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  • संकल्प की विजय के पचास वर्ष
    28 अगस्त 2015 को भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 में हुए दूसरे युद्ध को पचास साल पूरे हुए। आज के सूचना आधारित विश्व में नज़दीक के इतिहास की घटनाअों को जानना भी एक प्रकार से खुद को मजबूत बनाना है। इस पहले लेख में युद्ध की पृष्ठभूमि और युद्ध : वर्ष 1947-48 में कबायली हमले के जरिये जम्मू-कश्मीर पर कब्जे में नाकामी के बाद पाकिस्तान ने खुद को राजनीतिक, आर्थिक और सैनिक तौर पर मजबूत करने के लिए अमेरिका से हाथ मिला लिए। इसने कम्युनिस्ट विरोधी अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सदस्यता को खूब भुनाया और अपनी सेना को पैटन टैंक, 155...
    02:59 AM
  • एक बात का फसाने में बदलना
    छोटी सी बात का फसाना बन सकता है बशर्ते बात सहेजकर रखी गई यादों को कुरेदने वाली हो, यादों के सहारे खड़े किए गए सियासी सोच के जारी सिलसिले में फिट बैठती हो। मुस्लिम आबादी का 0.8 फीसद बढ़ना और हिंदुओं की आबादी का 0.7 फीसद का कम होना कुछ ऐसी ही बात है। इस तथ्य को भय के भरपूर अफसाने में तब्दील किया जा सकता है, क्योंकि भारत के राष्ट्र-रूप में बदलने की भयावह यादों को इसके जरिये जगाया जा सकता है। याद दिलाया जा सकता है कि भारत और पाकिस्तान नाम के दो नव-निर्मित राष्ट्रों के बीच सदी की सबसे दर्दनाक त्रासदी घटी थी।...
    August 28, 03:13 AM
  • न्यायिक लड़ाई का नया मुकाम
    तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता, फिल्म अभिनेता सलमान खान और अब दिल्ली के उपहार हादसे में 18 सालों की लंबी अदालती कार्यवाही और ताकतवरों के बचाव से न सिर्फ पीड़ितों की हताशा वरन् उस न्यायिक त्रासदी का इल्म भी होता है, जिसे दो बच्चों की मृत्यु से आहत नीलम कृष्णमूर्ति ने न्यायपालिका के प्रति अविश्वास से प्रकट किया। तमिलनाड़ु के तुतीकोरन में जुलाई 1979 को लक्ष्मी टॉकीज में हुए अग्निकांड में उपहार त्रासदी से ज्यादा 73 लोगों की मृत्यु हुई थी, जिसके बाद संबंधित सरकारी एजेंसियों यथा नगर-निगम और अग्निशमन...
    August 26, 02:42 AM
  • भारत में होंगे अगले दौर के नए इनोवेशन
    देश को डिजिटल शक्ति से संपन्न और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम उम्मीद जगाता है। यही इसका घोषित उद्देश्य भी है। जाहिर है हमने सरकार का चेहरा व लोगों की जिंदगी बदलने की टेक्नोलॉजी की क्षमता को पहचान लिया है। कई लोगों के लिए डिजिटल इंडिया का मतलब टेक्नोलॉजी का कोई आकर्षक मंच है। समाज के ऊपर के तबकों के लिए इसका अर्थ फेसबुक व ट्विटर हो सकता है- पूरा देश स्मार्टफोन से लगा बैठा है, कुछ ऐसी छवि उनके दिमाग में आती है। किंतु डिजिटल इंडिया का संबंध शासन के मूल...
    August 24, 06:34 AM
  • अध्यात्म में जीवन  उलटे पेड़ जैसा क्यों?
    भारतीय अध्यात्म में मानव जीवन को बरगद के उलटे पेड़ के रूप में दर्शाया गया है। ऐसा पेड़ जिसकी जड़ें आसमान में हैं। यह वृक्ष अमर है। जो इसे जान लेता है, वह जीवन की वास्तविकता को जान लेता है। यानी मानव एक आध्यात्मिक अस्तित्व है। उसकी सबसे बड़ी जरूरत दुनिया को जानना ही नहीं है, खुद को बेहतर ढंग से जानना भी है। इस आध्यात्मिक अस्तित्व को ऊपर से पोषण मिलता है, इसीलिए वृक्ष की जड़ें ऊपर बताई गई हैं। चेतना को उच्च स्तर पर ले जाकर इस वृक्ष को जाना जा सकता है। चेतना के स्तर में बदलाव तो भीतर से ही आएगा। हम माला के...
