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  • ऐसे जीवित करें अपनी नदियों को
    मुझे याद आता है मेरा बचपन, जो मैंने गंगा-यमुना के संगम पर गुजारा। बीच में रेलवे की ऊंची पटरी और दूसरी ओर कोसी नदी। जब सारे बच्चे फुटबॉल खेल रहे होते तो मैं गंडक किनारे बैठा घंटों उछलती-कूदती डॉल्फिन को एकटक निहारता रहता था। बिना जाने कि यह मछली है या स्तनधारी। मानसून के आगमन से दिल दहल उठता था। एक ओर गंगा, गंडक तो दूसरी ओर कोसी विकराल रूप धारण कर लेती थी। सारा खगड़िया शहर पानी में, यहां तक कि कलेक्टर कार्यालय भी पानी में डूब जाता था। आकाश में हेलिकॉप्टर का कोलाहल, छतों पर खाने के पैकेटों का गिरना...
    04:17 AM
  • विकास के ममता मॉडल ने किया माओवाद बेअसर
    भारत के कई राज्यों में माओवादी संगठन राजनीतिक तौर पर भले चुनौती नहीं बन पाए हों, सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं। इसका पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिस सकारात्मक दृष्टि के साथ मुकाबला किया, वह माओवाद प्रभावित बाकी राज्यों के लिए एक उदाहरण है। ममता ने पुलिस और अर्द्ध-सैनिक बलों के बूते माओवादी आंदोलन से निपटने की बजाय शांतिपूर्ण सह अस्तित्व की अवधारणा को आजमाया। पांच साल पहले मुख्यमंत्री बनते ही ममता ने माओवादियों के मध्यस्थों से शांति वार्ता शुरू की और यह स्वीकार करने...
    April 29, 03:21 AM
  • पानी से डरते थे, अब ओलिंपिक के रोवर
    सोमवार को एक और भारतीय खिलाड़ी ने रियो ओलिंपिक में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर ली, लेकिन यह युवक हमेशा की तरह न तो बॉक्सर है और न तीरंदाज। उसका खेल है नौकायन। महाराष्ट्र की चांदवड़ तहसील के हमेशा सूखे को झेलने वाले तलेगांव रोही का युवक दत्तू भोकनल। उसने दक्षिण कोरिया के चुंग जु में फिसा एशियाई व ओसिनिया ओलिंपिक के लिए नौकायन की पात्रता स्पर्द्धा में 7 मिनट 14 सेकंड और 49 मिली सेकंड में दो किलोमीटर की दूरी तय कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। प्रथम आने वाले कजाकिस्तान के खिलाड़ी से वे 11 मिली सेकंड पीछे...
    April 29, 03:02 AM
  • आवास क्षेत्र से आएगी जॉब क्रांति
    मेरे मित्र मुझे बताते हैं कि प्रसन्नता भीतरी बात है और जीवन के प्रति मेरे रवैये से इसका संबंध है। वे मुझे जिंदगी की रफ्तार कम करने, योगा करने, ध्यान सीखने, खूब मुस्कराने और ईश्वर में भरोसा रखने को कहते हैं। ऐसी आध्यात्मिक बातचीत आमतौर पर मुझे गंभीर कर देती है। मैंने पाया है कि मेरी जिंदगी की खुशी दिन-प्रतिदिन की छोटी बातों में होती है- अपने काम में डूबे होना, किसी दोस्त के साथ ठहाके लगाना या अचानक सुंदरता से सामना हो जाना। खुशी तो यहीं, इसी क्षण है; किसी सुदूर अालौकिक जीवन में नहीं। हम में से...
    April 27, 03:55 AM
  • ज्ञान की चुनौती लें, इसमें हार नहीं होती
    मेरे बचपन की कहानी सचमुच सकारात्मकता की कहानी है। मैं जब पांच वर्ष का था तो पिताजी की मृत्यु हो गई। उसके सदमे में मेरे दादा भी चल बसे। मैं दृष्टिहीन बाबा (दादाजी के भाई) के साथ रहता था। मां का पुनर्विवाह हुआ। हमारे सौतेले पिता का एक बेटा था। उसके साथ हमें पढ़ने स्कूल भेजा। थोड़े दिनों बाद उन्होंने स्कूल में जाकर पूछा कि बच्चे पढ़ाई में कैसे हैं तो अध्यापक ने कहा कि आपके बड़े बेटे (हमारा सौतेला भाई) में तो संभावना नहीं है, लेकिन छोटा बच्चा कुछ होनहार लगता है। इस पर ध्यान दीजिए। अध्यापक की बात का हमारे...
