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  • भारतीय जनता पार्टी की इस मांग से सहज ही सहमत हुआ जा सकता है कि यूपीए-2 सरकार को लोकपाल नियुक्ति की प्रक्रिया रोक देनी चाहिए। जब यह सरकार अपने आखिरी दिनों में है, उस समय विवादास्पद हो चुकी प्रक्रिया से चिर-प्रतीक्षित भ्रष्टाचार विरोधी संस्था को स्थापित करने के प्रयास को अनुचित ही माना जाएगा। अत: इस मामले में भाजपा का निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाना वाजिब कदम है। मगर इसके साथ ही नए सेनाध्यक्ष की नियुक्ति का मुद्दा जोड़कर उसने अवांछित हस्तक्षेप किया है। सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह अगली 31 जुलाई...
    03:28 AM
  • यदि आपको मोदी से बहुत बड़ी उम्मीद है तो धक्का पहुंचेगा
    रुकावटें होंगी। संदेह होंगे। भूलें होंगी। आशाएं होंगी। अपेक्षाएं होंगी। आकांक्षाएं होंगी। संघर्ष की कहां कोई सीमा है? - अज्ञात मोदी आ रहे हैं। उनके बनते ही सबकुछ एकदम अच्छा हो जाएगा, कहते हुए उस युवा मैनेजमेंट प्रोफेशनल की आंखों में अलग ही चमक दिखी। मैं उसे काफी समय से जानता हूं। धीर-गंभीर। आज का काम आज ही पूरा करना। काम की ही बात करना। किन्तु वह इन दिनों मोदी की खूब बातें कर रहा है। इकोनॉमी देखिएगा, कैसे ठीक होती है। खूब उम्मीद है उसे। हर कंपनी में आपको उसकी तरह के युवा मिल जाएंगे। इन्हें...
    April 19, 08:38 AM
  • नरेंद्र मोदी की लहर बनने के दो प्रमुख कारण हैं। पहला उनकी हिंदू राष्ट्रवादी छवि, जिससे भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार के समर्थक समूह उत्साहित एवं प्रेरित हुए। दूसरा कारण विकास का बहुचर्चित गुजरात मॉडल है, जिसे अपनी उपलब्धि के रूप में पेश करने में मोदी कामयाब हैं। इससे मध्यमार्गी जन समूहों में उनके प्रति आकर्षण बना है। इसलिए ये अस्वाभाविक नहीं है कि इस आम चुनाव में उनके प्रतिद्वंद्वी इन्हीं दो मुद्दों को लेकर उन पर खास हमले कर रहे हैं। हिंदू राष्ट्रवादी छवि पर जोर इस...
    April 19, 02:40 AM
  • चुनाव अभियान के मध्य में कांग्रेस में आई आक्रामकता साफ नजर आ रही है। पार्टी संभवत: इस नतीजे पर पहुंची है कि यूपीए शासनकाल के जन-कल्याणकारी कार्यों का प्रचार करने भर से उसकी वैतरणी पार नहीं लगेगी। तो अब उसने आम चुनाव को विचारधारात्मक संघर्ष में तब्दील करने की कोशिश की है। यह बात प्रियंका वाड्रा ने बेलाग ढंग से कही है, जिन्हें अब कांग्रेस का मुख्य रणनीतिकार बताया जा रहा है। टेलीविजन पर तीन मिनट के विज्ञापन संदेश में सोनिया गांधी का भी यही स्वर रहा। राहुल गांधी की चुनाव सभाओं में भी इसे दोहराया...
    April 18, 04:14 AM
  • सोलह मई को आम चुनाव के नतीजे आने के बाद जो भी सरकार सत्तासीन होगी, उसके सामने दो कारणों से गंभीर होती एक बड़ी समस्या पहले दिन से मौजूद होगी। यह चुनौती महंगाई की है। मार्च में मुद्रास्फीति दर न सिर्फ फिर चढ़ गई, बल्कि थोक मूल्य सूचकांक तीन महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। थोक मुद्रास्फीति फरवरी में 4.46 प्रतिशत थी, जो मार्च में 5.7 फीसदी हो गई। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर महंगाई दर 8.03 फीसदी से बढ़ कर 8.31 प्रतिशत हो गई। ये आंकड़े फिर भी सामान्य चिंता की बात होते, अगर मानसून की बेहतर संभावनाएं...
    April 17, 02:35 AM
  • माओवादियों की यह पहली माफी होती तो मान सकते थे कि आखिरकार उनमें मानवीय भावना एवं राजनीतिक विवेक जगा है। लेकिन उन्होंने निहत्थे, निर्दोष लोगों की हत्या के बाद माफी का जैसा मखौल बना रखा है उससे उनकी मंशा पर सवाल और गहरे हुए हैं। पिछले हफ्ते छत्तीसगढ़ के बीजापुर और बस्तर जिलों में माओवादियों ने घात लगाकर हमले किए, जिनमें 14 लोग मारे गए। एक हमले में पांच शिक्षक और दो चिकित्साकर्मियों की जान गई। इसे सीपीआई (माओवादी) ने अपनी गलती माना है, लेकिन इस बयान की कोई कीमत इसलिए नहीं है, क्योंकि ऐसा उन्होंने...
