संपादकीय
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  • महबूबा की सरकार बनने के बाद श्रीनगर में पहली बार दो आतंकी हमलों में तीन पुलिस वालों का मारा जाना कश्मीर में उभरे नव-उग्रवाद के सिलसिले की कड़ी है, जिसमें कभी मुठभेड़ में आतंकी मारे जाते हैं तो कभी पुलिस व सेना के जवान। बस फर्क यही है कि शेष भारत की सहानभूति जवानों के साथ होती है और घाटी के ज्यादातर नागरिकों की सहानुभूति मारे गए आतंकियों के साथ। कहा जाता है कि इन दिनों सीमा पर कड़ाई के कारण घरेलू आतंकियों को हथियारों की सप्लाई नहीं हो पा रही है, इसलिए वे हथियारों के लिए पुलिस, अर्द्धसैनिक बलों और...
    04:17 AM
  • प्रार्थना यानी स्वीकारने का दायरा बढ़ाना
    मैं अपने मरीजों से हमेशा कहती हूं कि उम्मीद रखें और प्रार्थना करें। क्या प्रार्थना में इतनी ताकत है कि वह दवा से ज्यादा कारगर साबित होती है? यदि होती है तो ऐसा उसमें क्या है, जो इतनी प्रभावी है? प्रार्थना विचारों से भरे मस्तिष्क को शुद्ध करने का प्रयास करती है। आमतौर पर मैं अपने मरीजों से यह बात कहती रहती हूं कि उम्मीद न छोड़ें और बेहतरी के लिए प्रार्थना करें, लेकिन क्या प्रार्थना आपकी मदद करती है या फिर यह केवल मनगढ़ंत सांत्वना ही है? इस बात को लेकर हमेशा असमंजस रहा है कि प्रार्थना से कुछ होगा या...
    May 23, 04:06 AM
  • कल्पेश याग्निक का कॉलम: चुनाव में जीत से सच, झूठ नहीं हो जाएंगे
    जीतने वाले सबसे अधिक ध्यान इसी बात का रखते हैं कि उनकी जीत पर किसी ने कोई ऐसी बात तो नहीं कह दी है - जो उसे नहीं कहनी चाहिए थी। ऐसा ही ध्यान, हारने वाले भी रखते हैं! - अज्ञात भव्य बीएमडब्ल्यू कार, धीमे-धीमे आगे बढ़ रही थी। चारों तरफ़ दौड़ रहे थे कमांडो। और मुस्तैद सुरक्षा जवान। कैमरे अथक। भीड़ अनंत। उत्साह असीमित। प्रतीक्षारत थी भाजपा श्रेष्ठि पंक्ति। अध्यक्ष अमित शाह, केन्द्रीय मंत्रियों से बात कर रहे थे। फिर कार रुकी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उतरे। भारी वर्षा में भी इतना पानी नहीं गिरा...
    May 21, 04:15 AM
  • भारतीय समाज में आदर्श और यथार्थ के बीच कितना कठिन संघर्ष है इसका प्रमाण नीट(नेशनल एंट्रेंस एलिजिबिलिटी टेस्ट) पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को दरकिनार करने के लिए लाया जाने वाला केंद्र सरकार का अध्यादेश है। छात्रों, अभिभावकों और राज्य सरकारों की व्यावहारिक दिक्कतों का हवाला देकर पूरे देश में ऐसा माहौल बनाया गया कि केंद्र की एनडीए सरकार जो देश में भ्रष्टाचार मिटाने का ढिंढोरा पीटने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती, उसने भी नीट की अनिवार्य परीक्षा को एक साल के लिए ही सही, टालने का फैसला कर लिया है।...
    May 21, 04:15 AM
  • सबसे बड़ी ज़िद: चतुर रणनीति और शख्सियत के कमाल से पलटी बाजी
    केरल में 93 वर्षीय अच्युतानंदन ने इतनी उम्र में जमकर पसीना बहाया, तो असम में सोनोवाल ने गहन जनसंपर्क से कमाल दिखाया। जयललिता और ममता बनर्जी ने अकेले चुनाव लड़कर अपने व्यक्तित्व के करिश्मे को खूब भुनाया। 93 वर्ष की उम्र में तूफानी प्रचार कर एलडीएफ को जीत दिलाई केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) को फिर सत्ता में लाने वाले 93 वर्षीय वीएस अच्युतानंदन की संघर्ष क्षमता गजब की है। जिस उम्र में व्यक्ति धूप में पसीना बहाने की बजाय ड्राइंग रूम में टीवी पर चुनाव विश्लेषण देखना पसंद करता है, उस...
