अभिव्यक्ति
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संपादकीय

भास्कर के लिए लिखा कलाम का लेख, जो संभवत: आखिरी लेख था

वर्ष 1975 में इसरो में हमें एक नया डिवाइस विकसित करने के लिए बेरिलियम डायफ्राम चाहिए था।
 

गुलजार के शब्दों में कलाम... मैं एक गहरा कुआं हूं इस जमीन पर

मैं शहर रामेश्वरम के एक मिडिल क्लास तमिल ख़ानदान में पैदा हुआ।

कमाल के कलाम

एक साधारण बच्चे से लेकर कलाम बनने का सफर आसान नहीं था।

जिनकी बांहों में दम तोड़ा, उन्होंने भास्कर को बताए कलाम के आखिरी शब्द

कलाम कहते थे- मैं शिक्षक हूं और इसी रूप में ही पहचाना जाना चाहता हूं... पढ़ाते हुए ही चले गए।

बेहतर भविष्य के प्रति आश्वस्त हैं भारतवासी

अमेरिका स्थित प्यू रिसर्च सेंटर जनमत का आकलन करने वाला प्रतिष्ठित एवं विश्वसनीय संस्थान...

जो यह नहीं जानता, वो कुछ और जानता है

‘आप क्या जानते हैं, यह तब तक नहीं जानते जब तक कि यह नहीं जान पाते कि आप क्या नहीं जानते।’
 
 
 
 
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