प्रॉपर्टी बेचने से हुए लाभ पर भी टैक्स
कोटा. अगर आपने प्रोपर्टी बेचकर पूंजीगत लाभ अर्जित किया है तो आयकर देना होगा। शहर में एक हजार भी अधिक ऐसे लोग को हाल ही में आयकर विभाग ने नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने कम कीमत दिखाकर प्रोपर्टी की रजिस्ट्री कराई है।
भू पंजीयन विभाग से आयकर विभाग को मिली सालाना रिपोर्ट में कई ऐसे मामले सामने आएं हैं, जिनमें यह पता लगा है कि डीएलसी दर से अधिक रेट में रजिस्ट्री करा रखी है, लेकिन बेची गई प्रोपर्टी पर पूंजीगत लाभ अर्जित करने के बाद उस आय को पिछले कई सालों से रिटर्न में नहीं दिखाया गया है। विभाग ने ऐसे लोगों को आय छुपाने का दोषी मानते हुए धारा 148 के तहत शहर के करीब एक हजार से अधिक लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगे हैं।
बेची पति ने फंसी पत्नी
अक्सर आयकर से बचने के लिए लोग प्रोपर्टी एवं शेयरों में निवेश का काम अपनी पत्नी के नाम से करते हैं। आयकर विभाग ने उन पत्नियों को भी नोटिस भेजे हैं, जिन्होंने प्रोपर्टी बेचकर पूंजीगत लाभ अर्जित किया है और आयकर रिटर्न भी नहीं भरी है। पत्नी के नाम नोटिस आने पर अब वह कभी आयकर विभाग के और कभी सीए के यहां चक्कर काट रहे हैं। सीए प्रमोद लाहोटी के मुताबिक यदि प्रोपर्टी 3 साल पुरानी है तो उस पर 20 फीसदी की दर से टैक्स वसूल होगा। पूंजीगत लाभ अर्जित करने के बाद रिटर्न में दिखाना जरूरी है। सीए प्रदीप जैन कहते हैं कि पूंजीगत लाभ अर्जित किया है तो उसकी गणना कर योग्य आय में की जाएगी। रिटर्न में नहीं दिखाया तो आय छुपाना माना जाएगा। इसके तहत आयकर विभाग नोटिस जारी कर सकता है।
ऐसे निकलती है सेल वैल्यू
आयकर विभाग के अनुसार रजिस्ट्रार ने जिस रेट में रजिस्ट्री की है वह उसकी सेल वेल्यू मानी जाती है। चाहे मकान या प्रोपर्टी कम रेट में बेची हो, लेकिन उस एरिया की डीएलसी रेट अधिक है तो रजिस्ट्रार उसकी कीमत के अंतर की स्टाम्प डच्यूटी चार्ज कर लेता है। आयकर विभाग इकरारनामा और रजिस्ट्री की कीमत के अंतर पर आयकर वसूलेगा। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति ने 1000 वर्गमीटर क्षेत्रफल का 10 लाख रुपए में प्रोपर्टी का सौदा किया। जिस एरिया में मकान खरीदा गया, वहां की डीएलसी दर यदि 1500 रुपए वर्ग फुट है तो उसकी रजिस्ट्री की कीमत 15 लाख रुपए मानी जाएगी। ऐसे में 5 लाख रुपए पर टैक्स लगेगा।











