वेद प्रताप वैदिक
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  • विदेश में दिखावा ज्यादा, नीति कम
    विदेश नीति के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहला साल कैसा रहा, यह प्रश्न सभी पूछ रहे हैं। सच कहा जाए तो उनका यह साल विदेश नीति का साल ही रहा है। पहले साल में मोदी ने जितनी विदेश-यात्राएं की हैं, अब तक किसी प्रधानमंत्री ने नहीं की। मोदी न तो विदेश नीति के अध्येता रहे हैं और न ही वे कभी विदेश मंत्री रहे हैं, जबकि जवाहरलाल नेहरू आजादी के पहले से कांग्रेस का विदेश विभाग संभाले हुए थे। अटलजी 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रह चुके थे और नरसिंह राव भी दो बार विदेश मंत्रालय संभाल चुके थे, लेकिन इन सबके...
    May 23, 05:32 AM
  • भारत-चीन : 21वीं सदी का सपना
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय चीन में हैं। प्रधानमंत्री के तौर पर यह उनकी पहली चीन-यात्रा है, लेकिन इसके पहले मुख्यमंत्री के तौर पर वे चार बार चीन जा चुके हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद वे शायद किसी भी देश में चार बार नहीं गए हैं और जहां तक मुझे याद पड़ता है कि चीनी सरकार ने इस भारतीय मुख्यमंत्री का उतना ही भाव-भीना स्वागत किया था, जितना कि किसी विदेशी प्रधानमंत्री का किया जाता है। यह भी तब जबकि भारत में कांग्रेस की सरकार थी। शायद इसीलिए मोदी के सत्तारूढ़ होते ही चीन के प्रधानमंत्री और फिर...
    May 16, 07:06 AM
  • कोर्ट को गुमराह करना ज्यादा गंभीर
    जमानत पर छूटे फिल्मी सितारे सलमान खान को मिलने के लिए मुंबई के कई कलाकार और नेतागण उनके घर पहुंच गए, यह स्वाभाविक है। हो सकता है कि सलमान लोगों के अच्छे दोस्त हों। वे लोकप्रिय अभिनेता तो हैं ही। उनके साथियों और प्रशंसकों को इस बात की पीड़ा है कि उन्हें पांच साल की सजा हो गई तो इस पीड़ा को भी गलत नहीं कहा जा सकता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जो लोग सलमान से मिलने गए, वे यह मानते हैं कि सलमान बेगुनाह है या उन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए थी। मित्र उन्हें ही माना जाता है जो विपद् में काम आएं। सलमान इस समय घनघोर...
    May 9, 06:30 AM
  • अफगान की उपेक्षा महंगी पड़ेगी
    अफगान राष्ट्रपति डाॅ. अशरफ गनी की भारत-यात्रा ऐसे विकट समय के दौरान हुई, जबकि नेपाल के भूकंप का साया सारे दक्षिण एशिया पर मंडरा रहा था। इसीलिए उन्हें जितना महत्व मिलना चाहिए था, नहीं मिला। उनकी यात्रा के ऐन मौके पर उनके अपने देश अफगानिस्तान में हुए आतंकी हमले ने ऐसी अफरा-तफरी मचाई कि वे नई दिल्ली कई घंटे देर से पहुंचे। यूं भी भारत को शिकायत थी कि अशरफ गनी राष्ट्रपति बनने के लगभग सात माह बाद भारत आए। इसके पहले वे अमेरिका, चीन, ईरान और दो बार पाकिस्तान हो आए। इसका क्या मतलब लगाया जाए? क्या इसका मतलब...
    May 2, 05:40 AM
  • गजेंद्र की मौत पर मगर के आंसू
    आम आदमी पार्टी की रैली के दौरान गजेंद्र सिंह की मौत से सारा देश स्तब्ध रह गया। हजारों किसानों की मौत वैसी खबर नहीं बना पाई, जैसी कि यह बन गई। यदि गजेंद्र सिंह वाला हादसा नहीं होता तो शायद आप की उस रैली को उतना महत्व भी नहीं मिलता, जितना कांग्रेस की रैली को मिला था। आप की रैली किसानों की कम, शहरियों की ज्यादा थी लेकिन गजेंद्र ने उस रैली पर सारे देश का ध्यान टिका दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से लेकर राहुल गांधी और सीताराम येचुरी ने भी आंसू बहाने में कोई कोताही नहीं की।...
