Monday, Mar 15th, 2010, 2:07 am [IST]  
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danik bhaskarट्रेनों की छत पर बैठ स्नान के लिए पहुंचे यात्री

भास्कर संवाददाता &

सोमवती अमावस्या पर ओंकारेश्वर जाने वाले यात्रियों की भीड़ उमड़ पड़ी। निजी वाहनों एवं बसों के अलावा यात्रियों का दबाव ट्रेन पर रहा। रविवार को स्टेशन पर यात्रियों का तांता लगा रहा और हर ट्रेन खचाखच भरकर गई।

24 घंटे में करीब पांच ट्रेनें ओंकारेश्वर की ओर जाती हैं। सुगम सुविधा होने से ज्यादातर यात्री ट्रेन से ही वहां जाते हैं। अमावस्या पर सुबह स्नान करने का महत्व है। इसलिए यात्री एक दिन पहले ही पहुंच जाते हैं। सुबह और दोपहर जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की खासी भीड़ रही। शाम को जाने वाली ट्रेन में भी बड़ी संख्या में यात्री ओकारेश्वर के लिए गए। बड़ी संख्या में यात्री छत पर बैठे थे। छत पर बैठने वालों में महिला, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे। दरवाजे पर भी सवारियां लटकी थी। आरपीएफ के जवानों ने खतरनाक स्थिति में बैठे हुए लोगों को ट्रेन से उतारा। इसके बाद भी लोग जोखिम उठाकर ओंकारेश्वर पहुंचे।

खिड़कियों पर रही भीड़ - टिकट खिड़की पर भी भीड़ देखी गई। सामान्यत: प्रतिदिन सात हजार लोग यात्रा करते हैं और तीन हजार टिकट की बिक्री होती है लेकिन सोमवती अमावस्या होने से बड़ी संख्या में लोगों ने यात्रा की। सामान्य से डबल यात्री ओंकारेश्वर गए। टिकटों की बिक्री भी दोगुनी हुई। पर्व को देखते हुए टिकट खिड़की ज्यादा खोली जाना थी लेकिन केवल दो ही खिड़कियां चालू रहीं। भीड़ को देखते हुए हमेशा विशेष ट्रेन चलाने की मांग की जाती रही है लेकिन विशेष ट्रेन नहीं चलाई गई। विशेष बल लगाया - आरपीएफ के थाना प्रभारी ग्रेसियस फर्नांडीज ने बताया अमावस्या को देखते हुए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई। ट्रेन में लटके व छत पर बैठे कई यात्रियों पर पुलिस बल ने निगरानी रखी और कई को ट्रेन से उतारा गया। ओंकारेश्वर में भी महू से पुलिस बल भेजा गया।

यह है स्नान का महत्व - संत ज्ञानेश्वर संजीवनी महाराज एवं पं. राजेश शास्त्री ने बताया वैसे तो अमावस्या हर शुभ कार्य के लिए निषेध है लेकिन अमावस्या सोमवार को होती है तो पुनीत हो जाती है। इस दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से सभी नदियों में स्नान करने का पुण्य मिलता है। इस दिन भगवान विष्णु की परिक्रमा करने का भी महत्व है।

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