शराब की तस्करी रोकने में नाकाम रही पुलिस
आबकारी विभाग खुद रोकेगा अवैध शराब की तस्करी।
जयपुर . आबकारी महकमे में प्रतिनियुक्ति पर आने वाले पुलिसकर्मी अवैध शराब की तस्करी रोकने में नाकाम रहे हैं। आबकारी विभाग अब खुद इस समस्या से निबटेगा। इसके लिए आबकारी निरोधक दलों की तर्ज पर प्रवर्तन शाखा का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। स्टाफ बढ़ाने के लिए नए वित्तीय वर्ष में 1000 कर्मचारियों की भर्ती भी की जाएगी।
वित्त विभाग के सूत्रों ने बताया कि आबकारी में अभी 2200 अधिकारी कर्मचारियों की स्ट्रेंथ (संख्या) है। इनमें विभाग के कर्मचारी 50 प्रतिशत ही हैं। बाकी 50 प्रतिशत पुलिस से प्रतिनियुक्ति पर आते हैं। प्रतिनियुक्ति पर आने वाले पुलिसकर्मी उस शिद्दत से काम नहीं करते हैं जिस शिद्दत से उन्हें काम करना चाहिए। दो-या तीन साल में वे अपने मूल विभाग में चले जाते हैं। इससे उनकी जिम्मेदारी भी तय नहीं हो पाती। हाल ही में पुलिस के एक सिपाही को अवैध शराब का ट्रक छोडऩे की एवज में 3 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है। अब इन पुलिस कर्मियों को धीरे धीरे कम किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि नया आने वाला अधिकारी और कर्मचारी अगले 20- या 30 साल तक शिद्दत से काम तो करेगा। उसकी जिम्मेदारी भी तय की जा सकेगी।
प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी :
प्रवर्तन स्टाफ में पुलिस कर्मियों की संख्या धीरे धीरे कम करके आबकारी विभाग का स्टाफ बढ़ाने के प्रस्ताव को सरकार ने आबकारी नीति के तहत मंजूरी दे दी है। आबकारी नीति के संबंध में कैबिनेट की मिनिट्स भी मंगलवार को जारी कर दीं। अगले माह आने वाले बजट में नई भर्तियों के लिए विभाग को बजट मिलने की संभावना है। तब तक प्रतिनियुक्ति के स्टाफ से काम चलाया जाएगा।
प्रवर्तन निदेशक का मुख्यालय अब उदयपुर में :
प्रवर्तन निदेशक का मुख्यालय भी सरकार ने अब उदयपुर कर दिया है। अभी तक यह मुख्यालय जयपुर में था। आबकारी विभाग काफी समय से प्रवर्तन निदेशक को उदयपुर बिठाए जाने की मांग कर रहा था। मंगलवार को इसके आदेश जारी कर दिए।
ऐसे बढ़ी तस्करी की समस्या :
आबकारी विभाग का मानना है कि वर्ष 2009-—10 से पहले तक शराब तस्करी की समस्या ज्यादा गंभीर नहीं थी। चालू वित्तीय वर्ष में शराब पर 20 प्रतिशत वैट लगने और शराब की दुकानों का समय रात 8 बजे तक करने से तस्करी ज्यादा बढ़ गई है।











