परीक्षा से पहले ही ‘गुरुओं’ में आक्रोश
स्कूल-कालेज की परीक्षाएं सिर पर हैं, पर टीचिंग तथा नॉनटीचिंग स्टाफ में सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आक्रोश है। इसके तहत इनकी तरफ से प्रदर्शन का सिलसिला जारी है। जिस तरीके से जत्थेबंदियों ने एकजुट होकर परीक्षाओं के बहिष्कार का मन बनाया है, उससे विद्यार्थियों को नुकसान उठाना पड़ेगा। पहले तो ये लोग एकएक करके लड़ाई लड़ रहे थे, मगर अब एक प्लेटफार्म पर आ चुके हैं।
कालेजों की पीड़ा
एडेड कालेजों का नॉनटीचिंग स्टाफ पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर मैदान में है। उसने पहले घंटे दो घंटे की स्ट्राइक की और अब मुकम्मल बंद का ऐलान किया है। अब इसमें पांच फीसदी अंतरिम राहत व मैडीकल भत्ते को भी जोड़ दिया गया है।
गवर्नमैंट एडेड कालेजेज इम्प्लाइज यूनियन के प्रांतीय संगठन सचिव दिलीप तिवारी का कहना है कि 12 फरवरी को वे लोग राज्यव्यापी बंद करेंगे, इसके बाद 13 को हालगेट में रैली होगी फिर जालंधर के दोआबा कालेज में रैली करके परीक्षाओं के बहिष्कार का ऐलान किया जाएगा।
पंजाब एंड पर लगी रोक को हटाने, ग्रामीण टीचरों को आवासीय भत्ता देने को लेकर मैदान में है। प्रांतीय महासचिव प्रो. एचएस वालिया ने कहा कि सरकार शिक्षा को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है।
स्कूलों की अनदेखी
सरकारी स्कूल भी सरकार की अनदेखी से आहत हैं और एक प्लेटफार्म पर आने के लिए तैयार हैं। उनकी मांगों में प्रमुख रूप से पांचवें वेतन आयोग की बकाया राशि, डायरेक्टर जनरल स्कूल एजुकेशन की गलत नीतियां व सरकार की दमनकारी नीति शामिल है।
डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट के जिला प्रधान अमरजीत सिंह भल्ला, महासचिव इंदर सिंह मान, खजांची सुखराज सिंह सरकारिया का कहना है कि राज्य सरकार एक-एक टीचर का लाख रुपए से अधिक की राशि दबाए हुए है।
उक्त लोगों का कहना है कि डीजीएसई को विभाग पर थोप कर सरकार टीचरों में खौफ पैदा कर रही है। एक साल के भीतर दो महिला टीचरों द्वारा आत्महत्या किया जाना सरकार व शिक्षामंत्री के लिए शर्मनाक है।
निशाने पर जिला परिषद
जिला परिषद को भी टीचर अपने निशाने पर रखे हैं। खास करके ईटीटी टीचर। इनका कहना है कि सरकार ने सरकारी स्कूलों को इनके अधीन करके शिक्षा का निजीकरण से भी बुरा हाल कर दिया है। ईटीटी अध्यापक यूनियन के जिला प्रधान जसविंदर सिंह जहांगीर का कहना है कि राज्य में 5,500 स्कूलों को जिला परिषद के हवाले करके सरकार ने 13,500 टीचरों को दिहाड़ीदार बना दिया है।
उनका कहना है कि जब वह लोग इसका विरोध करते हैं और अपनी मांगें सरकार के समक्ष रखते हैं तो उनके खिलाफ दमनकारी नीति अपनाई जाती है। इसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा, लेकिन अब इसे सहन नहीं किया जाएगा।
मिल बैठ निपटाएं विवाद
छुरी खरबूजे पर गिरे या फिर खरबूजा छुरी पर दोनों ही स्थितियों में कटना खरबूजे को ही है। कमोबेश इस वक्त टीचरों व सरकार में पैदा हुई तनातनी में ऐसी ही कुछ स्थिति बन रही है। एकजुट होकर के टीचरों द्वारा परीक्षा का बहिष्कार खतरे की घंटी है। हालांकि यह गलत है, लेकिन सरकार की तंद्रा भंग करने के लिए यह हथियार उनकी मजबूरी है और वह मानते भी हैं।
यह माना जा रहा है कि सरकार व शिक्षा विभाग इस विवाद को बैठ कर निपटाएं। यही सबके लिए बेहतर है। इस संदर्भ में प्रधान गुरुद्वारा सिंह सभा प्रताप नगर के प्रधान जत्थेदार दलबीर सिंह निज्जर का कहना है कि शिक्षा विकास का मुख्य आधार है। इसके लेकर सरकार को गंभीर होना चाहिए।
जिस तरीके से टीचरों व सरकार में टकराव की स्थिति पैदा हुई है वह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इसके प्रति सभी को गंभीर होना चाहिए। इसी तरह से चित्रकार भूपिंदर सिंह नंदा का कहना है कि शिक्षा विभाग में चल रहे विवाद को सरकार तथा टीचरों को मिलबैठ कर खत्म करना चाहिए। टकराव की स्थिति में नुकसान बच्चों का ही होना है।










