Wednesday, Feb 10th, 2010, 2:26 am [IST]  
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danik bhaskarबाड़ाबंदी की कोशिश रही नाकाम

भास्कर न्यूज & झाला

भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण पाटीदार के पुत्र श्याम पाटीदार ने मिनी सचिवालय में बाड़ाबंदी करने की कोशिश कर भाजपा की जीत का जश्न मना रहे पिता को दुविधा में डाल दिया। श्याम पाटीदार नवनिर्वाचित 10 जनपदों के साथ जब मिनी सचिवालय में शपथ ग्रहण करने पहुंचे। उसी समय वहां पर रोशनसिंह के साथ उनके 9 समर्थक भी वहां आए। यह देखकर श्याम पाटीदार को उनकी प्रधानी की दावेदारी पर संकट मंडराता दिखा तो उन्होंने आनन-फानन में खुद के समर्थकों के साथ रोशन सिंह के साथ आए समर्थकों को अपनी ओर खींचकर जीप में बैठा लिया और दूसरों को भी खींचने की कोशिश की। इसी बीच वहां पर हो-हल्ला होने लगा। हंगामा सुनकर अधिकारी और डीएसपी और पुलिस के जवान वहां तुरंत पहुंच गए। इनके आते ही आरएससी के जवानों की मदद से रोशनसिंह के साथ आए जनपदों को उनके चंगुल से मुक्त कराया गया। इस वारदात से जहां भाजपा के नेता सकते में आ गए वहीं कांग्रेस के नेताओं को बात का बतंगड़ बनाने का मौका भी मिल गया। हालांकि चुनाव में बाड़ाबंदी करने की बात आम है, लेकिन इस तरह सरेआम जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के सामने हुई यह घटना जिले में पहली बार पेश आई है। इसके बाद राजनैतिक हलकों में इस बात की सरगर्मी बढ़ गई कि भाजपा में समन्वय की कमी है और आपसी खींचतान और फूट खुलकर सामने आ रही है। वहीं जब दोनों पक्षों से इस बारे में मीडिया ने बात करना चाही तो उनके मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिले और उनसे संपर्क के तमाम प्रयास नाकाम रहे।

कमजोर पुलिस व्यवस्था पर नाराजगी

मिनी सचिवालय में भाजपा के दो गुटो में टकराव के समय पुलिस व्यवस्था को लेकर एसडीएम ने नाराजगी जताई है। दो गुटो में टकराव से बनी हंगामे की स्थिति के समय सीआई जीवनसिंह राणावत मौके पर मौजूद थे लेकिन वह स्थिति को नियंत्रित नहीं कर पाए। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल बुलवाना पड़ा। एसडीएम जगदीशचंद हेड़ा ने सीआई से कहा कि आपकी व्यवस्था कमजोर रही है।

कहीं खुशी तो कहीं गम

भास्कर न्यूज & झालावाड़

पंचायत चुनाव में जिला परिषद व पंचायत समितियों के चुनाव में आए नतीजों के बाद कहीं खुशी तो कहीं गम की स्थिति है। चुनाव में अधिकांश नए चेहरे चुनकर आए हैं। वहीं कुछ सीटों पर जहां प्रमुख लोग जीत गए हैं, वहीं कुछ को हार का सामना करना पड़ा है।

जिला परिषद के चुनाव में भाजपा को बहुमत तो मिला, लेकिन उनके दो प्रमुख प्रत्याशी पराजित हो गए। भाजपा ने वार्ड नंबर एक में भाजयुमो जिलाध्यक्ष व पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष इंद्रजीतसिंह झाला को मैदान में उतारा था। जिन्हें कांग्रेस के भैरोसिंह ने पराजित कर दिया। वहीं वार्ड नंबर 21 में खानपुर की निवर्तमान प्रधान अरुणा मीणा को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा।

अरुणा को कांग्रेस की कौशल्याबाई ने परास्त किया। वहीं निवर्तमान जिला प्रमुख भाजपा की नीतु वर्मा वार्ड नंबर 23 से विजयी हो गई है।

उधर, कांग्रेस में मंत्री प्रमोद जैन भाया की सिफारिश पर वार्ड नंबर पांच से चुनाव लड़ी दिलखुश जैन को हार का सामना करना पड़ा। यह सीट कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा की बनी हुई थी, जहां से भाजपा की मनोरमादेवी विजयी हुई।

कांग्रेस ने वार्ड नंबर 15 से कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष रंगलाल मीणा की बहू व मीणा समाज जिलाध्यक्ष हुकमचंद मीणा की पत्नी कुसुमलता को उतारा था, जिन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस ने वार्ड नंबर 10 में युकां जिलाध्यक्ष वीरेंद्रसिंह झाला की पत्नी मधु झाला को प्रत्याशी बनाया था, जो निर्विरोध निर्वाचित हो गई थी। साथ ही कांग्रेस ने वार्ड नंबर 11 से सुनेल के निवर्तमान प्रधान रामलाल चौहान को उतारा था, जिन्होंने भाजपा प्रत्याशी गोरधनसिंह को पराजित किया।

पंचायत समितियों में भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही। बकानी पंचायत समिति में मनेाहरथाना विधायक कैलाश मीणा की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी थी। इस पंचायत समिति के वार्ड नंबर नौ से विधायक की पत्नी संतोषबाई चुनाव जीती हैं। वहीं इसी पंचायत वार्ड नंबर 17 से कांग्रेस ने अकलेरा के पूर्व पालिकाध्यक्ष रामलाल मीणा की पत्नी बसंतीबाई को मैदान में उतारा था, जो भी सदस्य निर्वाचित हो गई है। वहीं खानपुर पंचायत समिति में वार्ड नंबर पांच से कांग्रेस ने ब्लॉक अध्यक्ष मांगीलाल व वार्ड नंबर चार से पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष भवानीशंकर गुर्जर को मैदान में उतारा था, लेकिन दोनों को हार का सामना करना पड़ा।

मनोहरथाना पंचायत समिति में वार्ड नंबर नौ में कांग्रेस ने महिला कांग्रेस की जिला उपाध्यक्ष राजेश कुमारी को प्रत्याशी बनाया था, जिन्हें भाजपा की भूलीबाई ने परास्त कर दिया। उधर, झालरापाटन में निवर्तमान उपप्रधान और भाजपा जिलाध्यक्ष के पुत्र श्याम पाटीदार ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। साथ ही यहां पर भाजपा को बहुमत मिलने और प्रधान सीट ओबीसी के लिए आरक्षित होने से पाटीदार को प्रधान का प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

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