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  • December 29, 08:03
     
    हाल  ही में टाटा ग्रुप के चेयरमैन पद से रिटायर हुए रतन टाटा विनम्र-मितभाषी हैं और शायद ही कभी शिकायत करते हैं। लेकिन इस महीने की शुरुआत में उन्होंने अपनी वेदना शब्दों में व्यक्त की। उनका कहना था कि सरकार की निष्क्रियता के चलते पूंजी निवेश देश से दूर जा रहा है और ऐसी...
     

  • December 26, 12:20
     
    इस वक्त दुनिया के आर्थिक हालात अच्छे नहीं हैं। अमेरिका के हठधर्मी राजनेता अपने देश को वित्तीय संकट में उलझाने पर आमादा हैं और वे यह नहीं सोचते कि इसका उनके अपने देश के अलावा पश्चिमी देशों की बीमार अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा।   एशिया की बात करें तो जापान की नई...
     

  • December 24, 11:26
     
    यह  बात हमारे सत्ताधीशों या सियासी हलकों में बैठे लोगों को अच्छी तरह समझ में आ गई होगी कि जनता के गुस्से या आक्रोश को बाहर निकलने के लिए हर बार किसी समाजसेवी, राजनेता या आंदोलन की जरूरत नहीं है। यह गुस्सा दुष्कर्म जैसे घिनौने अपराध के खिलाफ खुद-ब-खुद निकलकर बाहर आ...
     

  • December 24, 06:15
     
    दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी के लिए जंग लड़ रही गैंगरेप की शिकार २३ वर्षीय युवती की सलामती के लिए सारा देश दुआ कर रहा है। यह सिर्फ कृत्य की बर्बरता नहीं थी, जिसकी वजह से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। बल्कि जिन आम परिस्थितियों में उसके साथ यह सब हुआ, उससे भी लोग...
     

  • December 19, 01:10
     
    भारत में कई सदियों से जनभाषा की बजाय (क्रमश:) संस्कृत, फारसी या अंग्रेजी ही सत्ता का औपचारिक माध्यम रही हैं। जाति, वंश और धर्म के बूते राज तथा समाज पर अपनी पकड़ मजबूत कर चुके हमारे ताकतवर वर्गो ने सामाजिक रूढ़ियों, राजनीतिक दायरों और धार्मिक विधि निषेधों की मदद से इन...
     

  • December 18, 02:30
     
    मशहूर मनोचिकित्‍सक अरुणा ब्रूटा कहती हैं कि राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर शर्मसार हो गई है। साढ़े नौ बजे रात में एक लड़की, जो अपने पुरुष मित्र के साथ एक बस में सवार हुई, उसके साथ बलात्कार वह भी गैंग रेप हो जाता है। उसके पुरुष मित्र की बेरहमी से पिटाई की जाती...
     

  • December 18, 10:26
     
    पूर्व आईपीएस अधिकारी आमोद कंठ कहते हैं कि राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्ली में मेडिकल छात्रा से चलती बस में सामूहिक बलात्कार की घटना बहुत शर्मनाक है, खतरनाक है। इसके बारे में पुलिस को ही नहीं, हर किसी को सोचने की जरूरत है। दिल्ली शहर, जहां इतनी बड़ी संख्या में पुलिस बल...
     

  • December 18, 01:32
     
    मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मुझे महिला अधिकार संबंधी मसलों को इतना महत्वहीन होते देखना पड़ेगा, वह भी उन लोगों के द्वारा जो महिलाओं की आजादी के संरक्षक होने का दावा करते हैं। ड्रेस कोड मसले पर उठे हालिया विवाद को ही लें। हरियाणा के भिवानी में पिछले दिनों एक कॉलेज...
     

  • December 11, 11:45
     
    अनेक देशों को चीन के अत्यधिक निवेश से ईष्र्या रही है, केवल भारत को ही नहीं, जहां खराब सड़कों का मतलब है बाजार के रास्ते में ही 40 प्रतिशत फसलों का बर्बाद हो जाना। और जापान, जहां 30 प्रतिशत सुरंगें अपना जीवनकाल पूरा कर रही हैं, लेकिन मांग के अनुरूप उनका रखरखाव नहीं हो पा रहा...
     

  • December 11, 06:12
     
    वॉलमार्ट की लॉबिंग से जुड़ी खबर ने संसद में हंगामा खड़ा कर दिया। लेकिन सभी जानते हैं कि आज के दौर का सच यही है। अमेरिका में कॉरपोरेट लॉबिंग को कानूनी मान्यता मिली हुई है। भारत में लॉबिंग छुपछुपाकर अलग-अलग नामों का लबादा ओढ़कर की जाती है। लेकिन सभी का काम एक जैसा...
     

  • December 11, 05:49
     
    कांग्रेस लोकसभा चुनावों से पहले अपने घोषणा-पत्र में किए गए आर्थिक वादों को आक्रामक तरीके से पूरा करने में लग गई है।   मैं   यह कॉलम एक ऐसे समय पर लिख रहा हूं, जब गुजरात चुनाव और ब्रांड नरेंद्र मोदी इन चुनावों में कितने सफल होंगे, यह बहस अपनी चरम सीमा पर है। इस बात को...
     

  • December 10, 05:02
     
    खुदरा   में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर बहस अंतत: समाप्त हो गई। उम्मीद है कि अब इसने उन अन्य गरमागरम बहसों की आत्माओं के बीच अपनी शांतिपूर्ण जगह बना ली होगी, जिनसे हमारा लोकतांत्रिक देश यदा कदा गुजरता रहता है।   हर समय लगता है मानो यह हमारे जीवन-मरण का मुद्दा हो और...
     

  • December 8, 10:45
     
    ‘हमने 2004 में रिटेल में एफडीआई लाने की सोची। और हम हार गए। क्या आप भी 2014 में ऐसा ही भविष्य चाहते हो?’ -वेंकैया नायडू, भाजपा, राज्यसभा में  6 दिसंबर, 2012  ‘आपको तो खुश होना चाहिए। आपने सोचा था और हार गए। हमने तो कर दिखाया। हमारी ही सत्ता जाएगी ना?’ -भालचंद्र मुंगेकर,...
     

  • December 8, 10:37
     
    ‘हमने 2004 में रिटेल में एफडीआई लाने की सोची। और हम हार गए। क्या आप भी 2014 में ऐसा ही भविष्य चाहते हो?’ -वेंकैया नायडू, भाजपा, राज्यसभा में  6 दिसंबर, 2012  ‘आपको तो खुश होना चाहिए। आपने सोचा था और हार गए। हमने तो कर दिखाया। हमारी ही सत्ता जाएगी ना?’ -भालचंद्र मुंगेकर,...
     

  • December 5, 12:06
     
    वैसे तो सतत बदलते देश काल के बीच मनुष्य की सटीक और समयानुकूल परिभाषा सिर्फ साहित्य रच सकता है, पर इधर खुद को हरफनमौला मानने वाले राजनीतिक दल और (उनका फितरतन पीछा करने वाला) मीडिया नागरिकों की सही और समयानुकूल परिभाषा के इकलौते ठेकेदार बन चले हैं।   लिहाजा इन दिनों...
     
 
 
 
 
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