

‘लूट’ शब्द जो है, ठेठ हिंदी का है। उर्दू में भी उसकी अपनी जगह है। यानी उसका घर हिंदुस्तानी में है, बोलचाल की...
वर्तमान बाजारवाद के दौर में प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से बहुत बेहतर है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की...
पर्व-प्रसंग- कहते हैं श्री हरि व्रत, दान एवं तप से भी उतने प्रसन्न नहीं होते, जितने माघ पूर्णिमा को स्नान करते हुए...
सलमान रुश्दी प्रकरण ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन पर गंभीरतापूर्वक मनन किया जाना चाहिए। मैं इस हालिया विवाद के संदर्भ में पांच बिंदुओं पर अपनी बात कहना चाहूंगा।
पहली बात। हर लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार महत्वपूर्ण है। लोकतंत्र की प्रगति के लिए लिखने, बोलने और अपनी असहमति व्यक्त करने की आजादी जरूरी...
खत्म होने के बाद भी 2012 का जयपुर साहित्य समारोह अभिव्यक्ति की आजादी, कट्टरपंथिता और सेंसरशिप जैसे मुद्दों से जुड़कर सुर्खियां बना रहा है। वजह है भारी पब्लिसिटी के बाद विवादों से घिरे सलमान रुश्दी का इसमें न आना, प्रतिबंधित किताब के अंशों का चार लेखकों द्वारा सार्वजनिक पाठ, फिर (अदालती कार्रवाई के डर से) आयोजकों द्वारा उनको रुखसत करना और समारोह के आखिरी दिन न्यूयॉर्क में बैठे...
भारतीय कॉपरेरेट सेक्टर के अधिकतर वर्गो ने उदारीकरण की प्रक्रिया को किंचित अनिच्छा के साथ स्वीकार किया था, जबकि किसानों के संगठन 1970 के दशक से ही राज्यतंत्र के नियंत्रण से मुक्ति पाने के लिए लड़ाई लड़ते आ रहे थे। अनमने उदारीकरण के बावजूद महज डेढ़ दशक में ही भारतीय कॉपरेरेट का एक बड़ा वर्ग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में आ गया। उसी तरह भारत के किसानों में भी यह...
चाहे स्वाद का मामला हो या भाषा का, नमक के गुण-धर्म अनंत हैं। नमक, सेना नामक उस संस्थान में सम्मान का इशारा करने वाली प्रणाली का प्रतीक है, जो साम्राज्यों और उपनिवेशियों को साथ जोड़े रखता है। यदि आप अपने नमक पर सच्चे थे, तो आपने जिसका नमक खाया, उसके प्रति वफादार बने रहे।
यानी, आप नमकहलाल थे। इसका उल्टा, नमकहराम अभी भी बड़ा चुभने वाला इल्जाम है, हालांकि इस जमाने के नैतिक मूल्य प्राचीन...
इन दिनों भ्रष्टाचार को लेकर हमारे देश में बहुत ज्यादा जागरूकता का माहौल है। भ्रष्टाचार के खात्मे को लेकर आंदोलन या चर्चा-बहस जारी हैं। साथ ही लोकपाल बिल का भी बड़ा हल्ला है। भ्रष्टाचार रूपी दानव के खात्मे में लोकपाल बिल बहुत कारगर होगा, आमतौर पर एेसा माना जा रहा है। जबकि मैं इससे पूरी तरह असहमत हूं। मुझे लगता है, लोकपाल के अलावा भ्रष्टाचार से निबटने के लिए और भी कारगर कदम उठाने की...
सृष्टि के आरंभ में सर्वप्रथम जो शब्द उत्पन्न हुआ, वह ‘ओम’ ही था। सनातन धर्म के समस्त श्लोक एवं मंत्र का आरंभ इसी एकाक्षरी मंत्र से होता है। ओम वह सात्विक शक्ति है, जिसके जाप के समय होने वाले स्पंदन से शरीर के अंदर व्याप्त सभी प्रकार के रोगाणुओं का नाश हो जाता है।
ओम का बारंबार उच्चरण हमारे लिए कई प्रकार से सहायक होता हैं। बीमारियों को भगाने के अलावा हमारे आसपास के वातवरण को रमणीय...
विशेष संपादकीय: जब अमेरिका ने मनुष्य चांद पर उतार दिया, तब एक तीखा व्यंग्य आया। कहा गया- चांद के लिए तो हम भारतीय बेहतर हैं- क्योंकि ‘हम हवा, पानी, रोशनी, खाना और छत के बगैर भी जिंदा रह सकते हैं।’गणतंत्र के मात्र छह दशक में ही इसी भारतीय ने देश को विश्व शक्ति बना दिया। हां, यह अलग बात है कि तंत्र चलाने वालों का क्रूर मजाक अब भी जारी है। महंगाई रोकने में पूरी तरह विफल रहने के बाद कृषि...
एक गणतंत्र के तौर पर भारत दुनियाभर में लगातार मजबूत हो रहा है। बीते 62 साल के दौरान अगर भारत की कोई सबसे अहम कामयाबी है, तो वह यह है कि यहां लोकतंत्र बना हुआ है। यह कोई छोटी-मोटी कामयाबी नहीं है। लोकतंत्र के बने रहने से ही आज देश विकास की राह पर है।
पड़ोसी देशों की अनिश्चितता को देखते हुए भारतीय लोकतंत्र की कामयाबी बेहद अहम पहलू है। देश की ताकत को मापने के लिए सामाजिक और आर्थिक स्थिति...
चाहे जो कारण रहे हों, तथ्य तो यही है कि संसद लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक २क्११ को पारित करने में नाकाम रही है। अब लंबे समय तक दोषारोपणों का सिलसिला चलता रहेगा, लेकिन हममें से कितने लोग इस बारे में विचार कर रहे हैं कि भ्रष्टाचार के दैत्य को मात्र कानून बना देने और संस्थाएं खड़ी कर देने से परास्त नहीं किया जा सकता? वास्तव में यह मौजूदा संस्कृति की कृत्रिमता का ही तकाजा है कि हम लक्षणों...