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  • तर्क क्षमता बढ़ेगी तो सुधरेगा रिजल्ट
    देश में लगभग चालीस स्कूल बोर्ड हैं, जिनमें राष्ट्रीय स्तर पर सीबीएसई तथा आईसीएसई की अपनी अलग प्रतिष्ठा है। फिर लगभग हर राज्य का अपना स्कूल बोर्ड है। इस वर्ष मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के कक्षा दस के परिणामों के अनुसार करीब पचास प्रतिशत बच्चे ही सफल हो पाए हैं। अधिकतर राज्य बोर्ड के नतीजे कमोबेश ऐसे ही रहते हैं। दूसरी तरफ आईसीएसई की परीक्षा में 98 फीसदी बच्चे सफल हुए हैं। इतना बड़ा अंतर क्यों होना चाहिए? यह सवाल हर साल उठता है, लेकिन कुछ समय बाद भुला दिया जाता है। सवाल केंद्रीय व राज्य...
    06:31 AM
  • कानून की कसौटी पर केजरीवाल सही
    दिल्ली के उपराज्यपाल नज़ीब जंग द्वारा मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर पैदा हुआ विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है, जिसे टाला जा सकता था। आदर्श स्थिति में शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को एेसे विवादों से बचना चाहिए और यदि ऐसी स्थिति पैदा हो भी जाती है तो उसे सार्वजनिक नहीं होने देना चाहिए। अब इस विवाद का नतीजा लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर जोर दिए जाने में होगा और उपराज्यपाल के जरिये केंद्र सरकार द्वारा द्वारा नियुक्ति पर निर्वाचित सरकार के अधिकार को वाजिब तरजीह मिलेगी। विवाद की गहराई में जाने...
    May 21, 06:19 AM
  • बदलाव में ही अमेरिका का हित
    दो सबसे शक्तिशाली ताकतों ने हाल के दशकों में दुनिया को बदल डाला है। इतना बदला है कि लगता है नई दुनिया में ही पहुंच गए हैंं। ये ताकतें हैं वैश्वीकरण और सूचना क्रांति। ये दो महान इंजन एशिया को विश्व-व्यवस्था से जोड़ रहे हैं और उस डिजिटल युग का सूत्रपात कर रही हैं, जो अब जीवन के हर पहलू पर छा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के लिए फास्ट ट्रैक ट्रेड अथॉरिटी के प्रति उनकी ही डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ सदस्यों की ओर से हो रहे विरोध में इस युग की हकीकत की ओर से आंखें मूंद ली गई हैं। वास्तविकता यह है...
    May 20, 05:55 AM
  • सेवा और साइकलिंग का जुनून
    हजारों फीट की ऊंचाई। रास्ता अत्यंत ऊबड़-खाबड़। एक तरफ पहाड़ तो दूसरी ओर सैकड़ों फीट गहरी खाई। जमीन पर उतर आए बादलों के कारण पांच मीटर से ज्यादा दूरी तक देखना असंभव। उतार का रास्ता। साइकिल के ब्रेक और संतुलन कायम रखने पर सबकुछ निर्भर। ऐसे रास्ते पर मालूम पड़ता है कि चढ़ाई की तुलना में उतरना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। भूटान रेस के लिए हमने जो भी तैयारी की थी, वहां सब उससे उलटा ही निकला। रैस में चार ऊंचे दर्रे पार करने होते हैं। रास्ता अत्यंत खराब। खाई की तरफ रैलिंग का कोई सवाल ही नहीं और जमीन पर उतर...
    May 18, 06:34 AM
  • साल भर दाैड़ते-उड़ते रहे मोदी; दौड़ती-उड़ती रहीं हमारी उम्मीदें
    खुश रहना है तो दो तरीके हैं- कम खाना और गम खाना। - पुरानी कहावत नरेंद्र मोदी चलते ही इतनी तेजी से हैं कि देखने वालों में तत्काल एक उम्मीद जग जाती है। बराक ओबामा, मोदी से पूरे 11 साल छोटे हैं। नियमित जिम में पसीना बहाते हैं। बॉडी बिल्डर हैं। आप किन्तु उनके साथ मोदी के वीडियो क्लिप देखिए। एक गज़ब की फूर्ति। अमेरिकी राष्ट्रपति उनके बारे में जब भी बोलना शुरू करते हैं, सिर्फ उनकी एनर्जी की बात करते हैं। ऐसा ही अनुभव देशवासियों को पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान हुआ था। वो गरजते। लोग जोश में भर उठते।...