    April 25, 05:20 AM
  • सौ दृष्टिहीन बालिकाओं का जीवन ज्ञान से रोशन किया
    देश के सबसे पिछड़े क्षेत्र बुंदेलखंड के चित्रकूट में हाईस्कूल का एक विद्यार्थी बहुत परेशान था कि परीक्षा के लिए तैयारी कैसे करे? अगर उसके पास किताबें होती भी तो वह पढ़ नहीं सकता था, क्योंकि विधाता ने उसकी आंखों की रोशनी जो छीन ली थी। मेरे जैसे छोटे बच्चे उनकी पाठ्य सामग्री को कैसेट में रिकॉर्ड करके दे देते थे और उन्हें ही सुनकर वह दृष्टिहीन बालक सामान्य विद्यार्थियों के बीच भी अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो गया।   उस बालक ने दृष्टिहीनता को भी वरदान समझकर स्वीकार लिया, जिसे वह सुमधुर स्वर में...
    April 22, 08:53 AM
  • जल-संरक्षण के प्रयासों की तीन कहानियां, ऐसे बदली सूखे इलाकों की तस्वीर
    महाराष्ट्र व गुजरात के सूखा प्रभावित इलाकों से जल-संरक्षण के प्रयासों की तीन कहानियां। इन अल्पज्ञात लोगों के जिद का नतीजा है कि वहां सूखे की आंच कम है। जानिए ये कौन हैं और क्या हैं इनके प्रयास: दो सौ गांवों को सूखेकी आंच से बचाया विश्वनाथ खोत को चार साल से भीषण सूखे का सामना कर रहे मराठवाड़ा स्थित उस्मानाबाद जिले के प्रशासन और लोगों में अत्यधिक आदर प्राप्त है। जो भी बारिश हो, उसका पानी खेतों में इकट्ठा करना अौर उसे जमीन में पहुंचाना। संक्षेप में महाराष्ट्र सरकार की जलयुक्त शिवार योजना का...
    April 22, 03:56 AM
  • सबसे पहले अनुशासित भारत जरूरी
    अमेरिका में मैंने हाल ही में तीन सप्ताह गुजारे हैं। मुझे मिशिगन स्थित रॉस स्कूल ऑफ बिज़नेस ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया था। शेष वक्त मैंने बोस्टन में बिताया। अमेरिका निवास के दौरान मुझ पर कई बातों का प्रभाव पड़ा और उन पर विचार करते हुए मैं भारत लौटा। मैं चाहूंगा कि अपने पाठकों से उन बातों को साझा करूं। अमेरिका विरोधाभासों की भूमि है। वहां राष्ट्रपति का चुनाव नवंबर 2016 में होना तय है। किंतु चूंकि निर्वाचन प्रक्रिया बहुत जटिल है, रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक,...
    April 21, 03:53 AM
  • कितना उचित है धर्म का प्रदर्शन?
    केरल के कोल्लम जिले के पेरावुर कस्बे के देवी मंदिर में हुई दुर्घटना में भयावह जनहानि हुई। यह लिखे जाने तक 120 लोग मारे जा चुके थे और 350 जख्मी थे, जिनमें से कई लोगों की हालत बहुत गंभीर है। त्रासदी को लेकर कई अटकलें लगाई गईं, लेकिन सच्चाई हमें मालूम नहीं है। केरल सरकार ने मंदिर में आग लगने की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। बेहतर होगा हम इसका इंतजार करें। उम्मीद है कि यह निष्कर्ष तक पहुंचेगी। केरल पुलिस की अपराध शाखा को भी त्रासदी की जांच करने को कहा गया है, जो अतिरिक्त महानिदेशक स्तर के अधिकारी करेंगे।...
    April 20, 02:44 AM
  • संघर्ष के दौरान धीरज रखना ही मूलमंत्र
    मैं पुराने गुड़गांव से हूं जहां मॉल और मल्टीप्लेक्स नहीं होते थे। मेरे निम्नमध्यवर्गीय परिवार में किसी का दूर-दूर तक फिल्मी दुनिया से नाता नहीं रहा, लेकिन परिवार फिल्मों का दीवाना जरूर है। मैं घर में कई अभिनेताओं की मिमिक्री करता था, लेकिन फिल्मों में आने का सोचा नहीं था। मैं पढ़ाई में बहुत अच्छा नहीं था। कॉलेज में पढ़ने के साथ दिल्ली में ड्रामा करता था। कई बार ड्रामा के लिए गुड़गांव से दिल्ली साइकिल से चला जाता था। एफटीआईआई से एक्टिंग का कोर्स किया और मुंबई आ गया। स्टूडियो दर स्टूडियो भटकता था।...
