भाभी के हत्यारे की सजा बरकरार
बिलासपुर चरित्र पर संदेह के कारण दोस्त के साथ मिलकर भाभी की हत्या करने वाले की सजा हाईकोर्ट ने बरकरार रखी है। निचले कोर्ट ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा दी थी।
दुर्ग स्थित चरौदा केबिन बस्ती में मेघनाद अपनी पत्नी गिरिजा बाई और नीलकंठ के साथ रहता था। दो जुलाई 2002 को वह किसी काम से अपने गांव धौराभाठा चला गया। घर पर गिरिजा और नीलकंठ रह गए। नीलकंठ अपनी भाभी के चरित्र पर संदेह करता था।
उसने अपने दोस्त हीरालाल देवांगन के साथ उसी रात भाभी गिरिजा की गला दबाकर हत्या कर दी और घटना को लूट के कारण हत्या का रंग देने के लिए उसके जेवर निकालने के बाद पोटली में बांधकर कुएं में फेक दिए। हीरालाल ने नीलकंठ को खाट से बांध भी दिया और दरवाजा खुला छोड़कर चला गया।
छानबीन के दौरान पुलिस को असलियत पता चली और दोनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में मामला प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के बाद पंचम अपर सत्र न्यायाधीश दुर्ग ने दोनों को दोषी पाकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपियों ने निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। जस्टिस टीपी शर्मा, आरएल झंवर की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद सजा बरकरार रखी।



