संपादकीय
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  • राज्यसभा में बहस से इटली के साथ हुए और फिर रद्द हुए अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे में रिश्वत का सच भले सामने न आए, लेकिन पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बचे चरण और केरल व तमिलनाडु विधानसभा के पूरे चुनाव पर इस सौदे की छाया पड़नी तय है। इससे कांग्रेस और वामपंथ के गठबंधन पर तनाव तो आएगा ही, द्रमुक और कांग्रेस के गठबंधन को एक साथ लांछित करने का सुअवसर भी मिलेगा। साथ ही यह बहस उत्तरप्रदेश और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों पर भी असर डालेगी जहां से लोकसभा में भारी विजय हासिल करने के बावजूद राज्य के...
    03:49 AM
  • यह किसी भी सरकार का हक है कि वह अपने कामकाज को जनता के सामने प्रचारित करे और इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपनी पार्टी के सांसदों से यह कहना उचित ही है कि वे सरकार की दो साल की उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाएं, क्योंकि जो सरकारें अपने अच्छे कामकाज का प्रचार नहीं कर पातीं उनकी स्थिति यूपीए-2 यानी मनमोहन सिंह सरकार जैसी हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय मंदी और भारतीय अर्थव्यवस्था की घरेलू चुनौतियों के बीच मोदी सरकार ने देश में सकारात्मक माहौल बनाया है, जन कल्याणकारी योजनाओं से लेकर...
    May 4, 03:51 AM
  • पेड न्यूज के बारे में न्यायपालिका के सामने जताए गए सरकार के इरादे अगर कानून की शक्ल पाते हैं तो यह एक उचित कदम ही कहा जाएगा। इससे न सिर्फ हमारी चुनाव प्रणाली में घुसती हुई बीमारी का एक हद तक इलाज होगा बल्कि लोकतंत्र के चौथे खंभे के एक हिस्से की विश्वसनीयता बहाल होगी। एस्सार लीक के मामले में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार के हलफनामे से निकली इस बात पर अभी पूरा यकीन नहीं किया जा सकता, क्योंकि लोकतंत्र को दूषित कर रही राजनीति की एक लॉबी नहीं चाहती कि 1951 के जनप्रतिनिधित्व कानून और 1978 के...
    May 3, 03:51 AM
  • प्रेम उपहार लेकिन रहीम का नाजुक धागा भी
    प्रेम के कारण युवक-युवतियां अतिशयोक्ति भरा कदम उठाते हैं। हिंसा पर उतारू हो जाते हैं या फिर आत्मघाती हो बैठते हैं। क्या प्रेम इतना ही है? प्रेम शायद ऐसे दो व्यक्तियों के सौहार्द्र की अवस्था है, जहां कुछ भी अनुचित प्रतीत नहीं होता। प्रतीत नहीं होता, यह अलग विषय है, किंतु औचित्य व अनौचित्य का संदर्भ सदा बना रहता है। प्रेम का एक ही रूप नहीं है फिर भी मनुष्य जीवनभर उसी एक रूप को साकार करने में लगा रहता है। युग्म बन जाना प्रेम का चरम है या युग्म होते हुए भी युग्मता का विलोप हो जाना, कहना कठिन है।...
    May 2, 03:55 AM
  • आरक्षण: पहले पिछड़ों को पिछड़ा बनाए रखा - अब क्या ग़रीब सवर्णों को ग़रीब बनाए रखेंगे?
    संविधान में नहीं, सुप्रीम कोर्ट 50% से आगे देगा नहीं; फिर घोषणाएं क्यों? पिछले दस साल में ख़ुद को ओबीसी बताने वाले दस प्रतिशत बढ़कर 44% हो गए। बीस प्रतिशत अजा है। नौ प्रतिशत जजा। इस तरह कुल 73% को आरक्षण की पात्रता है। यदि इनमें नई, आंदोलन कर रही जातियों को जोड़ लिया जाए तो यह आंकड़ा 80-81% तक पहुंच जाएगा। तो बचेगा कौन? - विश्लेषणों से, नेशनल सेम्पल सर्वे के आधार पर - गुजरात ने अचानक 10% आरक्षण सवर्णों के लिए क्यों किया? -सीधा संबंध तो पटेल आंदोलन से ही है। किन्तु इसके राष्ट्रीय मायने भी हैं। - किस तरह के...