    August 24, 06:29 AM
  • हमारे पास भी हैं कठोर विकल्प
    भारत की जनता लगभग रोज नियंत्रण-रेखा पर पाकिस्तान की ओर से उकसावे की कार्रवाइयां देखती है और उसके मन में सवाल उठता है कि यह सब है क्या। नई पीढ़ी ने नब्बे के दशक और नई सदी की शुरुआत में नियंत्रण-रेखा पर होने वाला संघर्ष नहीं देखा है जब जम्मू-कश्मीर में दोनों सेनाएं बड़ी मात्रा में सीमा के आर-पार गोलाबारी करती थीं। तब विज़ुअल मीडिया इतना ताकतवर नहीं था, लेकिन आज डिनर के दौरान गोलीबारी के दृश्य दिखाए जाते हैं और परिवारों में इस पर चर्चा होती है। गौरतलब है कि नियंत्रण-रेखा वह जगह है, जहां दोनों सेनाएं आंख...
    August 22, 10:53 AM
  • हम भारतीय पाखंडी कैसे हो गए?
    दूसरों से मुझे बचाना तो राज्य का कर्तव्य है, लेकिन मुझे खुद से ही बचाना इसके दायरे में नहीं आता। हमारे संविधान में यही धारणा निहित है, जो जिम्मेदार नागरिक के रूप में मुझ पर भरोसा करता है और राज्य से हस्तक्षेप के बिना मुझे अपनी जिंदगी शांतिपूर्वक जीने की आजादी देता है। इसीलिए पोर्न साइट ब्लॉक करने का सरकार का आदेश गलत था। उसे श्रेय देना होगा कि उसने जल्दी ही अपनी गलती पहचान ली और रुख बदल लिया- इसने वयस्कों की साइट से प्रतिबंध हटा लिया जबकि चाइल्ड पोर्न साइट पर पाबंदी जारी रखी, जो बिल्कुल उचित है।...
    August 19, 02:20 AM
  • वे आज भी फेंके हुए पैसे नहीं लेते किन्तु सरकारें दे क्यों रही हैं?
    मुंशी जी तन्नाए पर जब उनसे कहा गया, ऐसा जुल्म और भी सह चुके हैं तो वे चले गए दुम दबाए। मुंशी जी के लड़के तन्नाए, पर जब उनसे कहा गया, ऐसा जुल्म और पर भी हुआ है तो वे और भी तन्नाए। - हरिवंशराय बच्चन दो पीढ़ियां अमिताभ बच्चन तो जो कुछ भी पैसा लेते होंगे - सभी से लेंगे। ये पैसे उन्हें दिए ही इसलिए जा रहे हैं क्योंकि वे अमिताभ बच्चन हैं। गलती तो सरकारों की है। उन्हें किसान चैनल के लिए बिग-बी ही क्यों चाहिए? जो निजी कंपनियां हैं, उन्हें विज्ञापन के लिए बड़े, आकर्षक...
    August 17, 04:47 PM
  • विचारों पर नियंत्रण तो नियति काबू में
    इक्कीस जून 2015 को विश्व योग दिवस मनाकर सामूहिक रूप से योगासन और सूर्यनमस्कार करने पर जोर दिया गया। योग का यह भी एक अंग है, लेकिन वह सिर्फ शुरुआत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में इसका उल्लेख किया था। संगीत के कार्यक्रम की शुरुआत में सारे वाद्यों को सुर में लाया जाता है। इससे कई लोग ऊब जाते हैं, लेकिन इसके बिना कार्यक्रम असली रंग में नहीं आ पाता। योगासन भी वाद्यों को सुर में लाने जैसा है। असली योग तो उसके बाद ही शुरू होता है। योगशास्त्र वास्तव में भारतीय मनोविज्ञानशास्त्र है और यह...
    August 17, 03:48 AM
  • प्राइवेसी के प्रश्न पर अटका ‘आधार’
    सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अगस्त को पारित आदेश से आधार को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए अनिवार्य बनाने से इनकार कर दिया है। केंद्र द्वारा 1954 के पुराने निर्णय पर जोर देने से निजता के अधिकार की व्यापक समीक्षा के लिए मामले को नौ न्यायाधीशों की संविधान खंडपीठ को भेजने का निर्णय भी आया। इसके पूर्व 24 मार्च 2014 के एक अन्य आदेश से सर्वोच्च न्यायालय ने आधार की निजी सूचनाओं को सार्वजनिक करने पर पहले ही रोक लगा दी थी। सरकारी अधिकारियों के सर्विस रिकाॅर्ड, बैंकिंग सेवाओं, वेतन भुगतान, स्काॅलरशिप,...
