वेद प्रताप वैदिक
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  • ओबामा बदलें एशिया की तस्वीर
    अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा चार साल में दूसरी बार भारत आ रहे हैं। यूं तो आइजनहाॅवर, निक्सन, कार्टर, क्लिंटन और बुश आदि कई अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आ चुके हैं, लेकिन अपने कार्यकाल में दुबारा भारत आने वाले बराक ओबामा पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं। यूं भी अमेरिकी नेता भारत के साथ-साथ प्रायः पाकिस्तान भी जाते हैं या इसे उलटकर भी कह सकते हैं। वे पाकिस्तान जाते-जाते भारत पर भी मेहरबानी कर देते हैं। ओबामा इस बार सिर्फ भारत और भारत आ रहे हैं। इससे भी बड़ी बात यह कि वे गणतंत्र दिवस के मेहमान होंगे। वे...
    January 24, 01:33 PM
  • अदालतों से अंग्रेजी कब विदा होगी?
    भारत के उच्च न्यायालयों में भारतीय भाषाएं आखिर कब चलेंगी? उनसे अंग्रेजी कब विदा होगी? देश को आजाद हुए 67 साल से भी ज्यादा हो गए, लेकिन हमारी ऊंची अदालतों में अंग्रेजों की गुलामी ज्यों की त्यों बरकरार है। हमारे सारे कानून और अध्यादेश आदि भी अंग्रेजी में ही बनते हैं। हमारी अदालतों और संसद में गुलामी का यह दौर अभी तक क्यों जारी है? इसलिए जारी है कि संविधान की धारा 348 कहती है कि सर्वोच्च न्यायालय और सभी उच्च न्यायालयों की भाषा अंग्रेजी ही रहेगी। न तो न्यायाधीश अपने निर्णय हिंदी में या किसी भारतीय भाषा...
    January 17, 07:24 AM
  • पेरिस में पैगंबर के पैगाम की हत्या
    फ्रांस की व्यंग्य पत्रिका चार्ली एब्दॉ के पत्रकारों की हत्या विश्व-पत्रकारिता के इतिहास में सबसे काले दिन की तौर पर जानी जाएगी। हर वर्ष साहसी पत्रकारों की हत्या की खबरें हम सुनते ही रहते हैं, लेकिन पेरिस के इस हत्याकांड ने सारी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इस हत्या के विरोध में सिर्फ यूरोप के ही लाखों लोग सड़कों पर नहीं उतर आए हैं, दुनिया के ईसाई, हिंदू, बौद्ध और यहां तक कि मुसलमानों ने भी इसकी कड़ी भर्त्सना की है। जो लोग चार्ली एब्दॉ पत्रिका की निर्मम टीका-टिप्पणी और कार्टूनों को पसंद नहीं करते,...
    January 10, 06:47 AM
  • सच्चे हिंदुत्व को दिखाती है ‘पीके’
    हमारे देश में आजकल हंसी-मजाक का दोहरा नाटक चल रहा है। एक नाटक सिनेमाघरों के अंदर चल रहा है और दूसरा उनके बाहर! सिनेमाघरों में फिल्म पीके चल रही है और सिनेमाघरों के बाहर फिल्म बिना देखे चल रही है। जो लोग इस फिल्म का विरोध कर रहे हैं, उनसे पूछिए कि आपने वह फिल्म देखी है? तो मालूम पड़ा कि वे उसका विरोध उसे देखे बिना ही कर रहे हैं? क्यों कर रहे हैं? क्योंकि उनके एक साथी ने उन्हें कहा है कि उसमें हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया गया है। यह बात मुझे भी चुभी। जब चार-पांच दिन पहले कुछ टीवी रिपोर्टरों ने मुझे...
    January 3, 04:11 AM
  • भारत रत्न स्वयं हुआ सम्मानित
    आज भारत रत्न के लिए अटलबिहारी वाजपेयी से बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता था? उन्हें यह सम्मान कांग्रेस सरकार देती तो उससे बेहतर क्या होता, लेकिन यह श्रेय मोदी सरकार को ही मिलना था। अब तक कांग्रेसी अटलजी को गलत पार्टी में सही आदमी कहते रहे। अटलजी अभी भाजपा में हैं या नहीं, इसका कोई खास मतलब नहीं रह गया है और अब वे सक्रिय राजनीति करेंगे, इसकी भी कोई संभावना नहीं रह गई है। ऐसे में कांग्रेस पुराने व्यंग्य को उलट सकती थी। वह कह सकती थी कि सही आदमी सही जगह पर है यानी अटलजी भारत रत्न हैं। वैसे भी आज देश में...
