Wednesday, Feb 10th, 2010, 12:52 pm [IST]  
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danik bhaskarबदले मौसम ने छीना किसानों का चैन

भास्कर न्यूज & टोडाभीम

उपखंड मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले दो दिनों से मौसम में आए बदलाव ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं।

कुछ स्थानों पर सोमवार रात को तथा कुछ जगह मंगलवार को तड़के हुई बारिश ने एक ओर तो गेहंू की फसल में अमृत का काम किया है, लेकिन सरसों की फसल में इसी बरसात से नुकसान होने की बात किसान कर रहे हैं।

पिछले एक पखवाड़े से तेज धूप ने लोगों को गर्मी की शुरुआत का अहसास करा दिया था, लेकिन कश्मीर में हुई बर्फबारी के बाद से सोमवार को मौसम में एकाएक बदलाव आया और लोगों को सर्दी का अहसास हुआ।

मंगलवार को हुई बारिश से जहां गेहंू की फसल फायदा पहुंचा है, वहीं तेज हवाओं के कारण आड़ी पड़ी फसल में नुकसान हुआ है। सरसों की तैयार खड़ी फसल में नुकसान से किसाना चिंतित हैं। कृषक जगदीश मीणा ने बताया कि बादल छाए रहने से सरसों में चेंपा व चने की फसल में फली छेदक कीट का प्रकोप बढ़ गया है। जो सरसों पक कर तैयार है तथा जिनमें कटाई चल रही है, उनमें बूंदाबांदी के कारण नुकसान पहुंचा है।

गुढ़ाचन्द्रजी. क्षेत्र में मंगलवार तड़के हुई बारिश से किसानों में अपनी खड़ी फसल को लेकर चिंता बढ़ गई है। क्षेत्र में सोमवार दोपहर से ही बादल आसमान में छाए रहे, जो मंगलवार तड़के बारिश में तब्दील गए। इससे खेतों में पकी खड़ी सरसों की फसल में नुकसान हुआ है। किसान राधाकिशन व हरसहाय ने बताया कि बादल छाए रहने से सरसों की पछेती फसल में चेंपा व चने की फसल में फली छेदक कीट का प्रकोप बढ़ गया है। सरसों की अगेती फसल पक कर तैयार है तथा कटाई कार्य चल रहा है। ऐसे में हल्की बूंदाबांदी भी फसल को नुकसान पहुंचा रही है।

ढिंढोरा. क्षेत्र में सोमवार रात हुई बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे। किसान बच्चूसिंह, होशियार सिंह, निरंजन, चरणसिंह ने बताया कि रात 10 बजे से दो घंटे तक रुक-रुककर बारिश हुई। बारिश से निचले स्थानों पर पानी जमा हो गया। किसानों ने बताया कि बारिश से गेहंू की फसल को काफी लाभ मिला है। इससे फसल में दिए जाने वाले सिंचाई के तीसरे पानी की बचत हो गई है।

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