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संपादकीय
 
 
 
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  • September 9, 12:09
     
    जयराम रमेश ने राष्ट्रीय भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास एवं पुनस्र्थापन विधेयक 2011 को तैयार करने के क्रम में व्यापक विचार-विमर्श की जो प्रक्रिया चलाई और जिस चुस्ती से इसे तैयार किया, वह प्रशंसनीय है। मगर बिल पेश करने के साथ उन्होंने इसे जो राजनीतिक रंग दिया और उसके माध्यम से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के संदर्भ में कांग्रेस पार्टी का ग्राफ उठाने की कोशिश की, वह अवांछित थी। इसलिए कि...
     

  • September 8, 12:08
     
    विकीलिक्स के ताजा खुलासों से पहले लेफ्ट और फिर मायावती के लिए उलझन खड़ी हुई। कुछ महीने पहले यही हाल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी का हुआ था। पहले जब कैश फॉर वोट, विदेश नीति और अन्य मामलों में सत्ताधारी गठबंधन का भीतरी चेहरा सामने आया, तो विपक्ष ने उसे हथियार बनाया। मगर आज की भारतीय राजनीति का स्वरूप ऐसा है कि जो केंद्र में विपक्ष है, वह पहले कभी सत्ताधारी था या आज भी किसी राज्य...
     

  • September 7, 12:06
     
    राजनीतिक कुप्रबंधन की यह पराकाष्ठा है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा के ऐतिहासिक होने की पूरी जमीन तैयार थी, लेकिन यात्रा शुरू होने के पहले ही उम्मीदों में पलीता लग गया। केंद्र सरकार इस यात्रा की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकती थी और अगर उससे कोई नाराजगी थी, तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी गरिमामय व्यवहार करते हुए भी अपनी बात मनवा सकती थीं। यह ठीक है...
     

  • September 6, 12:07
     
    घोटालों का गहरा दाग लगने और भ्रष्टाचार पर जनता के भड़के गुस्से से बने दबाव का ही परिणाम है कि अब सरकार फूंक-फूंककर कदम रखती नजर आती है। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक नया तरीका अपनाया है। अर्धसैनिक बलों के लिए 30 हजार करोड़ रुपए की लागत से एक आवासीय परियोजना पर काम होना है। गृह मंत्रालय ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से इस परियोजना के लिए अपनाई गई प्रक्रिया का ऑडिट करने को...
     

  • September 5, 07:47
     
    आज शिक्षकों के सम्मान का दिन है। शिक्षक, जो हमें ज्ञान देते हैं और जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। इसीलिए हर समाज और हर दौर में शिक्षक न सिर्फ महत्वपूर्ण, बल्कि आदरणीय भी रहे हैं। लेकिन बदलते दौर के साथ शिक्षकों से अपेक्षाएं भी बदलती हैं। आज भारत एक बड़े एवं महत्वाकांक्षी प्रयोग के मोड़ पर है, जब प्राथमिक शिक्षा को बच्चों का मौलिक अधिकार बना दिया गया है। स्पष्टत: इस पहल...
     

  • September 3, 12:04
     
    अब सबको अन्ना हजारे का साथ चाहिए। कश्मीर में हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता मीरवाइज उमर फारूक से लेकर मणिपुर में कई सालों से अनशन पर बैठीं इरोम शर्मिला तक को। उद्देश्य अलग-अलग हैं, मगर लोगों को उत्प्रेरित करने की अन्ना की क्षमता से सब चमत्कृत हैं। अपने-अपने संघर्षो में जुटे इन लोगों की यह ईमानदार इच्छा होगी कि अन्ना कुछ वैसा ही करिश्मा उनके लिए कर दिखाएं, जैसा अपने भ्रष्टाचार...
     

  • September 2, 12:28
     
    देश में आने वाले समय में उच्च शिक्षा किस दिशा में जाने वाली है, उसका अंदाजा योजना आयोग के ताजा दृष्टिकोण-पत्र से लगता है। आयोग चाहता है ऐसे उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना के लिए अनुमति दे दी जानी चाहिए, जिनका उद्देश्य मुनाफा कमाना हो। दृष्टिकोण-पत्र के मुताबिक 1 अप्रैल 2012 से शुरू हो रही 12वीं पंचवर्षीय योजना में उच्च शिक्षा, खासकर तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में निजी क्षेत्र को...
     

  • September 1, 12:18
     
    देश में खेल प्रशासन में सुधार कितना दुरूह और जोखिम भरा है, इसका व्यावहारिक एहसास अब खेल मंत्री अजय माकन को जरूर हुआ होगा। उनसे पहले सुनील दत्त, मणिशंकर अय्यर और एमएस गिल ने भी खेल संगठनों पर कब्जा जमाए बैठे ताकतवर लोगों से जब टकराने की कोशिश की, तो उन्हें अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे। बिल का मकसद खेल प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता लाना है, लेकिन इन दोनों बातों की मांग मौजूदा...
     

