ईश्वर की ज्ञान रचना है अन्नत
करनाल & आर्य केंद्रीय सभा द्वारा आयोजित महर्षि दयानंद जन्मोत्सव एवं बोधोत्सव के उपलक्ष्य में प्रात: कालीन कार्यक्रम की यज्ञ से शुरुआत हुई। आर्य कन्या गुरुकुल नजीबाबाद की आचार्य वेद भारती ने ऋग्वेद के शतक के पवित्र मंत्रों से यज्ञ करवाया।
आचार्य धर्मबंधु ने प्रवचन सुनाए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता ही सबसे बड़ा सुख है। आनंद सर्व शक्तिमान ईश्वर का गुण है। परमात्मा को प्रसन्न करने के लिए संसार के लोग विभिन्न तरीकों से कर्म करते हैैं। लेकिन परमपिता परमात्मा की सीमा का उल्लंघन नहीं कर सकते। ईश्वर अन्नत है उसका ज्ञान और रचना भी अन्नत है। रचना ही रचयिता का ज्ञान कराता है। संसार में वही राष्ट्र सुरक्षित होगा जो ईश्वर से शक्ति, ज्ञान, बुद्धि और शांति प्राप्त करेगा। परमपिता पूरे संसार के होते हैैं। उन्हें सीमा में नहीं बांधा जा सकता। आत्मा को पवित्र करने का श्रेष्ठ कर्म शारीरिक शक्तियों का संयम व मानसिक शक्तियों का संयम है। सायंकालीन सत्र में प्रियवंदा वेद भारती ने महिलाओं की शक्ति को महत्वपूर्ण बताते हुए राष्ट्र के उत्थान में महिलाओं के योगदान की चर्चा की। महिला ही वह धुरी है जिसके चारों ओर परिवार रूपी संस्था घूमती है। मां ईश्वर का रूप होती है, लेकिन कुछ लोग कन्या को गर्भ में ही मार देना चाहते हैैं। यदि वक्त रहते नहीं संभले तो संस्कृति नष्ट हो जाएगी। मौके पर कमलेश मिश्रा, डा. मधु चौधरी, उर्मिल आर्या, प्रेम सहगल, शकुंतला सुखीजा आदि मौजूद थीं।










