Wednesday, Mar 10th, 2010, 7:33 am [IST]  
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danik bhaskarफांसी के फंदे से प्रेम का संदेश

राजेश जोशी

रायपुर. फांसी के फंदे और खूबसूरती के बीच आखिर क्या संबंध हो सकता है? यह बात सुनने में अटपटी लगती है, पर राजधानी की सेंट्रल जेल में ऐसा ही कुछ होने जा रहा है। कैदियों ने फांसी के तख्ते को गुलाबों के 500 से ज्यादा पौधों वाले बगीचे से घेर दिया है।



कोशिश रंग लाई तो जिस स्थान पर 40 से ज्यादा लोगों को फांसी दी गई, उसी जगह के गुलाब अगले वैलेंटाइन डे पर किसी प्रेमी जोड़े के हाथ में होंगे। दो महीने की कड़ी मेहनत के बाद कैदियों ने फांसी के तख्ते के चारों तरफ गुलाब का गार्डन तैयार किया है। जेल परिसर में तालाब के पास बने फांसी के तख्ते को देखकर हड्डियों में ठंड के मौसम सी सिहरन दौड़ जाती है।



कैदी भी इस तख्ते के करीब नहीं जाते थे। मौत के खौफ से जुड़ी जगह को सुंदर फूलों से सजाने का फैसला अचानक ही हुआ। जेल अधिकारियों को लगा कि इस खास जगह को अलग पहचान देनी चाहिए। कैदियों ने पूरे इलाके की लेवलिंग के बाद वहां की मिट्टी बदली। कृषि विश्वविद्यालय के हार्टिकल्चर विशेषज्ञों को बुलाया गया ताकि उनकी राय ली जा सके।



कैदियों में ऐसे लोगों को छांटा गया, जो मूलत: कृषक थे। कृषि विवि और अन्य स्रोतों से मिली गुलाब की दो सौ से ज्यादा किस्मों के पांच सौ पौधे यहां लग चुके हैं। फंदे के चारों तरफ घास का लॉन बना दिया गया है, जिसमें दूसरी प्रजातियों के फूल भी हैं।



अब तक 37 को फांसी, चार और लाइन में : 1984 में बनाई गई रायपुर सेंट्रल जेल में 1947 के बाद से अब तक कुल 37 लोगों को फांसी की सजा दी जा चुकी है। 1957 तक 28 लोगों की फांसी की सजा दी गई। 1947 से 1951 के बीच औसतन हर साल तीन लोगों को मौत की सजा दी गई।



अंतिम फांसी 25 अक्टूबर 1975 में बैजू उर्फ भरोस (40) को दी गई थी। जघन्य हत्या के एक अन्य मामले में चार आरोपियों को फांसी की हाईकोर्ट पुष्टि कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट से डेथ सेंटेंस को मंजूरी मिलते ही इन चारों को भी सेंट्रल जेल में फांसी दे दी जाएगी।



अंग्रेजों के जमाने का तख्ता



अंग्रेज शासकों ने जेल भवन के साथ फांसी का तख्ता भी बनवाया था, जिसमें एक साथ दो लोगों को फांसी दी जा सकती है। पत्थर, मिट्टी और चूने की जुड़ाई से बनाया गया तख्ता सौ साल से एकदम सही हालत में है। तख्ते के लीवर, पिलर और प्लेट्स आयातित लोहे से बने हैं। जर्जर होने लगी दीवारों को दो महीने पहले मरम्मत कर ठीक किया गया।



फांसी की खास रस्सी से लेकर फांसी देते समय रस्सी पर लटकाए जाने वाले वजन के बारे में भी बेहद साफ नियम हैं। जेल अधीक्षक केके गुप्ता का कहना है कि सारा कुछ इतना कैलकुलेटेड होता है कि एक ही झटके में बंदी की गर्दन टूट जाती है। फांसी के फंदे के पास एक बोर्ड लगाकर उसके इतिहास को भी प्रदर्शित करने की योजना है।



गुलाब के फूलों की नर्सरी को डेवलप कर गुलाब के फूलों और पौधे की कलमों को बेचने की योजना है। अगले कुछ महीनों में यह काम शुरू हो जाएगा। - केके गुप्ता, अधीक्षक, सेंट्रल जेल

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