    December 27, 01:46 AM
  • पेशावर से शुरू हो सकता है नया दौर
    पेशावर में हुए हत्याकांड ने पाकिस्तान को हिलाकर रख दिया है। अब तक वहां हजारों लोग आतंकवाद के शिकार हुए हैं, लेकिन डेढ़ सौ बच्चों और अध्यापकों की निर्मम हत्या ने पाकिस्तान के हुक्मरानों को भी जगा दिया है। पाकिस्तान के किसी प्रधानमंत्री ने पहली बार कहा है कि आतंकवादी अच्छे और बुरे नहीं होते। वे सब बुरे ही होते हैं। सभी प्रकार के आतंकवादियों का जब तक उन्मूलन नहीं हो जाएगा, हम चैन से नहीं बैठेंगे। पेशावर में मासूम बच्चों की हत्या के पहले तक पाकिस्तान की फौज और नेता भी यह मानते थे कि कुछ तालिबान...
    December 20, 01:06 AM
  • थोक धर्म परिवर्तन पर लगे रोक
    नरेंद्र मोदी सरकार की मुसीबतें बढ़ती ही जा रही हैं। संसद का यह सत्र भी फिजूल की बहसों पर बलि चढ़ रहा है। पहले रामजादा और इस शब्द में ह उपसर्ग जोड़कर बने शब्द की बहस चली, फिर घर वापसी का तूफान उठा और फिर नाथूराम गोडसे गूंजने लगा। संसद का काम क्या इन्हीं मुद्दों पर मुठभेड़ करते रहना है? या फिर देश के महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर नीति निर्धारण करना व कानून बनाना है? जाहिर है कि ये मुद्दे मोदी की सरकार ने नहीं उठाए और न ही उसने इनका समर्थन किया है, लेकिन क्योंकि ये मुद्दे भाजपा के सांसदों व...
    December 13, 06:33 AM
  • एक तुकबंदी जो संसदबंदी बन गई
    मोदी सरकार की एक महिला राज्य मंत्री अचानक सुर्खियों में आ गई हैं। उनके रामजादा वाले बयान को यह कहकर टाला जा सकता था कि यह तो महज तुकबंदी है। घटिया तुकबंदी। गनीमत है कि इस शब्द को हथियार बनाकर, जिन लोगों पर हमला किया गया है, वे गजब की परिपक्वता और संयम का परिचय दे रहे हैं। उन्होंने अपना कद ऊंचा कर लिया है, लेकिन जो लोग संसद में शोर मचा रहे हैं, वे साध्वी निरंजन ज्योति का इस्तीफा मांगकर अपना ही नुकसान कर रहे हैं। यदि प्रधानमंत्री अपनी महिला राज्य मंत्री को बर्खास्त कर देते तो इससे प्रतिपक्ष का क्या...
    December 6, 07:50 AM
  • दक्षेस देशों पर भारत भय भारी
    दक्षेस का 18वां सम्मेलन काठमांडू में हुआ, लेकिन यह सवाल दक्षेस-नेताओं से पूछा जाना चाहिए कि यह क्षेत्रीय संगठन क्या 18 कदम भी आगे बढ़ पाया है? यह ठीक है कि सदस्य राष्ट्रों के बीच तू-तू मैं-मैं नहीं हुई, लेकिन औपचारिक प्रस्तावों के अलावा क्या हुआ? इस संगठन को 30 साल हो रहे हैं, लेकिन इतने वर्षों में वह अपना नाम भी नहीं ढूंढ़ पाया। अभी भी उसे सार्क कहा जाता है। क्या दक्षिण एशिया की सारी भाषाएं इतनी निर्बल हैं कि वे उसे आम आदमी के समझने लायक नाम भी न दे सकें? दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (दक्षेस) नाम अब...
    November 29, 06:33 AM
  • ढोंगी साधुओं के खिलाफ शंखनाद हो
    हरियाणा सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय बधाई के पात्र हैं। यदि उन्होंने धीरज और संयम से काम नहीं लिया होता तो बरवाला के सतलोक आश्रम की मुठभेड़ में सैकड़ों लोग मारे जाते। रामपाल के आश्रम में तैयारी उतनी घातक तो नहीं पर उसी तर्ज पर थी, जो 1984 में भिंडरावाला ने स्वर्ण मंदिर में कर रखी थी। महीनों तक चलने वाली रसद, रिवाॅल्वर, बंदूकें, बम-गोले और तेजाब की बोतलें क्या-क्या नहीं मिला है, रामपाल के आश्रम से! रामपाल ने पुलिस पर हमला बोलने के लिए सेवानिवृत्त फौजियों की सेना भी खड़ी कर रखी थी। घायलों के इलाज के लिए...
