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संपादकीय

सार्थक और फलदायी यात्रा

चीन  के प्रधानमंत्री ली केकियांग की भारत यात्रा इस लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाएगी कि इससे दोनों देशों के आपसी संबंधों के बारे में समझ अधिक यथार्थवादी और सकारात्मक हुई है। भारत-चीन के रिश्तों में जटिलताएं हैं, लेकिन वे आपसी लाभ के क्षेत्रों में दोतरफा सहयोग बढ़ाने की राह में बाधक नहीं हैं। ली ने जोर देकर कहा कि भारत और चीन का सहयोग न सिर्फ दोनों देशों, बल्कि एशिया और पूरे विश्व के फायदे में है।   ली ने प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने सार्वजनिक बयानों में भारत के प्रति जो आदर और सद्भाव दिखाया है, उससे अतीत एवं हाल की कड़वाहटों से आगे निकलने का रास्ता खुला है। सबसे खास...
 

नई गर्मजोशी की उम्मीद

यह  स्वागतयोग्य है कि भारत-अमेरिका संबंधों में गर्मजोशी बहाल करने के प्रयास नए सिरे से शुरू किए गए हैं।...

खाद्य सुरक्षा का अवरुद्ध रास्ता

यह  शिकायत निराधार नहीं है कि जब पर्याप्त समय था, तब यूपीए सरकार ने प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानून को लेकर...
 
 
 

गहरे दलदल की एक झांकी

पहली बार हुआ है जब स्पॉट या मैच फिक्सिंग के आरोप में पुलिस ने अपनी जांच के आधार पर तीन क्रिकेटरों को पकड़ा। लेकिन...

ओलिंपिक के लिए खुला रास्ता

भारत  सरकार सही मुकाम पर खड़ी है और अपनी बात समझाने की उसने कारगर रणनीति अपनाई- इसलिए अंतत: अंतरराष्ट्रीय...
 
 

और खबरें

 
 
 

  • May 15, 09:02
     
    भारतीय  न्याय व्यवस्था इस सिद्धांत पर आधारित है कि भले ही कई दोषी छूट जाएं, लेकिन किसी निदरेष को सजा नहीं होनी चाहिए। इसलिए यह खुद हमारी संवैधानिक व्यवस्था की साख के लिए जरूरी है कि अगर कहीं कोई बेगुनाह- किन्हीं हालात में किसी मामले में फंस गया हो, तो उसके साथ...
     

  • May 14, 10:36
     
    पाकिस्तान के चुनाव में जिस बड़ी संख्या में वोटर मतदान केन्द्रों तक पहुंचे, वह सचमुच उल्लेखनीय है। इसे दहशतगर्दी के खिलाफ अवाम के खामोश बयान के रूप में देखा जा सकता है।     2008 के चुनाव में सिर्फ 44 प्रतिशत वोट पड़े थे। पाकिस्तान के चुनाव आयोग के अनुमान के मुताबिक इस...
     

  • May 13, 07:40
     
    विदेश  मंत्री सलमान खुर्शीद की बीजिंग यात्रा का परिणाम यह है कि भारत-चीन संबंधों को लेकर पैदा हुई आशंकाएं दूर हो गई हैं। खुर्शीद के चीन जाने का मकसद वहां के प्रधानमंत्री ली केकियांग की भारत यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देना था। ली अगले रविवार को बतौर...
     

  • May 11, 08:33
     
    बंदूक के साये में लोकतंत्र- यह जुमला अक्सर बतौर मुहावरा कहा जाता है, लेकिन पाकिस्तान के संदर्भ में यह शब्दश: लागू होता है। अगर ये साया नहीं होता तो आज पाकिस्तान के लिए गौरव का दिन होता, क्योंकि उसके साढ़े छह दशक के इतिहास में एक से दूसरी असैनिक सरकार के हाथ में सत्ता के...
     

  • May 10, 08:05
     
    हमारा संवैधानिक लोकतंत्र बहुमत के साथ-साथ विधि के शासन के सिद्धांत पर भी आधारित है। संसदीय बहुमत से सरकारें बनती हैं, लेकिन वे वैधानिक व्यवस्था के तहत चलती हैं। यूपीए सरकार अगर संविधान की इस मूल स्थापना के प्रति जागरूकता एवं संवेदनशीलता का परिचय दे तो उसके सामने...
     

  • May 9, 07:08
     
    कर्नाटक में वैसे समय निर्णायक जीत के साथ कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई है, जब राष्ट्रीय स्तर पर उसकी संभावनाओं पर संशय गहराता गया है। दूसरी तरफ जिस समय भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली में अपना रुख अति आक्रामक कर दिया है, दक्षिण भारत में बना उसका पहला किला एक तरह से...
     

  • May 8, 07:56
     
    सुप्रीम कोर्ट का दो टूक फैसला आने के बाद अब कुडनकुलम परमाणु बिजली परियोजना के निर्बाध चालू होने का रास्ता साफ  हो गया है। परियोजना विरोधियों ने इसे रोकने के लिए आंदोलन से लेकर जन हित याचिका तक का सहारा लिया। लेकिन उनका पक्ष ना तो तार्किक है और ना ही देश के व्यापक हित...
     

  • May 7, 12:06
     
    लद्दाख में चीनी फौज की घुसपैठ से पैदा हुए संकट को राजनयिक माध्यम से हल कर लिया गया, तो इसके लिए भारत सरकार के संयम और कूटनीतिक मकसदों को संवाद से हासिल करने की उसकी क्षमता की तारीफ की जानी चाहिए।   दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में चीनी सेना के उस क्षेत्र में 19 किलोमीटर घुस...
     

  • May 6, 07:50
     
    सरकार के नजरिए से उचित है कि वह फ़ौरी मुश्किलों से ज्यादा अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाओं पर जोर दे। उधर मौद्रिक स्थिति के विनियामक के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक के लिए वाजिब है कि अपनी नीति वह दरपेश मुश्किलात पर नजर रखते हुए तैयार करे। लेकिन वर्तमान स्थिति...
     
 
 
 
 
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