वेद प्रताप वैदिक

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  • अयोध्या का हल सिर्फ बातचीत से ही होगा
    अयोध्या विवाद बातचीत से सुलझाया जाए, यह बात सर्वोच्च न्यायालय ने क्यों कही है? यदि हम इस झगड़े को निपटाना चाहते हैं तो पहले हमें इसी पहेली को हल करना चाहिए। सबसे बड़ी अदालत ने कोई फैसला नहीं दिया लेकिन, 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 61 साल से चल रहे मुकदमे का फैसला दे दिया था। क्या उसे तीनों पक्षों ने मान लिया? इसके बावजूद नहीं माना कि सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला- तीनों को अदालत ने विवादास्पद जमीन बांट दी थी। तीनों संतुष्ट हो सकते थे लेकिन, न हिंदू संतुष्ट हुए और न ही मुसलमान! न विश्व...
    March 25, 07:24 AM
  • आज के नतीजे तय करेंगे मोदी की दिशा
    पांच राज्यों के चुनावों ने इस बार देश को जैसा दंगल दिखाया है, शायद वैसा पहले कभी नहीं देखा गया। पहले हम यह जान लें कि इस चुनावी दंगल की खूबियां क्या-क्या रहीं और फिर हम इस मूल विषय की विवेचना करेंगे कि इस दंगल से निकले चुनाव-परिणाम क्या-क्या हो सकते हैं और भारत की राजनीति पर उनका क्या प्रभाव होगा। पहली बात तो यह कि इस बार लोग वोट डालने के लिए पहले से ज्यादा निकले। जब मतदान ज्यादा होता है तो यह माना जाता है कि लोग किसी लहर में बहकर बाहर निकले हैं लेकिन, इस बार 2014 के चुनाव-जैसी कोई लहर दिखाई नहीं पड़ी।...
    March 11, 02:58 AM
  • विराट आंदोलन ही रोक सकता है खर्चीली शादियां
    किसी भी विवाह-संस्कार, शादी, निकाह, आनंद कारज या वेडिंग में जरूरी खर्च कितना होता है? मुश्किल से हजार रुपए! हवन में कितने की सामग्री, कितने का घी और कितने की समिधा आएगी? निकाह, आनंद कारज और वेडिंग-सेरेमनी में तो इतना खर्च भी नहीं है। सिर्फ आयतें, गुरुवाणी या वर्सेस पढ़ी जानी होती हैं। यदि ये संस्कार न हो तो क्या किसी हिंदू, मुसलमान या सिख की शादी हो सकती है? नहीं हो सकती। हां, अदालती शादी हो सकती है लेकिन, उसका खर्च तो और भी कम है। कहने का मतलब यह कि असली शादी पर इतना कम खर्च होता है कि गरीबी की रेखा के नीचे...
    February 25, 05:07 AM
  • हिंदुत्व की नई परिभाषा में है सच्चा राष्ट्रवाद
    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने मध्यप्रदेश यात्रा के दौरान ऐसा बयान दे दिया है, जो हिंदुत्व शब्द की परिभाषा ही बदल सकता है। अभी तक भारत में हिंदू किसे कहा जाता है और अहिंदू किसे? पहले अहिंदू को जानें। जो धर्म भारत के बाहर पैदा हुए, वे अहिंदू यानी ईसाई, इस्लाम, पारसी, यहूदी आदि! जो धर्म भारत में पैदा हुए, वे हिंदू यानी वैदिक, पौराणिक, वैष्णव, शैव, शाक्त, जैन, बौद्ध, सिख, आर्यसमाजी, ब्रह्म समाजी आदि। इन तथाकथित हिंदू धर्म की शाखाओं में चाहे जितना भी परस्पर सैद्धांतिक विरोध हो, उन सब...
    February 11, 03:50 AM
  • कैसी होगी ट्रम्प और मोदी की जुगलबंदी?
    अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अच्छा संवाद कायम हो गया है। दोनों दो बार फोन पर बात कर चुके हैं और चुनाव-अभियान के दौरान हजारों प्रवासी भारतीयों के बीच ट्रम्प कह चुके हैं कि आई लव हिंदू एंड इंडिया। इसके अलावा चार-पांच भारतीय मूल के लोगों को उन्होंने काफी जिम्मेदारी के पद भी दे दिए हैं। ट्रम्प अपने मन की बात बिना लाग-लपेट कहने के लिए ख्यात हो चुके हैं। उन्होंने कई देशों के बारे में काफी सख्त टिप्पणियां भी की हैं लेकिन, भारत के विरुद्ध उन्होंने...
    January 28, 03:19 AM
  • एकतंत्र बनता जा रहा है हमारा लोकतंत्र
    ढाई साल के मोदी राज में देश किस दिशा में जाता रहा है, यह प्रश्न पूछने का समय अब आ गया है। यह महसूस हुआ है कि कोई प्रधानमंत्री है और धमाकेदार है, जबकि उसके पहले के दस वर्षों में यह पता लगाना पड़ता था कि प्रधानमंत्री कौन है। उन दिनों नीतियां कौन बना रहा था और उन्हें कौन लागू कर रहा था, यह बताना भी आसान नहीं था लेकिन, अब तक प्रधानमंत्री मोदी की कार्यपद्धति ऐसी रही है कि भारतीय लोकतंत्र, अब एकतंत्र (मोदीतंत्र) में बदलता दिख रहा है। इसके फायदे भी हैं और नुकसान भी हैं। फायदे कई हैं। जब प्रधानमंत्री...
    January 14, 04:42 AM
  • फैसलों में भावुकता नहीं स्पष्ट दृष्टिकोण जरूरी
    उड़ी हमले पर पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग करने के बाद ही गोवा में हुए ब्रिक्स सम्मेलन की घोषणा में सिर्फ आईएस और अलकायदा के एक गुट का नाम लिया गया, जो रूस व चीन के लिए खतरा है, भारत के लिए नहीं। क्या इसका मतलब यह है कि आतंकवाद पर दुनिया को हमसे सहानुभूति नहीं है? नहीं ऐसा नहीं है। यहां तक कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के दोस्त चीन ने भी उसे कोई राहत नहीं दी। बल्कि वह उसे अपने यहां के गुटों को काबू में रखने की सलाह देता रहता है। वजह यह है कि पाक- रूस, चीन, ईरान को आईएस से लड़ने में उपयोगी लगता...
    December 31, 03:37 AM
  • अब भ्रष्टाचार पर असली वार करे सरकार
    पिछला साल हमारी सरकार और जनता के लिए जैसा बीता, वैसा बीता लेकिन, अब नए साल में हम क्या करें? नया साल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भाजपा सरकार की आधी अवधि बीत चुकी है। शेष अवधि यह तय करेगी कि अगले चुनाव में वह लौटेगी या नहीं! यह 2017 का नया साल तय करेगा कि आने वाले कई वर्ष हमारी जनता के लिए कैसे वर्ष होंगे। पिछले संसदीय चुनाव के दौरान मैंने कई जन-सभाओं में नई सरकार के लिए जो एजेंडा पेश किया था, उसमें पहला मुद्दा था- गरीबी हटाने का। इस मामले में पिछले ढाई साल लगभग खाली चले गए। न तो करोड़ों नए रोजगार पैदा...
    December 30, 06:14 AM
  • अब नोटबंदी को ही बंद करने का वक्त
    नोटबंदी से उत्पन्न परेशानियों को लेकर विरोधी दलों के नेता राष्ट्रपति से मिले हैं लेकिन, राष्ट्रपति क्या कर सकते हैं? बहुत हुआ तो प्रधानमंत्री को सलाह दे सकते हैं बशर्ते कि उन्हें किसी की सलाह की जरूरत हो। नोटबंदी की नाव अभी किनारे पर ही थी कि वह भंवर में फंस गई। अपनी नाव को तैरा ले जाने के लिए सरकार ने क्या-क्या द्राविड़ी प्राणायाम नहीं किए लेकिन, मर्ज बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की। अब सरकार को नकदबंदी का नया मंत्र हाथ लगा है। नकद की जगह क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, पेटीएम, इंटरनेट बैंकिंग आदि के...
    December 17, 03:43 AM
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