संपादकीय
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  • कनाडा की संसद पर बंदूकधारी के हमले ने वैश्विक आतंकवाद की चुनौती को फिर रेखांकित किया है। हमले के समय देश के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर के अलावा कई सांसद भी वहां मौजूद थे। अभी स्पष्ट नहीं है कि हमले में किसी इस्लामी गुट का हाथ है, लेकिन दो दिन पहले इस्लाम को अपनाने वाले कनाडाई नागरिक ने कार चलाकर दो सुरक्षाकर्मियों को रौंद दिया था, जिसमें से एक की मौत हो गई थी। फिर इसी महीने कनाडा ने इराक व सीरिया के कुछ हिस्सों पर कब्जा जमाने वालेआईएसआईएस के खिलाफ हमलों के लिए छह लड़ाकू विमान लगाए हैं। दरअसल,...
    06:50 AM
  • यह दिवाली नई आशाओं के बीच आई है। अर्थव्यवस्था पर जो ग्रहण गत वर्षों में लगा, उसके दूर होने के संकेतों ने प्रकाश और समृद्धि की कामना को सार्थक बना दिया है। शेयर बाजारों में चमक लौटी है, तो रुपए की (अपेक्षाकृत) मजबूती तथा महंगाई दर पर नियंत्रण ने आम घरों के बजट के भी संभलने की संभावनाएं जगा दी हैं। घर में धन हो तो दीये ज्यादा सारगर्भित लगते हैं। तब प्रकाश केवल रस्म-अदायगी नहीं होता, बल्कि वह वास्तव में भीतर से उल्लसित करता है। भीतर के प्रकाश को व्यक्त करता है। फिलहाल, उल्लास सकारात्मक वातावरण और...
    October 23, 06:16 AM
  • जिन नेताओं के खिलाफ कोर्ट में आरोप तय हो चुके हों उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए, यह सुझाव नया नहीं है, लेकिन नई परिस्थितियों में निर्वाचन आयोग ने इसकी सिफारिश कर इसे फिर से सार्वजनिक एजेंडे पर ला दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष सजायाफ्ता होते ही सांसद/विधायकों की सदस्यता तुरंत प्रभाव से रद्द किए जाने का प्रावधान किया था। इससे निचली अदालत में आरोपों की पुष्टि होने के बावजूद जन-प्रतिनिधि बने रहने के अवांछित रिवाज पर रोक लगी है। इसी सुधार का अगला चरण निर्वाचन आयोग का सुझाव है, जिसे...
    October 22, 07:02 AM
  • 1989 के आम चुनाव के बाद भाजपा और वाम मोर्चे के बाहरी समर्थन से विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चे की सरकार बनी थी। उसके साथ ही एकदलीय शासन की लंबी परंपरा पर विराम लगा। तब राजनीतिशास्त्रियों ने सिद्धांत दिया कि भारतीय राजनीति का मुख्य रण-क्षेत्र असल में विभिन्न राज्य हैं। राष्ट्रीय जनादेश का स्वरूप उनके कुल योग से उभरता है। उसके 25 वर्ष बाद पांच महीने पहले पहली बार लोकसभा में किसी एक दल को पूर्ण बहुमत मिला। इसके बावजूद अटकलें जारी रहीं कि यह जनादेश महज एक बार किसी खास परिस्थिति...
    October 21, 06:05 AM
  • महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव परिणामों ने नरेंद्र मोदी के हाथों को और ताकत दी है। इन नतीजों ने फिर इस बात की पुष्टि की है कि मोदी अपनी रणनीति और नेतृत्व कौशल से अपने नाम पर राजनीतिक पूंजी जुटाने में सक्षम हैं। इसी पूंजी ने देश में, खासतौर पर भारतीय जनता पार्टी के भीतर उनकी बेजोड़ हैसियत बना दी है। कहा जा सकता है कि दोनों राज्यों में भाजपा की सफलता ने प्रधानमंत्री की राजनीतिक हैसियत में ऐसी बढ़ोतरी की है, जिससे आने वाले दिनों में उनके लिए कठिन फैसले लेना ज्यादा आसान हो जाएगा। अतः इससे उम्मीद...
    October 20, 06:43 AM
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रम सुधारों की शुरुआत के साथ ही अपनी सरकार में दो महत्वपूर्ण नियुक्तियां करके संभवतः यह संदेश दिया है कि महाराष्ट्र एवं हरियाणा के चुनावों से निपटने के बाद अब आर्थिक मामले उनकी सरकार का केंद्र बिंदु हैं। नि:संदेह इन दोनों नियुक्तियों ने आर्थिक सुधारों की गति तेज होने की अपेक्षाएं बढ़ा दी हैं। सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाए गए अर्थशास्त्री अरविंद सुब्रह्मण्यम उदारवादी अर्थव्यवस्था के पैरोकार हैं। सामाजिक कार्यक्रमों पर सरकारी धन खर्च करने की पिछली...