    May 16, 06:59 AM
  • फैसले से न्याय पर उठते सवाल
    सलमान खान को कार से कुचलने के मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद बेहिसाब संपत्ति के मामले में अन्नाद्रमुक नेता जयललिता के बरी होने से कई लोगों की भृकुटियों पर बल पड़े हैं। भारतीय न्यायपालिका के सारे प्रशंसकों के लिए तो यह आघात जैसा ही रहा। सोशल मीडिया निराशा और अविश्वास से भर गया है। लोगों को अचंभा यह है कि बड़े नामों पर मुकदमा चलाना हो तो आमतौर पर न्यायपालिका घोंघे की रफ्तार से चलती है, लेकिन वही न्यायपालिका सेलेब्रिटी को राहत देने के लिए अचानक रफ्तार पकड़ लेती है। हाल में राजनीतिक बदलाव...
    May 14, 06:54 AM
  • भूमि कानून से विकास या महाभारत?
    केंद्र में सत्तारूढ़ नरेंद्र मोदी की सरकार ने हमारे संसदीय जीवन के उस ऐतिहासिक क्षण की तरफ अपने शुरुआती कदम बढ़ा दिए हैं जब भूमि अधिग्रहण कानून बनाने के लिए दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेशन (आजादी के बाद केवल तीसरी बार) बुलाया जाएगा ताकि राज्यसभा के अल्पमत की लोकसभा के बहुमत से भरपाई की जा सके। लोकसभा में दोबारा पेश संशोधित भूमि अधिग्रहण विधेयक पर पहले तीस सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति गौर करेगी और फिर उसे सत्तारूढ़ बहुमत वाले निचले सदन में दोबारा पारित कराने के बाद राज्यसभा में रखा जाएगा। जैसे...
    May 13, 06:51 AM
  • सबसे चर्चित सजा, सबसे विवादित जमानत, सबसे लोकप्रिय दोषी और सबसे गंभीर सबक
    भोपाल गैस कांड में 25 हजार जानें चली गईं- तब दो साल की सज़ा हुई। तब चीफ जस्टिस ए.एच. अहमदी ने कहा था, ड्राइवर से एक्सीडेंट हो जाए, कोई मर जाए, तो मालिक को सज़ा कैसे हो सकती है? सलमान ने यदि किसी बॉलीवुड सितारे को कार दुर्घटना में मार दिया होता- तो क्या बॉलीवुड ऐसी ही प्रतिक्रिया देता? जो सड़क पर सोने वाले गरीबों पर भद्दा बोल रहे हैं- वे वास्तव में सलमान ग्रुप की किसी रणनीति का हिस्सा हैं जो मीडिया का ध्यान बांटने में सफल रहे। - सोशल मीडिया से स्वतंत्र भारत के इतिहास में इतनी चर्चित कोई सज़ा और जमानत...
    May 9, 07:33 AM
  • सुशासन होगा तो शहर बनेंगे स्मार्ट
    पिछले हफ्ते केंद्रीय कैबिनेट ने सौ स्मार्ट शहर बनाने की 48 हजार करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दे दी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश में बदलाव व विकास लाने के वादे का हिस्सा है। किंतु यदि इनका निर्माण हुआ तो ये क्या बदलाव लाएंगे और सरकार ने अपने पहले वर्ष में जो प्रगति की है उससे देखते हुए क्या कुछ संदेह पैदा होते हैं? क्या वे प्रधानमंत्री की सारे लोगों को विकास में साथ ले चलने का वादा भी पूरा करेंगे या ये स्मार्ट शहर, स्मार्ट लोगों के लिए हैं। शहरों में रहने वाले उन भारतीयों का क्या, जो स्मार्ट...
    May 8, 06:05 AM
  • सलमान के बहाने कुछ सवाल
    चर्चित और सफल अभिनेता, काफी हद तक सरल तथा उदार मुंबइया फिल्मी दुनिया के सच्चे प्रतिनिधि और नौजवानों में फिटनेस का क्रेज पैदा करने वाले सलमान खान को गैर-इरादतन हत्या का दोषी करार दिया जाना और सजा मिलना अगर बड़ी खबर बनती है तो इसमें हैरानी की बात नहीं है। आखिर वे उस खान तिकड़ी के सदस्य रहे हैं, जो पिछले पच्चीस वर्षों से हिंदी सिनेमा जगत पर और दर्शकों के मन पर राज करते रहे हैं। उनकी सजा के पहले अगर हिंदी सिनेमा उद्योग और मीडिया इस बात की चर्चा भी करता रहा है कि उनके ऊपर कितने अरब रुपए दांव पर लगे हैं, तो...
