Monday, Mar 22nd, 2010, 8:30 am [IST]  
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danik bhaskarअब देखें इस तेजी में दम है या नहीं

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राजीव रंजन झा

आज सुबह भारतीय बाजार की चाल कैसी रहेगी, इसके बारे में अनुमान लगाने के लिए कुछ खास सोचने की जरूरत नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार की शाम को बाजार बंद होने के बाद रेपो और रिवर्स रेपो दरें बढ़ायी थी, इसलिए आज सुबह बाजार में इस खबर की प्रतिक्रिया दिखेगी ही। स्वाभाविक रूप से बाजार पर इस खबर के चलते दबाव दिखेगा। इस सदमे से सिंगापुर निफ्टी आज सुबह 5200 के नीचे दिख रहा है। इसलिए इतना तो साफ है कि आज बाजार कमजोर खुलेगा। लेकिन असली कहानी इसके बाद की होगी, जो बतायेगी कि बाजार किधर जाने का मन बना रहा है।

दरअसल आरबीआई की ब्याज दरें बढ़ना बाजार के लिए कोई चौंकाने वाली बात भी नहीं है। लोग इस बात की संभावना पहले ही देख रहे थे। चौंकाने वाली कोई बात रही तो यही कि 20 अप्रैल की समीक्षा बैठक से 1 महीने पहले ही अचानक यह फैसला कर लिया गया। मगर अब बाजार शायद इस बात से डर रहा है कि कहीं 20 अप्रैल की समीक्षा बैठक में फिर से दरों को थोड़ा और न बढ़ा दिया जाये। आरबीआई ने पहले ही ब्याज दरें बढ़ा कर 20 अप्रैल की समीक्षा बैठक में फिर से कुछ बढ़ोतरी की गुंजाइश तो बना ही ली है। लेकिन वास्तव में अब आरबीआई इस तरह के फैसलों के लिए समीक्षा बैठक तक का इंतजार नहीं किया करता है। उसे जब भी जरूरी लगता है, तब इस तरह के फैसले हो जाते हैं। इसलिए 20 अप्रैल की समीक्षा बैठक में ब्याज दरें फिर से कुछ बढ़ेंगी, इस आशंका को मैं अभी ज्यादा वजनदार नहीं मानूँगा।

आज किन बातों पर ध्यान रखना होगा? पहली बात, सुबह बाजार खुलने पर निफ्टी फिसल कर कहाँ तक गिरता है। निफ्टी के लिए 5200-5220 का स्तर महत्वपूर्ण होगा। अगर यह स्तर बचा रहता है, खास तौर पर बंद भाव के लिहाज से, तो बाजार के लिए यह अच्छा संकेत होगा। पिछले 4 कारोबारी दिनों से लगातार निफ्टी ऊपर जा रहा था। अगर 15 मार्च की 8 अंक की छोटी सी गिरावट को छोड़ दें, तो 10 मार्च से लगातार बढ़त ही रही है। इसलिए कोई बहाना नहीं होता, तो भी मुनाफावसूली ही बाजार को थोड़ा नीचे ले जा सकती थी। देखना यही होगा कि कोई गिरावट मुनाफावसूली की स्वाभाविक सीमाओं के अंदर रहती है, या ज्यादा कमजोरी के संकेत देती है।

आज देखने वाली बात यह भी रहेगी कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार चल रही खरीदारी कायम रहती है या नहीं। और 25 फरवरी 2010 से लगातार बिकवाली कर रही घरेलू संस्थाएँ इसी शुक्रवार को फिर से खरीदार बनी थीं। सिर मुंड़ाते ओले पड़े! लेकिन अगर वे आज भी खरीदार बनी रह गयीं तो संकेत साफ होगा कि वे ब्याज दरों में बढ़ोतरी को नजरअंदाज करके आगे बढ़ रही हैं।

(© शेयर मंथन, 22 मार्च 2010)

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