    April 25, 05:56 AM
  • मोदी को राहत देने वाली यात्रा
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह त्रि-राष्ट्रीय विदेश-यात्रा अब तक की सभी विदेश-यात्राओं में सबसे अधिक सफल मानी जा सकती है। फ्रांस, जर्मनी और कनाडा यूं भी पूर्व के उन देशों से कहीं अधिक शक्तिशाली और संपन्न हैं, जिनमें मोदी अब तक गए थे। मोदी पहले पड़ोसी देशों में गए और फिर पूर्व के और अब पश्चिम के देशों में गए। अमेरिका तो पहले ही हो आए थे। यूरोप के देशों और कनाडा के साथ भारत के संबंध जितने घनिष्ट हो सकते थे, नहीं हुए । यदि उसके कारणों में हम यहां गहरे न उतरें तो भी यह तो मानना पड़ेगा कि मोदी की इस यात्रा...
    April 18, 05:52 AM
  • मर्यादा का पालन तो करना ही होगा
    विदेश राज्यमंत्री जनरल विजयकुमार सिंह ने पत्रकारों को प्रेस्टीट्यूट कह दिया। इस शब्द पर पत्रकारों का तिलमिला जाना स्वाभाविक है। यूं तो प्रेस्टीट्यूट का शाब्दिक अर्थ जरा भी आपत्तिजनक नहीं है, क्योंकि उसका अर्थ यही होगा- प्रेस नामक संस्था! लेकिन कई पत्रकार संगठनों ने जनरल सिंह की कड़ी भर्त्सना की है। क्यों की है? क्योंकि यह शब्द प्रेस्टीट्यूट अंग्रेजी के प्रॉस्टीट्यूट शब्द का रूपान्तर है। प्रॉस्टीट्यूट का अर्थ होता है वेश्या यानी पत्रकारिता वेश्यावृत्ति है। इन दोनों शब्दों के...
    April 11, 06:32 AM
  • भाजपा की लुढ़कन कैसे रुके
    बेंगलुरू में चल रही भाजपा की कार्यकारिणी की बैठक में क्या होगा? लगभग 300 सदस्यों की इस समिति का नाम कार्यकारिणी है। क्या-क्या कार्य करती है, यह? कुछ नहीं। कार्य करते हैं पार्टी के पदाधिकारी लोग और सत्तारूढ़ दल के मंत्री लोग। वास्तव में कार्यकारिणी तो होती है, विचारकारिणी। किसी भी पार्टी या सरकार में विचार या विचारधारा का कितना महत्व होता है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि कार्यकारिणी की बैठक साल-साल भर में होती है और सिर्फ दो दिन में 300 लोगों के विचार जानने की कोशिश की जाती है। वास्तव में...
    April 4, 06:27 AM
  • ‘आप’ में सिर्फ अहंकारों का द्वंद्
    स्वतंत्र भारत में कई राजनीतिक पार्टियां पैदा हुईं और उनमें टूट भी हुई, लेकिन आम आदमी पार्टी इस कगार पर इतनी जल्दी पहुंच जाएगी इसकी आशंका किसी को भी नहीं थी। उनको भी नहीं, जो इस पार्टी को सिर्फ नौसिखियों की नौटंकी समझ रहे थे। दिल्ली की प्रचंड विजय के बाद तो ऐसा लगने लगा था कि यदि आप ठीक से काम करती रही तो वह राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का विकल्प बनकर उभर सकती है और अरविंद केजरीवाल तो नरेंद्र मोदी के विकल्प दिखने लग ही गए थे। किंतु सिर मुंडाते ही ओले पड़ने लगे। अभी दिल्ली राज्य में सरकार बने दो माह भी...
    March 28, 05:33 AM
  • कश्मीर : मोदी बढ़ें अटलजी की राह
    जम्मू कश्मीर की विधानसभा के बजट सत्र का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल वोहरा ने दो-टूक शब्दों में कहा कि मुफ्ती मोहम्मद सईद सरकार कश्मीर समस्या के हल के लिए सभी आंतरिक तत्वों से बात करने को तैयार है। आंतरिक तत्वों का अर्थ है- हुर्रियत। उन्होंने हुर्रियत को बात करने का खुला निमंत्रण दिया है। इसमें एक अर्थ और छिपा हुआ है। वह यह है कि मुफ्ती सईद की सरकार सिर्फ एक प्रांतीय सरकार है। वह सिर्फ प्रांतीय लोगों से बात कर सकती है। विदेशी लोगों से नहीं। पाकिस्तानियों से नहीं। यहां मुख्य सवाल यह है कि क्या...
    March 21, 05:52 AM
  • हिंद महासागर में फहरे हिंद का झंडा
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हिंद महासागर-यात्रा काफी सार्थक रही। उन्होंने सेशल्स, मॉरीशस और श्रीलंका की यात्रा की। वे मालदीव भी जाने वाले थे, लेकिन वहां चल रही आंतरिक उथल-पुथल के कारण उन्होंने वहां जाना स्थगित किया। खुशी की बात है कि मालदीव में की गई हमारी गलतियों से उन्होंने सबक सीखा, जिसका लाभ उन्हें श्रीलंका में मिल रहा है। मालदीव के सत्तारूढ़ नेता नाराज न हो जाएं, इस आशंका के कारण हमारी सरकार ने वहां के विपक्ष की तरफ से अपना मुंह फेर लिया। विपक्ष के नेता और पूर्व राष्ट्रपति नशीद भारत के...