    April 30, 01:24 PM
  • पाटीदारों के जबरदस्त आंदोलन के दबाव में आकर आखिरकार गुजरात की आनंदीबेन पटेल सरकार ने आर्थिक आधार पर दस प्रतिशत आरक्षण दे तो दिया है, लेकिन न तो इस उपाय के अदालत में टिकने की गारंटी है और न ही इससे सामाजिक शांति कायम होने का यकीन बनता है। पहली वजह तो यही है कि अनारक्षित श्रेणियों को दिए गए इस आरक्षण को जोड़कर पहले से मौजूद आरक्षण का अनुपात सुप्रीम कोर्ट से निर्धारित पचास की सीमा से ऊपर यानी 59 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। लेकिन उससे भी बड़ी बात यह है कि सरकार ने आरक्षण के लिए सालाना आय की छह लाख रुपए की...
    April 30, 03:11 AM
  • विकास के ममता मॉडल ने किया माओवाद बेअसर
    भारत के कई राज्यों में माओवादी संगठन राजनीतिक तौर पर भले चुनौती नहीं बन पाए हों, सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं। इसका पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिस सकारात्मक दृष्टि के साथ मुकाबला किया, वह माओवाद प्रभावित बाकी राज्यों के लिए एक उदाहरण है। ममता ने पुलिस और अर्द्ध-सैनिक बलों के बूते माओवादी आंदोलन से निपटने की बजाय शांतिपूर्ण सह अस्तित्व की अवधारणा को आजमाया। पांच साल पहले मुख्यमंत्री बनते ही ममता ने माओवादियों के मध्यस्थों से शांति वार्ता शुरू की और यह स्वीकार करने...
    April 29, 03:21 AM
  • सरकार में होने की अपनी मजबूरियां होती हैं और कई बार पार्टियों को ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, जो उनके सिद्धांतों और जमाने के दस्तूर के खिलाफ होते हैं। ऐसा ही एक फैसला महाराष्ट्र सरकार ने दाल की कीमतें नियंत्रित करने का लिया है। उदारीकरण के इस दौर में जब तमाम वस्तुओं की कीमतें बाजार के हवाले कर दी गई हैं और सत्तर और अस्सी के दशक की कंट्रोल की नीति को कब का समुद्र में फेंका जा चुका है तब इस तरह का फैसला बताता है कि जरूर जमाने के दस्तूर में कहीं कुछ गड़बड़ है। लगातार तीन साल के सूखे में घटे उत्पादन और...
    April 28, 04:32 AM
  • भ्रष्टाचार कांग्रेस की कमजोर नस है और केंद्र की मोदी सरकार इस मामले में खुशकिस्मत है कि उसे कांग्रेस की इस नस को दबाने का मौका बार-बार मिलता रहता है। ताजा मौका इटली के मिलान की एक अदालत के फैसले से मिला है। भारत के हाईकोर्ट के समतुल्य इस अदालत ने हालांकि आगस्तावेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर के सौदे में रिश्वतखोरी के आरोप में अपने देश के अधिकारियों को दंडित किया है, लेकिन उसकी आंच न सिर्फ 2005-07 में भारतीय वायुसेना के प्रमुख रहे एयर मार्शल एसपी त्यागी तक जा रही है बल्कि यूपीए सरकार की संरक्षक और...
    April 27, 03:50 AM
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने भारत के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर का रो पड़ना महज निजी भावुकता में टाल दिए जाने वाली घटना नहीं है। यह अपने आप में इस बात का संकेत है कि हमारी कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। वैसे तो फ्रांसीसी दार्शनिक मांटेस्क्यू के सत्ता के विभाजन के सिद्धांत को भारतीय संविधान में दर्ज भी किया गया है और व्यवहार में भी हमारा लोकतंत्र उसे अपनाता रहा है, लेकिन जबसे भारतीय न्यायपालिका ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) की नियुक्ति...
