Monday, Mar 22nd, 2010, 7:45 am [IST]  
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danik bhaskarसेज में बढ़ते ई-कचरे से निपटने को सख्त हों कानून

एजेंसी.

नई दिल्लीई-वेस्ट डम्पिंग सेंटर बनने के कगार पर पहुंच चुके देश के विशेष आर्थिक परिक्षेत्रों (सेज) के लिए कानूनों को सख्त बनाने की सिफारिश की गई है। पर्यावरण मंत्रालय द्वारा गठित कमेटी ने सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश में बढ़ते इस खतरे को देखते हुए सेज को भी खतरनाक कचरा (प्रबंधन, संचालन और स्थानांतरण) नियमों के अधीन लाया जाना चाहिए। कमेटी का मानना है कि इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के तेजी से बढ़ते उपयोग देश में ई-कचरे के संकट को और बढ़ाया है।



एक सर्वेक्षण के मुताबिक 2012 तक यह 8,00,000 टन के स्तर तक पहुंच जाएगा जो कि 2005 में सिर्फ 1,46,000 टन था। कमेटी के अनुसार बढ़ते ई-कचरे के लिए आयात भी एक प्रमुख कारण है। आयात से उत्पन्न ई-कचरा देश के भीतर पैदा होने वाली कचरे के बराबर ही है। कमेटी के अनुसार उत्पादों के रि-साइकिल और रि-यूज के साथ ही उत्पादकों पर इस बात के लिए भी दबाव बनाया जाना चाहिए कि उत्पाद का जीवन खत्म होने पर वे उसे वापस खरीदें।

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