    May 7, 06:53 AM
  • हमारे अफगान हितों में चीन की भूमिका
    नेपाल में हुई त्रासदी के कारण अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी की भारत यात्रा पर बहुत ध्यान नहीं दिया जा सका, लेकिन इसके महत्व से कोई इनकार नहीं कर सकता। खासतौर पर तब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते चीन यात्रा पर जा रहे हैं। गनी के स्वागत में दिए भाषण में प्रधानमंत्री ने नेपाल में आए भूकंप का जिक्र कर संवेदनशीलता का परिचय दिया। भूकंप को दक्षिण एशियाई त्रासदी कहा जा सकता है और मोदी ने भारत की भावनाएं व्यक्त करने के साथ नेपाल के पुनर्निर्माण का संकल्प जताकर सही संकेत दिया, जिसे गनी ने...
    May 6, 05:17 AM
  • नेपाल में महाप्रलय की पहली रात
    भूकंप आने से क्षणभर पहले तक काठमांडू के टुंडी खेल मैदान में योग शिविर के तहत एक कार्यक्रम चल रहा था। स्वामी रामदेवजी ने सबको योग व अध्यात्म की बातें बताई। जैन संत महाश्रमणजी भी साधना की चर्चा करते रहे। कार्यक्रम समाप्त हुआ। स्वामी रामदेव से लोग मिल रहे थे। अचानक जोर-जोर की आवाजें आने लगीं। स्वामीजी व कुछ लोग गाड़ी के पास पेड़ को पकड़े खड़े थे। सामने स्थित बाल मंदिर का आधा हिस्सा टूटकर गिर चुका था। कुछ सेकंड में ही चारों तरफ भयावह नजारा था। लोहे के काॅलम में खड़ा टीनशेड वाला पंडाल धराशायी हो गया।...
    May 5, 05:10 AM
  • धर्म का विज्ञान बताने वाले बुद्ध
    आज युग की मांग एक ऐसे सकारात्मक आदर्श की है जो मानवतावादी, सांसारिक और अध्यात्मिक प्रवृत्तियों में तालमेल स्थापित करता हो। राज कुमार सिद्धार्थ से तथागत भगवान बुद्ध तक की यात्रा, इसी समन्वय की यात्रा है। 2600 साल पहले बुद्ध ने धर्म को पारलौकिक आदर्श न मानकर जीवनशैली के रूप में अपनाने की सलाह दी। प्राचीन समय में प्रवृत्तियों के निषेध से आदर्श (ईश्वर) की ओर बढ़ने की परिकल्पना थी। यहां आदर्श, यथार्थ से बहुत ही ऊंचा था। आज 21वीं शताब्दी में मानव ने इतने प्रकार के वैज्ञानिक और तकनीकी उपकरण हासिल कर लिए...
    May 4, 06:33 AM
  • सलमान खान से जाति क्यों पूछी अदालत ने? किसी से  भी क्यों पूछते हैं?
    न्याय की पलक झपकने मात्र से ही अन्याय प्रचंड आंधी बनकर उभर सकता है।- अज्ञात सलमान खान से न्यायालय ने यह क्यों पूछा कि आपकी जाति क्या है? किसी भी पद या नाम पर हों, न्यायालय में प्रत्येक कार्रवाई - यानी एक्शन - न्याय करने के लिए ही होती है। इसीलिए प्रत्येक कार्यवाही - यानी प्रोसिडिंग्ज़ - इसी दिशा में होती है कि अंतत: न्याय मिले। किन्तु काले हिरण शिकार प्रकरण में सलमान की जाति न तो किसी कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है, न ही किसी वैधानिक कार्यवाही को आगे, परिणाम की ओर, बढ़ा सकती है। जाति अथवा धर्म...
    May 2, 07:23 AM
  • शासक से सेवक बनाने की गुत्थी
    लोकतंत्र की शायद सबसे जटिल गुत्थी यह रही है कि नौकरशाही अर्थात ब्यूरोक्रेसी को लोक सेवा या सिविल सर्विस में कैसेे बदला जाए। करीब ढाई सौ वर्षों के अपने इतिहास में लोकतंत्र नौकरों को शासक बनने से रोकते हुए सेवक बनाने का कोई सिक्काबंद फॉर्मूला ईजाद नहीं कर पाया है। यह सवाल लगातार हवा में लटका हुआ है कि ब्यूरो यानी दफ्तर, जिसमें बैठे हुए, क्रेसी यानी तंत्र के संचालक अधिकारियों से लोक अर्थात समग्र समाज के बारे में गहराई से सोचते हुए निष्ठापूर्वक उसकी सेवा कैसे कराई जा सकती है? प्रधानमंत्री...
