कहते हैं मुसीबत कभी अकेले नहीं आती। वर्ष 2011 में हमने यही होते देखा। अमेरिका की अर्थव्यवस्था 2008 के झटकों से उबरने का प्रयास कर ही रही थी कि यूरोजोन धराशायी हो गया। जापान, जो अपनी दो दशक की जड़ता से वास्तविक रूप से कभी उबर नहीं पाया था, फुकुशिमा हादसे के बाद एक और संकट की गर्त में चला गया। चीन लंबे समय से दुनिया की फैक्टरी बना हुआ है, लेकिन अब उसकी गति भी मंथर हुई है, क्योंकि उसके निर्यातों को प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है।
जहां दुनिया की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मुश्किल में हैं, वहां भारत को सात या साढ़े सात की विकास दर से चमक दिखानी चाहिए थी, लेकिन वह अंधों में काना...