बताया संयमित दिनचर्या का महत्व
युवाचार्य स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने बच्चों को दिए प्रवचन
रामगंजमंडी. भानपुरा शक्तिपीठ के युवाचार्य स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने मंगलवार को इंडियन रिच्यूअल पब्लिक स्कूल में बच्चों को संयमित दिनचर्या के लाभ बताए। उन्होंने कहा कि समय से उठना और संयम से रहने से ही स्वस्थ रहा जा सकता है। महाराज ने बच्चों को सूर्योदय से पहले उठने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर उप प्रधानाचार्य प्रेमशंकर प्रजापति, स्कूल समिति के अध्यक्ष मदनलाल शर्मा, संरक्षक विनोद गौतम, अध्यापक सुरेश कुमार गालव, सुमंत अग्रवाल, गोविंद गुप्ता, महावीर पोरवाल आदि उपस्थित थे। महाराज ने सभी बच्चों को पेंसिल और पेन गिफ्ट दिए।
गुरुजी जयंती मनाई
आदर्श विद्या मंदिर पंचमुखी रोड द्वारा संचालित सरस्वती संस्कार केंद्र यादव मोहल्ला में गुरुजी की जयंती मनाई गई। मुख्य वक्ता मनोहर सिंह ने गुरुजी के बारे में बताया। अध्यक्षता उत्तम यादव ने की।
भागवत कथा की पूर्णाहुति हुई
सुल्तानपुर. कस्बे में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा की मंगलवार को पूर्णाहुति हुई। पूर्णाहुति के दौरान कथावाचक पं. बजरंगलाल तेहरिया ने बताया कि पृथ्वी गौ-माता का एवं बैल धर्म का रूप है। उन्होंने कहा कि सत्य, दान, दया और तप धर्म रूपी बैल के चार पैर हंै। एक युग खत्म होने पर एक पैर खत्म हो जाता है। तीन युग बीत जाने के कारण कलियुग में एक ही पैर बचता है, जो तप है। उन्होंने सत्संग एवं भगवान की भक्ति व कथा सुनने को तप बताया है। शास्त्र के अनुसार ज्ञान से अहंकार अज्ञान में बदल जाता है। हमारे यहां दो तरह की संस्कृति रही है। एक जिसमें भगवान अवतार लेते है, दूसरी जिसमें साधना के मार्ग से व्यक्ति भक्त से भगवान स्वरूप बन जाता है। व्यक्ति आपस में बैठकर तो चर्चा कर लेते हैं, परन्तु उसे सत्संग मुश्किल से मिल पाता है। तुलसीदास जी ने सबसे बड़ा तीर्थ सत्संग को बताया है। व्यक्ति को तीन चीजे बडी दुलर्भता से प्राप्त होती है देह, सत्संग व मोक्ष। इसलिए जब भी हमे सत्संग या संतो के प्रवचन सुनने का अवसर मिले तो हमे उसका फायदा उठाना चाहिए। कथा के दौरान गायक बालक विष्णुकुमार राव द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी गई। कथा के अंत में आरती उतारी गई एवं प्रसाद वितरण किया गया।
दीपयज्ञ में दी आहुतियां
इटावा. विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा चलाए जा रहे दीपयज्ञ कार्यक्रमों की शृंखला में इटावा में दीपयज्ञ का आयोजन हुआ। इसमें १०० से अधिक भाई-बहनों ने भाग लिया। गायत्री परिवार तहसील संयोजक चन्द्रभाण मीणा ने व्यक्ति, परिवार व समाज निर्माण की बात गहनता से बताई। उन्होंने बताया कि वर्ष २०१० से 11 तक का समय शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। इस मौके पर १०१ दीप प्रज्वलित करके महायज्ञ में कर्मनिष्ट कार्यकत्र्ताओं ने 'अनिष्ट टले, अशुभ का निवारण हो एवं सभी का भला होÓ प्रार्थना व भावना के साथ आहुतियां दी। कार्यक्रम में आनन्दीलाल सुमन, जोधराज मीणा, रामनारायण सुमन, जुगल सोनी सहित अनेक सदस्य मौजूद थे।










