इराक में यातना शिविर चलाती थी ब्रिटेन की सैन्य खुफिया
लंदन मीडिया में आई एक रिपोर्ट मंे बताया गया है कि ब्रिटेन की सैन्य खुफिया एजेंसी इराक में एक गुप्त यातना शिविर चलाती थी। इस शिविर में कैदियों के साथ बेहद कठोर व्यवहार किया जाता था। ‘द इंडिपेंडेंट’ में प्रकाशित खबर में दस्तावेजों के हवाले से कहा गया है कि शिविर में कैदियों को लंबे समय तक भीषण गर्म स्थान में रखा जाता था और सैन्य खुफिया अधिकारी उन्हें सोने नहीं देते थे।
ये अधिकारी ‘‘सीधे लंदन को’’ अपनी रिपोर्ट सौंपते थे। 2003 में ब्रिटिश सेना की हिरासत में मारे गए इराकी होटलकर्मी बाहा मुसा के मामले की जांच कर रही ज्वायंट फॉरवर्ड इंटेरोगेशन टीम को यह जानकही एक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी ने दी। जांच आयोग को दिए वक्तव्य में कर्नल क्रिस्टोफर वेरोन ने बताया कि 30 से 40 कैदियों को घुटने के बल पर बैठा देख और उनके सर पर बोरियां देख उन्होंने चिंता जताई।
इस शिविर के जो इसके प्रभारी थे वे सेना के खुफिया मुख्यालय से थे और सीधे लंदन रिपोर्ट करते थे। उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे बताया गया कि वे एक स्वतंत्र इकाई हैं और जीओसी1ब्रिटेन आम्र्ड डिवीजन के अंदर नहीं आते हैं।’’ कर्नल ने जांच आयोग को बताया कि यह सब देखना काफी हैरतंगेज था। उन्हें इसकी कल्पना भी नहीं थी।
इस खुलासे ने ब्रिटेन और अमेरिका की आतंकियों के खिलाफ लड़ाई को कठघरे में खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट में इराक पर हमले के पीछे की नीयत को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इससे पहले अफगानिस्तान और पाकिस्तान में सरकारी खुफिया तंत्र के साए में अमेरिकी रक्षा विभाग के एक अधिकारी द्वारा निजी कॉन्ट्रैक्टरों का नेटवर्क स्थापित करने का मामला सामने आया था।