    April 29, 05:56 AM
  • आपदा राहत ही सबसे बड़ी संवेदना
    नेपाल में आई आपदा के प्रति भारत सरकार और इसकी एजेंसियों की भूमिका काफी राहत देने वाली है। पड़ोसियों के प्रति संवेदना जताने का इससे बेहतर तरीका नहीं हो सकता। इसमें कोई संदेह नहीं कि हाल के महीनों में उत्तराखंड और कश्मीर में बाढ़, ओडिशा में चक्रवात और यमन से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने जैसे अनुभवों से अचानक आने वाली समस्याओं से निबटने की हमारी क्षमता बेहतर हुई है। न्यूज़ चैनल भूकंप के बाद की विभीषिका और राहत कार्यों की सूचनाएं देने में व्यस्त हैं, लेकिन यहां यह जानना जरूरी है कि ऐसे प्रतिकूल...
    April 28, 06:09 AM
  • हमने आधे कर दिए हैं किसान; संख्या में भी और वैसे भी
    किसी का हमने छीना नहीं, प्रकृति का रहा पालना यहीं। हमारी जन्मभूमि थी यहीं, कहीं से हम अाए थे नहीं।- जयशंकर प्रसाद हमने बचपन में पढ़ा था कि देश की 80 प्रतिशत जनता गांवों में रहती है। इनमें अधिकांश खेती पर जीवन यापन करते हैं। ये किसान हैं। आज 60 प्रतिशत लोग गांवों में रहते हैं। आजादी के बाद 1951 में हुई पहली जनगणना में किसानों की संख्या, कुल जनसंख्या का 50% थी। यानी आधा देश किसान था। आज ये घटकर आधे रह गए हैं। 24%, यदि 2011 की जनगणना देखें तो। 40 साल में ऐसा पहली बार हुआ है कि 90 लाख किसान पिछले दस वर्षों...
    April 27, 10:22 AM
  • आमदनी बढ़े तो बेहतर होंगे किसान
    दिल्ली सदमे में है। राजस्थान में दौसा के 41 वर्षीय किसान गजेंद्र सिंह ने किसानों की आत्महत्या के मुद्दे को इसकी दहलीज पर ला खड़ा किया है। यह पहले भी गंभीर समस्या थी, लेकिन आत्महत्या की घटनाएं सत्ता केंद्र से दूर होती थीं, लेकिन अब यह सत्ता के मठाधीशों के नजदीक पहुंचकर उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी एक ट्वीट के जरिए यह बताना पड़ा कि हाड़-तोड़ मेहनत करने वाले किसान खुद को कभी अकेला न समझें। देश के किसानों के लिए बेहतर कल बनाने में हम सब साथ हैं। बेमौसम...
    April 24, 06:32 AM
  • संवेदना की मौत और मंडराते गिद्ध
    यह संवेदना की मौत का दृश्य था। कल तक सूखे, फटे, उजड़े, जकड़े से खेतों के किसी अनजान कोने में वह मर जाता था, राष्ट्र अनजान ही रहता था। उन खाली बर्तनों में अन्न नहीं। कुचले डिब्बों में दाना नहीं, फटे कुर्तों में सिक्के नहीं। तो कोई जंतर-मंतर तो है नहीं। अब मैं कहां जाऊं? यही प्रश्न बचता है। जिसने जहां जाने का तय कर लिया, वह तो वहां चला ही गया। किन्तु जैसे गिद्ध मंडराते हैं, वैसे संवेदना के शव पर चक्कर लगाते सफेदपोश एक और काला अध्याय लिख गए। लिखते चले गए। रचते चले गए। वो संभवत: इतना बड़ा दुर्भाग्य लेकर नहीं...
    April 23, 07:34 AM
  • ये दस कदम उठाकर दिखाएं प्रभु
    गर्मी की छुटि्टयां और भारतीय रेल का अटूट संबंध रहा है। हर भारतीय मन में रेलवे को लेकर छुटि्टयों में की गई यात्रा की कोई न कोई रूमानी याद जरूर होती है। आज ये रूमानी यादें धुंधला गई हैं, क्योंकि सत्तारूढ़ नेताओं ने इसके साथ निजी जागीर जैसा व्यवहार कर इसे कुचल डाला है। रेलवे भारतीय व्यवस्था का लघु रूप है- अक्षम, भ्रष्ट, राजनीतिकरण से बेजार, गैर-जरूरी स्टाफ के बोझ से चरमराती असुरक्षित सेवा।सरकारी एकाधिकार और धन-आवंटन में राजनीति के कारण निवेश व टेक्नोलॉजी के लिए पैसे की तंगी इसकी मूल समस्या है। इस...
    April 23, 06:31 AM
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