इतने कार्ड, फिर पहचान का संकट क्यों?
गेस्ट एडिटर विशेष : हर नागरिक के लिए यूनिक आईडेंटिफिकेशन नंबर की जरूरत क्यों? यह है हमारे विशेषांक की थीम। गेस्ट एडिटर नंदन नीलकेणी के सुझाए अनुसार हमने दैनिक भास्कर और दिव्य भास्कर के देशभर में फैले नेटवर्क के जरिये यह सर्वे करवाया। संवाददाताओं को दूरदराज के पिछड़े जिलों में भेजा ताकि समझ सकें कि योजनाओं का फायदा क्यों नहीं मिल पाता आम आदमी को। सर्वे में ६,172 पाठकों से मिले फीडबैक से पता चलता है कि राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे तमाम तरह के पहचान-पत्र होने के बावजूद देश में नागरिकों को पहचान साबित करना कई बार कठिन हो जाता है। 
इतनी गंभीरता से बनाया नीलकेणी ने अखबार
नंदन नीलकेणी ने गेस्ट एडिटर बनने की पेशकश को इतनी गंभीरता से लिया कि पिछले दो हफ्ते से वे हमारे संपादकों के साथ इस अंक की प्लानिंग में लगातार शामिल रहे। बुधवार सुबह 11.30 बजे वे इंदौर कार्यालय पहुंचे। हमारे वरिष्ठ पत्रकारों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। डेढ़ घंटे तक उन्होंने खबरों और विशेष पेजों पर बात की।
इसके बाद भास्कर के निमंत्रण पर आए शहर के उद्योगपतियों से विशेष बातचीत की। फिर दिन में शहर के सभी प्रमुख मैनेजमेंट संस्थानों के स्टूडेंट्स से रुबरू हुए। यही नहीं शाम को दोबारा भास्कर कार्यालय लौटे। एक-एक खबर को जांचा और तब फाइनल किया अखबार।
ग्राउंड रिपोर्ट :
छग : मेहरबान कुदरत, सरकार नहीं
गुजरात : सब बढ़े पर पिछड़े डांग के निवासी
मप्र. : गांवों से बीस किमी तक कोई अस्पताल नहीं
छह सौ करोड़ में भी नहीं बदली तकदीर
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राजस्थान : सड़कंे ही बनीं, बाकी कुछ नहीं