    October 18, 07:29 AM
  • यह भारत और यहां के उपभोक्ताओं के लिए राहत का वक्त है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सस्ता बेचने की मची होड़ ने कच्चे तेल के भाव में ऐसी गिरावट ला दी है, जिसकी कल्पना करना भी कुछ महीने पहले तक मुश्किल था। चार महीने पहले कच्चा तेल लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के भाव से बिक रहा था। बुधवार को एक मौके पर यह 83.37 डॉलर तक गिर गया। अनुमान है कि यह भाव 80 डॉलर से भी नीचे आ सकता है। इसका कारण यह है कि सऊदी अरब तथा कुछ अन्य तेल उत्पादक देशों का अपना बाजार बचाने का प्रयास। अमेरिका में तेल के नए भंडार मिलने और शेल गैस का...
    October 17, 07:46 AM
  • जब भारतीय बाजार की बात होती है, असल में चर्चा देश के मध्य वर्ग की होती है। छोटे से धनी तबके के अलावा आबादी का यही वो हिस्सा है, जिसके पास आधुनिक उपभोग के लायक क्रय-शक्ति है। अपनी माली हैसियत के कारण आज यह तबका अपनी संख्यात्मक शक्ति की तुलना में कहीं ज्यादा प्रभावशाली हो गया है। इसकी नाराजगी कितनी महंगी पड़ती है, इसका तजुर्बा हाल में कांग्रेस को हुआ, इसीलिए मध्य वर्ग के स्वरूप को समझना भारतीय राजनीति एवं अर्थव्यवस्था को समझने के लिए उत्तरोत्तर अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है। इस संदर्भ में अहम...
    October 16, 05:55 AM
  • उच्च आर्थिक वृद्धि दर के साथ-साथ सामाजिक विकास के खास कार्यक्रमों को लागू करने का गुजरे दशक में सकारात्मक असर हुआ, इसकी तस्दीक दो ताजा रिपोर्टों ने की है। जाहिर है, इनसे विकास प्रक्रिया को समावेशी बनाने की नीति की प्रासंगिकता सिद्ध हुई है। वैश्विक थिंक टैंक इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार विश्व भूख सूचकांक (ग्लोबल हंगर इंडेक्स-जीएचआई)-2014 में भारत 55वें स्थान पर आया है। पिछले वर्ष वह 63वें नंबर पर था। 2006 में जब पहली बार यह इंडेक्स तैयार हुआ, तब 119 देशों की सूची में भारत 96वें...
    October 15, 05:54 AM
  • पहले चौधरी देवीलाल और फिर चौधरी चरण सिंह के नाम पर आयोजित जलसों में जनता परिवार के नेता इकट्ठे हुए। पहले संकेतों में और दूसरी बार खुलकर उन्होंने एक-दूसरे से एकजुट होने की अपील की। सबसे पुरजोर आवाज नीतीश कुमार की थी। अपना उदाहरण दिया कि कैसे जब खतरा आया तो उन्होंने और लालू प्रसाद यादव से हाथ मिला लिया, जिनसे वे बीस साल से लड़ रहे थे, लेकिन यह नीतीश कुमार के भाषण से ही साफ है कि समाजवादी पार्टी पूरे मन से इस प्रयास में शामिल नहीं है। मेरठ में हुए आयोजन में मुलायम सिंह यादव या अखिलेश यादव नहीं आए।...
    October 14, 06:13 AM
  • सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) अस्तित्व में आने के बाद अपने 10वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। निर्विवाद कहा जा सकता है कि सरकारी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कराने के लिहाज से पिछले 9 वर्ष में यह सबसे महत्वपूर्ण कदम रहा, जिसका प्रभाव दूरगामी है। इसके जरिये कई बड़े घोटालों का खुलासा हुआ, जबकि हजारों लोग जानकारी मांगने के अपने वैधानिक अधिकार का उपयोग कर सरकारी विभागों एवं दफ्तरों में उत्तरदायित्व का भाव पैदा करने में भागीदार बने, जबकि सरकारों- बल्कि कई मौकों पर न्यायपालिका की तरफ से भी इस...
    October 13, 07:42 AM
  • कल्पेश याग्निक का कॉलम: नोबेल ने अंतत: खोजा सत्यार्थ किन्तु हिंदू-मुस्लिम कहा, मलाल रहेगा
    मेरी मां हमेशा कहती : सिर-मुंह ढंको। वो लड़का तुम्हें देख रहा है। मैं कहती - तो क्या? मैं भी तो उसे देख रही हूं! - मलाला युसुफज़ई संघर्ष बहुत ही बड़ा है। किन्तु मैंं अपने जीवनकाल में ही बालश्रमिक जैसे पाप नष्ट कर दूंगा। - कैलाश सत्यार्थी आप नहीं, तो कौन? अभी नहीं, तो कब? पूछते रहने वाले कैलाश सत्यार्थी को आज मानो समूचा संसार एक साथ उत्तर दे रहा है : आप ही। हमारे देश के लिए, हमारे बच्चों के लिए यह शक्तिशाली विजय का पल है। हर्ष। गर्व। दायित्व। चुनौती। नोबेल ने दिए हैं ये...
    October 11, 12:10 PM
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