    May 20, 06:35 AM
  • अमेरिका की कंप्यूटर कंपनी एपल के सीईओ टिम कुक को मुंबई के सिद्धि विनायक और केरल के सबरीमाला मंदिर में माथा टेकते हुए देखकर यही कहा जा सकता है कि जापर विपदा परत हैं सो आपत यहि देस। किंतु उनकी भारत यात्रा की खासियत यह है कि यह धार्मिक यात्रा नहीं है बल्कि पूरी तरह से व्यावसायिक यात्रा है, जिसमें आध्यात्मिकता मिली हुई है। एपल कंपनी के संस्थापक और रोचक चरित्र के धनी स्टीव जॉब्स भारत को अपनी आध्यात्मिक यात्रा का तो गंतव्य बनाते थे और नीम करोली बाबा के आश्रम में महीनों निवास करते थे, लेकिन भारत को...
    May 19, 05:00 AM
  • दुर्वासा की तरह हर किसी को शाप देने पर आमादा भाजपा के नए राज्यसभा सदस्य डॉक्टर सुब्रह्मण्यम स्वामी ने अब रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन को निशाने पर लेकर भाजपा को नई परेशानी में डाल दिया है। यह सही है कि राजन एक निर्भीक बैंकर की तरह किसी के दबाव में नहीं आते और उनके पास अमेरिका का ग्रीन कार्ड है, लेकिन सिर्फ इतनी-सी बात से न तो उनकी निष्ठा पर संदेह किया जा सकता है और न ही योग्यता पर। इस तरह की स्थिति में बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर मार्क कार्नी भी हैं। कार्नी कनाडा के रहने वाले हैं और उनकी...
    May 18, 04:58 AM
  • उत्तरप्रदेश और बिहार के बीच शराबबंदी की राजनीति के बहाने ऐसी बहस छिड़ी है, जिसमें हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला का सद्भावना संदेश समाजवादी राजनीति के लिए उल्टा साबित हो रहा है। बच्चन ने लिखा था, बैर बढ़ाते मंदिर मस्जिद, मेल कराती मधुशाला। लेकिन यहां अब मधुशाला ही दो हिंदी भाषी राज्यों और समाजवादी आंदोलन से निकले दो सहोदर दलों के बीच बैर बढ़ा रही है। नीतीश की बिहार की शराबबंदी राज्यों की सीमाओं पर ही नहीं, राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं में भी समस्या पैदा कर रही है। उन्होंने संघ मुक्त भारत और शराब...
    May 17, 03:41 AM
  • मुरझाए मन को फिर खिला देती है मित्रता
    मित्रता मैदान में नदी की धारा की तरह शांत, लेकिन स्थायी होती है और जीवन के अंतिम पहर तक साथ देती है। प्रेम एकतरफा हो सकता है, लेकिन मित्रता में दोनों सक्रिय रहते हैं और दोनों ही दायित्व महसूस करते हैं। मैत्री, प्रेम का सबसे मानवीय स्तर है। स्वतंत्रता, बराबरी और बंधुत्व का ऐसा मेल अन्य किसी रिश्ते में संभव नहीं है। आजकल सोशल मीडिया पर दोस्ती की बहार है किंतु क्या इसे सच्चे अर्थों में दोस्ती कहा जा सकता है? सिर्फ पसंद/नापसंद या कभी कोई टिप्पणी कर देने मात्र से दोस्ती जिंदा तो रह सकती है पर परवान...
    May 16, 03:50 AM
  • सुप्रीम कोर्ट ने मानहानि के डेढ़ सौ साल पुराने फौजदारी कानून में परिवर्तन से इनकार करके यह संदेश दे दिया है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर दूसरों की इज्जत पर कीचड़ उछालने की सहज इजाजत नहीं दी जा सकती, क्योंकि आधुनिक दौर में अभिव्यक्ति के तमाम मंचों के उपलब्ध होने से किसी पर कोई भी आरोप लगाना आसान हो गया है। इसलिए उस पर दंडात्मक विधान भी जरूरी है। रोचक तथ्य यह है कि इस कानून को चुनौती ऐसे राजनेताओं और पत्रकारों ने दी थी, जिनमें से कुछ का तो काम ही दूसरों को लगातार आरोपों के कठघरे में खड़े करना...
