किए जा सकते हैं पेड़ ट्रांसप्लांट
रायपुर. पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह पर ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। इन्हें ना केवल लगाया जा सकता है बल्कि नई जगह पर भी ये पेड़ पूर्व की तरह हरे-भरे रह सकते हैं। दो साल पहले राजधानी में गौरवपथ के निर्माण की जब बात की गई तो अनेक पेड़ रास्ते में बाधा बन कर सामने आए। ऐसे में इन पेड़ों को काटना राजधानी को हरियाली से वंचित करने जैसा था। तब यहां से अनेक पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया गया।
ऐसे होते हैं पेड़ ट्रांसप्लांट : पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने के लिए एक टीम बनाई जाती है। इस टीम में मृदा विशेषज्ञ, पादप विशेषज्ञ, समेत अनेक लोग होते हैं। पहले पादप विशेषज्ञ पेड़ की जांच करता है और संबंधित अधिकारी को बाताता है कि ये पेड़ ट्रांसप्लांट हो सकता है या नहीं।
इसके बाद मृदा विशेषज्ञ मिट्टी का परीक्षण कर जगह बताता है कि किस जगह पर किसी पेड़ को रोपित किया जा सकता है। सोइल एक्सपर्ट ये भी बताता है कि पेड़ कितने समय के अंदर शिफ्ट किया जा सकता है।
केमिकल लगा कर रखना होता है : इन पेड़ों की जड़ों को बारदाने से लपेट कर पानी डाला जाता है। पूरा पेड़ ट्रेक्टर-ट्रॉली में रख कर संबंधित जगह पर ले जाया जाता है। पेड़ को लेजाने से पहले ही उस जगह पर एक गढ्ढा खोदा जाता है,जहां इन्हें लगाना होता है।
इस जगह में शिफ्ट करके पेड़ की खास देख-भाल की जाती है। रायपुर गौरवपथ के पड़ों को ऊर्जा पार्क और सोना डोंगरी में लगाया गया था। छत्तीसगढ़ में ये इस तरह का पहला प्रयोग था। नंदन वन के प्रभारी आरएस मिश्रा के मुताबिक पेड़ों का ट्रांसप्लांट थोड़ा जोखिम भरा रहता है। इनमें से कितने पेड़ जीएंगे इसका कोई दावा नहीं किया जा सकता।
आधे से ज्यादा करते हैं सर्वाइव : गौरवपथ से किए ट्रांसप्लांट किए गये 140 पेड़ों में से 47 फीसदी पेड़ ही जिंदा हैं। इन पेड़ों का रख रखाव ठीक से किया जाता है। ऊर्जा पार्क के ही 47 पेड़ अभी जिंदा हैं। जबकि सोनाडोंगरी में भी करीब आधे से ज्यादा पेड़ अभी जिंदा हैं। श्री मिश्रा के मुताबिक इन पेड़ों को विशेष रूप से संरक्षित और देख-भाल में रखना होता है।
ज्यादा उम्र के पेड़ों को ट्रांसप्लांट नहीं किया जा सकता। इनमें बड़े पेड़ जैसे पीपल और बरगद आदि को शिफ्ट नहीं किया जा सकता। महीनों तक होना चाहिए संरक्षण सीटेग के अध्यक्ष इंजीनियर पिल्लीवार का कहना है कि पिछले दिनों जब वे चीन की यात्रा पर गए, तो पता चला कि यहां पर एक पेड़ को एक महीने से भी ज्यादा समय तक जमीन से उखाड़ कर रखा जा सकता है।
वे कहते हैं इस दौरान वहां खेलों की तैयारी के चलते अनेक पेड़ों को काटा गया और फिर शिफ्ट कर दिया गया। इन पेड़ों की जड़ों को खास केमिकल्स से संरक्षित रखा जाता है। इस तरह के प्रयोग भारत में भी होते हैं। लेकिन यहां पर इन पेड़ों को ज्यादा समय तक नहीं रखा जा सकता।



