अंधेरे में नहीं कराना पड़ेगा इलाज
लुधियाना.सिविल अस्पताल की हॉटलाइन पावर सप्लाई पर कट लग जाने पर मरीजों को अंधेरे में नहीं रहना पड़ेगा। दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद हालांकि, हॉटलाइन पॉवर सप्लाई पर लगने वाले कट में सुधार तो नहीं हुआ है।
लेकिन मरीजों की परेशानियों को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रबंधन ने खराब पड़े इनवर्टर को बदल दिया है। साथ ही तीन नए इनवर्टर खरीदकर मेल व फीमेल वार्ड की बिजली सप्लाई से जोड़ दिए गए हैं। लेबर रूम में पहले ही इनवर्टर लगा है। इसकी पुष्टि एसएमओ डा.हरविंदर सिंह ने की।
बता दें कि दैनिक भास्कर ने 31 जनवरी को विशेष रिपोर्ट प्रकाशित कर दो घंटे तक बिजली न रहने से मरीजों को हुई परेशानी का खुलासा किया था। जानकारी के अनुसार, एमरजेंसी ब्लाक का इनवर्टर एक महीने से खराब पड़ा हुआ था, लेकिन उसे बदला नहीं जा रहा था।
हालांकि पूछे जाने पर प्रबंधन ने तर्क दिया था कि आमतौर पर बिजली गुल हो जाने पर जनरेटर चला दिए जाते हैं, लेकिन उस दिन एकमात्र आपरेटर डच्यूटी के बाद घर जा चुका था, इसलिए जनरेटर नहीं चल सके। बताते हैं कि खबर प्रकाशित होने के बाद आला अधिकारियों ने आपात व्यवस्था करने व किसी भी हाल में अस्पताल मंे अंधेरा न होने के निर्देश दिए। इसके बाद विशेष तौर पर तीन इनवर्टर खरीदकर लगा दिए गए ताकि अगर कभी फिर आपरेटर न होने की वजह से जनरेटर न चल सके, तब तक इनवर्टर से काम चलता रहे।
लगेगा बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम, बदलनी पड़ेगी आदत
राज्य के सरकारी अस्पतालों के डाक्टर व स्टाफ अपनी घड़ी का टाइम अस्पताल की घड़ी से मिलाकर अभी से अस्पताल में टाइम पर पहुंचने की आदत डालना शुरू कर लें। क्योंकि भविष्य में एक मिनट की लेट लतीफी भी उन्हें महंगी पड़ेगी। स्टाफ की लेट लतीफी से आजिज राज्य सरकार ने सिविल अस्पतालों में परंपरागत रजिस्टर की जगह बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम से हाजिरी लगवाने की तैयारी कर ली है।
सोमवार को लुधियाना दौरे पर पहुंचे पंजाब हेल्थ सिस्टम कापरेरेशन के डायरेक्टर डा.अशोक नय्यर से जब सिविल अस्पताल में डाक्टरों के लेट आने व उससे मरीजों को होने वाली परेशानी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने माना कि कई अस्पतालों में स्टाफ समय पर नहीं पहुंचता।
इस समस्या को दूर करने के लिए सूबे के सभी अस्पतालों में बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू करने के लिए योजना बनाई जा रही है। इस सिस्टम के तहत प्रत्येक कर्मचारी को कार्ड या फिंगर प्रिंट से मशीन पर अपनी हाजिरी दर्ज करनी होगी। इससे कर्मचारी के लापरवाही के चलते लेट आने का रवैया खत्म हो जाएगा। नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के तहत प्राइमरी व कम्यूनिटी हेल्थ सेंटरों में पहले ही स्टाफ को समय का पाबंद बनाने के लिए यह फामरूला अपनाया जा चुका है।
दरअसल, शहर का सिविल अस्पताल हो, ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र या जिला परिषद की डिस्पेंसरियां, उनमें ज्यादातर में स्टाफ डच्यूटी पर देरी से पहुंचता है या गैरहाजिरी रहता है। दैनिक भास्कर पांच फरवरी को विशेष रिपोर्ट प्रकाशित कर सिविल अस्पतालों में डाक्टरों के लेट आने से मरीजों को होने वाली परेशानी का खुलासा पहले ही कर चुका है।
सिविल सर्जन के माछीवाड़ा व मान्नुपुर ब्लाक में छापो में भी डेढ़ दर्जन डाक्टर व स्टाफ गैरहाजिर मिले थे। शनिवार को ग्रामीण डिस्पेंसरियों पर जिला परिषद सेक्रेटरी के छापे में भी चार लोग डच्यूटी से नदारद मिले थे।










