विज्ञापन
 
 
हर्ष मंदर

वह महज बीस साल की है : पतली-दुबली, पीली, भावशून्य और विचारहीन आंखें, छोटी सी दुखभरी जिंदगी के अंत या उम्मीद की कोई...

भारत   सहित दुनियाभर में गरीबी और भुखमरी पर अर्थशास्त्री, पोषण विशेषज्ञ और जनयोजनाकार अथक मेहनत से लंबी-चौड़ी...

नौकरशाही के इस्पाती ढांचे में जंग लगी

स्वतंत्रता  के ठीक बाद के दशकों में जबकि आदर्शवादिता का प्रभाव बरकरार था, सिविल सेवा की ईमानदारी और राजनीतिक...

सभी बेबस गरीब पेंशन के हकदार

मैं देश के हर हिस्से में स्थित गांवों में जाता हूं और पूछता हूं कि सबसे ज्यादा गरीब और असुरक्षित कौन है तो जवाब हर...
 

बदहाल गांव और शहरों में बढ़ती भीड़

अभी चार साल भी नहीं हुए जब मेरा दोस्त नरेन ब्रेन ट्यूमर के चलते दुनिया को अलविदा कह गया, लेकिन जीते जी ही नहीं,...

हिंसा के बीच फूटती प्यार की कोंपलें

यह आम लोगों केरोष प्रदर्शन का मौसम है, भारत में यह ठंड प्रतिशोध की है। एक के बाद एक दो लोगों को गंभीर आतंकी...
 

और खबरें

 
 
 

  • February 12, 06:29
     
    नेल्सन   मंडेला ने एक बार कहा था कि किसी समाज की आत्मा की सबसे अच्छी पहचान इसी से होती है कि वह अपने बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करता है। जाड़े की एक रात में दिल्ली में एक बस में एक छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म और फिर उसकी हत्या के बाद लोगों में आक्रोश का जैसा उभार...
     

  • February 1, 12:59
     
    शहरों  में बेघरबार लोगों को किस कदर मुश्किलों से गुजरना पड़ता है, इसका ज्यादातर लोगों को शायद अंदाजा नहीं होगा। एक बार हम देश की राजधानी में यह पड़ताल करने निकले कि रोज वहां कितने बेघर लोग काल के गाल में समा जाते हैं।   हमने पाया कि दिल्ली की सड़कों पर रोज कम से कम...
     

  • January 18, 02:50
     
    अमत्र्य  सेन अपनी किताब ‘द आइडिया ऑफ जस्टिस’ में सवाल उठाते हैं कि इंसानी समुदायों में न्याय की खोज इतनी व्यापक क्यों है? उनके मुताबिक ऐसा मुख्यत: इंसान की इंसान के प्रति हमदर्दी और आजादी की आरजू की वजह से है। हमदर्दी यानी दूसरों के दर्द व अपमान को इस तरह महसूस...
     

  • January 4, 01:20
     
    दिल्ली गैंगरेप की घटना के बाद देशभर में लोग और खासकर युवा सड़कों पर उतरते हुए महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून बनाने और दुष्कर्मियों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग कर रहे हैं। ज्यादातर लोगों की मांग है कि दुष्कर्मियों को मौत की सजा हो। हाल ही में आतंकी हिंसा...
     

  • December 22, 12:47
     
    ‘महिलाएं  दुनिया का आखिरी उपनिवेश हैं’, यह कहना है भारत व दक्षिण एशिया में महिला अधिकारों तथा लैंगिक समानता की मुखर प्रवक्ता कमला भसीन का। वह कहती हैं, ‘दूसरे उपनिवेशों ने कम से कम अपनी औपचारिक आजादी तो हासिल कर ली, लेकिन महिलाएं इससे महरूम हैं। उनकी मेहनत करने...
     

  • December 7, 12:12
     
    कभी  महात्मा गांधी की समावेशी, नैतिकतापूर्ण, और अहिंसक राजनीति की पोषक रही गुजरात की माटी आज बिल्कुल अलग तरह की राजनीति की गिरफ्त में है, जिसे त्रिदिप सुहरुद जैसे टिप्पणीकार ने ‘अति-मर्दाना’, विभाजनकारी और अधिनायकवादी राजनीति कहा है।   नए ब्रांड की यह राजनीति...
     

  • November 16, 11:24
     
    देश के तमाम शहरों की सड़कें न सिर्फ लाखों कामगार गरीबों तथा अभावग्रस्त लोगों की आश्रयस्थली वरन उनकी रोजी-रोटी का केंद्र भी हैं, जहां पर वे सस्ते और आकर्षक सामानों की दुकान सजाते हैं। शहरों में सड़क किनारे फुटपाथ पर आपको ऐसे अनेक पुरुष-महिलाएं पकाया हुआ भोजन, फल व...
     

  • October 27, 03:39
     
    भारत अपने तेजी से बढ़ते उपभोक्तावादी मध्यम वर्ग के साथ आर्थिक महाशक्ति बनने के लिए बेताब है। आत्मविश्वास से लबरेज हमारे कारोबारी लीडर्स विदेशी कंपनियों का अधिग्रहण करते हुए दुनिया को अपनी धमक दिखा रहे हैं। फोब्र्स की 2011 की सूची में कुल पचास भारतीयों को जगह मिली...
     

  • October 13, 12:07
     
    पूर्वी  राजस्थान के बारन में रहने वाले सहरिया आदिवासी लोगों में भुखमरी से मौत होना कोई असामान्य घटना नहीं है। दस वर्ष पूर्व मैं पहली बार इस इलाके में गया था, तब गांव के बाहरी इलाके में मिट्टी और घास-फूस से बने इनके झोपड़ों में मैंने इन लोगों को जबर्दस्त गरीबी और...
     
 
 
 
 
विज्ञापन
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 

रोचक खबरें

 

बॉलीवुड

 

जीवन मंत्र

 

क्रिकेट

 

बिज़नेस

 

जोक्स

 

पसंदीदा खबरें