    April 26, 03:50 AM
  • चुनने का अधिकार सिर्फ मानव जाति को मिला है
    चुनने का अधिकार सिर्फ मानवजाति को दिया गया हैं। हर एक प्राणी अपने प्रारब्ध का शिकार हैं। कोई शेर नहीं सोच सकता, क्यों न मैं शाकाहारी बन जाऊं। कोई गाय नहीं सोच सकती, क्यों न मैं मांसाहारी बन जाऊं। प्रयोग करने में क्या हर्ज है। नहीं। सब प्राणी अपने-अपने स्वभाव के अधीन हैं। उनमें चुनने की क्षमता नहीं है। सिर्फ मनुष्य ही चुन सकता हैं। यह हमारा श्राप भी हैं और वरदान भी। हममें सोचने की काबिलियत है। अगर यह हम सही ढंग से सोचेंगे तो चांद तारों की ओर बढ़ेंगे। अगर गलत विचार धारण करेंगे तो राक्षस योनि के...
    April 25, 05:17 AM
  • कल्पेश याग्निक का कॉलम: कोहिनूर नहीं- लाना है तो निवेश, काला धन और दाऊद लाओ
    करने से पहले, सुनो। बोलने से पहले, सोचो। खर्च से पहले, कमाओ। कोसने से पहले, जांचो। थोपने से पहले, पूछो। प्रार्थना से पहले, करो। छोड़ने-हारने से पहले, प्रयास करो। क्योंकि किसी की शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान नहीं है, काम है। काम जल्दी करें। जल्दबाज़ी में नहीं। - प्राचीन काल से प्रचलित। कोहिनूर। पीएफ। उत्तराखंड। तीन असंबद्ध, अलग विषय। किन्तु एक ही पाठ पढ़ा रहे हैं। कि जल्दबाज़ी बहुत ही बुरी होती है। कहा जा सकता है कि हम सभी इस कालजयी कहावत को जानते हैं, इसमें नया क्या है? यही समझने का प्रयास...
    April 23, 03:41 AM
  • सूखे और बाढ़ के प्रभाव में गरीबों के घर छोड़कर भागने की घटनाएं तो अक्सर होती रहती हैं, लेकिन उसके कारण आईपीएल जैसे कमाऊ और ग्लैमर वाले आयोजन के देश से भागने की तैयारी सामान्य ढर्रे से हटकर होने वाली घटना है और सरकार और समाज पर दबाव डालने का तरीका भी। यह मनोरंजन के व्यवसाय बनाम सामाजिक अस्तित्व की लड़ाई है, जिसमें स्वाभाविक तौर पर सामाजिक कार्यकर्ता और न्यायालय समाज के पक्ष में खड़े हुए हैं। हम इसे भारतीय न्याय व्यवस्था की संवेदनशीलता भी कह सकते हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था का नुकसान भी। इसे...
    April 23, 03:34 AM
  • सौ दृष्टिहीन बालिकाओं का जीवन ज्ञान से रोशन किया
    देश के सबसे पिछड़े क्षेत्र बुंदेलखंड के चित्रकूट में हाईस्कूल का एक विद्यार्थी बहुत परेशान था कि परीक्षा के लिए तैयारी कैसे करे? अगर उसके पास किताबें होती भी तो वह पढ़ नहीं सकता था, क्योंकि विधाता ने उसकी आंखों की रोशनी जो छीन ली थी। मेरे जैसे छोटे बच्चे उनकी पाठ्य सामग्री को कैसेट में रिकॉर्ड करके दे देते थे और उन्हें ही सुनकर वह दृष्टिहीन बालक सामान्य विद्यार्थियों के बीच भी अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो गया।   उस बालक ने दृष्टिहीनता को भी वरदान समझकर स्वीकार लिया, जिसे वह सुमधुर स्वर में...
    April 22, 08:53 AM
  • जल-संरक्षण के प्रयासों की तीन कहानियां, ऐसे बदली सूखे इलाकों की तस्वीर
    महाराष्ट्र व गुजरात के सूखा प्रभावित इलाकों से जल-संरक्षण के प्रयासों की तीन कहानियां। इन अल्पज्ञात लोगों के जिद का नतीजा है कि वहां सूखे की आंच कम है। जानिए ये कौन हैं और क्या हैं इनके प्रयास: दो सौ गांवों को सूखेकी आंच से बचाया विश्वनाथ खोत को चार साल से भीषण सूखे का सामना कर रहे मराठवाड़ा स्थित उस्मानाबाद जिले के प्रशासन और लोगों में अत्यधिक आदर प्राप्त है। जो भी बारिश हो, उसका पानी खेतों में इकट्ठा करना अौर उसे जमीन में पहुंचाना। संक्षेप में महाराष्ट्र सरकार की जलयुक्त शिवार योजना का...
