Saturday, Mar 6th, 2010, 2:22 am [IST]  
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danik bhaskarसंभाग भर में सालों से नहीं हुई सैंपलिंग

भास्कर न्यूज & जगदलपुर

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग का संभाग मुख्यालय स्थित कार्यालय सिर्फ एक ही कर्मचारी के भरोसे चल रहा है। राज्य गठन के बाद सभी जिलों में इस विभाग का कार्यालय तो खोल दिया गया लेकिन स्टाफ की व्यवस्था नहीं की गई। यहां पदस्थ ड्रग इंस्पेक्टर के सन 2000 में सेवानिवृति लेने के बाद अन्य इंस्पेक्टर की पदस्थापना तो की गई लेकिन एक दो सालों में वे भी रिटायर हो गए।

समय के साथ ही इस कार्यालय से चपरासी तक रायपुर बुलवा लिए गए। स्थिति यह रही कि महारानी हास्पिटल के मुख्य भवन के तीसरी मंजिल में नाम के लिए संचालित यह कार्यालय मेडिकल कालेज के अस्तित्व में आने के बाद वहां से भी हटा दिया गया। अब यह मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के दफ्तर में एक छोटे से कमरे से संचालित हो रहा है।

सरकार की उदासीनता के चलते इस महत्वपूर्ण दफ्तर में कोई जिम्मेदार अफसर नहीं है। जिले भर में खाद्य एवं औषधि की गुणवत्ता की जांच इसी विभाग के जिम्मे है। मिलावट की जांच भी यही विभाग करता है। स्टाफ न होने से यह कार्य लंबे समय से ठप पड़ा है।

सालों से न तो खाद्य पदार्थों की और न ही तेल व दूध जैसी रोजमर्रा के उपयोग की सामग्रियों की जांच हो पा रही है। आए दिन मिलावटी खोवा व अन्य सिंथेटिक पदार्थों से निर्मित मिठाइयों की शिकायतें आती रहतीं हैं, लेकिन इसकी भी जांच नहीं हो पा रही है। जिसके चलते इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

इसी तरह पिछले कुछ समय में मेडिकल स्टोर्स की बाढ़ आ गई है। शहर के साथ ही गांवों में भी भारी मात्रा में नशीली व प्रतिबंधित दवाएं भी धड़ल्ले से बेची जा रही है। वहीं अमानक स्तर के दवाओं की भी कमी नहीं है।

ग्रामीणों की मजबूरी का फायदा उठा कर यह कारोबार बड़े पैमाने पर हो रहा है। ड्रग इंस्पेक्टर के न होने से इस पर भी नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार राज्य भर में इस विभाग के पास केवल दो ही इंस्पेक्टर हैं। इन्हीं पर ही राज्य भर में व्यवस्था देखने की जिम्मेदारी है।

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