    May 14, 03:07 AM
  • कल्पेश याग्निक का कॉलम : एक तर्क जिससे फेल्यिर्स, टॉपर्स के बराबर खड़े हैं
    संसार का सबसे बड़ा कदम कौन-सा है? -घर से बाहर रखा कदम। - अज्ञात प्रिय मां, मैं फिर फेल हो गया। दो दिन हो गए। दो रातें बीत गईं। मैं हिम्मत खो बैठा। हिम्मत जुटा नहीं पाया। कैसे लिखूं? क्या बताऊं तुम्हें? पापा क्या कहेंगे? या कि, तुम पापा को क्या कहोगी? सच कहूं? एक बार, बल्कि दो बार, तो इच्छा हुई चौथी मंजिल से कूद जाऊं। फंदे पर लटक जाऊं। फिर वो अंग्रेजी वाले सर याद आ गए। यू आर बोर्न टू डू समथिंग। बिफाेर यू डाई। बहुत जोर-जोर से यही कहते रहते हैं। फिर शाम को आयुष्मान आया। पिछली बार बताया था न कि वह भी...
    May 14, 03:06 AM
  • सबसे बड़ी जिद : हरियाली और खुशहाली लौटाने का संकल्प
    सूखे में उगने वाली और प्रोटीन से भरपूर किस्म विकसित की मैसूर के प्रोफेसर राम राजशेखरन को लंबे समय से देश की समस्याएं सता रही थीं। एक तो मुख्यत: शाकाहारी आबादी होने के कारण आहार में प्रोटीन की कमी की समस्या और दूसरा बार-बार आने वाला सूखा। वे चाहते थे कि ऐसी कोई फसल हो जो बहुत ही कम पानी में उग सके और उसमें इतना प्रोटीन हो, जो मांसाहार में मौजूद प्रोटीन के बराबर हो। वे तमिलनाडु की मनमदुराई तहसील के हैं और उनकी परवरिश पुश्तैनी खेत के वातावरण में ही हुई। इस गांव में पानी का हमेशा संकट बना रहता है।...
    May 13, 07:29 AM
  • कानूनी उपायों से तेज होती परिवर्तन की रफ्तार
    प्राचीन काल से भारतीय समाज स्मृति, श्रुति, धर्म और अन्य परंपरागत नियमों से रूपांतरित होता रहा है। उपनिवेश काल में यह काम पश्चिमी अवधारणा व कानून से हुआ। स्वतंत्र भारत में धार्मिक नियमों को संहिताबद्ध करने और सकारात्मक पहल से समाज में परिवर्तन आया। जैसे हिंदू विवाह अधिनियम 1955 से पति-पत्नी एक ही जाति के होने की पूर्व शर्त खत्म हो गई। सत्तर के दशक में जनहित याचिका की अवधारणा ने भी सामाजिक परिवर्तन की गति को तेज किया। बाल और बंधुआ मजदूरी, कारावास भुगत रहे कैदी व प्रकारांतर से उनके परिजनों और...
    May 13, 07:15 AM
  • ब्रिटिश सरकार ने विजय माल्या को भारत भेजने से इनकार कर दिया है। हालांकि, उसने उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू करने का सुझाव देते हुए सहयोग की पेशकश की है। इससे भारतीय स्टेट बैंक सहित 17 बैंकों के 9,000 करोड़ की राशि वसूल होने की बची उम्मीद भी खत्म हो गई है। हमारे समाज में सामंती मानसिकता इतनी गहरी पैठी है कि सरकारी एजेंसियों के कामकाज पर भी इसका असर दिखाई देता है। इसी वजह से बड़ी शख्सियतों के मामले में जांच एजेंसियां कार्रवाई में सुस्ती दिखाती हैं। माल्या के मामले में भी यही हुआ और वे देश से बाहर...
    May 12, 03:36 AM
  • उत्तराखंड विधानसभा में हरीश रावत की बर्खास्त सरकार के मंगलवार के बहुमत परीक्षण का नतीजा तो बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से घोषित होगा, लेकिन वहां से नए राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के संदेश निकलने लगे हैं। स्टिंग ऑपरेशन और भाजपा के बड़े- बड़े खिलाड़ियों से घिरे हरीश रावत ने जिस प्रकार विधानसभा के दो घंटे के सत्र के बाद आशा और भाजपा के विधायकों ने निराशा प्रकट की है, उससे लग रहा है कि वहां भाजपा की राजनीतिक पराजय आसन्न है। इससे पहले नैनीताल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार कर और फिर सुप्रीम कोर्ट...
