अभिव्यक्ति
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संपादकीय

कर्ज के बोझ में दबा सामाजिक विकास

दुर्भाग्यपूर्ण है कि फिर भी कृषि आधारित परिवारों की हालत में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ।
 

असंभव के विरुद्ध: या खुदा! पाकिस्तान में इतनी बुजदिली क्यों है?

बुजदिली से ज्य़ादा कोई ऐसी इन्सानी हरकत नहीं होती जो उससे भी नीची हो।

जीएसटी से संघीय ढांचे को मजबूती

शुरुआती कुछ वर्षों तक इस पर राज्य वैट और केंद्र सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लगाते रहेंगे।

संसद के गतिरोध में अटके सुधार

दोनों पक्षों के अपने रुख पर अड़े रहने का परिणाम यह है कि सरकार का विधायी एजेंडा अवरुद्ध हो...

क्या स्पाइस जेट को सरकार बचा लेगी?

नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की 30 दिन की बुकिंग सीमा से भी उसे छूट देने का फैसला हुआ...

कल्‍पेश याग्निक की टिप्‍पणी: आज हम सब पाकिस्तानी, लेकिन …

याचना नहीं, यातना के योग्य हैं तालिबानी। इस्लामिक स्टेट। इंडियन मुजाहिदीन। जो भी नाम हो।...
 
 
 
 
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