    April 18, 03:23 AM
  • बराबरी से बड़ा कोई बदलाव संभव नहीं
    स्वतंत्रता हासिल होने को 65 साल हो गए हैं, लेकिन खेद है कि स्त्री-पुरुष समानता के लिए मुझे लड़ाई लड़नी पड़ रही है। अशालीन तरीके से बदनाम करने से लेकर मुझे जान से मारने तक के प्रयास हुए हैं। सवाल उठता है कि समानता के अधिकार के लिए लड़ना गुनाह है क्या? यहां से (कोल्हापुर) नजदीक कर्नाटक का निपाणी मेरा मूल गांव है। कोल्हापुर जिले की गडहिंग्लज तहसील के लिंगनूर में मेरा ससुराल है। किंतु मैं पिछले कुछ वर्षों से पुणे मंें सक्रिय हूं। हमने 2010 में पुणे में भूमाता बिग्रेड का गठन किया था। तब झुग्गी-झोपड़ियों से...
    April 15, 06:31 AM
  • पहले ही देख लिए थे लोकतंत्र पर खतरे
    मौजूदा समय में संसदीय लोकतंत्र के सामने जो खतरे पैदा हुए हैं, उन्हें आंबेडकर ने 65 वर्ष पहले ही देख लिया था। उन्होंने उस समय कहा था कि संसद में शेयर बाजार, बिग बिज़नेस और पुरोहित वर्ग के प्रतिनिधि नहीं होने चाहिए। संसद में इनके प्रवेश से आज गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। आंबेडकर के साथ 1948 से 1954 तक के छह साल की निकटता में उनके यह विचार जानने को मिले थे। उनका यह भी कहना था कि संसद में नृत्यांगनाओं का भी कोई काम नहीं है। वे कहते थे कि शेयर बाजार दलालों का बाजार होता है और ये संसद से दूर रहे, इसी में बेहतरी है।...
    April 14, 02:48 AM
  • जाति हो या कश्मीर, समझौता नहीं किया
    डॉ. भीमराव आंबेडकर का विचार ईमानदारी का दूसरा पर्याय है| उन्होंने गलत को गलत और सही को सही कहा चाहे उसका अंजाम जो भी हो। नारी मुक्ति कि बात हो, जातिविहीन समाज की स्थापना, देश की सीमा की रक्षा या अंधविश्वास उन्होंने कहीं भी रंच मात्र समझौता नहीं किया। 1950 के दशक में बेटियों को पैतृक संपत्ति में अधिकार देने की बात करना आसान नहीं था|नेहरूजी से परामर्श लेकर आंबेडकर ने संसद में हिंदू कोड बिल पेश किया। विधेयक का मूल मकसद था बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों जैसे अधिकार देना। देश से भारी विरोध के कारण...
    April 14, 02:46 AM
  • चरित्र पर निर्भर होता है आपका प्रदर्शन
    स्कूल के दिनों से ही क्रिकेट के प्रति आकर्षण पैदा हो गया था। उस जमाने में दुनिया की सभी टीमों में बड़े-बड़े खिलाड़ी थे। उनके खेल के बारे में सुनते। अपने देश के खिलाड़ियों को खेलते देखते तो बड़ी प्रेरणा मिलती। उत्साह जगता कि हम भी एक दिन इनके जैसे बनेंगे। जब आप बड़े खिलाड़ियों को देखते हैं तो उससे बड़ी प्रेरणा कोई नहीं हो सकती। कामयाबी, सफलता का रास्ता तो काफी लंबा होता है। यह तो खुद ही तय करना होता है, लेकिन मोटीवेशन वहीं से आता है। फिर टेलेंट होना भी जरूरी है। उत्साह व लगन हो तो इसे विकसित भी किया जा सकता...
    April 11, 03:29 AM
  • सोशल ऑडिट से ग्रामीणों में आई हक के लिए जागरूकता
    सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की जोर पकड़ती मांग के बीच सोशल-ऑडिट का विचार एक कारगर समाधान क्या कभी आपकी भेंट ऐसे जिला शिक्षा अधिकारी से हुई है, जिससे भरी महफिल में किसी ग्रामीण ने शिक्षा के अधिकार के हवाले से पूछा हो, बताओ ऐसे कितने स्कूल हैं जहां शौचालय ठीक-ठाक बने और काम कर रहे हैं? क्या आपने जिला शिक्षा अधिकारी को आंकड़ों की ओट में तथ्य छुपाते और इस तथ्य-छुपाई पर उसी महफिल में एक से ज्यादा ग्रामीणों के मुंह से टोके और दुरुस्त किए जाते देखा है? अधिकारियों का एेसा व्यवहार...
