अरावली में फिर माइनिंग पर संकट
उदयपुर. अरावली की सीमा में आने वाले राज्य के पंद्रह जिलों में खदानों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। खनन कार्य से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को लेकर दायर दो नई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
19 फरवरी को इस मामले की सुनवाई होगी। इसको लेकर सरकार और माइनिंग के अधिकारियों में अफरा तफरी का माहौल है। यही वजह है कि खान एवं भूविज्ञान निदेशालय के कर्मचारियों और अधिकारियों की आने वाली तीन छुट्टियों को निरस्त कर दिया गया है।
जवाब पेश करने के लिए अतिरिक्त निदेशक खान (मुख्यालय) बीआरके रंगा, अतिरिक्त निदेशक, जयपुर एके कोठारी और अतिरिक्त निदेशक (पर्यावरण) आरके हिरात दिल्ली जाएंगे। इसके लिए विभाग के अधिकारियों और जियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने एक रिपोर्ट तैयार की है जो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश की जाएगी।
क्या है मामला
बंधुआ मुक्ति मोर्चा और एक अन्य संस्थान ने राज्य के पंद्रह जिलों में स्थित अरावली पर्वतमालाओं व उसके आसपास क्षेत्र में होने वाले खनन कार्य से पर्यावरण के नुकसान को लेकर सवाल उठाए हैं। इन याचिकाओं में पर्यावरण से संबंधित मुद्दे को उठाया गया है।
क्या जवाब देना है
अरावली क्षेत्र में स्थित राज्य के पंद्रह जिलों में होने वाले खनन कार्यो की विस्तृत जानकारी देनी है। खनन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान, डंपिंग यार्ड की स्थिति, ध्वनि और वायु प्रदूषण, खदानों में काम करने वाले मजदूरों के स्वास्थ्य आदि बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी है।
क्या है आशंका
राज्य सरकार की ओर से पेश जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट राजस्थान में खनन कार्यो पर रोक लगा सकती है। इससे सरकार को करोड़ो रुपए का नुकसान होने की आशंका है। सैकड़ों श्रमिकों के रोजगार पर संकट खड़ा हो जाएगा।
इनका कहना है
सुप्रीम कोर्ट में जवाब पेश करने की तैयारी की जा रही है। सभी बिंदुओं का अध्ययन कर जवाब तैयार किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान उपस्थिति के लिए तीन अधिकारियों को नियुक्त किया गया है।
- बीआरके रंगा, अतिरिक्त निदेशक खान (मुख्यालय)










