

बायलाइन. एक सवाल ने जवाब को लेकर मुझे हैरान रख छोड़ा है : शानदार आइडिया और बढ़िया भाग्य का मेल कितना उत्तेजक और...
हर तरह से यह उपयुक्त ही होगा कि ब्रिटिश संग्रहालय का नाम बदलकर ब्रिटिश साम्राज्य संग्रहालय कर देना चाहिए।...
बायलाइन. कश्मकश अगर एकदम तीखी नहीं, तो कष्टप्रद तो है ही। अमेरिका ने लश्कर-ए-तैयबा उर्फ जमात उद दावा के नेता हाफिज...
बायलाइन. एक ऐसे राजनीतिज्ञ के सामने चिरौरी करना श्रीमती सोनिया गांधी के लिए थोड़ा कष्टप्रद तो होगा ही, जिसने 1997...
बायलाइन. डॉ. हेनरी किसिंजर अमेरिका के विदेश सचिव बने ही थे कि मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात ने 6 अक्टूबर, 1973 को यहूदियों के पवित्र योम किप्पुर दिवस पर इजराइल के खिलाफ सफल युद्ध की शुरुआत करके दुनिया को हैरान कर दिया और अपने अरब जगत को भी चौंका दिया।
24 घंटों के भीतर ही मिस्री टुकड़ियां लाल सागर को पार कर 1967 में खोए क्षेत्र को फिर हासिल करने के लिए सिनाई मरुस्थल पर पहुंच गईं। इस...
बायलाइन . किसी भी नुमाइश में भीड़ खींचने वाले दो लोकप्रिय तत्व होते हैं- अग्निखोर और बाजीगर। और साफ है कि हमारे लोकतांत्रिक देश की सबसे बड़ी नुमाइश है, राजनीति और इसीलिए जब कभी न चुकने वाले मीडिया की अगुवाई में बड़ी भीड़ किसी भी आग निगलने के तमाशे के इर्द-गिर्द जुटी हो, तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए।
किसी एक पर निगाह जमाना हमेशा लुभावना होता है। दो को होड़ करते, लड़ते-झगड़ते देखना...
बायलाइन . बड़े दुख की बात है कि लोकतंत्र नामक चमकीले-दमकीले खेल की कवरेज में चुनावों का एक रंगबिरंगा पहलू उपेक्षित ही रहा है। यह है पोस्ट कैंपेन ट्रॉमा सिंड्रोम या पीसीटीएस, जैसा कि विशेषज्ञों के बीच इसे जाना जाता है। यह गौर कराना बेमतलब ही है कि यह सिर्फ हारने वालों पर असर करता है, क्योंकि सीधी-सी बात है, विजेता तो जश्न मनाने में इतने व्यस्त होते हैं कि उनके पास विश्लेषण का वक्त ही...
बायलाइन . एक खरीदो 10 प्रतिशत बचाओ, दो खरीदो 20 प्रतिशत बचाओ, तीन खरीदो 40 प्रतिशत बचाओ- हवाईअड्डे पर मिलने वाले इस शानदार प्रस्ताव पर एक ही तर्कसंगत प्रतिक्रिया हो सकती है : कुछ मत खरीदो और 100 फीसदी बचाओ!
एक जमाने में शहरों के एयरपोर्ट होते थे। अब हर शहर में एक ही जैसे एयरपोर्ट हैं। किसी जमाने में कोई एयरपोर्ट स्थानीय इतिहास की सुवास बिखेरता था या उसकी संस्कृति की खुशबू से ओतप्रोत होता...
बायलाइन . हर अच्छा चुनाव लोकगाथाओं में कुछ-न-कुछ जोड़ता है। उत्तरप्रदेश पारंपरिक बुद्धि की भूमि है। इसके नेताओं की उग्रता का जोड़ सिर्फ इसके मतदाताओं के उपहासपूर्ण चातुर्य से ही होता है। अवध के पुत्रों की संस्कृति के कई आयाम हैं, लेकिन विरासत में मिलने वाली एक अहम चीज है, भाषा का बारीक अंतर- लिखित और मौखिक दोनों रूपों में।
अवधिया किसी बातचीत को छुरेबाजी में तब्दील कर सकते हैं,...
बायलाइन . आंसू सार्वजनिक जीवन में बड़े कमजोर हथियार हैं। इनकी सफलता की दर इतनी कम है कि इन्हें बहता दिखाना अपवाद रूप में ही बुद्धिमानी हो।
लोग पड़ताल करने लगते हैं कि वे किस तरह के हैं। जनसमूह जुटाने के लिए भावना एक शक्तिशाली गुण हो सकती है, लेकिन पर भावुकता कभी कारगर नहीं होती। लाचारी या अफसोस के आंसू तिरस्कार को बुलावा देते हैं। पहली तरह के आंसू असमर्थता के और दूसरी तरह के,...
एक ऐसा एक्जिट पोल है, जिसे देश का कोई भी निर्वाचन आयुक्त प्रतिबंधित नहीं कर सकता। यह कहलाता है, जबानी चर्चा। यह चुनावी भाषण देते नेताओं के मुंह से निकलकर नहीं आती, न ही हवा में उड़ने वाले पत्रकारों की ओर से। यह उभरती है उनकी ओर से, जिनके पैर जमीन पर दृढ़ता से जमे होते हैं- मतदाता, जिन्होंने अपनी बहुमूल्य राय को निर्णय के दिन तक चौकन्नी गोपनीयता के साथ बचाए रखा। चूंकि अब यह अभिमत दे...
दक्षिण एशिया की राजनीतिक शैली में किससे निबटना ज्यादा कठिन है : लगाव या फिर रोष? शारीरिक संदर्भ में कहें, तो लगाव से। लोकप्रिय समर्थन के किसी भी प्रदर्शन का प्रमुख मूल भाव ठेल-धकेल ही होता है। फिर चाहे इस्लामाबाद में यूसुफ गिलानी सुप्रीम कोर्ट की अपनी राह पर हों या लखनऊ में मुलायम सिंह यादव विधानसभा की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हों, समर्थक खुद को अपने नेताओं के हरसंभव करीब जाकर उनके...
पाक में पहले तख्ता पलट का नेतृत्व एक असैन्य व्यक्ति ने किया था। जब नौकरशाह से गवर्नर जनरल बने गुलाम मोहम्मद ने 17 अप्रैल 1953 को मनमाने ढंग से प्रधानमंत्री ख्वाजा नजीमुद्दीन को बर्खास्त कर दिया, तब वे ब्रिटेन की क्वीन एलिजाबेथ द्वारा हस्तक्षेप को लेकर थोड़े आशंकित थे। उनके पास चिंतित होने के कारण थे, क्योंकि पाकिस्तान उस समय तक स्वाधीन-उपनिवेश था और क्वीन उसकी वैधानिक रानी थीं।
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