‘युआन’ पर चीन-अमेरिका फिर आमने-सामने
वाशिंगटन/बीजिंग
मुद्रा विवाद पर चीन और अमेरिका फिर टकराव की स्थिति में पहुंच गया है। जहां अमेरिका चीन पर उसकी मुद्रा ‘युआन’ को सही मूल्य तक लाने के लिए दबाव बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं चीन ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान कर कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। अमेरिकी सांसदों की इस मांग से कि चीन पर अपनी मुद्रा से छेड़छाड़ के लिए कार्रवाई हो, यह सारा विवाद फिर से ताजा हो गया है।
हालांकि चीन पर मुद्रा के पुनर्मूल्यांकन के अमेरिकी दबाव से कई एशियाई व यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं को फायदा हो सकता है। इन अर्थव्यवस्थाओं को भी अभी तक चीनी एक्सचेंज-दर की वजह से घाटा उठाना पड़ रहा है। इनकी भी लंबे समय से शिकायत रही है कि युआन के कमजोर होने से चीन गलत तरीके से फायदा कमा रहा है।
हालांकि ये देश अमेरिका की तरह चीन के खिलाफ दबाव नहीं बना पा रहे थे। जहां एशियाई अर्थव्यवस्थाएं चीन को नाराज नहीं करना चाहतीं, वहीं यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं का घाटा अमेरिका जितना नहीं है।
अमेरिकी सांसदों ने मांग की थी कि अमेरिक ी राष्ट्रपति बराक ओबामा चीन पर मुद्रा के साथ हेरफेर करने वाले देश होने का ठप्पा लगाएं। ऐसा करने से चीन पर कड़े दंडात्मक प्रावधान लग सकते हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री टिमोथी गीथनर को इस मुद्दे पर अगले महीने फैसला करना है। उन्होंने कहा,‘युआन का मुद्दा अमेरिकी नहीं वैश्विक स्तर का है।’
युआन पर अमेरिका और चीन पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं। 2005 में चीन ने अमेरिकी दबाव में युआन को और लचीला बनाया था लेकिन आर्थिक मंदी के समय उसने फिर से युआन को कमजोर कर अपने निर्यात को मजबूत किया। हालांकि उसके बाद युआन फिर 20 प्रतिशत ऊपर आया लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक युआन अभी भी सही मूल्य से 40 फीसदी नीचे की कीमत पर है।
उधर, चीन ने अमेरिका को आगाह कि या है कि अगर अमेरिका उसक ी विनिमय दर नीति पर कारोबारी प्रतिबंध या अन्य दंडात्मक प्रावधान लागू करता है तो वह इसका जवाब देगा। ‘पीपुल्स डेली’ ने चीन के उद्योग मंत्री चेन डेमिंग के हवाले से खबर दी,‘हम आंखें मूंदे नहीं बैठेंगे।’ उनसे यह पूछा गया था कि क्या अमेरिका चीन पर प्रतिबंध लगा सकता है। चीन की यह टिप्पणी बीजिंग में आर्थिक मंच की एक बैठक क े दौरान आई।