    November 22, 07:22 AM
  • पाक से रिश्तों पर जेटली की लक्ष्मण रेखा
    नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री की शपथ ली थी, उस दिन ऐसा लग रहा था कि दक्षिण एशिया में नए सूर्य का उदय हो रहा है। पिछले 67 साल से दक्षिण एशिया के पैरों में बंधी बेड़ियां अब टूटने ही वाली हैं। दक्षिण एशिया की एकता और समृद्धि के मार्ग में सबसे बड़ा रोड़ा है- भारत-पाक संबंध! यों तो अन्य पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंध नरम-गरम होते रहते हैं, लेकिन उनके साथ दुश्मनी या युद्ध की नौबत कभी नहीं आती। इस बार सारे विरोधों के बावजूद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का हमारे प्रधानमंत्री के शपथ-समारोह में आना इस...
    November 8, 03:04 AM
  • बाबुओं को शाह से सेवक कैसे बनाएं?
    केंद्र सरकार ने अपने खर्च में से 10 प्रतिशत की कटौती करने की जो घोषणा की है, उसका तो खुले दिल से स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन हम लगे हाथ यह प्रश्न भी पूछ लें तो किसी को बुरा नहीं लगना चाहिए कि सरकार में फिजूलखर्ची क्या सिर्फ 10 प्रतिशत ही होती है? अधिकाधिक सुशासन और न्यूनतम शासन का नारा लगाने वाली मोदी सरकार से ही यह सवाल पूछा जा सकता है। पिछली सरकारें तो वोट की खातिर नोट और नौकरियां झोलों में भर-भरकर बांट रही थीं। उस बंदरबांट का सुशासन से कोई लेना-देना नहीं था, इसीलिए भारत की सरकार बेहद वजनदार हो...
    November 1, 06:13 AM
  • व्यवस्था परिवर्तन का दौर शुरू
    प्रांतीय चुनावों से मुक्त होते ही केंद्र सरकार ने तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। इसके तीन स्पष्ट संकेत हमारे सामने हैं। पहला, श्रमसुधार की घोषणाएं, महत्वपूर्ण सचिवों की अदलाबदली और मनरेगा का रूपांतरण! यदि इन तीनों परिवर्तनों को एक साथ रखकर देखें तो आशा बंधती है कि इस वर्ष के अंत तक यह सरकार देश के सामने कुछ ठोस उपलब्धियां प्रस्तुत कर सकेगी। दूसरे शब्दों में लोग शायद महसूस करने लगें कि सरकार बदली है तो अब व्यवस्था भी बदल रही है, जिसका बेसब्री से इंतजार है। हमारी व्यवस्था में कई दोष हैं,...
    October 18, 07:26 AM
  • थोड़े से खुद गांधी  बनें तो बात बने
    वेदप्रताप वैदिक. गांधी-जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सफाई अभियान और सरसंघ चालक मोहन भागवत का विजयदशमी भाषण काफी चर्चा में रहे। उन्होंने आशा जगाई कि देश में अब रचनात्मक काम बड़े पैमाने पर शुरू होंगे, लेकिन क्या वाकई कोई रचनात्मक जन-आंदोलन शुरू होगा, जो साफ-सफाई, खादी, स्वभाषा, स्वदेशी, गोरक्षा, नशाबंदी, जाति-मुक्ति आदि कामों की प्रेरणा लाखों-करोड़ों लोगों को देगा? सत्तारूढ़ नेताओं के इन उपदेशों को लागू कौन करेगा? सरकार कठोर कानून बना सकती है और नौकरशाही मक्खी पर मक्खी बिठा सकती है, लेकिन...
    October 13, 07:36 AM
  • भारत ने अमेरिका से क्या पाया?
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा में भारत ने क्या खोया, क्या पाया यह सवाल सभी सुधीजन खुद से पूछ रहे हैं। यह सवाल के यदि संपूर्ण विदेश नीति के संदर्भ में रखकर पूछें तो यह ज्यादा अर्थवान हो जाता है। अभी तक मोदी ब्रिक्स में हुई भेंटों के अलावा भूटान, जापान, चीन और अमेरिका के नेताओं से मिले हैं। इन भेंटों में से भारत के लिए क्या निकला और आगे क्या निकलने की संभावनाएं हैं? हमारी कुल विदेश नीति की दिशा क्या है? जहां तक मोदी की अमेरिकी यात्रा का प्रश्न है, इसे हम अपूर्व जनसंपर्क कह सकते हैं।...
