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रस्किन बॉण्ड

कई सालों से नंदू का यह सपना था कि उसके कॉफी हाउस को ‘राइटर्स बार’ के नाम से जाना जाए। हो भी क्यों न, जिस कॉफी हाउस...

मैं देवदार के पेड़ों तले खड़ा टैक्सी का इंतजार कर रहा था। नगर निगम चुनावों के एक उम्मीदवार देवीलाल अपने सभी...

जीवन के सफर की वह भोर

बच्चों को स्कूल बंक करने या घर से भागने की हिदायत तो नहीं दी जा सकती, लेकिन कभी-कभी यह इतना बुरा भी नहीं होता। जीवन...

बचपन के दो प्यारे साथी

सर्दियों की वह सुबह मुझे आज भी अच्छी तरह याद है। मैं देहरादून स्थित अपने घर के बरामदे में दादू के साथ टहल रहा था...
 

आधी हकीकत आधा फसाना

कभी-कभी यह जरूर हो सकता है कि दो पुरुष एक-दूसरे की तरह हों, लेकिन दो महिलाएं कभी समान नहीं होतीं। हाल ही में एक बार...

अप्पू और शुतुरमुर्ग की दास्तां, किक का जवाब धोबीपछाड़

दादू को जानवरों से बहुत लगाव था और उनके पास तरह-तरह के पालतू जीव-जंतु थे। इन्हीं में से एक था अप्पू यानी हाथी का...
 

और खबरें

 
 
 

  • January 2, 12:56
     
    ‘हेल्दी ईटिंग’ और ‘हैप्पी ईटिंग’ दो अलग-अलग बातें हैं और जो चीजें खाने में अच्छी लगती हैं, जरूरी नहीं कि वे सेहत के लिए भी अच्छी ही हों और जो चीजें सेहत के लिए अच्छी होती हैं, जरूरी नहीं कि वे खाने में भी लजीज ही लगें। ‘जीभर के हंसिए और अपना खून बढ़ाइए, आलीजाह!’ ये बेन जॉनसन के एक नाटक के शब्द हैं। बेन जॉनसन लेखक होने के साथ ही बढ़िया भोजन, शराब और उत्फुल्ल ठहाकों के प्रेमी भी थे। वैसे...
     

  • December 19, 12:45
     
    मेरे दादू में यूं तो कई खूबियां थीं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी खूबी थी बहुरुपियापन। वे कभी फेरीवाला, कभी बढ़ई तो कभी बागवान बन जाते। वे हर उस व्यक्ति का रूप धरने को तैयार रहते थे, जिसकी हरकतों पर काफी समय से नजर रखे हुए हों। वे लोगों के हावभावों का बहुत नजदीकी से अध्ययन करते थे। उनका पहनावा तो सीधा-सादा था, लेकिन उनकी आलमारी में दुनिया-जहान के कपड़े होते थे, जैसे धोती, लुंगी, पायजामा,...
     

  • November 29, 12:34
     
    टिमोथी की खोज मेरे दादू ने देहरा के निकट तेराई जंगल में एक शिकार अभियान के दौरान की थी। टिमोथी एक बाघ शावक था। मेरे दादू शिकारी नहीं थे, लेकिन चूंकि वे शिवालिक हिल्स के जंगलों के बारे में किसी भी अन्य व्यक्ति से अधिक जानते थे, इसलिए शिकार पार्टी उन्हें अपने साथ ले गई थी। पार्टी भी कोई ऐरी-गैरी नहीं थी, उसमें दिल्ली के कई बड़े नाम शामिल थे। शिकार के लिए शानदार कैम्प लगाया गया था। हर...
     

