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  • कार्य को भार मानें या आभार
    सुबह-सुबह अपने घर के पड़ोस के पार्क में सैर करने हम सब मित्र जाते हैं। उस पार्क में एक जिम भी बन रहा है। घटना बहुत सामान्य है परंतु सामान्य घटनाओं में ही असामान्य अनुभूति होती है। इस पार्क में जो जिम बन रहा है उसका एक भाग पहले बन गया था तथा दूसरे का काम चल रहा है। आप इस दृश्य की मन में कल्पना करें। जिम के अंदर युवा वेट-लिफ्टिंग कर रहे हैं और बाहर मजदूर ईंटें उठा रहा है। जिम में युवक पसीने-पसीने हो रहा है और बाहर मजदूर भी पसीने-पसीने हो रहा है। अगर जिम का प्रशिक्षक युवाओं का भार कुछ बढ़ा दे तो युवा के...
    03:01 AM
  • सीमाएं टूटती हैं तो साकार होते हैं सपने
    मैं हूं इरा सिंघल। मैंने आईएएस टॉप किया है। आज लोग मुझे जानते हैं, लेकिन एक समय मुझे अपनी पहचान के लिए संघर्ष करना पड़ा। मैंने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। बचपन में ही मेरी रीढ़ की हड्डी सिकुड़ने लगी। मेडिकल में इसे रेअरेस्ट माना जाता है। डॉक्टर्स ने इसे स्कोलियोसिस बताया। मुझे उस उम्र में इस बीमारी का पता भी नहीं था। पर मेरी ज़िंदगी में संघर्ष यहीं से शुरू हो गया। ऑपरेशन कराने में जान का खतरा था, तो माता-पिता ने जाेखिम नहीं लिया। मेरी ज़िंदगी अपनी राह पर थी, तो यह स्थिति भी साथ थी। स्कूल में...
    02:53 AM
  • कल्पेश याग्निक का कॉलम: क्यों झूठे हैं मृत्युदंड को समाप्त करने के लिए दिए जा रहे चारों तर्क
    जो कुछ भी गोपनीय रखा जाता है, पूरी तरह बताया और समझाया नहीं जाता, अनेक प्रश्न अनुत्तरित रखकर किया जाता है; वह बाद में सड़ने लगता है। चाहे इस तरह किया गया न्याय ही क्यों न हो। -पुरानी कहावत मृत्युदंड दिया जाना चाहिए कि नहीं? प्रभावी और मेधावी लब्धप्रतिष्ठितों की स्पष्ट राय है - नहीं? उनके चार तर्क हैं : 1. क्योंकि यह तो आंख के बदले अांख का विकृत कानून हो जाएगा। जैसा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि इस तरह तो समूचा समाज अंतत: अंधा हो जाएगा। 2. क्योंकि यह हमें स्टेट किलिंग का अपराधी...
    August 1, 05:52 AM
  • कल्पेश याग्निक का कॉलम: देश इसे कभी माफ नहीं कर सकेगा
    तड़के चार बजना चाहते हैं। इंसाफ के गलियारे गूंज रहे हैं। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। न्यायपालिका का सम्मान सर्वोच्च है। किंतु किसके लिए है इतनी चिंता, इतनी मशक्कत, इतनी बेचैनी? एक आतंकी के लिए, जिसने अपने परिवार से रेकी करवाई थी कि बम वहां फटे, जहां स्कूल के बच्चों की बस गुजरती हो। सेंचुरी बाजार की अकेली साजिश को ही लें तो सुनते ही कांप जाएंगे कि वहां कई दिनों तक याकूब के आतंकियों ने यह पड़ताल की थी कि आरडीएक्स कहां भरें। ताकि ज्यादा से ज्यादा निर्दोष लोगों के टुकड़े-टुकड़े हो जाएं। मैनहोल में भरे थे...
    July 31, 10:25 AM
  • राजन से टकराव में अटके अच्छे दिन
    ऐसा लगता है कि इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था राजनीतिक नेतृत्व बनाम वित्तीय नेतृत्व के विवाद में फंस गई है। एक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बहस छिड़ गई है, जिसका ताल्लुक हमारे केंद्रीय बैंक (भारतीय रिजर्व बैंक) और उसके गवर्नर रघुराम राजन के साथ है। शायद ऐसा पहली बार हुआ है कि लंदन के फाइनेंशियल टाइम्स जैसे अखबारों ने इस संबंध में भारत सरकार, उसके वित्त मंत्रालय और फाइनेंशियल सेक्टर लेजिस्लेटिव रिफॉर्म कमीशन को आड़े हाथों लिया हो। भारत के भीतर भी ऐसे आलोचकों की कमी नहीं है, जो यह मानते हैं कि मोदी...
