

नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए बहुचर्चित एवं बहुप्रचारित उपवास का राष्ट्र के नाम संदेश क्या रहा, इसका पता गुजरात...
वह वर्ष 1984 में हुए आम चुनाव में तमिलनाडु की शिवगंगा सीट से पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए थे। प्रधानमंत्री डॉ...
देश मेंसबसे अधिक सुरक्षा प्राप्त शहर दिल्ली आज सबसे ज्यादा असुरक्षित बन गया है। केवल तीन महीने तेरह दिन बाद ही...
विक्रम संवत 2068 के भादो मास के कृष्ण पक्ष की तेरस या फिर इक्कीसवीं शताब्दी के वर्ष 2011 के 27 अगस्त के शनिवार का दिन...
अन्ना जीत गए हैं। वे हजारों लोग जो दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रत्यक्ष उपस्थित हैं और वे करोड़ों अन्य जो देश के अलग-अलग हिस्सों और दुनियाभर में अपनी सांसें थामे हुए पल-पल के घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं, अब उस अद्भुत क्षण की प्रतीक्षा में हैं जब यह घोषणा भी होगी कि अन्ना, अन्न ग्रहण करने वाले हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 64 वर्षो के उथल-पुथल भरे इतिहास के दौरान यह पहला अवसर है जब...
अनशन अन्ना हजारे कर रहे हैं, जान सरकार की दांव पर लगी है। कड़कती धूप में शरीर अपना आंदोलनकारी जला रहे हैं, पसीना वातानुकूलित कमरों में चहलकदमी कर रही सरकार का बह रहा है। सरकार की चिंता आंदोलनकारियों के लगातार तेज होते नारे नहीं, अन्ना की लगातार धीमी पड़ती आवाज है।
अब उसके सारे प्रयास इसी दिशा में हैं कि अनशन तोड़ने के लिए ‘किसी भी तरह से’ अन्ना को मना लिया जाए। अन्ना तैयार नहीं हो...
तिहाड़ जेल से बाहर निकलने के बाद अन्ना हजारे रामलीला मैदान में उमड़ने वाले जन-सैलाब की आसमानी उम्मीदों को कैसे पूरी करने वाले हैं? देश की जनता को उसके समर्थन के लिए धन्यवाद देने के बाद क्या अन्ना यही सूचना देने वाले हैं कि जन लोकपाल की स्थापना को लेकर सरकार के साथ उनकी टीम का समझौता हो गया है? और कि उनके साथी जन लोकपाल के दायरे से प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को बाहर रखने पर तैयार हो...
अन्ना हजारे और उनके समर्थकों के साथ दिल्ली में लालकिले की नाक के नीचे जो कुछ भी मंगलवार को हुआ उसके लिए गृहमंत्री ने ‘अफसोस’ व्यक्त किया है पर साथ ही यह भी जोड़ा है कि ऐसा करना जरूरी हो गया था। चार जून की आधी रात को दिल्ली के रामलीला मैदान में पुलिस के बल प्रयोग के बाद भी सरकार ने ऐसा ही अफसोस जाहिर किया था और कहा था कि ऐसा करना जरूरी हो गया था। देश में चलने वाले किसी भी शांतिपूर्ण...
विपक्षी दल इस समय ‘मजा आ रहा है’ की मुद्रा में हैं। वे आनंदलोक की स्थिति में हैं कि सरकार का एक और मंत्री विदा हो गया। सरकार जितनी ज्यादा कमजोर होती जाती है, विपक्ष के लिए जश्न मनाने का कारण भी उतना ही मजबूत बनता जाता है। पर देश की जनता के साथ ऐसा कतई नहीं है।
सरकारों का कमजोर होना जनता को ही सबसे ज्यादा परेशान करता है। टीवी चैनलों पर सरकार के खिलाफ विपक्षी नेताओं के आक्रामक तेवरों...
देश को एक गैर-जरूरी बहस में व्यस्त किया जा रहा है कि राहुल गांधी अब प्रधानमंत्री का पद संभालने के योग्य हो गए हैं। यह कांग्रेस पार्टी का एक अंदरूनी मामला है कि वह सरकार चलाने के लिए राहुल गांधी को जिम्मेदारी सौंपने का फैसला कब करती है। ईमानदारी से कहा जाए तो निर्णय पार्टी को भी कम और राहुल गांधी को ही ज्यादा करना है।
वर्ष 2004 के चुनावों के बाद जब कांग्रेस ने सरकार बनाने की हैसियत...