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  • मोदी सरकार के 100 दिन: जानिए सरकार क्या कर रही है महंगाई पर
    नई दिल्ली.नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार में यूपीए सरकार पर सबसे ज्यादा हमले महंगाई को लेकर किए। भाजपा के घोषणा-पत्र में भी महंगाई से राहत दिलाने के वादे को सबसे ऊपर रखा। सरकार बनने पर मोदी ने पहली बार रिजर्व बैंक को महंगाई से सीधे जूझने का काम दिया। मोदी की कुछ कोशिशें नाकाफी साबित हुईं तो कुछ का असर बाद में दिखाई देगा। आइए, नज़र डालते हैं महंगाई से जुड़ीं कुछ चुनौतियों, सरकार के प्रयासों और फैसलों पर। देश के ख्यात अर्थशास्त्रियों की मदद से बता रहे हैं भास्कर के रिसर्च जर्नलिस्ट... महंगाई...
    August 30, 11:57 AM
  • असंभव के विरुद्ध: पैसे अच्छे होते हैं या बुरे?
    पैसा सभी बुराइयों की जड़ है। पैसों की कमी सभी बुराइयों की जड़ है। -प्राचीन कहावतें किन्तु पैसे की जड़ में क्या है? - द फाउन्टनहेड की लेखिका एन रैंड आर्थिक छुआछूत एक अछूता जुमला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाए हैं। वे इस विधा में कुशल हैं। वे जन-धन योजना को तन-मन से लाए हैं। मूल में बचत है। माध्यम बैंक है। लक्ष्य पैसा है। हर व्यक्ति के पास ग़रीबी से लड़ने का पैसा। परिवार पालने का पैसा। बच्चों को आगे बढ़ाने का पैसा। संसार में जितना जटिल मसला पैसे का है, उतना किसी भी चल-अचल वस्तु-व्यक्ति या स्थान...
    August 30, 08:07 AM
  • सबसे अच्छा महानगर कैसा हो?
    इन दिनों बीमारियों, विनाश और मौत की खबरें इतनी आ रही है कि शायद उदासी के इस साये को हटाने के लिए ही मीडिया ने खुद से यह सवाल पूछा कि रहने के लिए दुनिया का सबसे खुशनुमा शहर कौन-सा है? हाल ही में जब मैं हिचकोले खाते हवाई सफर में था तो ध्यान बांटने के लिए मैंने कुछ हल्का-फुल्का पढ़ना चाहा। एक मोटी-सी पत्रिका हाथ लगी, जिसमें इस शाश्वत प्रश्न का उत्तर खोजने का प्रयास था। इसके दो दिनों बाद ही इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट 140 शहरों की सूची ले आई। बताया गया कि दुनिया के कौन-से शहर सबसे ज्यादा रहने लायक या न रहने...
    August 29, 07:40 AM
  • जन भागीदारी बनाएगी शहरों को स्मार्ट
    भारत का इतिहास शहरी बसाहटों और महान शहरों के वर्णनों से भरा है। ऐसे शहर जो व्यापार, वाणिज्य, उद्योगों और ज्ञान-विज्ञान के केंद्र थे। इसके बावजूद आधुनिक भारत के शहर गरीबी, अक्षमता और दुर्दशा के प्रतीक बन गए हैं। ऐसा इसलिए नहीं है कि अब इनकी कोई आर्थिक भूमिका नहीं रह गई है। असल में हमारी ज्यादातर संपदा शहरों में ही पैदा होती है। इनकी दुर्दशा इसलिए हुई, क्योंकि ये सभ्यता और लोकतंत्र के आधारभूत विचार से अलग हो गए हैं। जब नागरिक सिर्फ उपभोक्ताओं में तब्दील हो जाएं तो साझा संसाधनों और सार्वजनिक...
    August 28, 07:17 AM
  • मुखौटों-मनुष्यों का फर्क समझे संसद
    जजों के चयन की कॉलेजियम प्रणाली के बाद अब प्रधानमंत्री का योजना आयोग को खत्म करने का फैसला कई मायनों में महत्वपूर्ण है। ये दोनों ही निर्णय राजनीति की रचनात्मक भूमिका की ओर तो इशारा करते ही हैं, यह उम्मीद भी जगाते हैं कि वर्षों पुरानी, थकी, लडख़ड़ाती और बीमार शासन व्यवस्था में बदलाव वक्त के साथ जरूरी हैं। नाजुक, भावुक और पेचीदा प्रजातांत्रिक व्यवस्था अब मेकओवर की मांग कर रही है। यहां दिलचस्प यह है कि सरकारें अब पुरानी राजनीतिक अंध भक्त व्यवस्था से ऊपर उठते हुए जनमत के प्रति जवाबदेह होकर...
    August 27, 06:19 AM
  • वुमन इक्वलिटी डे: योग्यता दिखाएं, समान दर्जा अपने आप मिलेगा
    मेरा सौभाग्य है कि समानता का मसला मेरे लिए खबर के समान है। मेरा विकास बैडमिंटन खिलाड़ी के रूप में हुआ है और मेरे इस खेल में महिला हो या पुरुष सबके साथ समान व्यवहार होता है। हां, हमारे समाज में जरूर आमतौर पर खाना पकाने, बच्चों की परवरिश जैसे कुछ विशेष काम महिलाएं करती हैं जबकि अन्य काम पुरुष करते हैं। यह सही है कि सभी क्षेत्रों में महिलाअों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए पर उन्हें भी पढ़ाई में व अन्य तरह के क्षेत्रों में अधिक प्रयास कर आगे आना चाहिए। जैसे मैं अपनी ही बात कहूं तो खेल के मैदान पर मैं...
