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  • August 21, 04:50
     
    राज्यसभा में पश्चिम बंगाल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सौमित्र सेन के खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव पास हो गया है| न्यायमूर्ति सेन पर 1990 के दशक में लगभग 33.23 लाख रुपये के गबन का आरोप है| उस वक़्त वे वकील थे और कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उन्हें एक विवाद सुलझाने के लिए रिसीवर नियुक्त किया था| यह विवाद स्टील कार्पोरेशन आफ इंडिया और शिपिंग कार्पोरेशन के बीच था| सेन पर आरोप है कि उन्होंने...
     

  • August 21, 12:10
     
    भ्रष्ट आचरण के खिलाफ अन्ना हजारे का आंदोलन प्रासंगिक है और इसे समर्थन देना समय की मांग है। आने वाले पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए सभी को उसे उसूलन समर्थन देना चाहिए। उनके आंदोलन से भ्रष्टाचार का खात्मा होता है कि नहीं, यह बाद की बात है। अहम तो यह है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठ रही है। शुरुआत ऐसे ही होती है। अंग्रेजों के विरुद्ध भी ऐसा ही हुआ। पहले मंगल पांडे, फिर झांसी की रानी और...
     

  • August 19, 12:47
     
    अन्ना हजारे की गिरफ्तारी ने कई सवाल खड़े कर दिए। आखिर सरकार ने अन्ना को तिहाड़ जेल क्यों भेजा? अगर अन्ना से खतरा था तो उसी दिन शाम तक उन्हें रिहा करने का फैसला क्यों लिया? अगर अन्ना पहले ही अनशन पर बैठ जाते, तो कौन-सा पहाड़ टूट जाता? क्या सरकार को, कांग्रेस पार्टी को अंदाजा नहीं था कि अन्ना को जेल भेजने की देश में इतनी जबरदस्त प्रतिक्रिया होगी? क्या इसी से डरकर रातों-रात अन्ना को छोड़ने...
     

  • August 18, 10:02
     
    अन्ना से सरकार भन्ना उठी है। सब तरफ अन्ना हैं। अन्ना के नाम के चुटकुले, फोटो, कहानियां-किस्से, फेसबुक कमेंट, पोस्टर, एसएमएस, गाने और न जाने क्या-क्या। सब कुछ अन्नामय है। मीडिया की भाषा चुटीली, रसीली और मटकीली हो गई है। ऐसे जोरदार फुटेज मिल रहे हैं कि लग रहा है कि मीडिया का सावन का सीजन ही शुरू हो गया हो।लेकिन सावन तो नेताओं का भी है। फेब इंडिया के नए झकाझक रंगीन कुर्तों में नेता टीवी...
     

  • August 18, 09:55
     
    रात साढ़े बारह बजे तिहाड़ जेल के गेट नंबर तीन पर अचानक एक व्यक्ति ने पीछे से हाथ पकड़ते हुए मराठी में कहा, ‘मी शरद पोटले। रालेगन सिद्दि हूण आलो (मैं शरद पोटले। रालेगन सिद्दि से आया हूं)। मुझे 1991 में महाराष्ट्र में अन्ना का वह आंदोलन याद आ गया जो नौकरशाही के भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन की शुरुआत कर उन्होंने राज्य सरकार से सीधे कहा था कि भ्रष्ट अधिकारी हटाओ वरना अनशन जारी रहेगा। हफ्ते...
     

  • August 17, 12:06
     
    भूगर्भशास्त्री कहते हैं कि ऊपर से स्थिर दिखने वाली हमारी पृथ्वी का बड़ा हिस्सा समुद्र की गहराइयों के भीतर लगातार करवट लेता रहता है और हलचलों के भूगर्भीय दबाव जब विस्फोटक बन जाएं तो सतह को तोड़कर बाहर फूटते हैं और रातोंरात दुनिया का भूगोल बदल देते हैं। राजनीति की जमीन भी कुछ ऐसी ही है। उसकी सतह पर जब सब कुछ सामान्य दिखता हो, तब भी उसकी अनदिख पाताली गहराइयों में सदियों पुराने...
     

  • August 15, 12:24
     
    प्यारे दोस्तो, एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत 64 वर्षो का सफर तय कर चुका है। यह हम सभी के लिए गौरव और खुशी का क्षण है। साथ ही हमें एक राष्ट्र के रूप में अपने विचारों को पुनर्जीवित करने, अपनी प्रगति की समीक्षा करने और उन चुनौतियों का सामना करने के लिए नई रणनीतियां बनाने की भी जरूरत है, जो 21वीं सदी के भारत के समक्ष मुंह बाए खड़ी हैं। मेरा मानना है कि ऊर्जा और प्रेरणा से भरे...
     

