Home >> Abhivyakti >> Editorial
  • इरोम शर्मिला चानू को 14 वर्ष बाद पुलिस हिरासत से मुक्त, खुली हवा में सांस लेने का मौका मिला है। सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) कानून के खिलाफ बेमिसाल अहिंसक संघर्ष के लिए अपने जीवनकाल में ही किंवदन्ती बन चुकीं इरोम की रिहाई मणिपुर ईस्ट सेशन कोर्ट के फैसले से संभव हुई। 2 नवंबर 2000 से अनशन पर बैठीं इरोम शर्मिला को भारतीय दंड संहिता की धारा 309 (आत्महत्या की कोशिश) के तहत गिरफ्तार किया गया था। तब से पुलिस नाक के जरिये उन्हें जबरन आहार दे रही थी, मगर कोर्ट की व्याख्या है कि अनशन पर बैठना आत्महत्या की कोशिश नहीं...
    19 mins ago
  • देश को भूलकर ये कैसा जय-जयकार, बहिष्कार?
    कांग्रेस के क्रोध पर तो अब किसी को क्रोध भी नहीं आता। उसे अपने मुख्यमंत्रियों के अपमान की चिंता है। हार से उपजी चुनौतियों की नहीं। कांग्रेसी मुख्यमंत्री यदि भीड़, नारे और शोर का सामना नहीं कर पा रहे तो वे चुनाव में क्या करेंगे? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहिष्कार की घोषणा वास्तव में लोकतंत्र का अपमान है। भारतीय इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि कई मुख्यमंत्री, दलगत राजनीति से उत्तेजित हो, प्रधानमंत्री का बहिष्कार कर दें। उधर, भाजपा की प्रसन्नता पर अवश्य क्रोध आता है। शक्तिशाली रूप से केंद्र...
    32 mins ago
  • प्रधानमंत्री के हत्यारों को किरदार बनाकर फिल्म बनाई जाए, बेशक यह बात आम संवेदना को आहत करने वाली है। इंदिरा गांधी के हत्यारों बेअंत सिंह और सतवंत सिंह को लेकर बनाई गई फिल्म का नाम कौम दे (के) हीरे रखा गया है तो उस पर जनता के एक बड़े हिस्से में एतराज होना भी लाजिमी है। मुमकिन है कि फिल्म निर्माता के इस दावे में कुछ दम हो कि उनका कोई सियासी मकसद नहीं है और वे सिर्फ उन दो परिवारों की कहानी दिखाना चाहते हैं जिन पर अनजाने में बड़ी विपदा आ पड़ी थी। मगर हाल में पंजाब में कट्टरपंथी संगठनों द्वारा...
    August 21, 07:25 AM
  • पाकिस्तान के शत्रुतापूर्ण रवैये में कोई अंतर नहीं आया है। जाहिर है वह पुरानी लीक से हटने को तैयार नहीं है। एेसे में उससे बातचीत निरर्थक है। अतः 25 अगस्त को इस्लामाबाद में तय विदेश सचिव स्तर की वार्ता को रद्द करने का हमारा फैसला वाजिब और सही दिशा में है। एनडीए सरकार को जिन हालात में यह निर्णय करना पड़ा, उम्मीद है कि उससे वह उचित सीख लेगी और भविष्य में न सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि दूसरे देशों के साथ संबंधों के मामले में पहल करते हुए अधिक सतर्कता बरतेगी। सबक यह है कि सरकारें बदलने, सद्भावना दिखाने या...
    August 20, 07:08 AM
  • इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें टेस्ट मैच में बल्लेबाजों के घुटने टेकने के साथ भारतीय टीम की हुई अपमानजनक धुलाई पर सुनील गावसकर ने कहा, मुझे नहीं मालूम कि मैं क्या कहूं? लगातार तीसरे टेस्ट में शर्मनाक हार के बाद दरअसल, देश के करोड़ों हतप्रभ क्रिकेटप्रेमियों के दिल में भी तब यही अहसास और असमंजस था। जाहिर है, वे लोग भारतीय क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाजों में से एक गावसकर की इस आक्रोश भरी प्रतिक्रिया से भी इत्तफाक रखते होंगे, अगर आप (भारतीय खिलाड़ी) भारत के लिए टेस्ट मैच नहीं खेलना चाहते तो छोड़...
    August 19, 07:39 AM
  • अभी बहुत समय नहीं गुजरा, जब अगर यह कहा जाता था कि न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका अपनी हदों में रहें तो उसका मतलब न्यायपालिका को आगाह करना माना जाता था, लेकिन स्वतंत्रता दिवस को जब प्रधान न्यायाधीश जस्टिस आरएम लोढ़ा ने ऐसा कहा तो उसे पिछले हफ्ते संसद से पास राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति विधेयक के प्रति न्यायपालिका के एतराज के रूप में देखा गया। दरअसल, न्यायिक हलकों में आई अनेक प्रतिक्रियाओं का सार यही है कि एनडीए सरकार ने यह विधेयक पारित कराने में जल्दबाजी दिखाई। संसद ने बिना अवरोध एवं...
