

भारतीय मध्यवर्ग का भोजन से खास ताल्लुक है। यह रसास्वादन के उन चुनिंदा स्वरूपों में से है, जिसे हमारा समाज तत्परता...
किसी भी व्यक्ति से पूछें कि एक सफल भारतीय राजनेता बनने के लिए किन गुणों की दरकार है और बहुत संभावना है कि हमें जवाब...
लगता नहीं कि कांग्रेस सलाह-मशविरों को बहुत पसंद करती है। वह स्वयं को एक ऐसी परफेक्ट पार्टी के रूप में प्रस्तुत...
पिछले हफ्ते रॉबर्ट वाड्रा ने राजनीति में आने की इच्छा जताई थी। कइयों ने इस पर ऐतराज किया, कइयों ने इसे ‘अवसरवाद का...
कर्नाटक विधानसभा में मंत्रियों द्वारा पोर्न देखने की घटना हमारी उबाऊ विधानसभाओं में से उभरकर आने वाली गिनी-चुनी रोचक कहानियों में से एक है। हमारे नेता क्लिंटन जैसे बांके-छबीले तो हैं नहीं कि वे उनके जैसे कारनामे कर पाएं। कम से कम उन्होंने अपने सेलफोन पर ही कुछ मजा करने की कोशिश तो की। २जी लाइसेंस सस्ते में बेच देना हो या ३जी पर पोर्न देखना, लगता है हमारे नेताओं और टेलीकॉम का आपस...
यह देखकर खुशी होती है कि भारत में कुछ ऐसी खूबसूरत चीजें भी हैं, जिनके बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण से लिखा जा सकता है। हाल ही में हुए जयपुर साहित्य समारोह (जेएलएफ) ने बड़े पैमाने पर लोगों को अपनी ओर आकृष्ट किया और भारत को दुनिया के नक्शे पर ला दिया। अभी जब मैं यह लिख रहा हूं, तब गूगल न्यूज पर जेएलएफ से संबंधित पांच हजार से भी अधिक स्टोरीज दुनियाभर में प्रदर्शित की जा रही हैं।
जेएलएफ...
जिस तरह कुछ फूल एक खास मौसम में ही खिलते हैं, उसी तरह भारत की राजनीति भी चुनाव के मौसम में ही अपना असली रंग दिखाती है। राजनीतिक दलों की रणनीतियों को देखें तो बड़ी आसानी से पता लगाया जा सकता है कि भारत के मतदाताओं की प्राथमिकताएं क्या हैं या वे किसी को क्यों वोट देते हैं।
उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों द्वारा जो घोषणाएं की गई हैं, वे चाहे कितनी ही...
यह अच्छी बात है कि लोकपाल बिल एक हकीकत बनने के करीब है और आशा करें कि राज्यसभा भी उसे मंजूरी दे देगी। बहरहाल, यूपीए के राजनेता सार्वजनिक रूप से चाहे जितना ही ‘अन्नाजी ये’ और ‘अन्नाजी वो’ करते रहें, लेकिन वास्तविकता यह है कि टीम अन्ना उन्हें फूटी आंख नहीं सुहाती। चाहे अन्ना के विरोध में कोई भी बात कही जाने पर यूपीए सदस्यों के चेहरे पर आने वाली कुटिल हंसी हो या अन्ना से संबंधित चलताऊ...
विज्ञान या तकनीकी पृष्ठभूमि वाले कुछ खास किस्म के लोगों के लिए आमतौर पर एक किंचित निंदात्मक शब्द का उपयोग किया जाता है : ‘नर्ड’। नर्डस वे होते हैं, जो अकादमिक गतिविधियों में डूबे रहते हैं। वे इंटेलीजेंट माने जाते हैं, लेकिन सामाजिक मामलों में वे आमतौर पर अनाड़ी साबित होते हैं।
वे वास्तविक जगत की हलचलों से दूर समीकरणों और फामरूलों में खोए रहते हैं। अलबत्ता यह बात तकनीकी...
रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर संसद में जो कोहराम मचा है, उससे मुझे अपने बचपन की एक घटना याद हो आई। बात तब की है, जब मैं सातवीं क्लास में था। हमारी सख्त टीचर ने हमें एक मुश्किल होमवर्क दिया। निर्धारित दिनांक आई, लेकिन बहुत कम स्टूडेंट्स होमवर्क पूरा कर पाए थे। यह लगभग तय था कि हमें पनिशमेंट मिलेगी। तभी हमारे एक साथी के दिमाग में एक आइडिया आया। उसने एक खाली डेस्क के नीचे...
यह विडंबना ही है कि मैं यह कॉलम किंगफिशर की दिल्ली-बेंगलुरू फ्लाइट से लिख रहा हूं। एक खूबसूरत फ्लाइट अटेंडेंट ने मुझे सफेद कटलरी पर टोमैटो-मोज्जारेला सैंडविच सर्व की है। उसकी मुस्कराहट देखकर यह अनुमान लगा पाना कठिन है कि उसकी एयरलाइन इन दिनों एक मुश्किल दौर से गुजर रही है। पता नहीं वह यह जानती है या नहीं कि उसकी कंपनी ने पिछले साल एक हजार करोड़ रुपयों का घाटा उठाया है और उस पर सात...
पिछले हफ्ते मैककिन्से के पूर्व सीईओ और अमेरिका के सबसे हाई प्रोफाइल कापरेरेट व्यक्तित्वों में से एक रजत गुप्ता को इनसाइडर ट्रेडिंग संबंधी आरोपों के चलते गिरफ्तार कर लिया गया था। सात अरब डॉलर का हेज फंड चलाने वाले राजारत्नम् को पहले ही इनसाइडर ट्रेडिंग के लिए ११ वर्षो की सजा सुनाई जा चुकी है। तेरह अन्य लोग भी दंडित हुए हैं।
यह खबर कई उन लोगों को आश्चर्यजनक लग सकती है, जो अमेरिका...
पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी अपने तीनों उपचुनाव हार गई। कांग्रेस के मुखर प्रवक्तागण अपेक्षा के अनुरूप छद्म साहस का प्रदर्शन करते हुए और अन्ना फैक्टर को ज्यादा तूल नहीं देने की कोशिश करते रहे। कुछ कांग्रेस प्रवक्ताओं का अति आत्मविश्वास तो लगभग मुग्ध कर देने वाला था।
जी करता रहा कि इतनी मुश्किल परिस्थितियों में भी निष्ठापूर्वक अपना दायित्व निभाने के लिए उन्हें भरपूर शाबाशी...