Monday, Mar 22nd, 2010, 8:27 am [IST]  
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danik bhaskarजरूरत से कम हैं एटीसी कर्मचारी

प्रदीप सुरीन

नई दिल्ली नागरिक उड्डयन क्षेत्र आने वाले समय में जोरदार प्रगति की उम्मीद भले कर रहा हो, पर इन सबसे अलग हवाई अड्डों पर जमीनी हकीकत कुछ अलग ही है। देश के हवाई अड्डों पर विमानों की सुरक्षित लैंडिंग और टेक-ऑफ कराने वाले एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (एटीसी) कर्मचारियों की भारी कमी है।



नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल का कहना है कि देश में बने सभी हवाई अड्डों पर 2107 एटीसी अधिकारी तैनात होने चाहिए, पर अभी भी सिर्फ 1605 अधिकारी ही तैनात हैं। संसद में रखी गई रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बुरा हाल दक्षिण भारत के हवाई अड्डों का है। दक्षिण भारत के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में स्थित हवाई अड्डों पर 750 एटीसी अधिकारी होने चाहिए, पर वहां अभी भी लगभग 272 अधिकारियों की कमी है। दिल्ली, श्रीनगर, चंडीगढ़ और लखनऊ सहित तमाम उत्तर भारतीय हवाई अड्डों पर आवश्यक 545 एटीसी अधिकारियों के बजाय मात्र 448 ही तैनात हैं। वहीं मुंबई, अहमदाबाद और इंदौर सहित पूरे पश्चिमी भाग के हवाई अड्डों पर ९२ एटीसी अधिकारियों के पद खाली पड़े हैं।



दिल्ली एयरपोर्ट पर तैनात एक एटीसी अधिकारी ने भास्कर को बताया कि इस कमी को काफी गंभीरता से लेने की जरूरत है, क्योंकि यह सीधे-सीधे विमानों और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उनके मुताबिक, एटीसी में अधिकारियों की कमी के कारण एक-एक अधिकारी पर काम का दोगुना बोझ होता है। ज्यादातर एटीसी अधिकारी क्षमता से ज्यादा काम कर रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि अधिकारी अपना जरूरी साप्ताहिक अवकाश तक नहीं ले पा रहे हैं। जानकार बताते हैं कि आने वाले सालों में देश का उड्डयन क्षेत्र २क् प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ेगा। ऐसे में एटीसी में कर्मचारियों की कमी पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।



खुद प्रफुल्ल पटेल ने कहा था कि २क्२क् तक देश में तीन हजार एयरक्राफ्ट की जरूरत होगी। ऐसे में हवाई अड्डों पर विमानों की संभावित भीड़ से निबटने के लिए ज्यादा एटीसी अधिकारियों की जरूरत पड़ने वाली है।

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