Home >> Abhivyakti >> Hamare Columnists >> Ved Pratap Vaidik
  • ताकि भ्रष्टाचारियों की रूह कांपे
    .वेदप्रताप वैदिक जनता समझती है कि उनके चुने हुए नेता सरकार चलाते हैं, लेकिन असलियत यह है कि नौकरशाह सरकार चलाते हैं । नेता तो थोड़े समय के मेहमान होते हैं। नौकरशाह सरकार के स्थायी मालिक होते हैं! नेता लोग हमारे नौकरशाहों के नौकर होते हैं। यदि नौकरशाही सुधर जाए तो कोई भी सरकार सचमुच जनता की सच्ची सेवक बन सकती है। प्रसन्नता की बात है कि सरकार ने नौकरशाहों के लिए एक नई और संशोधित नियमावली जारी की है। नौकरशाहों की जो आचरण-नियमावली बरसों से चली आ रही थी, उसमें कर्तव्यनिष्ठा, विनम्रता, ईमानदारी आदि...
    August 9, 06:32 AM
  • देशी भाषाओं में हों भर्ती परीक्षाएं
    संघ लोक सेवा आयोग की भर्ती-परीक्षा में सीसेट के प्रश्न-पत्रों का इतना तगड़ा विरोध होगा, इसका अंदाजा न तो पिछली सरकार को था और न ही वर्तमान सरकार को। पिछले साल दिल्ली के मुखर्जी नगर में जब इन छात्रों की पहली सभा को मैंने संबोधित किया था तो मुझे ऐसा जरूर लगा था कि यह आंदोलन पिछले कुछ हिंदी आंदोलनों की तरह बीच में ही ठप नहीं होगा, क्योंकि आंदोलनकारी छात्रों का भविष्य इस आंदोलन से सीधा जुड़ा हुआ था। लगभग दस लाख छात्र इस परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं। इन भर्ती-परीक्षाओं में अंग्रेजी का इतना बोलबाला है...
    August 2, 06:45 AM
  • जजों की नियुक्ति में सरकारी दखल
    न्यायपालिका में उच्चतम स्तर पर भ्रष्टाचार का एक नया मामला उजागर हुआ है। मद्रास उच्च न्यायालय के एक भ्रष्ट एडिशनल जज को स्थायी जज का दर्जा कैसे मिल गया, यह सवाल मार्कंडेय काटजू ने पूछा है। काटजू उस समय मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। रमेशचंद्र लाहोटी सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे। यह 2007 के आस-पास की बात है। उस समय देश में कांग्रेस की गठबंधन सरकार थी। तमिलनाडु की द्रमुक पार्टी इस गठबंधन में काफी वज़नदार थी। द्रमुक ने कांग्रेस को धमकी दी। यदि तुम इस जज को उच्च न्यायालय में...
    July 25, 04:58 AM
  • अचानक हुई मुलाकात पर हंगामा अनावश्यक
    मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के साथ मुलाकात को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। मुलाकात का उद्देश्य क्या था? सईद का इंटरव्यू किस प्रकाशन के लिए किया गया? तीखे सवालों के जवाब भी सईद ने ऐसी विनम्रता से क्यों दिए, जबकि यह उसकी करतूतों से मेल नहीं खाता? सईद व एक भारतीय पत्रकार की मुलाकात में जो तनाव नजर आना था, वह नदारद क्यों था? यहां लेखक ने इन्हीं सवालों के जवाब देने का प्रयास किया है। साथ में पाठकों की सुविधा के लिए विवादित इंटरव्यू : हाफिज सईद से मुलाकात अचानक तय हुई। 2 जुलाई की दोपहर मैं भारत...
    July 19, 08:38 AM
  • मोदी का मनमोहक बजट
    नरेंद्र मोदी सरकार का पहला बजट आ गया। हर बजट में हर आदमी क्या देखना चाहता है? सबसे पहले वह यह देखना चाहता है कि इस बजट में मेरे लिए क्या आ रहा है और मेरे पास से क्या जा रहा है? बजट की इस भाषा को समझने वाले लोग भारत में कितने होंगे? मुश्किल से 10-15 करोड़ लोग! इन 10-15 करोड़ लोगों के लिए यह बजट सचमुच मनमोहक है। इसे हम मनमोहक इसलिए भी कह सकते हैं कि यह मनमोहन-बजटों का ही विस्तार है। इसमें कोई चमत्कारी जलवा नहीं है। इस मोदी-बजट की आलोचना करते हुए सोनिया गांधी ने ठीक ही कहा है कि इसमें नया क्या है। शायद इसीलिए...
    July 12, 05:39 AM
  • पाक जेहन में मोदी से जुड़े सवाल
    पाकिस्तान के लिए नरेंद्र मोदी अब भी एक पहेली हैं। उन्हें भारत का प्रधानमंत्री बने अब एक महीना हो गया है, लेकिन पाकिस्तान के लोग अब भी उनके नाम का सही उच्चारण भी नहीं कर पाते। कुछ टीवी एंकर उन्हें नरिंदर कहते हैं तो कुछ नरिंदरा और जो लोग अंग्रेजीदां हैं, वे उन्हें मोदी नहीं, मोडी कहते हैं तो कुछ जागरूक बुद्धिजीवी, भारत से लौटे हुए कुछ कूटनीतिज्ञ और कुछ प्रबुद्ध पत्रकार हमारे प्रधानमंत्री का सही उच्चारण जरूर करते हैं, लेकिन यदि आप सड़क चलते किसी आम आदमी से पूछें कि भारत के नए वजीर-ए-आजम कौन हैं तो...