    August 13, 06:11 AM
  • हमारी ज़िंदगी में क्या अर्थ है गूगल के इस बदलाव का
    यह इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि एक भारतीय को दुनिया की सबसे प्रसिद्ध कम्पनी का सर्वोच्च पद मिला है। न ही इसे कॉर्पोरेट जगत की एक बड़ी खबर मानकर आगे बढ़ जाना चाहिए। इसे ध्यान से देखने पर हम हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में कई सबक ले सकते हैं। सुंदर पिचई को ही क्यों चुना गया? सत्या नडेला जब माइक्रोसॉफ्ट के सर्वोच्च बनाए गए थे, तब हमने देखा था कि दो ही कारण से शीर्ष पदों के लिए किसी को चुना जाता है- पहला : कम्पीटेन्स यानी योग्यता और दूसरा : कम्फर्ट यानी आपके साथ काम करने में सुविधा। यही लैरी पेज और सर्गेई...
    August 12, 04:13 AM
  • मौलिकता के लिए आंदोलन कब?
    न मैं फिल्मों से संबंधित लेखक हूं न ही समीक्षक। टेक और रीटेक की भाषा भी मैं नहीं समझता। फिल्म इंडस्ट्री के तनावों-दबावों से भी मैं कभी नहीं गुजरा हूं। मैं यह भी मानता हूं कि फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) के नवनियुक्त चेयरमैन गजेंद्र चौहान फिल्म इंडस्ट्री के चुनींदा फ्लॉप एक्टरों में से एक हैं, लेकिन बावजूद इसके मेरे मन में एक छटपटाहट भरा सवाल है- इस शानदार संस्थान के लिए पूर्ववर्ती नामचीनों ने आखिर क्या किया? गुटबंदी और सियासी प्रतिबद्धताओं में फंसता जा रहा यह संस्थान...
    August 12, 03:38 AM
  • अपने श्रेष्ठ को जानें और पीछे पड़ जाएं
    मुझे याद है आठ साल की थी (1998), तब तक मैं नटखट बच्ची थी। दुबली-पतली और नाजुक लड़की। हरियाणा के हिसार तक सीमित। सिर्फ गर्मी में जब हिसार का तापमान 48 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाता तो बचने के लिए हम छुटि्टयों में दिल्ली चले जाते थे। बस में भी मैं 150 किलोमीटर से ज्यादा नहीं घूमी थी। हवाई जहाज की तो बात ही क्या, बचपन में कभी ट्रेन में भी नहीं बैठी थी। यानी असाधारण की ओर मेरी शुरुआत साधारण से हुई। हिसार की चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिक पिताजी हरवीर सिंह ने भारतीय कृषि शोध परिषद की...
    August 10, 03:10 AM
  • पूरे पूर्वोत्तर में शांति लाएगा यह करार
    केंद्र सरकार ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम-अाईएम (एनएससीएन) के साथ समझौता कर लिया। नगा गुट की ओर से इसके महासचिव थुइंगालेंग मुइवा ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता कारगर होगा। इसका कारण यह है कि समझौते में काफी वक्त लगा है। सरकार काफी सोचकर देश के इस सबसे पुराने अलगाववादी आंदोलन को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ी है। यह समस्या 1950 के दशक के मध्य में शुरू हुई थी। इस दिशा में पहला मील का पत्थर 1997 का संघर्ष विराम समझौता रहा। उसके बाद से...
    August 4, 03:21 AM
  • कार्य को भार मानें या आभार
    सुबह-सुबह अपने घर के पड़ोस के पार्क में सैर करने हम सब मित्र जाते हैं। उस पार्क में एक जिम भी बन रहा है। घटना बहुत सामान्य है परंतु सामान्य घटनाओं में ही असामान्य अनुभूति होती है। इस पार्क में जो जिम बन रहा है उसका एक भाग पहले बन गया था तथा दूसरे का काम चल रहा है। आप इस दृश्य की मन में कल्पना करें। जिम के अंदर युवा वेट-लिफ्टिंग कर रहे हैं और बाहर मजदूर ईंटें उठा रहा है। जिम में युवक पसीने-पसीने हो रहा है और बाहर मजदूर भी पसीने-पसीने हो रहा है। अगर जिम का प्रशिक्षक युवाओं का भार कुछ बढ़ा दे तो युवा के...