  • August 9, 11:00
     
    केरल के श्रीपद्मनाभ मंदिर से अकूत संपदा का प्राप्त होना दुनियाभर के लिए विस्मय का कारण बन गया है। इस संपदा का मूल्य एक लाख करोड़ रुपए आंका गया है, जबकि मंदिर का एक तहखाना खोला जाना अब भी बाकी है। इसके साथ ही श्रीपद्मनाभ मंदिर संपदा के मामले में तिरुपति सहित दुनिया के किसी भी अन्य धर्मस्थल से आगे निकल गया है। यदि कलात्मक महत्व के आधार पर मंदिर की संपदा का आकलन किया जाए तो यह आंकड़ा...
     

  • August 3, 12:06
     
    पाकिस्तान की युवा व ग्लैमरस विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार का भारत दौरा गलत वजहों से सुर्खियां बना गया। तीन बच्चों की मां हिना सुंदर और युवा होने के साथ पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान से अपने करीबी रिश्तों और अपनी संपन्न पारिवारिक हैसियत के लिए जानी जाती हैं। पाकिस्तान के अमीर खानदानों की परंपरानुसार उन्होंने विदेश से होटल मैनेजमेंट की तालीम हासिल की है, उनकेपति बड़े व्यवसायी...
     

  • August 2, 12:06
     
    जहां हम लगातार यह दावा करते हैं कि 26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर रियासत का भारत में सम्मिलन हो गया था और वह भारत का अभिन्न अंग बन गया था, वहीं हम इसमें कम ही रुचि रखते हैं कि फिलवक्त उस बड़े क्षेत्र में क्या हो रहा है, जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है। जून में इस क्षेत्र के एक हिस्से में विधानसभा चुनाव हुए, लेकिन हमारे मीडिया ने इस घटना को तकरीबन नजरअंदाज कर दिया। यह क्षेत्र अत्यधिक...
     

  • August 1, 09:50
     
    दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की साख दांव पर है। यदि अमेरिका लड़खड़ाता है तो पूरी दुनिया में सुनामी आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। पिछला सप्ताह कठिनाईपूर्ण रोचकताओं से भरा रहा। इससे पहले कि कल (२ अगस्त) तक अमेरिका का सरकारी खजाना खाली हो जाए, राष्ट्रपति बराक ओबामा और रिपब्लिकन्स और डेमोक्रेट्स १४.३ लाख करोड़ डॉलर की कर्ज सीमा बढ़ाने की जरूरत और उसके तरीकों के बारे...
     

  • July 30, 06:41
     
    केंद्र की कांग्रेसनीत संप्रग सरकार ने लोकपाल बिल पर आखिरकार अन्ना हजारे सहित पूरे देश को अजीब से दोराहे पर ला खड़ा किया है| भ्रष्टाचार को मिटाने हेतु मजबूत लोकपाल बिल अवश्यंभावी था मगर सरकार में बैठे नीति-निर्धारण तत्वों ने इसे नकार कर अप्रत्यक्ष रूप से जनता को यह जताने की कोशिश की है कि जो सरकार चाहेगी वही होगा| कैबिनेट ने सरकारी लोकपाल विधेयक के मसौदे पर मंजूरी दे दी है और अब इसे...
     

  • July 26, 01:08
     
    जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों का निजीकरण किया था, तो उनसे पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री हेरॉल्ड मैकमिलन ने यह कहकर उन्हें आड़े हाथों लिया था कि वे ‘घर की दौलत बेच रही हैं।’ आज अन्य यूरोपियन सरकारें, यूरोपियन सेंट्रल बैंक और इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) लामबंद होकर मांग कर रहे हैं कि यूनान वर्ष 2015 तक 50 अरब यूरो का बंदोबस्त करने...
     

  • July 24, 03:36
     
    मौजूदा दौर में बाजारवाद हर ओर हावी है। कला-साहित्य जैसे मूलत: रचनात्मक क्षेत्र में भी इसका असर दिखाई पड़ा है। टेलीविजन में भी आज आप सारे सीरियल में एकरसता पाएंगे। एक समय था, जब दूरदर्शन में विविधताओं भरे रोचक सीरियल आते थे, जिसमें कहानी होती थी, लोगों का जुड़ाव होता था। ‘हम लोग’, ‘बुनियाद’ जैसे सोप ओपेरा थे, ‘फिर वही तलाश’, ‘द ग्रेट मराठा’, ‘और भी गम हैं जमाने के’, ‘अधिकार’ जैसे...
     

  • July 20, 12:39
     
    पिछले सप्ताह की खबरों से जाहिर है कि आतंकी हमला होने पर हकबका जाना और होश संभलने पर कहना कि देश की सुरक्षा में कोई खामी सहन नहीं होगी, बेहतर गुप्तचरी के लिए अमुक-तमुक संस्थान के हाथ मजबूत किए जाएंगे और वारदात करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी, हमारे शिखर नेतृत्व की वैसी ही आदत बन गई है, जैसे कि नागरिकों, मीडिया और विपक्ष द्वारा हताशा और कड़वाहट के साथ शिखर नेताओं, सुरक्षा...
     
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