April 10, 11:47

जिस विकास में विवेक न हो, उसे व्यर्थ कहा जा सकता है। गीता में अव्यभिचारिणी भक्ति की महिमा है। इक्कीसवीं सदी में अव्यभिचारिणी बुद्धि की महिमा न हो, तो ड्रग कल्चर मुंह खोलकर बैठा है। आप किसी ऐसी कार की कल्पना करें, जिसमें एक्सीलेटर तो हो, पर ब्रेक न हो। ऐसी कार की नियति...