    April 8, 03:45 AM
  • कन्हैया नहीं, जॉब की कमी खतरा
    भारतीय राजनीतिक जीवन अजीब और विडंबनाअों से भरा है। छात्र नेता कन्हैया कुमार को राजद्रोह और राष्ट्र-विरोधी आचरण के आरोप में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी ने उन्हें हीरो बना दिया। इसे असहमति व्यक्त करने की स्वतंत्रता का प्रतीक माना गया। गृह मंत्री ने गिरफ्तारी का यह गलत तर्क देकर बचाव किया कि असाधारण लोकतांत्रिक देश अमेरिका भी राष्ट्र विरोध को सहन नहीं करता। गिरफ्तारी पर लगातार विरोध ने मीडिया का ध्यान सरकार के शानदार बजट से हटा लिया। एक अद्भुत भाषण में स्वतंत्रता के प्रतीक ने अपना असली...
    April 7, 04:23 AM
  • क्या हम हिंदू पाकिस्तान चाहते हैं?
    कुछ दिन पहले मैं मुझे सुनने के लिए उत्सुक दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्रों के एक समूह से उनके प्रशासकीय ब्लॉक के बाहर बात कर रहा था। विषय था राष्ट्रवाद। तीन छात्र नेताओं पर 9 फरवरी को देशद्रोह का मामला दायर होने और छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को राष्ट्र विरोधी समझने वाले वकीलों द्वारा उनकी अदालत परिसर में पिटाई के बाद से छात्र इस विषय पर बहस-मुबाहिसे में उलझे हैं। मेरे 37 मिनट के भाषण के बाद प्रश्नोत्तर का सत्र हुआ, जिसमें मैंने करीब दर्जनभर छात्र-छात्राओं के सवालों...
    April 6, 04:03 AM
  • केंद्र और राज्यों के चुनाव साथ हों
    भारत की बर्बादी का पूर्वानुमान लगाने वाले उपनिवेशकालीन शासकों की भविष्यवाणी के विपरीत हमारे देश में लोकतंत्र फलता-फूलता गया। चुनाव बार-बार मनाए जाने वाले लोकतंत्र के उत्सवों की तरह हो गए। किंतु इतने बरसों में जैसे-जैसे लोकतंत्र फैलता गया, विभिन्न कारणों से राष्ट्र हर साल पंचायत, नगरीय निकायों, विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में मसरूफ रहने लगा। अब वक्त आ गया है कि हम इस बात पर विचार करें कि क्या लोकतंत्र के इन उत्सवों को मनाने का कोई व्यवस्थित तरीका हो सकता है। केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी,...
    April 5, 03:31 AM
  • सकारात्मकता का नतीजा, 50 लाख पेड़
    जब मैं यह लिख रहा हूं तो करीब 40 साल का काम आंखों में तैर रहा है। यह मेरे आसपास के 136 गांवों में फैला हुआ है। देवभूमि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल और चमौली जिले के इन गांवों में हमने करीब 50 लाख पौधे रोपे। अब ये पहाड़ों पर आसमान चूमते हरे-भरे दरख्तों की शक्ल में सामने हैं, जिन्हें देखने देश-दुनिया के हजारों लोग आते हैं। मशहूर चिपको आंदोलन की प्रेरणा से उपजा यह एक ऐसा फल है, जिसे धरती ने अपनी सेवा के बदले प्रसादस्वरूप हम गांव वालों को लौटाया। मगर आज इन शानदार नतीजों के सामने आने की कहानी ये चार पंक्तियां लिखे...
    April 4, 06:07 AM
  • नौकरी की बजाय खुद का व्यवसाय करने का चलन
    आमतौर पर आजीविका कमाने के दो तरीके होते हैं। आप नौकरी करते हैं या कोई धंधा शुरू कर देते हैं। मेरी युवावस्था में कलकत्ता में हर कोई नौकरी ढूंढता था, क्योंकि इंजीनियर, डॉक्टर या सीए होना बहुत आसान था। मैं कवि हो गया यानी बिलों के भुगतान के लिए दिन में अलग जॉब करना जरूरी था। आज बदलाव यह आया है कि कहीं ज्यादा संख्या में युवा अपना उद्यम शुरू करना चाहते हैं खासतौर पर मंुबई में, जहां मैं रहता हूं। छोटा-मोटा ही क्यों न हो, अपना उपक्रम हो और इसमें वे गर्व महसूस करते हैं। मैंने भी 23 साल पहले अपना उद्यम शुरू...
    April 1, 06:50 AM