    April 16, 02:01 AM
  • पहले संजय बारू और फिर पीसी पारख। दोनों ऐसे वक्त अपनी किताबें लेकर आए हैं, जब देश आम चुनाव के दौर में है। दोनों किताबों से विपक्ष को यूपीए- खासकर कांग्रेस- पर हमला करने के लिए नए मसाले मिल गए हैं। या कम से कम यह तो जरूर हुआ है कि विपक्ष ने पहले से जिन बिंदुओं पर सत्ताधारी गठबंधन को कठघरे में खड़ा कर रखा था, उसे और वजन मिला है। बारू प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार थे और पारख कोयला सचिव। दोनों ने जो कहानी प्रस्तुत की है, उनका सार यह है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भले और ईमानदार व्यक्ति हैं,...
    April 15, 02:27 AM
  • राजनेताओं की निजी जिंदगी की वो हद कहां तक है, जिसे सार्वजनिक बहस से अलग रखा जाए, यह लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में विवादास्पद मुद्दा है। इसलिए कि जिन व्यक्तियों के आचरण से करोड़ों लोगों की जिंदगियां प्रभावित होती हों, उनके कार्य-व्यवहार उनके सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह असंबंधित नहीं रह सकते। इसीलिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच निजी जिंदगी को चुनावी चर्चा में लाने के मुद्दे पर छिड़ी बहस में आम जन को भी हस्तक्षेप करना चाहिए। प्रसंग यह है कि राहुल गांधी ने चुनाव सभा में नरेंद्र...
    April 14, 03:13 AM
  • निकृष्ट समझे जाने वाले नेताओं से मिल सकती हैं 9 उत्कृष्ट सीख
    सांप तुम सभ्य तो हुए नहीं, नगर में बसना भी तुम्हें नहीं आया। एक बात पूछूं? उत्तर दोगे? तब कहां सीखा डसना? विष कहां पाया? - अज्ञेय विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनाव में प्रत्याशी बनकर लड़ रहे नेताओं के अनछुए पहलू पर इस बार का कॉलम वे घृणा के पात्र हैं। उपहास का केंद्र हैं। क्रोध के शिकार हैं। कुंठा के कारण हैं। पतन के प्रतीक हैं। अलग-अलग शब्दों में कुछ ऐसा ही कहा-माना जाता है नेताओं को। चुनाव, वह भी देश का - लोकसभा - चुनाव लड़ रहे - लड़वा रहे नेताओं को तो और भी बुरी तरह कोसा जा रहा है। भ्रष्ट। दागी।...
    April 12, 07:03 AM
  • आधार कार्ड योजना जिस तरह अधर में लटकी हुई है, आम चुनाव के बाद बनने वाली सरकार अगर उस पर समग्रता से पुनर्विचार करे तो यह तार्किक कदम होगा। इसलिए भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह की यह घोषणा सही दिशा में है कि उनकी पार्टी की सरकार बनी तो वह इस परियोजना की समीक्षा करेगी। मगर यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि समीक्षा उन मुद्दों और तर्कों पर हो, जिनकी वजह से यह योजना अपने घोषित लक्ष्य को पाने की दिशा में आगे नहीं बढ़ पाई। बिना वैधानिक आधार के आधार योजना को लागू करने, इसे राष्ट्रीय जनसंख्या...
    April 12, 04:58 AM
  • मुमकिन है कि निर्वाचन आयुक्त एचएस ब्रह्मा की इस राय से अनेक लोग अतीत के अपने अनुभवों के कारण सहमत न हों कि पिछले तीन दशकों के बीच इस बार चुनाव अभियान में सबसे ज्यादा बदजुबानी हो रही है। हालांकि, यह निर्विवाद है कि भावनाएं भड़काने, व्यक्तिगत कटाक्ष और जातीय-सांप्रदायिक पहचान के आधार पर मतदाताओं को गोलबंद करने की कोशिश में नेताओं ने सार्वजनिक मर्यादा एवं राजनीतिक आचरण की तमाम सीमाएं तोड़ दी हैं। समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने तो अपनी जुबान अपने प्रतिद्वंद्वी दलों या नेताओं तक ही सीमित...
    April 11, 04:43 AM
  • ममता बनर्जी को झुकना पड़ा, क्योंकि वे गलत थीं। ये गलती उन्होंने अनजाने में की हो, मानना कठिन है। बल्कि अपने खिलाफ बाकी सबको लामबंद बताकर हमदर्दी जुटाने और ताकतवर व्यक्तियों तथा संस्थाओं को शत्रु दिखाकर अपने समर्थकों को गोलबंद करने की पुरानी चाल उन्होंने चली। मुमकिन है, इस सियासी मकसद में वे एक हद तक कामयाब रही हों। मगर ऐसा करते हुए उन्होंने उस संवैधानिक संस्था को लांछित करने की कोशिश की जिसकी साख निर्विवाद है और अपने बेहतरीन रिकॉर्ड के कारण जो दुनियाभर में प्रतिष्ठित है। चुनाव के दौरान...
    April 10, 03:25 AM
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