वेद प्रताप वैदिक
Home >> Abhivyakti >> Hamare Columnists >> Ved Pratap Vaidik
  • अश्लीलता पर शीर्षासन क्यों?
    इंटरनेट पर दिखाई जाने वाली अश्लील वेबसाइटों के बारे में सरकार ने शुरू में बहुत ही अच्छा रवैया अपनाकर 857 अश्लील वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन फिर उसने सिर्फ बच्चों की अश्लील वेबसाइटों पर अपने प्रतिबंध को सीमित कर दिया। सूचना एवं तकनीकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसकी घोषणा की। सरकार ने यह शीर्षासन क्यों किया? सरकार ने यह शीर्षासन किया, अंग्रेजी अखबारों और चैनलों की हायतौबा के कारण! किसी की हिम्मत नहीं हुई कि वह अश्लीलता के समर्थकों का विरोध करे। इससे साफ जाहिर होता है कि स्वतंत्र...
    August 14, 03:18 AM
  • हत्यारे को जीवनदान कैसे संभव
    याकूब मेमन की फांसी पर जैसी सियासत भारत में चली है, क्या किसी अन्य देश में चल सकती है? यह भारत के लोकतंत्र का बड़प्पन है कि लोग उन्हें भी बर्दाश्त कर रहे हैं, जो याकूब की फांसी का विरोध कर रहे थे। याकूब के शव को उसके भाई को सुपुर्द किया गया और उसको खुलेआम दफनाने दिया गया, क्या यह उदारता उल्लेखनीय नहीं है? याकूब का अंजाम वह नहीं हुआ, जो अफजल गुरु और अजमल कसाब का हुआ था। मुंबई के उन 257 परिवारों और घायलों के परिवारों के धैर्य की हम प्रशंसा किए बिना नहीं रह सकते, जिन्होंने उनके प्रियजनों के थोक हत्यारे की...
    August 1, 02:37 AM
  • हम जाति का ज़हर फिर क्यों पिएं?
    मुझे आश्चर्य है कि भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल ने ऐसा राष्ट्र-विरोधी निर्णय कैसे कर लिया? जातीय जनगणना को कांग्रेस सरकार ने अधबीच में बंद कर दिया था, लेकिन इस गणना के जो भी अधकचरे आंकड़े इकट्ठे हुए हैं, सरकार उन्हें प्रकट करने के लिए तैयार हो गई है। वह इन्हें अगले साल तक प्रकाशित करेगी। तब तक राज्य-सरकारों की रपट भी उसके पास आ जाएगी और जो आंकड़े उसके पास अभी हैं, उनका विश्लेषण भी हो जाएगा। लगता है कि भाजपा सरकार जातिवादी नेताओं के दबाव में आ गई है। राष्ट्रवाद पर जातिवाद अचानक कैसे सवार हो गया है?...
    July 18, 03:06 AM
  • आर्याना के द्वार पर मोदी की दस्तक
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्तमान विदेश यात्रा अब तक हुई उनकी सभी विदेश यात्राओं से ज्यादा महत्वपूर्ण है। वे अपने पहले साल में ही अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी और फ्रांस जैसे शक्तिशाली राष्ट्रों में हो आए। वे यात्राएं सार्थक रहीं, जैसी कि प्रायः रहती ही हैं, लेकिन मेरी याददाश्त में वे ऐसे पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं; जो मध्य एशिया के पांचों गणतंत्रों-कजाकिस्तान, उजबेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, किरगिजिस्तान और ताजिकिस्तान में एक साथ जा रहे हैं। हमारे कई प्रधानमंत्रियों और विदेश मंत्रियों...
    July 11, 06:58 AM
  • लोकतंत्र पर सवार है नेतातंत्र
    यदि भारत लोकतंत्र है तो फिर यह सवाल उठे बिना नहीं रहेगा कि उसमें इतनी गैर-बराबरी क्यों है, जितनी कि गुलाम राष्ट्रों में होती है या पुराने सामंती राज्यों में होती थी? यह ठीक है कि सभी मनुष्य एक समान नहीं होते। हर मनुष्य की क्षमता और प्रतिभा अलग-अलग होती है। कम-ज्यादा होती है। उसी के मुताबिक उसे अधिकार, सम्मान और पैसा मिलता है, लेकिन मूल प्रश्न यह है कि राज्य की नज़र में सब नागरिक बराबर होते हैं या नहीं? राज्य की सामान्य सुविधाएं सभी लोगों को बराबरी से मिलनी चाहिए या नहीं? लोकतंत्र में तो मिलनी ही...