    August 26, 07:35 AM
  • उम्मीद जगाने वाले 10 कदम
    हम सब स्वतंत्रता दिवस पर नरेंद्र मोदी के भाषण से बहुत प्रभावित हुए। जवाहरलाल नेहरू के बाद से हमने लाल किले से ऐसा ताजगीभरा, उत्साह बढ़ाने वाला और ईमानदारी जाहिर करता भाषण नहीं सुना। मोदी हिंदू राष्ट्रवादी की तरह नहीं, भारतीय राष्ट्रवादी की तरह बोले। आदर्शवाद की ऊंची-ऊंची बातें नहीं कीं, कोई बड़ी नीतिगत घोषणाएं नहीं कीं और न खैरात बांटीं। आमतौर पर हमारे नेता बताते हैं कि वे हमें क्या देने वाले हैं। उन्होंने बताया कि हमें कौन-सी चीजें राष्ट्र को देनी चाहिए। मोदी की शैली को वर्णित करने के लिए...
    August 25, 06:52 AM
  • असंभव के विरुद्ध: युवाओं को बीमार, बेकार  और बूढ़ा करने से रोकने वाला  निर्णय कहीं रुक न जाए
    मानव शरीर में शराब जाते ही सबसे पहले गलने वाली चीज़ है - उसकी गरिमा। - प्राचीन कथन जब हम कोच्चि सेे मुन्नार के मार्ग पर थे तो पलक झपकते पता चला कि केरल को ईश्वर की भूमि क्यों कहते हैं? गॉड्स ओन कंट्री। पलक झपके तो! भव्य फैले मैदान, छोटी-संकरी किन्तु निर्दोष-सी सड़क और चारों ओर आकाश को छूने को बेताब नारियल के पेड़ों के समूह। किन्तु इनसे भी अधिक ईश्वरीय आकर्षण : भोले, भले लोग। मानो कुछ चाहिए ही नहीं। किसी से। न सांसारिक चातुर्य। न आध्यात्मिक गांभीर्य। बस, अच्छे-सच्चे से मनुष्य।...
    August 23, 05:47 AM
  • देश को भूलकर ये कैसा जय-जयकार, बहिष्कार?
    कांग्रेस के क्रोध पर तो अब किसी को क्रोध भी नहीं आता। उसे अपने मुख्यमंत्रियों के अपमान की चिंता है। हार से उपजी चुनौतियों की नहीं। कांग्रेसी मुख्यमंत्री यदि भीड़, नारे और शोर का सामना नहीं कर पा रहे तो वे चुनाव में क्या करेंगे? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहिष्कार की घोषणा वास्तव में लोकतंत्र का अपमान है। भारतीय इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि कई मुख्यमंत्री, दलगत राजनीति से उत्तेजित हो, प्रधानमंत्री का बहिष्कार कर दें। उधर, भाजपा की प्रसन्नता पर अवश्य क्रोध आता है। शक्तिशाली रूप से केंद्र...
    August 22, 07:42 AM
  • वर्ल्ड मॉस्किटो डे: मलेरिया के उपचार की रोमांचक खोज
    आज से ठीक 117 साल पहले भारत में जन्मे और तत्कालीन इंडियन मेडिकल सर्विस के अधिकारी डॉ. रोनाल्ड रॉस ने मच्छर की आंत में मलेरिया के रोगाणु का पता लगाकर यह तथ्य स्थापित किया था कि मच्छर मलेरिया का वाहक है और मच्छरों पर काबू पाकर इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। इस खोज ने कई रोगों के इलाज की दिशा में नए युग की शुरुआत की। रॉस को इस खोज के लिए 1902 में नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा गया। सिकंदराबाद की भीषण गर्मी, अत्यधिक उमस और खुद मलेरिया के शिकार होते हुए भी उन्होंने एक हजार मच्छरों का डिसेक्शन किया। यह काम कितना...
    August 20, 07:05 AM
  • पुलिस पर मुस्लिमों का घटता भरोसा
    पुलिस बलों को अल्पसंख्यक तबकों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने संबंधी ताजा रिपोर्ट से मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ है। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि मुस्लिमों को पुलिस पर भरोसा नहीं है। उन्हें लगता है कि पुलिस सांप्रदायिक, पक्षपाती, असंवेदनशील तथा पर्याप्त सूचनाओं और पेशेवर दक्षता से रहित है। यह रिपोर्ट हो या कोई अन्य रिपोर्ट इस निष्कर्ष पर मुझे अचरज नहीं होता कि लोगों के रोज के जीवन से जितनी संस्थाओं का संबंध आता है, उनमें लोगों का भरोसा जीतने में पुलिस सबसे आखिर में आती है। सर्वे बताता है कि न...
    August 19, 07:35 AM
  • मौलिक चिंतन व देशी समाधान की राह
    सिविल सेवा परीक्षा को लेकर विवाद ने अंग्रेजी और भारतीय भाषाअों की भूमिका को लेकर बहस ताजा कर दी है। कुछ साल पहले मेरी चर्चा अंग्रेजी भाषी गणराज्य के एक प्रतिनिधिमंडल से हुई थी। इस दल का उद्देश्य अंग्रेजी को सहभागी भाषा और ज्ञान व आपसी समझबूझ की अंतरराष्ट्रीय संपर्क भाषा के रूप में बढ़ावा देना था। मैंने अपने भाषण में इस देश में अंग्रेजी के प्रभुत्व से भारतीय भाषाओं के लिए मौजूद खतरे के बारे में बात की। मुझे अपेक्षा थी कि जब मैं प्रतिनिधिमंडल से चाय की टेबल पर मिलूंगा तो कोई बहुत सौहार्दपूर्ण...
    August 18, 07:13 AM
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