    April 22, 03:56 AM
  • न्याय, दंड और क्षमा स्थायी राजनीतिक सिद्धांत हैं, लेकिन वे हर पांच साल पर होने वाले चुनाव के इर्द-गिर्द चक्कर काटते नजर आने लगे हैं। यह स्थिति पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के सात मुजरिमों के बारे में भी है। विधानसभा चुनाव से गुजर रहे तमिलनाडु की जयललिता सरकार और प्रमुख विपक्षी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम चाहती है कि राजीव गांधी की हत्या के सात मुजरिमों को रिहा कर दिया जाए, क्योंकि वे पहले ही जेल में 20 साल से ज्यादा का समय काट चुके हैं। इनमें से दो मुजरिमों की फांसी की सजा को सुप्रीम...
    April 21, 03:51 AM
  • इशरत जहां मुठभेड़ पर पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम को लपेटने की भाजपा सरकार की कोशिशें अल्पकालिक भी हैं और दीर्घकालिक भी। इसका एक उद्देश्य तमिलनाडु विधानसभा के मौजूदा चुनाव में कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं को देशद्रोही और नरेंद्र मोदी के खिलाफ हद दर्जे की साजिश करने वाला बताना है तो दूसरी तरफ चिदंबरम के बहाने कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी को मुश्किल में डालने की भी तैयारी है। संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू की प्रेस कॉन्फ्रेंस उसी सिलसिले की कड़ी है, जो निर्मला सीतारमन और किरण...
    April 20, 02:31 AM
  • अंतरराष्ट्रीय नीतियां किसी नैतिकता और सिद्धांत की बजाय शुद्ध भू-राजनीतिक हितों पर आधारित होती हैं और मसूद अजहर के मामले में चीन के पाकिस्तान के प्रति झुकाव को हमें इसी संदर्भ में समझना चाहिए। इसीलिए हमें इस बात से संतोष जरूर मिला है कि भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मास्को में भारत-रूस और चीन की तितरफा वार्ता के लिए इकट्ठा हुए विदेश मंत्रियों की बैठक से अलग चीन के विदेश मंत्री वांग वी से अपनी आपत्ति दर्ज करा दी है, लेकिन इतने भर से चीन अपनी पाक समर्थक नीतियों को बदल देगा ऐसा सोचना...
    April 19, 04:24 AM
  • बच्चे जैसा देखेंगे वैसी ही नकल करेंगे
    बचपन में एक कहानी पढ़ी थी कि एक बंदर के हाथ में उस्तरा आ गया। और जब उस्तरा देखा तो उसे लगा कि मैं भी मनुष्यों की तरह अपनी दाढ़ी बना सकता हूं। उसके उपरांत उसका क्या परिणाम हुआ ये हम सब जानते हैं। शास्त्रों ने मन को बंदर की तरह कहा है तथा किशोर अवस्था की स्थिति बंदर की तरह ही होती है। किशोर अवस्था का बच्चा यह सोचता है कि मैं भी बड़े व्यक्तियों की तरह जी सकता हूं। परंतु बुद्धि का विकास न होने के कारण वह दूसरों की नक़ल करने लगता है। बंदर तो मात्र अपना नुक़सान करता है किंतु किशोर अवस्था के युवक तथा...
    April 18, 03:18 AM
  • कल्पेश याग्निक का कॉलम: यहां यदि खेलोगे तो यह मेरी मौत पर खिलखिलाना होगा
    सूखा : त्रास, त्रासदी और त्राहिमाम पर उठी एक हूक यहां यदि खेलोगे तो यह मेरी मौत पर खिलखिलाना होगा गाना ही है यहां तो बस शोक गीत गाना होगा यहांं खेल से अर्थ केवल क्रिकेट से नहीं है चुने हुए नेता उनके बुने हुए ताने बने हुए अफसर उनके तने हुए सीने सब खिलवाड़ ही तो कर रहे हैं हम सूखे का शिकार हैं यहां वो जो अपनी मलिनता से तालाबों को भरने का दंभ भरते थे उन्हें दण्ड दिलाना होगा यहां यदि खेलोगे तो यह मेरी मौत पर खिलखिलाना होगा यहां पानी से आशय केवल पोखर-जलाशय-नदियों से नहीं है केन्द्र से चली...
    April 16, 02:30 AM