    July 31, 03:14 AM
  • कलाम पर भास्कर में मोदी का संपादकीय: लिखा- भारत ने अपना ‘रत्न’ खो दिया
    नरेंद्र मोदी। एपीजे अब्दुल कलाम के रूप में भारत ने एक रत्न खो दिया है। लेकिन उस हीरे की चमक और रोशनी हमें उस मंजिल तक पहुंचाएगी, जो उस स्वप्नद्रष्टा ने देखी थी। उन्होंने ख्वाब देखा था कि भारत एक नालेज सुपरपावर (ज्ञान शक्तिपुंज) के रूप में पहली कतार के देशों में शुमार हो। हम उस लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे। वैज्ञानिक पृष्ठभूमि से चलकर राष्ट्रपति पद तक पहुंचे कलाम सच्चे मायनों में जनता के राष्ट्रपति थे और यही कारण था कि उन्हें जनता से अथाह प्यार और सम्मान मिला और शायद उनके लिए सफलता का अर्थ भी यही था।...
    July 30, 08:59 AM
  • डॉ. कलाम के साथ अंतिम सफर
    आठ घंटे हो चुके हैं (यह लिखते वक्त), जब हमने आखिरी बार बात की थी- नींद कोसों दूर है और यादों का सैलाब चला आ रहा है, कभी-कभी आंसुओं के रूप में। 27 जुलाई को हमारे दिन की शुरुआत दोपहर 12 बजे हुई थी, जब हम गुवाहाटी जाने वाली फ्लाइट में सवार हुए। वे अपनी खास शैली का गहरे रंग का कलाम सूट पहने हुए थे और मैंने सराहना करते हुए कहा, बहुत ही अच्छा रंग है! तब मुझे क्या मालूम था कि मैं उन पर फबता अंतिम रंग देख रहा हूं। मानसून के मौसम में 2 घंटे 50 मिनट का हवाई सफर। ऐसे मौसम में हवाई जहाज के थराथराने से मुझे नफरत है जबकि कलाम...
    July 29, 03:18 AM
  • न्याय होता दिखाने की शुरुआत
    सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने 1992 में सर्वसम्मति से निर्णय लिया था कि न्यायपालिका में आम जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए सर्वोत्तम कदम उठाए जाने चाहिए, क्योंकि संविधान के अनुसार जनता का हित ही सर्वोपरि हैं। देश में सर्वोच्च न्यायालय, 24 उच्च न्यायालय तथा 19 हजार से अधिक अधीनस्थ अदालतों का व्यापक न्यायिक तंत्र है। इसी तारतम्य में विधि आयोग एवं संसदीय समितियों की सिफारिशों के आधार पर न्यायपालिका में सुधार के प्रथम चरण में किए गए कार्यों के नतीजे दिखने लगे हैं। सर्वोच्च न्यायालय में...
    July 27, 02:58 AM
  • जो यह नहीं जानता, वो  कुछ और जानता है
    आप क्या जानते हैं, यह तब तक नहीं जानते जब तक कि यह नहीं जान पाते कि आप क्या नहीं जानते।- चीनी कहावत नॉलेज की क्या कोई गति है? - आज पैदा हुआ बच्चा जब 50 वर्ष का हो जाएगा, तो जितना संसार को पता है उसका 97 प्रतिशत नॉलेज सबके लिए उपलब्ध होगा। इस तरह क्या हर एक व्यक्ति विद्वान हो जाएगा? - ज्ञानवान। विद्वान नहीं। इंटलैक्ट होता है। जबकि नॉलेज लेना पड़ता है। दोनों साथ-साथ नहीं हो सकते? - इंटेलीजेंट लोग नॉलेज का शक्तिशाली रूप से उपयोग करते हैं। शशि थरूर के पास अथाह ज्ञान है। किन्तु अंग्रेजों के अत्याचारों का...
    July 25, 09:21 PM
  • ये पांच चुनाव सुधार तत्काल हों
    हमारे गणतंत्र के साथ कुछ बहुत ही गलत हो गया है। हाल ही में शुरू हुए संसद के मानसून सत्र पर अपशकुन के बादल मंडरा रहे हैं। सांसदों को हमारी नाजुक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के बारे में गहरी चिंता होनी चाहिए, हर महीने 10 लाख रोजगार कैसे लाएं यह सोचना चाहिए और वे हैं कि अगले घोटाले के बारे में सोच रहे हैं। जहां विपक्षी सांसदों का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि संसद को कैसे ठप किया जाए, सत्ता पक्ष के सांसद घबराए खरगोशों की तरह भाग रहे हैं। दोनों भूल रहे हैं कि उन्हें क्यों निर्वाचित किया गया था। जब...