    August 18, 07:19 AM
  • असंभव के विरुद्ध: यदि हर पल को समूचे आनंद से जी रहे हैं तो ही हम पूर्ण स्वतंत्र हैं
    यदि ग़लती करने की आज़ादी नहीं है - तो मुझे ऐसी आज़ादी चाहिए ही नहीं। - महात्मा गांधी हमें ग़ुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने वाले महान सेनानी तीन तरह के थे। पहले- क्रांतिकारी। दूसरे- गरम दल। तीसरे- नरम दल। क्रांतिकारियों ने सीने में आग धधकाए रखी। हमें स्वतंत्र कराने के लिए प्रचंड ज्वालामुखी की तरह फटते थे। कलेजा चीर कर ज्वाला से मशाल जलाते जाते। जलते जाते। दावानल। हर समय। गरम दल की आंखों में अंगारे उतने ही दहकते थे। किन्तु वे महासागर की क्रुद्ध लहरों से थे। गरजते आते। और कुछ सोचकर लौट जाते। सोच...
    August 15, 08:14 AM
  • मुद्रास्फीति और औद्योगिक उत्पादन संबंधी ताजा आंकड़े उम्मीदों पर पानी फेरने वाले हैं। आशंका है कि इन मोर्चों पर स्थिति तुरंत नहीं सुधरी तो उसका मनोवैज्ञानिक असर शेयर बाजारों पर भी हो सकता है, जिससे पिछले महीनों के दौरान बना सकारात्मक माहौल प्रभावित होगा। अतः नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के सामने अहम चुनौती है कि उसके सत्ता में आने से अर्थ जगत में जो नई रफ्तार आती दिखी, उसे वह सुस्त न हो दे। फिर महंगाई के काबू में आने के राजनीतिक परिणाम भी होते हैं। जुलाई में उपभोक्ता मूल्य...
    August 14, 05:08 AM
  • राजनीति अंकगणित जैसे सरल जोड़-घटाव से चलती तो बड़े आराम से बिहार में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के हाल में बने गठबंधन के चुनावों में अपराजेय होने की भविष्यवाणी की जा सकती थी। आखिर हाल के लोकसभा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ लड़े राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल (यू) के गठबंधनों को मिलाकर 44.3 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि जिस भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन को हराने के लिए वे एकजुट हुए हैं, उसे 38.8 फीसदी मत ही प्राप्त हुए थे। फिर लालू और नीतीश वो दिग्गज हैं, जो पिछले चौबीस वर्षों से बिहार की राजनीति की धुरी रहे...
    August 13, 07:13 AM
  • सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू तमिलनाडु हाईकोर्ट से जुड़े एक मामले में भारत के तीन पूर्व प्रधान न्यायाधीशों पर तोहमत पहले ही लगा चुके थे। अब अपने एक ब्लॉग में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक कथित मामले का वर्णन कर उन्होंने एक अन्य पूर्व प्रधान न्यायाधीश को सवालों के घेरे में लाने की कोशिश की है। साथ ही कहा है कि ऐसी अनेक कथाएं उनके पिटारे में हैं। वर्षों गुजरने के बाद ऐसी कहानियां सार्वजनिक करने के पीछे काटजू का क्या मकसद है और उनके तरीके कितने उचित हैं, कई हलकों से ऐसे प्रश्न उठाए...
    August 12, 08:01 AM
  • अमेरिका को सैनिक कार्रवाई के साथ इराक में लौटना पड़ा है। उसकी वायुसेना के विमान खिलाफत (इस्लामी राज्य) की घोषणा करने वाले इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) के ठिकानों पर बम बरसा रहे हैं। ड्रोन हमले भी हुए हैं। इन कार्रवाइयों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने मोटेतौर पर राहत महसूस की है, क्योंकि खिलाफत के चरमपंथियों का इराक स्थित अल्पसंख्यकों पर कहर लगातार बढ़ता गया है। साथ ही उन्होंने अपने हमलों का विस्तार करते हुए इराकी और सीरियाई इलाकों के बाद अब लेबनानी क्षेत्र को भी अपने दायरे में...
    August 11, 12:57 AM
  • असंभव के विरुद्ध: यदि आपको अंग्रेज़ी से परेशानी है तो इसे जरूर पढ़ें
    इंग्लिश इज़ फॉरेन टू ऑल। फ्रैंच टू दोज़ हू डोन्ट नो इट। एंड ग्रीक टू दोज़ हू क्लेम टू नो इट। - अंग्रेजी में विफलता के बचाव में, स्वरचित उस दिन अंग्रेज़ी में मुझे फिर शून्य मिला। अंग्रेज़ी पढ़ाने वाली वो टीचर न जाने क्या करेंगी? डर जैसे जम गया था। टीचर रौबीली थी। ऊंचा कद। गौर वर्ण। एक-एक कर बच्चों को बुलाती गईं। शाबासी देती गईं। सभी ने बहुत अच्छा किया था। फिर मैं। मेरी विफलता। मेरा भय। उन्होंने क्रोध से मेरा कान खींचा। पूरी कक्षा आंखे फैलाकर मुझे देख रही थी। जोर से कुछ कहने जा रहीं टीचर का चेहरा...
    August 9, 06:45 AM
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