आखिर क्यों हुई टीम इंडिया फिस्स?
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नागपुर टेस्ट में भारत को एक पारी से हार का सामना करना पड़ा है। विश्व की नंबर एक का दम भरने वाली टीम के धुरंधर बेबस से नजर आए। पर भारत की इस स्थिति का कारण क्या है? क्या भारत का टेस्ट के बादशाह का दर्जा एक तुक्का है? क्या भारतीय टीम नंबर वन गलती से बन गई? भारत की हार के पीछे के कई कारण हो सकते है।
कारण 1 -- तेज़ गेंदबाजी के खिलाफ कमजोरी। भारतीय बल्लेबाज़ों की तेज़ गेंदबाज़ी के विरुद्ध खराब तकनीक एक बार फिर उजागर हुई। भारतीय पिच पर दक्षिण अफ्रीका के डेल स्टीन ने 51 रन देकर सात विकेट लेकर भारतीय शेरों की सारी पोल खोल दी। फास्ट बॉलिंग के खिलाफ कमजोरी कोई नई नहीं है। भारतीय टीम प्रबंधन को इस ओर ध्यान देने की ज़रूरत है।
कारण 2 -- दबाव में होते हैं फेल। भारतीय खिलाड़ी दबाव में अच्छा प्रदर्शन करने में अक्सर नाकाम होते हैं। नागपुर टेस्ट में ऐसा ही कुछ देखने मिला। सबसे पहले द. अफ्रीका के खिलाफ गेंदबाज़ी करते हुए शुरुआती झटकों के बाद जैसे ही बल्लेबाज़ों ने बॉलिंग की धुनाई करनी शुरू की भारत ने रक्षात्मक खेल खेलना प्रारंभ कर दिया। दूसरी बार बल्लेबाज़ी करते हुए किसी भी भारतीय बल्लेबाज़ के रवैये को देखकर ऐसा नहीं लगा की वो लंबी पारी खेलेगा। टीम इंडिया को मानसिक तौर पर मजबूत होने की ज़रूरत है।
कारण 3 -- सचिन-द्रविड़-लक्ष्मण के बिना कैसे जीतेंगे? भारत के प्रमुख बल्लेबाज राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के मैच से बाहर होते ही टीम इंडिया क्वालिटी गेंदबाज़ी के खिलाफ ताश के पत्तों सी बिखर गई। कारण भारत के पास इन धुरंधर बल्लेबाजों का स्थान लेने के लिए उम्दा खिलाड़ी नहीं हैं। इसके लिए भारत को घरेलू क्रिकेट के प्रारूप में बदलाव की सख्त जरूरत है।
कारण 4 -- गैरजिम्मेदाराना रवैया। मैच से ठीक पहले रोहित शर्मा का चोटग्रस्त होना कुछ गंभीर सवाल खड़े करता है। मुकाबले से पहले वार्मअप की जगह फुटबॉल और कबड्डी जैसे पेचीदा खेनों का खेलना टीम प्रबंधन की बेवकूफी दर्शाता है। वार्मअप किये बगैर कोई भी खेल खेलना खतरनाक हो सकता है। यही ट्रेनिंग का सबसे पहला नियम भी है। पर टीम प्रबंधन को इससे कोइ मतलब नहीं।
कारण 5 -- चोटिल खिलाड़ियों का टीम में होना। बांग्लादेश दौरे में जब वीवीएस लक्ष्मण चोटग्रस्त हो गए थे तो भी भारतीय चयनकर्ताओं ने उन्हें दक्षिण अफ्रीका जैसी महत्वपूर्ण श्रृंखला के लिए चुना। नतीजा सबके सामने है। अगर टीम में किसी फिट खिलाड़ी को रखा गया होता तो परिस्थितियां कुछ बेहतर होती।
जो हुआ सो हुआ। अब अगर भारत को अपना नंबर एक का दर्जा बचाना है तो दूसरे टेस्ट के लिए कमर कसके तैयारी करनी होगी। जिससे टीम इंडिया के फैन्स गर्व से कह सकें, जय हो!!
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