    July 25, 03:11 AM
  • भास्कर एक्सपर्ट: पहली बार साजिश रचने वाले को मिलेगी फांसी
    मुंबई. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर दूर तक होगा। यह पहली बार है जब किसी साजिश रचने वाले को मौत की सजा दी जाएगी। मुंबई ब्लास्ट मामले में टाडा कोर्ट ने 12 लोगों को फांसी की सजा सुनाई थी। इनमें से 11 ने बम लगाए थे। याकूब मेनन साजिश में शामिल था। सुप्रीम काेर्ट ने उन 11 लोगों की सजा तो कम कर उम्रकैद कर दी, पर याकूब पर कोई नर्मी नहीं बरती। इस फैसले से टाइगर मेनन और दाउद इब्राहिम को भी मैसेज जाएगा कि भारत का कानून किसी को बख्शेगा नहीं। कुछ लोग कह रहे हैं कि याकूब ने खुद सरेंडर किया था। इसलिए नर्मी हो। पर...
    July 22, 02:56 AM
  • पटरी से उतरता विधायी एजेंडा
    मानसून की बारिश ने जो नमी पैदा की है उसके कारण भारतीय जनता पार्टी को अपने कदम इस समय राजनीति की ज़मीन में गहरे धंसे हुए लग रहे हैं। उसका आलाकमान यह सोच भी नहीं सकता था कि एक असाधारण चुनावी विजय के केवल चौदह महीने के भीतर उनकी सरकार, पार्टी और पितृ-संगठन को ऐसे संकट का सामना करना पड़ेगा, जिसे हल करने की उसके पास कोई तरकीब नहीं होगी। उसकी मजबूरियों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र का विपक्ष के आरोपों में पूरी तरह से डूब जाना बिल्कुल तय माना जा रहा...
    July 21, 02:34 AM
  • वे आज भी फेंके हुए पैसे नहीं लेते किन्तु सरकारें दे क्यों रही हैं?
    मुंशी जी तन्नाए पर जब उनसे कहा गया, ऐसा जुल्म और भी सह चुके हैं तो वे चले गए दुम दबाए। मुंशी जी के लड़के तन्नाए, पर जब उनसे कहा गया, ऐसा जुल्म और पर भी हुआ है तो वे और भी तन्नाए। - हरिवंशराय बच्चन दो पीढ़ियां अमिताभ बच्चन तो जो कुछ भी पैसा लेते होंगे - सभी से लेंगे। ये पैसे उन्हें दिए ही इसलिए जा रहे हैं क्योंकि वे अमिताभ बच्चन हैं। गलती तो सरकारों की है। उन्हें किसान चैनल के लिए बिग-बी ही क्यों चाहिए? जो निजी कंपनियां हैं, उन्हें विज्ञापन के लिए बड़े, आकर्षक...
    July 18, 03:33 AM
  • मुशर्रफ का खेल दोहरा रही है फौज
    पिछले दिनों नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ की मुलाकात के बाद भारत-पाक संबंधों के पटरी पर लौटने की उम्मीद बनने लगी थी, लेकिन इसके ठीक बाद सीमा पर पाक फौज द्वारा गोलीबारी ने करगिल युद्ध की याद दिला दी। अगले हफ्ते करगिल विजय को 16 साल पूरे हो जाएंगे और 1999 में मई से 26 जुलाई तक हुए इस युद्ध को लेकर तब के पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष व बाद में तानाशाह राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के शेखीभरे बयानों की शुरुआत हो जाएगी, जो वे इतने वर्षों से देते आ रहे हैं कि उन्होंने भारतीय सेना का गला पकड़ लिया था, लेकिन गर्दन काटे बगैर छोड़...
    July 17, 03:35 AM
  • गांवों को गोद लेना असली दायित्व
    यूरोप की अर्थव्यवस्था दूसरे विश्वयुद्व के बाद पूरी तरह लड़खड़ा गई थी और उस समय उद्योग को मूलमंत्र मानकर विकास की रूपरेखा तैयार की गई। इसी समय विकास की दिशा में दो बड़े परिवर्तन हुए। पहला विकास की परिभाषा गढ़ी गई, जिसका मतलब सीधा-सा यह था कि उद्योग और उससे जुड़े तमाम आगे-पीछे के आयामों को ही विकास मान लिया जाए। दूसरा इसी के बाद भोगवादी सभ्यता का तेजी से चलन बढ़ा। भारत ने भी स्वतंत्रता के बाद इसे ही प्रगति का बड़ा रास्ता माना और तथाकथित विकास की बेतरतीब दौड़ का हिस्सा बन गया। इसके बड़े परिणाम जो भी रहे हों...