  • November 21, 12:47
     
    यदि आप अंकल केन के साथ हैं तो मानकर चलिए कि कुछ न कुछ जरूर होने वाला है। अंकल के साथ सामान्य परिस्थितियां भी असामान्य हो जाती थीं। लेकिन इसके बावजूद मम्मी ने उन्हें मेरे साथ इंग्लैंड रवाना कर दिया। उन्हें लगा कि महज सोलह साल का लड़का विदेश यात्रा कैसे करेगा, लिहाजा मुझे अंकल जैसे किसी मार्गदर्शक की जरूरत होगी। अंकल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई कि वे मुझे इंग्लैंड में अपनी आंटी के...
     

  • November 15, 12:11
     
    मैं पैंतालीस साल पुरानी उस सुबह को याद करने की कोशिश कर रहा हूं, जब मेरा पहला उपन्यास छपकर आया था। मैं उन्नीस साल का था और हाल ही में इंग्लैंड से लौटा था, जहां मैंने दफ्तरों में नीरस काम करते हुए तीन साल काटे थे। मैं छुट्टी के दिन लिखता था और अपनी प्रतिभा से साहित्यिक संपादकों को चमत्कृत कर देने का प्रयास करता था। आखिरकार मुझे एक प्रकाशक मिला। लेकिन देहरादून की उस उमसभरी सुबह को...
     

  • October 22, 01:00
     
    मैंने अपना जीवन यायावरों की तरह बिताया है। मेरे पास कार नहीं है और न ही मुझे कार चलाना आती है। कार तो क्या, मुझे मोटरसाइकिल, बस, ट्रैक्टर, ट्रक, हवाई जहाज, स्टीमरोलर कुछ भी चलाना नहीं आता। जब मैं छोटा था, तब मेरे पास एक साइकिल जरूर हुआ करती थी। लेकिन एक बार मैं पूरी स्पीड से एक बैलगाड़ी से जा भिड़ा और मेरी साइकिल के अस्थिपंजर ढीले हो गए। उसके बाद बैलगाड़ी वाले ने मुझे रोड सेंस पर एक...
     

  • October 15, 12:16
     
    शरलॉक होम्स के लिए दरवाजे पर दस्तक का अर्थ था एक बेचैन क्लाइंट। नीरो वूल्फी के लिए उसका अर्थ था एकांत में दखल देने वाली ध्वनि। एडगर एलन पो के लिए उसका अर्थ हो सकता था कोई अतींद्रिय अनुभव यानी दस्तक दी तो गई है, किंतु शायद दरवाजे के उस तरफ कोई भी मौजूद नहीं है! बहरहाल, मेरे दरवाजे पर दस्तक देने वालों में न तो कोई क्लाइंट होता है और न ही अदृश्य आत्माएं। माजरा कुल जमा यही है कि चूंकि मैं...
     

  • September 19, 12:16
     
    बूढ़ा बागवान धुकी अपनी खुरपी लेकर दिनभर काम करता रहता था। मुझे भी धरती को कुरेदना अच्छा लगता था। मैं कई बार धुकी की मदद करने की कोशिश करता, लेकिन वह मुझे अपने काम में दखलंदाजी नहीं करने देता। वह कहता था कि मेरे कारण उसकी मेहनत चौपट हो जाएगी। मुझे लगता है सभी समर्पित और निष्ठावान बागवान ऐसे ही होते हैं। वे अपने काम में किसी की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं करते। लिहाजा मैंने तय किया कि मैं...
     

  • September 12, 12:11
     
    तुम नाकारा हो। न तो तुम बोलते हो, न गाते हो और न नाचते हो!’ इन शब्दों के साथ रूबी आंटी रोज अपने अभागे तोते को कोसतीं और वह बेचारा पिंजरे में बैठा बरामदे की ओर टुकुर-टुकुर ताकता रहता। यह मेरी नानी के बंगले का बरामदा था। एक जमाना था, जब लगभग हर कोई, फिर चाहे वह भारतीय हो या यूरोपियन, तोतों को पालना पसंद करता था। कुछ लोग लवबर्डस भी रखते थे। तोतों की इस खूबी के बारे में तो सभी जानते हैं कि वे...
     
 
 
 
 
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