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  • February 6, 12:29
     
    बराक ओबामा ने कुछ दिन पूर्व अपने चिरपरिचित अंदाज में शानदार भाषण देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया।   कुछ रिपब्लिकनों ने भी माना कि ओबामा का 2013 का उद्घाटन भाषण अमेरिका के हालिया इतिहास में दिए गए बेहतरीन भाषणों में से एक था। मेरी...
     

  • February 4, 01:07
     
    नरेंद्र  मोदी को भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाए या नहीं, इस संदर्भ में संघ परिवार एक नहीं बल्कि तिहरे पसोपेश में उलझा है। पहला पसोपेश तो संघ परिवार और भाजपा के रिश्तों को लेकर है; दूसरी दुविधा अगले चुनाव के एजेंडे को लेकर है और तीसरी चिंता...
     

  • February 2, 05:36
     
     मानव मूल्यों को छोड़कर, बाकी सभी के मूल्य बढ़ रहे हैं/रहेंगे। जिस गांभीर्य के साथ सरकार ऐसा कर रही है, उससे तो यही लग रहा है कि देश शायद समझ ही नहीं पा रहा कि ‘घाटा’ कितना भयावह होता है। देश संभवत: यह नहीं देख पा रहा कि सरकार की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का लाभ कितना...
     

  • January 30, 12:36
     
    वैसे  तो भारतीय राजनीति के असार संसार में नेताओं की पीढ़ीवार आवाजाही और खुशी-नाखुशी का इजहार निरंतर चलता रहता है, फिर भी हर आम चुनाव की पूर्वसंध्या पर तमाम छोटी-बड़ी पार्टियां, मतदाता का मन थाह कर अपने नेतृत्व क्रम में कई बड़े बदलावों के संकेत सार्वजनिक करने लगती...
     

  • January 29, 12:05
     
    भारत  में जनभावनाएं उफान पर हैं। लोगों का सड़कों पर उतरना यह बताता है कि  उन्हें अब मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर भरोसा नहीं रहा। राजनीति के पुराने तौर-तरीकों को ललकारा जा रहा है, मगर कोई नई राह भी नहीं मिली है।   कोई नहीं जानता कि अगला जनाक्रोश क्या लेकर आएगा। जब...
     

  • February 1, 05:25
     
      ‘फांसी की सज़ा को माफ करना राष्ट्रपति की इच्छा पर निर्भर नहीं है। यह उनका दायित्व है कि माफी देने से अभियुक्त को लाभ तो हो, लेकिन यह भी ध्यान रखें कि उनके फैसले का पीड़ित परिवार पर क्या असर होगा।’   जस्टिस अरिजित पसायत और जस्टिस एसएच कपाड़िया (2006 में माफी के एक...
     

  • January 23, 01:08
     
    अर्थव्यवस्था को उबारने में प्रधानमंत्री शिंजो एबे की नीतियां कितनी कारगर होंगी, यह देखना बाकी है।   जापान  का प्रधानमंत्री निर्वाचित होने के दो हफ्ते बाद शिंजो एबे की सरकार ने सुधारात्मक उपायों के तहत 20.2 लाख करोड़ येन (12.23 लाख करोड़ रुपए) के भारीभरकम पैकेज की घोषणा...
     

  • January 22, 01:42
     
    मैंने हाल ही में 'एपल' के सह-संस्थापक व सीईओ और दुनियाभर में कंप्यूटर की दुनिया बदलने वाले दिवंगत स्टीव जॉब्स की आत्मकथा पढ़ी। इस किताब की शुरुआत में स्टीव जॉब्स अपनी जिंदगी की कहानी के जरिए स्टेनफोर्ड के विद्यार्थियों को बताते हैं कि वे इस मुकाम तक कैसे पहुंचे और...
     

  • January 21, 12:09
     
    यदि  हमें लगता है कि हम एक दोहरी मानसिकता वाले पाकिस्तान के साथ चल रहे हैं, जो कभी शांति के एजेंडे को आगे बढ़ाता है और कभी भारत को लहूलुहान करना चाहता है, तो ऐसा इसलिए है, क्योंकि हम वास्तव में दो पाकिस्तानों से रूबरू हैं।   पहला पाकिस्तान वह है, जिसका प्रतिनिधित्व...
     

  • January 19, 05:03
     
    पिछले  दिनों एक टीवी चैनल पर दिल्ली गैंगरेप पीड़िता के साथी की गवाही ने हमें हमारे समाज की एक तकलीफदेह हकीकत से रूबरू कराया। सड़क पर बुरी तरह घायल पड़ी गैंगरेप पीड़िता और उसके साथी के प्रति वहां एकत्रित लोगों और आसपास से गुजरने वाले कार व ऑटोचालकों की जैसी बेरुखी,...
     

  • January 16, 02:40
     
    एक बर्बर समय में सभ्यता आजादख्याल रिश्तों की झांकियां देखने वाले संस्कारशून्य किशोर के मन में इन लड़कियों को लेकर आकर्षण व प्रतिशोध एक साथ पनपते हैं। हमारे समय में जो चीजें बड़ी तेजी से बदली हैं, उनमें सबसे ऊपर हैं स्त्री-पुरुष के बीच पारिवारिक से इतर रिश्ते।...
     

  • January 14, 12:39
     
    जम्मू-कश्मीर  में नियंत्रण रेखा पर संघर्ष-विराम के उल्लंघनों को दो तरह से देखा जा सकता है। एक तो इसे ईंट का जवाब पत्थर से देने जैसी प्रतिक्रियाओं के रूप में देख सकते हैं। या फिर इसे भारत-पाक के बीच शत्रुता के अगले दौर के शंखनाद के तौर पर देख सकते हैं। पहली संभावना को...
     

  • January 12, 12:13
     
    आज  हमारे सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि कानून में लिखी बातों और हकीकत में उनके अमल में आने के बीच का फर्क बढ़ता जा रहा है। जब कानून अपने वायदों को पूरा करने में नाकाम रहता है तो हम मानने लगते हैं कि यह सख्त नहीं है।   इसमें कई खामियां हैं, जिसके चलते अपराधी सजा से बच...
     

  • January 8, 12:08
     
    पुलिस सुधार एक ऐसा विषय है, जिसे मैं अपने टीवी कार्यक्रमों में पिछले काफी समय से उठाता रहा हूं। हमारे मुल्क में जब आर्थिक सुधारों पर इतनी बड़ी बहस हो सकती है, मल्टीब्रांड में एफडीआई की जरूरत पर इतने विस्तार से चर्चा हो सकती है, तो पुलिस सुधार के बारे में क्यों नहीं? बात...
     

  • January 6, 11:54
     
    वैश्वीकरण यानी ऐसी अखंड दुनिया तैयार करना, जहां पर आर्थिक स्वतंत्रता और सबके लिए ज्यादा अवसरों की खातिर राष्ट्रीय सीमाएं गौण हो जाएं। इंटरनेट इस मामले में बड़ा समताकारी है, जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति अपनी राय अखबार के संपादकों, प्रकाशकों या अन्य मीडिया के गहन...
     
 
 
 
 
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