Wednesday, Feb 10th, 2010, 2:20 am [IST]  
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danik bhaskarएटीएस मुख्यालय ही सुरक्षित नहीं

Bhaskar News

इमरजेंसी रिस्पांस टीम्स के कमांडोज के इस्तेमाल में ही नहीं आतंकवादियों को काउंटर करने के लिए बनाई गई राजस्थान एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) के हैडक्वार्टर के चयन में भी नीति नियंताओं की रणनीतिक अदूरदर्शिता दिखाई देती है।



ऐसे रणनीतिकार फिर आतंकियों के खिलाफ कितनी प्रभावी रणनीति बनाएंगे, इस पर सवाल उठना लाजिमी है। यह कमी एटीएस में बैठे अधिकारियों को भी परेशान किए हुए है। उन्होंने नए मुख्यालय के लिए सरकार को प्रस्ताव भी भेजा है, लेकिन वह ठंडे बस्ते से बाहर नहीं आ पा रहा है।



सोमवार को भास्कर ने खुलासा किया था कि किस तरह से आतंकियों से निबटने के लिए बनाई गई विशेष इमरजेंसी रिस्पांस टीम्स के कमांडोज की इफिशिएंसी अधिकारियों की गलत नीतियों के चलते गिरती जा रही है। ऐसी ही नीतियां आतंक से निपटने के लिए बनाए जा रहे हर सिस्टम में नजर आ रही हैं।



आतंक से लड़ाई आमने-सामने से मनोवैज्ञानिक ज्यादा है। जिस तरह से एटीएस हैडक्वार्टर भीड़भरे मुख्य रास्ते से एकदम लगकर है, वह कभी भी एक बड़ी खामी साबित हो सकता है। ईश्वर न करे कल आतंकी राजस्थान एटीएस को हतोत्साहित करने के लिए उस पर हमले का सिम्बोलिक प्लान बनाएं तो उसे अमल में लाना बेहद आसान है। आराम से मोटरसाइकिल पर चलते-चलते कोई भी उसकी आसान एप्रोच के चलते आतंकी हैडक्वार्टर को निशाना बना सकता है। पूरे देश में शायद ही कहीं एटीएस का हैडक्वार्टर इतनी आसान एप्रोच में हो। वैसे भी एटीएस के अधिकारी आतंकियों के निशाने पर होते हैं। इस लिहाज से ज्यादातर स्टेट्स में एटीएस हैडक्वार्टर काफी कठिन एप्रोच में बनाए गए हैं।



वर्तमान एटीएस मुख्यालय ऑपरेशनल गतिविधियों के लिए भी माकूल नहीं है। चाहे संदिग्ध आतंकियों को इंट्रोगेट करने के लिहाज से हो या स्ट्रैटजिक मूवमेंट के लिहाज से, परेशानियां ही परेशानियां हैं। एक तो वह संवेदनशील इलाके में बसा है, दूसरा हैडक्वार्टर के एप्रोच रास्ते से शहर में निर्विघ्न मूवमेंट तो संभव ही नहीं है। अगर एटीएस अधिकारियों को कहीं इमरजेंसी में जाना पड़े तो मुख्यालय से मिनर्वा सर्किल तक पहुंचने में ही 15-20 मिनट लग जाएंगे। आतंकी हमले से निपटने में रिस्पांस टाइम कितना अहम है, यह नीति नियंता और एटीएस अधिकारी खुद जानते हैं। क्या यह हैडक्वार्टर रणनीतिक रूप से आपको ठीक लगता है, इस सवाल पर एडीजी एटीएस कपिल गर्ग कुछ भी कहने से इनकार करते हैं।

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