    June 28, 05:31 AM
  • आंखन देखी: तालिबान के खिलाफ शरीफ की मुहिम
    मुझे पाकिस्तान आए एक हफ्ता हो गया है। हम लोग आए थे, एक भारत-पाक संगोष्ठी में भाग लेने ताकि नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ ने जो पहल की है, उसे आगे बढ़ाया जा सके, लेकिन इस समय पाकिस्तान की राजनीति में अचानक दो बड़े तहलके मच गए हैं। एक तो सरकार ने आतंकवादियों के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया है और दूसरा लाहौर के मॉडल टाउन में भयंकर रक्तपात हो गया है। यहां सभी टीवी चैनलों और अखबारों में पिछले तीन-चार दिन से लाहौर छाया हुआ है। उत्तरी वजीरिस्तान में पाकिस्तानी फौज जिस बहादुरी से आतंकवादियों को खदेड़ रही है, यह...
    June 21, 07:09 AM
  • मोदी की खिचड़ी में क्या कुछ नहीं
    जवाहरलाल नेहरू से लेकर अब तक जितने भी प्रधानमंत्री हुए हैं, उन सबके भाषण सुनने का और नेहरूजी और शास्त्रीजी के अलावा सभी प्रधानमंत्रियों से निकट संपर्क का मौका मुझे मिला है, लेकिन जो सपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जगाए हैं, मुझे याद नहीं पड़ता कि किसी और प्रधानमंत्री ने कभी जगाए। नेहरूजी ने समाजवादी समाज, शास्त्रीजी ने जय जवान-जय किसान और इंदिराजी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया। अटलजी ने अपने आखिरी दौर में चमकते भारत का नारा दिया, लेकिन ये सब नारे ही रहे। इन नारों के तहत कुछ लक्ष्य भी पूरे हुए,...
    June 14, 03:42 AM
  • मोदी की विदेश नीति हिन्दी में
    एक अंग्रेजी अखबार की इस खबर ने मुझे आह्लादित कर दिया कि दक्षेस देशों से आए नेताओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंदी में वार्तालाप किया। वैसे नवाज शरीफ, हामिद करजई, सुशील कोइराला आदि तो हिंदी खूब समझते हैं। इन नेताओं से मेरी दर्जनों बार बात हुई है पर इन्होंने मुझसे कभी भी अंग्रेजी में बात नहीं की। किंतु मोदी ने श्रीलंकाई नेता महिंद राजपक्षे से भी हिंदी में बात की। राजपक्षे हिंदी बिल्कुल भी नहीं समझते। तो क्या ऐसा हुआ होगा कि मोदी बोलते रहे होंगे और राजपक्षे बगलें झांकते रहे होंगे? न ऐसा...
    June 7, 06:01 AM
  • सही दिशा देता मोदी का पहला हफ्ता
    यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले हफ्ते पर नजर डालें तो लगता है कि पांच साल में तो देश की शक्ल ही बदल जाएगी। इस सप्ताह में मोदी ने जिस रफ्तार और मौलिकता का परिचय दिया, वह असाधारण थी। उन्होंने शपथ ली, उसके पहले ही हेरात में हमारे दूतावास पर आतंकवादियों का हमला हो गया और देश में रेल-दुर्घटना हो गई। उन्होंने काबुल और हेरात में नियुक्त हमारे कूटनीतिज्ञों से फोन पर सीधी बात की और घटनास्थल पर रेल-मंत्री को दौड़ाया। उसके पहले ही उन्होंने दक्षेस-राष्ट्रों और मॉरिशस के नेताओं को भी आमंत्रित कर...
    May 31, 05:32 AM
  • मोदी करें विदेश नीति में नई पहल
    यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि उनकी विदेश नीति मौलिक हो तो उसकी लगाम उन्हें खुद थामनी होगी। विदेश मंत्री वे चाहे जिसे बना दें, यह स्पष्ट है कि सत्तारूढ़ नेताओं में कोई भी उसका विशेषज्ञ नहीं है। अब तक जिन चार प्रधानमंत्रियों ने भारत की विदेश नीति को ढाला है- नेहरू, इंदिरा, नरसिंहराव और वाजपेयी- उनके विदेश मंत्री चाहे जो भी रहे हों, विदेश नीति के मूलभूत सिद्धांतों का निर्धारण और संचालन उन्होंने स्वयं किया है। नेहरू अपने विदेश मंत्री स्वयं थे और इंदिरा गांधी के पास स्वर्णसिंह,...
    May 24, 06:53 AM
  • मोदी पीएम नहीं बने तो क्या होगा?
    एक औसत पाठक को लगेगा कि इस लेख का शीर्षक इतना बेढंगा क्यों है? भला, क्या ऐसा भी हो सकता है कि भाजपा के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी सरकार न बना पाएं? क्या उनको 272 सीटें भी नहीं मिलेंगी? माहौल तो एकदम उलट है। ऐसा जोशीला स्वागत तो स्वतंत्र भारत के इतिहास में किसी नेता का कभी नहीं हुआ। नेहरू अपवाद थे। आजादी के पहले ही वे जन-जन के कंठहार बन चुके थे, लेकिन उनके बाद जितने भी नेता प्रधानमंत्री बने, क्या उनकी सभाओं में ऐसी भीड़ उमड़ी, जैसी मोदी की सभाओं में उमड़ती रही? ज्यादातर प्रधानमंत्री तो बिना सभाओं, बिना भीड़...
    May 10, 04:05 AM
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