

यह अकारण नहीं है कि ए के एंटनी को ‘संत’ एंटनी कहा जाता है। यदि किसी नेता ने सार्वजनिक जीवन में दशकों बिता दिए हों...
भारतीय राजनीति में जीरो से हीरो और हीरो से जीरो बनने के लिए एक हफ्ता तो छोड़िए, चंद घंटे भी काफी हैं। 14 मार्च...
सही मायनों में ‘डर्टी पिक्चर’ तो राजनीति ही है : निष्ठुर और क्रूरतापूर्ण। पिछले हफ्ते, जिस दिन महान राहुल द्रविड़...
क्या गुजरात वाकई वर्ष 2002 में हुई नृशंस हिंसा से आगे बढ़ चुका है? इसका जवाब इस पर निर्भर करेगा कि सवाल किससे पूछा गया...
वर्ष 1999 में हमें एक ‘टेलीविजन घटना’ का अनुभव हुआ था। हम अमेठी में सोनिया गांधी के चुनाव प्रचार को कवर कर रहे थे, जहां हमारी भेंट उनकी पुत्री प्रियंका से हुई। अगले कई घंटों तक हम उनके साथ उनके संसदीय क्षेत्र का तूफानी दौरा करते रहे। तब टीवी कैमरे इतनी तादाद में नहीं हुआ करते थे, लिहाजा ‘साउंडबाइट्स’ के लिए किसी तरह की कश्मकश भी नहीं हुई।
प्रियंका का व्यक्तित्व टीवी कैमरों के...
अन्ना हजारे के आंदोलन के बारे में हमारा चाहे जो मत हो, लेकिन इसमें संदेह नहीं कि उनके आंदोलन ने राजनीतिक वर्ग में भय की भावना जरूर पैदा कर दी।
एक ऐसे तंत्र पर अपना नियंत्रण खो देने का भय, जिस पर वे दशकों से काबिज हैं। इसलिए हैरानी नहीं होनी चाहिए कि 74 वर्षीय समाजसेवी के हाल-फिलहाल ‘रिटायर्ड हर्ट’ हो जाने से अनेक राजनेताओं का आत्मविश्वास फिर से लौट आया है। यह कुछ ऐसा ही था कि 2011 में...
आमतौर पर मीडिया जिन्हें चढ़ाता है, उन्हें गिरा भी देता है। सीएनएन आईबीएन के इंडियन ऑफ द ईयर अवार्ड के दौरान अन्ना हजारे ने बड़े भोलेपन से स्वीकारा कि उन्हें महाराष्ट्र के क्षेत्रीय नेता से राष्ट्रीय आइकॉन बनाने के लिए मीडिया जिम्मेदार था। ‘यदि आपके कैमरे हर जगह मेरा पीछा नहीं करते तो भला मुझे कौन जानता?’ यह इस समाजसेवी का ईमानदार वक्तव्य था।
अब वही मीडिया मुंबई में अन्ना के...
हम भारतीयों को वर्षगांठ मनाना बहुत भाता है। शायद, हमें लगता है कि सालाना जश्न मनाने के बाद सालभर की बाकी बातों को आसानी से भुलाया जा सकता है। लिहाजा, संसद पर हमले की दसवीं वर्षगांठ पर इस हादसे में जान गंवाने वाले शहीदों के प्रति भावुक आदरांजलियां व्यक्त की गईं, भले ही एक शहीद की विधवा को पेट्रोल पंप आवंटित होने में छह साल लग गए हों।
अब देश एक और वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है : इस...
कई लोगों ने कहा था कि केंटुकी (केएफसी) ढाबों को चलन से बाहर कर देगी, लेकिन ढाबों ने केंटुकी को खदेड़ दिया। कोक और पेप्सी के बावजूद शरबत का अस्तित्व बरकरार है। भारत को कम आंकने की कोशिश न करें।’ ये शब्द एनडीए के पूर्व वित्त मंत्री जसवंत सिंह के हैं।
यह बात उन्होंने 2004 में रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का समर्थन करते हुए कही थी। ‘हमारी 50 फीसदी आबादी (जिसमें छोटे व्यवसायी,...
पिछले आठ माह से भारतीय क्रिकेट प्रशंसक सांसें थामकर उस क्षण की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जब उनके अन्यतम क्रिकेट आदर्श सचिन तेंडुलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना सौवां शतक पूरा करेंगे। लेकिन इस दौरान एक व्यक्ति चुपचाप वह सब करता रहा, जो कि वह पिछले अनेक वर्षो से एक अद्भुत दक्षता के साथ करता आ रहा था। ‘मेड फॉर टीवी’ अनशनों और नयनाभिराम तमाशों के इस दौर में राहुल द्रविड़ ने दृढ़ता और...
पिछले लगभग एक साल के अंतराल में देश में हुए दो बड़े खेल आयोजनों में भारत की दो अलग-अलग तस्वीरें नजर आईं। गत वर्ष अक्टूबर में हुए कॉमनवेल्थ खेलों का आयोजन पुराने भारत के नेता-बाबू गठबंधन द्वारा किया गया था। फॉर्मूला वन ग्रांप्री का आयोजन नए भारत द्वारा स्थानीय निजी उद्यमियों और वैश्विक व्यवसाय के सहर्ष संयोग से किया गया। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन के...
मायावती के दलित स्मारकों पर बहस जारी है। ऐसे में यह कल्पना करना रोचक होगा कि वास्तविक दलित नायक डॉ बाबासाहेब आंबेडकर इस स्थिति में क्या करते। यह तो तय है कि उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री के विपरीत वे अपनी मूर्तियों के निर्माण का हुक्म नहीं देते। आंबेडकर धुर राष्ट्रवादी थे और वे किसी भी किस्म की राजनीतिक व्यक्ति-पूजा को पसंद नहीं करते थे। 1949 में संविधान सभा को संबोधित करते हुए...
आम धारणा यही रही है कि यूपीए में दो सत्ता केंद्र हैं, लेकिन वास्तव में सत्ता केंद्र दो नहीं तीन हैं। यूपीए की अध्यक्षा सोनिया गांधी सर्वोच्च नेत्री हैं, लेकिन उनके पास प्रशासनिक उत्तरदायित्व नहीं हैं। यह जिम्मेदारी वर्ष 2004 में प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को सौंपी गई थी और कैबिनेट का प्रमुख होने के साथ ही उन्हें एक सीईओ-नुमा भूमिका भी निभानी थी।
लेकिन इन दोनों के साथ ही यूपीए में...