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  • जीत के साथ आत्म परीक्षण का मौका
    भाजपा अंतत: शिवसेना के साथ गठजोड़ करके या अन्य दलों के समर्थन से महाराष्ट्र में सरकार बना लेगी, लेकिन निश्चित ही पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का जो जुआ खेला था, वह पूरी तरह कामयाब रहा, एेसा नहीं कहा जा सकता। पार्टी ने हरियाणा में तो अपने बूते अधिकांश सीटें जीत लीं, लेकिन महाराष्ट्र में वह बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी। यह सही है कि महाराष्ट्र में अकेले चुनाव लड़ने के फैसले ने पार्टी को अपने आधार का विस्तार करने में मदद की है और यही वजह है कि पार्टी विधानसभा में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है।...
    October 20, 06:47 AM
  • सत्ता बदलेगी पर शासन बदलना मुमकिन नहीं
    महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर स्थिति अस्पष्ट होने के बावजूद कुछ मुद्दे बिल्कुल स्पष्ट हैं। पहली बात तो यह कि कांग्रेस या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के खुद के बूते या संयुक्तरूप से भी सत्ता में आने की कतई उम्मीद नहीं है। महाराष्ट्र के जनमत को समझने वाला कोई भी समझ सकता है कि लोगों ने ठान लिया है कि इस गठबंधन को अब सत्ता नहीं सौंपनी है। दूसरा मुद्दा पहले और दूसरे स्थान की लड़ाई का है तो वह शिवसेना व भाजपा के बीच ही है। तीसरा मुद्दा है राज्य में त्रिशंकु विधानसभा आने की संभावना।...
    October 15, 05:51 AM
  • अब होगी असली परीक्षा मोदी और भाजपा की
    तीन दौर के उप-चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भाजपा के लिए इन विधानसभा चुनावों में अपनी खींची लकीर भारी पड़ रही है, पर इस लकीर ने; अर्थात आम चुनाव के प्रदर्शन ने उसे इतनी हिम्मत जरूर दे दी कि वह हरियाणा और महाराष्ट्र में मुख्य मुकाबले में आने के साथ सत्ता की दावेदार भी बन गई। जाहिर है अब अगर उसे इसमें लोकसभा से खराब सफलता मिली तो नेतृत्व मंडली पर सवाल उठेंगे और उसकी स्थिति भी कमजोर होगी। कम से कम हरियाणा में पार्टी का प्रदर्शन केंद्रीय नेतृत्व के खाते में जाएगा, इसलिए अचरज नहीं कि...
    October 15, 05:46 AM
  • निर्णायक हो सकते हैं मुस्लिम वोट
    महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में मुख्य राजनीतिक दल इस बार स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहे हैं । कांग्रेस, भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) हर कोई इस बात का दावा कर रहा है कि सरकार बनाने में मात्र उसे ही सफलता मिलेगी, लेकिन पिछले चुनावों का अनुभव बताता है कि कोई भी दल अपने बलबूते पर सरकार नहीं बना सकता है । सभी दल मानते हैं कि राज्य के 16 फीसदी मुस्लिम मतदाता बड़ी भूमिका निभाएंगे। हालांकि, मुस्लिमों की भी अपनी पार्टियां हैं, लेकिन उनमें इतना दमखम नहीं कि वे अकेले किसी को साथ...
    October 14, 06:09 AM
  • इस्लाम को लेकर सोच कैसी हो?
    जब टेलीविजन एंकर बिल माहर अपने साप्ताहिक शो में घोषणा करते हैं, मुस्लिम विश्व में बहुत कुछ आईएसआईएस जैसा है और शो के मेहमान सैम हैरिस उनसे सहमति जताते हुए कहते हैं, इस्लाम खराब विचारों का उद्गम है तो मैं समझ सकता हूं कि यह सुनकर लोग विचलित क्यों हो गए। उनका विचलित होना स्वाभाविक है। माहर और हैरिस ने बहुत ही भौंड़ा सरलीकरण किया है, बहुत भौंड़ी अतिशयोक्ति की है। और इसके बावजूद मैं कहूंगा कि वे एक हकीकत भी बयान कर रहे थे। मैं इस्लाम को हिंसक और प्रतिक्रियावादी बताने के खिलाफ दी जाने वाली सारी...
    October 13, 07:38 AM
  • कल्पेश याग्निक का कॉलम: नोबेल ने अंतत: खोजा सत्यार्थ किन्तु हिंदू-मुस्लिम कहा, मलाल रहेगा
    मेरी मां हमेशा कहती : सिर-मुंह ढंको। वो लड़का तुम्हें देख रहा है। मैं कहती - तो क्या? मैं भी तो उसे देख रही हूं! - मलाला युसुफज़ई संघर्ष बहुत ही बड़ा है। किन्तु मैंं अपने जीवनकाल में ही बालश्रमिक जैसे पाप नष्ट कर दूंगा। - कैलाश सत्यार्थी आप नहीं, तो कौन? अभी नहीं, तो कब? पूछते रहने वाले कैलाश सत्यार्थी को आज मानो समूचा संसार एक साथ उत्तर दे रहा है : आप ही। हमारे देश के लिए, हमारे बच्चों के लिए यह शक्तिशाली विजय का पल है। हर्ष। गर्व। दायित्व। चुनौती। नोबेल ने दिए हैं ये...