    July 16, 07:43 AM
  • राष्ट्रीय सुरक्षा व निजता दांव पर
    मोदी सरकार भारत की संवेदनशील इमारतों और खुले आसमान में आम आदमी की पल-पल की तस्वीर और एक-एक मिनट का रिकॉर्ड अमेरिका में सेव कराने जा रही है। इन इमारतों में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास, संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, साउथ ब्लॉक, न्यूक्लियर प्लांट व तीनों सेनाओं के हेडक्वाटर्स शामिल हैं। गृह मंत्रालय ने अमेरिकी कंपनी गूगल को गूगल अर्थ से भारत की 3डी तस्वीरें लेने को प्रारंभिक मंजूरी भी दे दी है, जबकि, अमेरिका, चीन सहित कई देशों में राष्ट्रपति निवास और परमाणु ठिकानों...
    July 15, 08:55 AM
  • उदारता देती है जिंदगी को सही अर्थ
    दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहर में नाविक गंगा में नाव खे रहा था। एक के बाद एक घाट पीछे छूट रहे थे। फिर वह लंबे वेदनाभरे क्षणों तक मणिकर्णिका घाट पर रुका। आप पाएंगे कि दिन के किसी भी वक्त वाराणसी में ज्यादातर नौकाएं इसी घाट पर आकर लगती हैं। एक स्थान पर रुकी, लहरों पर उठती-गिरती नौकाएं। दूर उठतीं लपटें धुंध में लिपटी मरीचिका-सी निर्मित करती हैं। एक महीन परदा उस शाश्वत सत्य पर पड़ जाता है, जिससे इनकार नहीं किया जा सकता। जीवन के विराम का सत्य। हजारों वर्षों तक जिंदगी को करीब से देखने वाले इस प्राचीन...
    July 13, 06:45 AM
  • कल्पेश याग्निक का कॉलम: देश का सबसे बड़ा घोटाला, सबसे रहस्यमय मौतें और राहत में शिवराज
    तुम्हारे व्यापक भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करने के बजाय मैं पार्टी को ही शानदार ढंग से दफन करने को प्राथमिकता दूंगा।- महात्मा गांधी, 1935 में गवर्न्मेंट ऑफ इंडियाएक्ट में बनी प्रांतीय सरकार के भ्रष्टाचार से व्यथित होकर अब मैं राहत महसूस कर रहा हूं। एक बोझ-सा था, जो उतर गया। यही घोषणा की थी शिवराज सिंह ने। जब सुप्रीम कोर्ट ने व्यापमं घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने की उनकी बात मान ली। कैसे राहत महसूस कर सकते हैं वे? देश का सबसे दर्दनाक घोटाला उनके कार्यकाल में हुआ है। इतिहास में इतना गहरा, इतना...
    July 11, 01:39 PM
  • दस मौतों का राज सामने आना चाहिए
    वर्ष 1993 में मैं हरदा जिले से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के उद्देश्य से पीएमटी (प्री मेडिकल टेस्ट) की तैयारी के लिए इंदौर आया था। पीएमटी की परीक्षा के दौरान मैं जूलॉजी का पेपर देकर बाहर आया। पेपर अच्छा गया था, लेकिन पता चला कि ग्वालियर में पेपर लीक हो गया था। प्रवेश परीक्षा देने वाले हम छात्रों के भारी विरोध के बाद जूलॉजी की परीक्षा फिर से हुई। तब पीएमटी की प्रतिष्ठा बहुत थी। पहली बार लगा कि पीएमटी के भी पेपर आउट होते हैं। ऐसा कभी सुना ही नहीं था। भरोसा नहीं हो रहा था। एमबीबीएस करने के बाद जब मैंने 2005...
    July 8, 06:21 AM
  • डिजिटल नहीं, औद्योगिक क्रांति हो
    देश की आर्थिक जनगणना के बहुप्रतीक्षित आंकड़ें सार्वजनिक हो गए हैं। पूरे देश की 125 करोड़ आबादी के 24.39 करोड़ परिवारों की आर्थिक स्थिति का लेखा-जोखा 80 वर्ष पश्चात् सामने आया है। इसके अनुसार लगभग 17.91 करोड़ परिवार गांव में रहते हैं और उनमें से 16.50 करोड़ परिवारों की आमदनी 10 हजार रुपए महीने से कम है तथा 13.34 करोड़ परिवार 5 हजार रुपए महीने से कम की आमदनी पर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। गावों में 10.08 करोड़ परिवारों के पास कोई भी कृषि भूमि नहीं है। तकरीबन 9.16 करोड़ ग्रामीण परिवार दिहाड़ी मजदूरी पर जिंदा हैं तथा 35 प्रतिशत लोग...
    July 7, 05:52 AM
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