    August 3, 03:01 AM
  • सीमाएं टूटती हैं तो साकार होते हैं सपने
    मैं हूं इरा सिंघल। मैंने आईएएस टॉप किया है। आज लोग मुझे जानते हैं, लेकिन एक समय मुझे अपनी पहचान के लिए संघर्ष करना पड़ा। मैंने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। बचपन में ही मेरी रीढ़ की हड्डी सिकुड़ने लगी। मेडिकल में इसे रेअरेस्ट माना जाता है। डॉक्टर्स ने इसे स्कोलियोसिस बताया। मुझे उस उम्र में इस बीमारी का पता भी नहीं था। पर मेरी ज़िंदगी में संघर्ष यहीं से शुरू हो गया। ऑपरेशन कराने में जान का खतरा था, तो माता-पिता ने जाेखिम नहीं लिया। मेरी ज़िंदगी अपनी राह पर थी, तो यह स्थिति भी साथ थी। स्कूल में...
    August 3, 02:53 AM
  • राजन से टकराव में अटके अच्छे दिन
    ऐसा लगता है कि इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था राजनीतिक नेतृत्व बनाम वित्तीय नेतृत्व के विवाद में फंस गई है। एक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बहस छिड़ गई है, जिसका ताल्लुक हमारे केंद्रीय बैंक (भारतीय रिजर्व बैंक) और उसके गवर्नर रघुराम राजन के साथ है। शायद ऐसा पहली बार हुआ है कि लंदन के फाइनेंशियल टाइम्स जैसे अखबारों ने इस संबंध में भारत सरकार, उसके वित्त मंत्रालय और फाइनेंशियल सेक्टर लेजिस्लेटिव रिफॉर्म कमीशन को आड़े हाथों लिया हो। भारत के भीतर भी ऐसे आलोचकों की कमी नहीं है, जो यह मानते हैं कि मोदी...
    July 31, 03:14 AM
  • कलाम पर भास्कर में मोदी का संपादकीय: लिखा- भारत ने अपना ‘रत्न’ खो दिया
    नरेंद्र मोदी। एपीजे अब्दुल कलाम के रूप में भारत ने एक रत्न खो दिया है। लेकिन उस हीरे की चमक और रोशनी हमें उस मंजिल तक पहुंचाएगी, जो उस स्वप्नद्रष्टा ने देखी थी। उन्होंने ख्वाब देखा था कि भारत एक नालेज सुपरपावर (ज्ञान शक्तिपुंज) के रूप में पहली कतार के देशों में शुमार हो। हम उस लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे। वैज्ञानिक पृष्ठभूमि से चलकर राष्ट्रपति पद तक पहुंचे कलाम सच्चे मायनों में जनता के राष्ट्रपति थे और यही कारण था कि उन्हें जनता से अथाह प्यार और सम्मान मिला और शायद उनके लिए सफलता का अर्थ भी यही था।...
    July 30, 08:59 AM
  • डॉ. कलाम के साथ अंतिम सफर
    आठ घंटे हो चुके हैं (यह लिखते वक्त), जब हमने आखिरी बार बात की थी- नींद कोसों दूर है और यादों का सैलाब चला आ रहा है, कभी-कभी आंसुओं के रूप में। 27 जुलाई को हमारे दिन की शुरुआत दोपहर 12 बजे हुई थी, जब हम गुवाहाटी जाने वाली फ्लाइट में सवार हुए। वे अपनी खास शैली का गहरे रंग का कलाम सूट पहने हुए थे और मैंने सराहना करते हुए कहा, बहुत ही अच्छा रंग है! तब मुझे क्या मालूम था कि मैं उन पर फबता अंतिम रंग देख रहा हूं। मानसून के मौसम में 2 घंटे 50 मिनट का हवाई सफर। ऐसे मौसम में हवाई जहाज के थराथराने से मुझे नफरत है जबकि कलाम...
    July 29, 03:18 AM
  • न्याय होता दिखाने की शुरुआत
    सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने 1992 में सर्वसम्मति से निर्णय लिया था कि न्यायपालिका में आम जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए सर्वोत्तम कदम उठाए जाने चाहिए, क्योंकि संविधान के अनुसार जनता का हित ही सर्वोपरि हैं। देश में सर्वोच्च न्यायालय, 24 उच्च न्यायालय तथा 19 हजार से अधिक अधीनस्थ अदालतों का व्यापक न्यायिक तंत्र है। इसी तारतम्य में विधि आयोग एवं संसदीय समितियों की सिफारिशों के आधार पर न्यायपालिका में सुधार के प्रथम चरण में किए गए कार्यों के नतीजे दिखने लगे हैं। सर्वोच्च न्यायालय में...
    July 27, 02:58 AM