    October 11, 12:10 PM
  • सरहद पर जरूरी फौज की सख्ती
    भारत और पाकिस्तानी सेनाओं के बीच एक बार फिर नाेक-झोंक का दौर शुरू है। नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के दोनों ओर से गोलीबारी हो रही है। हर साल अक्टूबर में ऐसा होता है ताकि सर्दियों में बर्फबारी शुरू होने से पहले पाकिस्तान ज्यादा से ज्यादा आतंकियों को भारत में घुसपैठ करा सके। हालांकि, इस वर्ष अक्टूबर से पहले अगस्त में भी सीमा पर ऐसे ही हालात देखने को मिले और दोनों ही मौकों पर अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास ज्यादा गहमागहमी रही। पाकिस्तान इस समय भारत को उकसाने की कोशिश क्यों कर रहा है और इसके...
    October 10, 07:42 AM
  • नेतृत्व का संकट, भाजपा की मुश्किल
    कुछ माह पहले अपने सहयोगियों के साथ भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में भारी जीत हासिल की और हरियाणा तथा महाराष्ट्र दोनों राज्यों में बड़ी संख्या में लोकसभा सीटें जीतीं। पिछले कुछ माह में भाजपा की लोकप्रियता में उल्लेखनीय कमी आने के संकेत नहीं मिले हैं। इस हिसाब से तो भाजपा को इन दोनों राज्यों के विधानसभा चुनावों में भारी जीत मिलनी चाहिए, लेकिन जमीनी स्थिति देखते हुए कहा जा सकता है कि पार्टी को इन चुनाव में मुश्किल पेश आ सकती है। लोकसभा चुनाव में बड़ी संख्या में लोगों ने भाजपा को इसलिए वोट...
    October 9, 07:12 AM
  • बड़ी घोषणाएं नहीं, छोटे बदलाव चाहिए
    मेरा हमेशा से मानना रहा है कि सरकार को विकास की दिशा में छोटे बदलाव लाते रहना चाहिए बजाय ऐसी बड़ी घोषणाएं करने के, जिसे पूरा करना ही चुनौती बन जाए। नई केंद्र सरकार ऐसे ही छोटे और विकास परक बदलावों की राह पर तेजी से चल रही है, जो वर्तमान की आवश्यकता है। इस दिशा में खासतौर से बिजनेस के माहौल को आसान बनाने के प्रयासों का उल्लेख किया जा सकता है, जिसके अभाव में इंडस्ट्री वर्षों से संघर्ष कर रही थी। इसके अलावा प्राइवेट इक्विटी या कई क्षेत्रों में विदेशी पूंजी निवेश को बढ़ाना हमेशा ही इंडस्ट्री के लिए...
    October 8, 06:44 AM
  • जयललिता के फैसले का अर्थ
    बेंगलुरू की निचली अदालत द्वारा हाल ही में तमिलनाडु की अब पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के खिलाफ सुनाए फैसले ने राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर कई लघु-सम्राटों और अपने इलाके के हिटलरों की रीढ़ में कंपकंपी ला दी है। विडंबना यह है कि जयललिता मूलत: कर्नाटक के मैसूर की हैं और बेंगलुरू की अदालत ने ही उन्हें दोषी ठहराकर जेल भेजा है। पुरानी कहावत है, न्याय की चक्की धीमी पीसती है पर पीसती जरूर है। न्याय की जंग लगी चक्की, जांच एजेंसियों को साधने की कला और मुकदमे की ढीली-ढाली प्रक्रिया के कारण दुस्साहसी बने...
    October 6, 06:27 AM
  • जब शेर स्वयं को पहचान लेगा तो भेड़ क्यों बना रहेगा?
    किसने कहा कि सड़क साफ करने वाला कुछ नहीं कर सकता? क्यों न इतनी तन्मयता से, इतने सलीके से, एेसे प्रेम से सड़क साफ करो कि आसमान में उड़ते देवदूत भी ठिठक जाएं... हैरान हों, पूछें कि कौन है यह जो इतना डूब कर सफाई कर रहा है... जैसे कि प्रार्थना कर रहा हो! - मार्टिन लूथर किंग नरेंद्र मोदी ने देश में एक हलचल पैदा कर दी है। वे प्रतिदिन कुछ न कुछ नया कर देते हैं। राजनीति ही क्या, किसी भी क्षेत्र के किसी भी नेतृत्व ने इतना जोश-ओ-ख़रोश भरा वातावरण शायद ही तैयार किया हो। इसी से एक भारी आशंका भी पैदा...
    October 4, 07:10 AM
  • जो स्वच्छ और सुशासित, वही स्मार्ट
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूयॉर्क के मेडिसन स्क्वेयर पर फिर स्वच्छता का मुद्दा उठाया। इसके पहले स्वतंत्रता दिवस के भाषण में जब उनसे शहरी विकास को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की उम्मीद थी, उन्होंने स्वच्छता और लैंगिक भेदभाव जैसे विषयों पर अपना उद्बोधन केंद्रित रखा। दोनों बार उन्होंने उपहास के साथ यह भी कहा कि ऐसे विषयों को प्रधानमंत्री के गौर करने लायक नहीं माना जाता। स्वतंत्रता दिवस के भाषण में उल्लेख करने लायक तो कतई नहीं! जो लोग स्मार्ट सिटी को लेकर मोदी सरकार की घोषणाओं को नया विचार...
    September 30, 07:04 AM
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