    July 4, 06:24 AM
  • इस व्यवस्था का उद्धार कौन करेगा?
    नरेंद्र मोदी के मौन की दहाड़ पूरा देश सुन रहा है। आज पूरा देश अवाक है और बस सुन रहा है, लेकिन वह अपना मुंह कब तक बंद रखेगा? जब देश बोलने लगेगा तो सरकार और नेताओं की आवाज कहां डूब जाएगी, पता भी नहीं चलेगा। पहला मामला सुषमा स्वराज (विदेश मंत्री) का ही था। फिर आया, वसुंधरा राजे (मुख्यमंत्री) का और अब आ गए हैं, स्मृति ईरानी (मानव संसाधन विकास मंत्री) और पंकजा मुंडे (मंत्री, महाराष्ट्र) के मामले भी! कुछ और मामले भी हैं, लेकिन अभी वे अंदर कूदे नहीं हैं। बस, झरोखों से झांक रहे हैं। सारे देश को आश्चर्य है कि...
    June 27, 06:21 AM
  • इसलिए है आपातकाल की आशंका
    भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की आपातकाल संबंधी टिप्पणी को क्या हम ठीक से समझ पाए हैं? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के नेतागण उस पर लीपा-पोती कर रहे हैं और विरोधी दल गद्गद हैं। संघ और भाजपा के प्रवक्ता कह रहे हैं कि आडवाणी ने आपातकाल की जो आशंका व्यक्त की है, उसका मोदी सरकार से संबंध नहीं है। यदि उन्हें सरकार के बारे में कुछ कहना है तो वे मार्गदर्शक मंडल के सदस्य हैं। वे प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष से सीधे बात कर सकते हैं। आडवाणी ने देश की संपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक व्यवस्था के...
    June 20, 05:53 AM
  • ढोल जरा कम पीटते तो बेहतर होता
    भारत-बर्मा (म्यांमार) सीमांत में छिपे नगा बागियों पर हमारी फौज ने जैसा हमला किया और हमले से भी ज्यादा उसका जैसा प्रचार किया, उससे सारा देश गद्गद् हो गया। हमारे फौजियों को तो शाबाशी मिली ही, हमारे नेताओं ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिए। 56 इंच के सीने वाली सरकार का सीना फूलकर 60 इंच का हो गया। कई मंत्री बहक गए। एक ने कह दिया कि जो म्यांमार में हुआ, वह पाकिस्तान में भी हो सकता है। दूसरे ने कहा कि इसी डर के मारे पिछले दोतीन दिन से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान की सीनेट ने भारत के विरुद्ध...
    June 13, 05:56 AM
  • मैगी के बहाने कुछ मूल प्रश्न
    नेस्ले कंपनी की मैगी नामक सेवइयां जहरीली है या नहीं, यह अभी पूरी तरह से तय नहीं हो पाया है, लेकिन अभी तक जितने भी परीक्षण हुए हैं, उनमें से ज्यादातर में मैगी खतरनाक पाई गई है। उसमें दो ऐसे तत्व पाए गए हैं, जो काफी खतरनाक हैं। इसी आधार पर कई राज्यों ने मैगी की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। उसका दस हजार करोड़ रु. का धंधा अधर में लटक गया है। कुछ प्रयोगशालाओं की राय है कि मैगी में सीसे की मात्रा जितनी होनी चाहिए, उससे वह सात गुना ज्यादा है और मोनोसोडियम ग्लूटामेट नामक रसायन भी खतरे के बिंदु से ज्यादा...
    June 6, 06:32 AM
  • दिल्ली : एक म्यान में दो तलवारें?
    दिल्ली को हम बोलचाल में प्रदेश कहते हैं और इस प्रदेश के चुने हुए मुखिया को मुख्यमंत्री! दिल्ली न तो अन्य प्रदेशों की तरह प्रदेश है और न ही उसका मुख्यमंत्री अन्य मुख्यमंत्रियों की तरह मुख्यमंत्री है। लेकिन अरविंद केजरीवाल यदि खुद को पूरा मुख्यमंत्री समझते हैं तो इसमें उनका दोष क्या है? उन्होंने जब वाराणसी से चुनाव लड़ा और देशभर में 400 से ज्यादा उम्मीदवार लड़वाए तो वे प्रधानमंत्री पद का सपना देख रहे थे। अब आप उन्हें मुख्यमंत्री भी मानने को तैयार नहीं हैं? केजरीवाल का कहना है कि यदि आप मुझे...