    March 14, 06:40 AM
  • पीडीपी को मर्यादा के भीतर छूट दें
    मुफ्ती ने कहा क्या है? मुफ्ती ने जो कुछ कहा है, उसके भी को टीवी एंकरों ने ही बना दिया है। इसी ही और भी के झगड़े ने सारा भ्रम पैदा कर दिया है। मुफ्ती ने कह दिया कि कश्मीर के चुनावों को सफल बनाने में पाकिस्तान और हुर्रियत का भी हाथ है। भारत की कोई भी केंद्रीय सरकार क्या यह नहीं चाहेगी कि कश्मीर का मसला हल हो और पाकिस्तान से संबंध सहज हों? केंद्र सरकार को एक सबल मध्यस्थ अपने आप मिल गया है। मुफ्ती से ज्यादा मोदी चाहते हैं कि पाकिस्तान से बातचीत शुरू हो, इसीलिए उन्होंने दक्षेस के बहाने विदेश सचिव जयशंकर को...
    March 4, 06:36 AM
  • जो कहा उसी पर डटे रहें मोदी
    ऐसा नहीं है कि भारत का राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री कुछ बोले तो वह राष्ट्र के लिए वेदवाक्य बन जाता है। ऐसा भी नहीं है कि उनकी वाणी को संतवाणी की तरह पवित्र माना जाता है, लेकिन उनके राज में किसी मुद्दे पर गहरी हलचल मची हो और वे चुप रहें तो देश अपने आप से यह पूछने लगता है कि हमारे ये नेता मौनी बाबा कैसे बन गए हैं? क्यों बन गए हैं? जो नेता हर किसी मसले पर टांग अड़ाने में नहीं चूकते, वे फलां-फलां नाजुक मुद्दे पर चुप क्यों हैं? ऐसी ही चुप्पी पिछले कई माह से हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर काफी भारी पड़...
    February 21, 07:01 AM
  • आम आदमी पार्टी से देश क्या आशा करे?
    दिल्ली में आम आदमी पार्टी की विजय अरविंद केजरीवाल का दिमाग वैसे ही फुला सकती है, जैसा कि 1984 में राजीव गांधी का फूल गया था और आठ माह पहले नरेंद्र मोदी का। राजीव गांधी, नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल को हम नेता न कहें, यह तो शुद्ध ज्यादती ही होगी, लेकिन आज के दिन यह सोचना जरूरी है कि तीनों में क्या समानताएं हैं और कहीं अरविंद भी उसी तरह नीचे नहीं लुढ़कने लगें, जैसे कि राजीव लुढ़के थे और मोदी का लुढ़कना शुरू हो गया है। राजीव को ढाई साल लगे। गली-गली में शोर मचने लगा। मोदी को नौ महीने भी नहीं लगे। दिल्ली ने...
    February 13, 07:30 AM
  • वरदान है यह हार भाजपा के लिए
    दिल्ली की जनता ने केंद्र सरकार को गाढ़ी नींद से जगा दिया है। इस धक्के से नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे प्रांतीय नेताओं को समझ में आ गया होगा कि पार्टी के राष्ट्रीय व स्थानीय नेताओं की उपेक्षा का क्या नतीजा होता है। दिल्ली में भाजपा को ऐसी हार मिली है, जैसी इस शहर में पहले किसी प्रमुख पार्टी को नहीं मिली। कांग्रेस के सफाए पर किसी को भी आश्चर्य या दुख नहीं है। उसके बारे में चर्चा करना भी जरूरी नहीं है, लेकिन भाजपा के लिए तो यह हार वरदान की तरह उतरी है। यदि इस चुनाव में भाजपा की करारी हार नहीं होती और...
    February 12, 05:53 AM
  • ‘आप’ दे सकती है विपक्ष को नेतृत्व
    दिल्ली का चुनाव नगर निगम के चुनाव से थोड़ा बड़ा है और प्रांतीय चुनावों से काफी छोटा है। फिर भी सारे देश का ध्यान इस स्थानीय चुनाव पर लगा हुआ है। इस चुनाव में कांग्रेस की तो गिनती ही नहीं है, जो दशकों तक इस राज्य की राजनीति पर हावी रही है। कांटे की लड़ाई अगर है तो भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी में है। दोनों पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत इस चुनाव में झोंक दी है। एक बिल्कुल नई और स्थानीय पार्टी है और दूसरी पुरानी और अखिल भारतीय पार्टी है, लेकिन ऐसा लग रहा है, जैसे कि दोनों बराबर की पार्टियां हैं।...
    February 7, 05:52 AM
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