स्ट्रेचर पर लेटकर दुल्हन ने लिए फेरे
रेवाड़ी. अस्पताल में बिस्तर पर दुल्हन लेटी है। हाथों पर मेहंदी रची है मगर दाएं हाथ में सीरिंज भी लगी है। खून दिया जा रहा है। दूल्हा उसके बाएं हाथ की उंगली में अंगूठी पहना रहा है। सात जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाई जा रही हैं। सोमवार रात शहर के एक अस्पताल में ऐसी ही एक शादी हुई।
इस पर भी क्लिक करें... * बेंच पर लेटकर दे रही आठवीं बोर्ड की परीक्षा
सोमवार दोपहर तक गांव मोहदीनपुर निवासी धनीराम की बेटी ममता दुल्हन के लिबास में जिंदगी-मौत से जूझ रही थी। उसकी सोमवार को गांव जखाला के वीरेंद्र सिंह के बेटे बिजेंद्र सिंह के साथ शादी तय थी। दोनों तरफ से शादी की जोरदार तैयारियां चल रही थीं। अल सुबह अचानक नसें फूलने से ममता के पेट में दर्द हुआ।
दवा से असर नहीं हुआ तो परिजनों ने उसे शहर के ललिता मेमोरियल अस्पताल में भर्ती करा दिया। डॉ. सीमा मित्तल ने इसे एपेंडिक्स बताते हुए तुरंत प्रभाव से ऑपरेशन करने को कहा। परिजनों को सूझ नहीं रहा था कि वे क्या करें। समय बीतता जा रहा था। डॉक्टर इस पक्ष में नहीं थे कि ममता को दो-तीन घंटे के लिए विवाह समारोह स्थल पर भेजा जा सके।
ममता के भाई सतीश कुमार ने हिम्मत करते हुए दूल्हे बिजेंद्र सिंह और उसके पिता बीरेंद्र सिंह को बताया। सवाल था कहीं बारात न रोकनी पड़े। बीरेंद्र सिंह बिना कोई देर किए अस्पताल पहुंचे और ममता की हालत को देखकर एक पल के लिए असमंजस में पड़ गए।
गांव से बारात के चलने की तैयारी हो चुकी थी। किसी भी सूरत में रिस्क नहीं लेना चाहते थे। इस खबर से माहौल कहीं दूसरा नहीं हो जाए इसलिए बीरेंद्र सिंह ने इसके बारे में किसी को नहीं बताया। डॉ. सीमा मित्तल और डॉ. घनश्याम मित्तल ने स्थिति भांपते हुए बीरेंद्र सिंह को अस्पताल में ही शादी की रस्म को पूरा करने की सलाह दी।
दोनों पक्ष इसके लिए राजी हो गए। बारात जखाला से मोहदीनपुर पहुंची। वहां प्रीतिभोज के बाद उसे वापस भेज दिया गया, जबकि दूल्हा बिजेंद्र सिंह अपने परिजनों के साथ सात फेरे लेने के लिए अस्पताल पहुंच गया।