    May 11, 05:46 AM
  • इसमें कोई दो राय नहीं कि हाल में भारत और नेपाल के राजनयिक रिश्तों को जो झटका लगा है उसके पीछे नेपाल की आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता एक बड़ा कारण है, लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि भारत अगर नेपाल से अपने समसामयिक रिश्तों को धार्मिक आधार पर मजबूत करना चाहता है तो वह संभव नहीं है। नेपाल ने पहले अपनी राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी का अक्षय तृतीया पर सिंहस्थ स्नान और 21 मई को बुद्धपूर्णिमा पर लुंबिनी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उपस्थिति को रद्द किया और बाद में जिस तरह से भारत में...
    May 10, 03:13 AM
  • हर दिन में छिपा है खुशी के खजाने का रहस्य
    अधिकांश लोगों से आज पूछा जाए कि कैसे हैं तो जवाब मिलेगा-क्या बताए बस चल रहा है और न जाने कितने दिन झेलना है। ये ऐसे लोग हैं जो दु:ख को हमेशा साथ लेकर चलते हैं। वे यह समझ ही नहीं पाते कि एक दिन हमें कितना कुछ देकर जाता है। जो दिन हमें ईश्वर ने दिया है, उसमें कितना खजाना छिपा हुआ है, यह उसे टटोलेंगे तभी पता चल सकेगा। बहुत सारे लोगों की राय यह रहती है कि हमारे आज के दौर में मानव जीवन में अनगिनत दुख है, इसलिए लोग जीवन में परेशान है। अगर किसी भी व्यक्ति से पूछा जाए कि वह अंतिम बार बहुत ज्यादा खुश कब हुआ था तो...
    May 9, 02:56 AM
  • कल्पेश याग्निक का कॉलम: क्यों करें मोदी सिंहस्थ में चिंतन? क्यों करवाएं शाह दलितों को स्नान?
    प्रकृति ने बनाए लोग - ताकि प्रेम किया जाए फिर बनाईं वस्तुएं - ताकि उपयोग किया जाए संसार किन्तु कष्टों से भर गया, क्योंकि हम वस्तुओं से तो प्रेम करने लगे और लोगों का उपयोग करने लगे। - बहुत पुरानी बात, आज अधिक प्रासंगिक पूर्व सूचना : आज का कॉलम आपको विचलित कर सकता है प्राचीन सभ्यताओं की अंतिम परिभाषाओं में से एक -हमारी अपनी उज्जयिनी नगरी सिंहस्थ के विराट मेले के लिए भी चर्चित है। एक भयावह आंधी ने वहां श्रद्धालुओं के प्राण हर लिए। यह धक्का पहुंचाने वाला समाचार सभी को भीतर तक हिला...
    May 7, 06:58 AM
  • दस मई को उत्तराखंड विधानसभा में अदालती निगरानी में होने वाले शक्ति परीक्षण में दो घंटे के लिए पुनर्जीवित हुई हरीश रावत सरकार हारे या जीते, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से लोकतंत्र जरूर जीत गया है। भले सुप्रीम कोर्ट ने इसी दिशा में दिए गए उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले पर पहले स्टे दे दिया था, लेकिन अब उसे ही आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए एसआर बोम्मई के मशहूर फैसले की भावना को जिंदा रखा है। बस फर्क यही है कि जो काम हाईकोर्ट ने न्यायिक ठसक के साथ और कार्यपालिका को डांटते हुए किया था वही फैसला...
    May 7, 03:18 AM
  • शासन में भागीदारी से ही आ रही है सच्ची समानता
    दलितों में चेतना पैदा कर समाज में बदलाव लाने की कई धाराएं रही हैं, लेकिन यदि दिशा सही न हो तो कई कोस चलकर भी मंजिल प्राप्ति की गारंटी नहीं होती। मध्यकालीन भारत में तमाम सूफी-संतों व भक्त कवियों ने बिगुल बजाया कि सभी प्रभु के बंदे है तो भेदभाव क्यों? इस धारा के तुकाराम, कबीरदास, रहीम, रामानंद, गुरु घासीदास, रविदास आदि महापुरुषों ने प्यार-मोहब्बत का संदेश देने की कोशिश की। इससे दबे-कुचले वर्ग में विश्वास पैदा हुआ। जो गैर-दलित थे, चेतना उनमें पैदा करनी थी कि जात-पात एवं छुआछूत मानव निर्मित है। जो...
    May 6, 06:16 AM