    October 4, 06:37 AM
  • मोदी तय करें भारत-अमेरिकी राह
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली अमेरिका-यात्रा प्रारंभ हो गई है। यह यात्रा इस अर्थ में असाधारण है कि जिस मोदी को सालभर पहले तक अमेरिका वीजा देने को तैयार नहीं था, उसी मोदी की अगवानी में अमेरिकी राष्ट्रपति पलक-पांवड़े बिछाए हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए सितंबर-अक्टूबर का महीना ऐसा होता है, जिसमें वे विदेशी राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों से मिलने में कतराते हैं, क्योंकि न्यूयॉर्क में होने वाले संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में लगभग सभी राष्ट्रों के नेता पहुंचे रहते हैं। ऐसे में...
    September 27, 07:10 AM
  • बहुरूिपए चीन की पैंतरेबाजी
    चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत-यात्रा कैसी रही, इसका जवाब मैं यह देता हूं कि वह भारत-यात्रा नहीं, दक्षिण एशिया-यात्रा थी। इसमें पाकिस्तान, मालदीव और श्रीलंका पहले थे और भारत सबसे बाद में था। शी पाकिस्तान इसलिए नहीं जा पाए कि वहां जन-आंदोलन ने काफी अव्यवस्था फैला रखी थी। नेपाल और बांग्लादेश में भी आंतरिक समस्याएं हैं, वरना चीनी राष्ट्रपति लगे हाथ इन देशों में भी हो आते । यदि राष्ट्रपति शी का ध्यान भारत पर केंद्रित होता तो पहली बात यह कि उनके आने के हफ्ते-दो हफ्ते पहले से लद्दाख में चल रही...
    September 20, 07:16 AM
  • हम कैसे मनाएं हिंदी दिवस?
    हर 14 सितंबर को देश में हिंदी दिवस मनाया जाता है। जरा हम पता तो करें कि सवा अरब के इस देश में कितने लोगों को मालूम है कि 14 सितंबर को हिंदी दिवस होता है। आम आदमी का उससे कोई लेना-देना नहीं होता। सरकारी दफ्तरों में भी वह वार्षिक कर्मकांड बन गया है। किसी अफसर या किसी छोटे-मोटे नेता या किसी हिंदीसेवी को बुलाकर कुछ कर्मचारियों को हिंदी में काम करने के लिए पुरस्कार दे दिए जाते हैं। रटे-रटाए शब्दों में पिटे-पिटाए मुद्दों पर भाषण हो जाते हैं और फिर परनाला वहीं गिरना शुरू हो जाता है। अब नरेंद्र मोदी की...
    September 13, 06:40 AM
  • भारत-जापान मैत्री, मणि कांचन योग
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान-यात्रा की सफलता का प्रमाण यही है कि कांग्रेस के महान युवा नेता उसकी आलोचना में सिर्फ कुछ कंकर ही उछाल पाए हैं। उन्होंने कहा है कि देश में महंगाई और बेरोजगारी सिर उठाए हुए है और मोदी जापान में ढोलक पीट रहे हैं। इस बेचारे नेता को यह भी पता नहीं कि ढोल और ढोलक में क्या अंतर है। ऐसे नेता के नीचे काम करने की इच्छा व्यक्त करने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जापान के साथ कैसे रिश्ते बनाए? अपने दस साल के राज में कांग्रेस चाहती तो मैत्री का ऐसा चंदोवा खड़ा कर देती कि जो...
    September 6, 08:25 AM
  • फिर पटरी पर लौटेगी भारत-पाक वार्ता
    भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की वार्ता स्थगित क्या हुई, देश के कई जाने-माने राजनेताओं और विशेषज्ञों को ऐसा लगा कि भारत-पाक संबंध दुबारा शीर्षासन की मुद्रा में आ गए हैं। उनके मन में घबराहट पैदा हो गई है कि अगले कुछ दिनों में कहीं फौजी मुठभेड़ की नौबत न आ जाए। दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी राष्ट्र अचानक पटरी से क्यों उतर गए? हुर्रियत से पाक-उच्चायुक्त का मिलना तो मामूली बात है। इधर अचानक कोई गंभीर बात हुई है, जिसके कारण हमें ऐसा फैसला लेना पड़ा है। वह गंभीर बात क्या हो सकती है, वह हम आगे बताएंगे।...
    August 23, 08:07 AM
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