  • August 31, 12:08
     
    देश अब भ्रष्टाचार और सरकारी कामकाज में लेटलतीफी सहने के मूड में नहीं है, यह पैगाम शायद सत्ता प्रतिष्ठान में अंदर तक गया है। हलचल केंद्र से लेकर विभिन्न राज्यों तक है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने अधिकारियों द्वारा भ्रष्ट तरीकों से हासिल संपत्ति को जब्त करने के लिए एक विधेयक विधानसभा में पेश किया है, तो खबर है कि केंद्र सरकार ने शिकायत निवारण बिल का पहला प्रारूप तैयार कर लिया है, जिसके...
     

  • August 30, 12:19
     
    नेपाल जिन निराशाओं से घिरा है, उनके बीच बाबूराम भट्टराई के लिए प्रधानमंत्री पद कांटों भरा ताज ही है। नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) और संयुक्त लोकतांत्रिक मधेसी मोर्चे के बीच समझौते से माओवादी पार्टी में ‘संविधान एवं शांति’ के समर्थक भट्टराई प्रधानमंत्री तो बन गए हैं, लेकिन अगले 45 दिन में संविधान लेखन के काम को पूरा करने की स्थिति वे बना पाएंगे, इस बारे में किसी को पूरा...
     

  • August 29, 12:04
     
    अन्ना हजारे ने चुनाव सुधारों के लिए संघर्ष की बात कही है, तो जाहिर है कि अब राजनीतिक चंदे का सवाल जोर-शोर से उठेगा। इस बहस को ठोस रूप देने में एक राजनीतिक दल के कोष के बारे में सामने आई ताजा जानकारी अहम साबित हो सकती है। सूचना के अधिकार कानून के तहत प्राप्त इस जानकारी के मुताबिक उस पार्टी का कोष पिछले आठ साल में सात गुना बढ़ गया है। यहां बात सिर्फ उसी एक पार्टी की नहीं है। यह अध्ययन...
     

  • August 27, 12:52
     
    आर्थिक चिंताएं गहरा रही हैं। महंगाई सबसे बड़ी समस्या है, जिसका असर आर्थिक विकास दर पर पड़ रहा है। इस वजह से राजकोषीय सेहत कमजोर हो रही है। धनी देशों में आर्थिक मंदी से भारतीय निर्यात प्रभावित हो रहा है और इसका भी विपरीत असर सामने आ रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने 2011-12 के लिए जो अनुमान जारी किए हैं, उनका यही निष्कर्ष है। मुद्रास्फीति अभी ऊंचे स्तर पर बनी रहने वाली है। अंदाजा है कि यह...
     

  • August 26, 12:09
     
    कैश फॉर वोट मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा पेश चार्जशीट इस मामले की 2008 में जांच करने वाली संसदीय समिति के लिए निश्चित ही एक बड़ी शर्मिदगी की वजह होगी। समिति ने कुछ उन नामों को बरी कर दिया था, जिन्हें अब उस घटनाक्रम का ‘मास्टरमाइंड’ बताया गया है। जुलाई 2008 में मनमोहन सिंह सरकार के विश्वासमत के दौरान सांसदों की खरीद-फरोख्त के आरोप खुलेआम लगे थे। तीन सांसदों ने लोकसभा में करोड़ों रुपए...
     

  • August 25, 12:11
     
    देश में इस समय भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की लहर है। हर शहर, कस्बे से लेकर गांवों तक में अन्ना हजारे के आंदोलन के समर्थन में लोगों का हुजूम उमड़ रहा है। संसद से लेकर मीडिया तक भी यही लहर हावी है। जनहित के ऐसे बेहद जरूरी सवाल पर ऐसी जनजागरूकता बहुत कम मौकों पर देखने को मिलती है, इसलिए ताजा घटनाक्रम से समाज में एक नई उम्मीद जगी है। लेकिन इस मुद्दे के सर्वव्यापी हो जाने का असर यह है कि कई...
     

  • August 24, 12:07
     
    ताजा अंदाजा यह है कि अगले 30 साल में भारत में पानी की आवश्यकता उससे तकरीबन दस फीसदी ज्यादा होगी, जितना पहले अनुमान लगाया गया था। इसलिए कि पहले देश की जनसंख्या 2040 तक स्थिर हो जाने का अनुमान था, लेकिन अब संभवत: 2070 तक आबादी बढ़ती रहेगी। जाहिर है, जितने लोग होंगे, उतनी ही पानी की जरूरत होगी। मगर दिक्कत यह है कि पानी के स्रोत सिकुड़ रहे हैं। कुछ राज्यों में भूजल के अति दोहन से कृषि के साथ-साथ...
     
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