अब वित्त विधेयक पर होगी जोर-आजमाइश
नई दिल्ली राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक के बहाने समर्थक कुनबे में आई दरार से घिरी केंद्र सरकार अब आंकड़ों का खेल दुरूस्त करने में जुट गई है। कांग्रेस की कोशिश यह है कि अब पहले वह वित्त विधेयक को पारित कराए।
लिहाजा रूठी रेलमंत्री ममता बनर्जी को हकीकत समझाकर साथ लेने की कोशिश में बहुत हद तक सफल होने के बाद कांग्रेस ने अब उन सहयोगियों को भी साथ बनाए रखने की कवायद शुरू कर दी है जो महिला आरक्षण को लेकर सरकार से दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। इसी रणनीति के तहत सरकार ने वित्त विधेयक पारित होने के बाद ही महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पेश करने की योजना बनाई है।
लेकिन अभी कोई समय तय नहीं किया गया है। सरकार को डर यह है कि अगर महिला आरक्षण विधेयक के बहाने लालू और मुलायम से बनी कांग्रेस की दूरी इस मुकाम तक चली जाती है कि ये दोनों दल सरकार के वित्त विधेयक के खिलाफ मतदान करते हैं, तो स्थिति बहुत आसान नहीं रह जाएगी। क्योंकि वित्त विधेयक पर उसे विपक्षी दलों के कटौती प्रस्ताव का भी सामना करना पड़ सकता है। सरकार की अंदरूनी कोशिशों का ही असर है कि लालू और मुलायम ने तल्खी दिखाने के बावजूद सरकार से समर्थन वापसी का पत्र नहीं दिया है।
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने बुधवार को कहा कि उन राजनीतिक दलों को हकीकत समझनी होगी जो महिला आरक्षण विधेयक का विरोध कर रहे हैं। ममता के विरोध पर उन्होंने कहा कि वे उस कैबिनेट बैठक में शामिल थीं जिसने महिला आरक्षण बिल को हरी झंडी दिखाई थी। उन्होंने उम्मीद जाहिर किया कि रेलमंत्री अपने फैसले पर पुनर्विचार करेंगी।
केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि महिला आरक्षण विधेयक पर कदम वापस खींचने का कोई सवाल नहीं है।
लेकिन सरकार राज्यसभा में बिल पारित कराने के बाद सरकार के जोखिम को कम करके आगे बढ़ने के मूड में है। सरकार वित्त विधेयक को पारित कराने के लिए अपने सहयोगियों के अलावा निर्दलीयों को भी साथ लेने की संभावना टटोल रही है। केंद्र सरकार के रणनीतिकारों का कहना है कि सरकार को बजट सत्र में कई अन्य चुनौतियों से जूझना है, जिसमें न्यूक्लियर लाएबिलिटी बिल भी शामिल है।