    May 30, 06:18 AM
  • विदेश में दिखावा ज्यादा, नीति कम
    विदेश नीति के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहला साल कैसा रहा, यह प्रश्न सभी पूछ रहे हैं। सच कहा जाए तो उनका यह साल विदेश नीति का साल ही रहा है। पहले साल में मोदी ने जितनी विदेश-यात्राएं की हैं, अब तक किसी प्रधानमंत्री ने नहीं की। मोदी न तो विदेश नीति के अध्येता रहे हैं और न ही वे कभी विदेश मंत्री रहे हैं, जबकि जवाहरलाल नेहरू आजादी के पहले से कांग्रेस का विदेश विभाग संभाले हुए थे। अटलजी 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रह चुके थे और नरसिंह राव भी दो बार विदेश मंत्रालय संभाल चुके थे, लेकिन इन सबके...
    May 23, 05:32 AM
  • भारत-चीन : 21वीं सदी का सपना
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय चीन में हैं। प्रधानमंत्री के तौर पर यह उनकी पहली चीन-यात्रा है, लेकिन इसके पहले मुख्यमंत्री के तौर पर वे चार बार चीन जा चुके हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद वे शायद किसी भी देश में चार बार नहीं गए हैं और जहां तक मुझे याद पड़ता है कि चीनी सरकार ने इस भारतीय मुख्यमंत्री का उतना ही भाव-भीना स्वागत किया था, जितना कि किसी विदेशी प्रधानमंत्री का किया जाता है। यह भी तब जबकि भारत में कांग्रेस की सरकार थी। शायद इसीलिए मोदी के सत्तारूढ़ होते ही चीन के प्रधानमंत्री और फिर...
    May 16, 07:06 AM
  • कोर्ट को गुमराह करना ज्यादा गंभीर
    जमानत पर छूटे फिल्मी सितारे सलमान खान को मिलने के लिए मुंबई के कई कलाकार और नेतागण उनके घर पहुंच गए, यह स्वाभाविक है। हो सकता है कि सलमान लोगों के अच्छे दोस्त हों। वे लोकप्रिय अभिनेता तो हैं ही। उनके साथियों और प्रशंसकों को इस बात की पीड़ा है कि उन्हें पांच साल की सजा हो गई तो इस पीड़ा को भी गलत नहीं कहा जा सकता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जो लोग सलमान से मिलने गए, वे यह मानते हैं कि सलमान बेगुनाह है या उन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए थी। मित्र उन्हें ही माना जाता है जो विपद् में काम आएं। सलमान इस समय घनघोर...
    May 9, 06:30 AM
  • अफगान की उपेक्षा महंगी पड़ेगी
    अफगान राष्ट्रपति डाॅ. अशरफ गनी की भारत-यात्रा ऐसे विकट समय के दौरान हुई, जबकि नेपाल के भूकंप का साया सारे दक्षिण एशिया पर मंडरा रहा था। इसीलिए उन्हें जितना महत्व मिलना चाहिए था, नहीं मिला। उनकी यात्रा के ऐन मौके पर उनके अपने देश अफगानिस्तान में हुए आतंकी हमले ने ऐसी अफरा-तफरी मचाई कि वे नई दिल्ली कई घंटे देर से पहुंचे। यूं भी भारत को शिकायत थी कि अशरफ गनी राष्ट्रपति बनने के लगभग सात माह बाद भारत आए। इसके पहले वे अमेरिका, चीन, ईरान और दो बार पाकिस्तान हो आए। इसका क्या मतलब लगाया जाए? क्या इसका मतलब...
    May 2, 05:40 AM
  • गजेंद्र की मौत पर मगर के आंसू
    आम आदमी पार्टी की रैली के दौरान गजेंद्र सिंह की मौत से सारा देश स्तब्ध रह गया। हजारों किसानों की मौत वैसी खबर नहीं बना पाई, जैसी कि यह बन गई। यदि गजेंद्र सिंह वाला हादसा नहीं होता तो शायद आप की उस रैली को उतना महत्व भी नहीं मिलता, जितना कांग्रेस की रैली को मिला था। आप की रैली किसानों की कम, शहरियों की ज्यादा थी लेकिन गजेंद्र ने उस रैली पर सारे देश का ध्यान टिका दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से लेकर राहुल गांधी और सीताराम येचुरी ने भी आंसू बहाने में कोई कोताही नहीं की।...
    April 25, 05:56 AM
  • मोदी को राहत देने वाली यात्रा
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह त्रि-राष्ट्रीय विदेश-यात्रा अब तक की सभी विदेश-यात्राओं में सबसे अधिक सफल मानी जा सकती है। फ्रांस, जर्मनी और कनाडा यूं भी पूर्व के उन देशों से कहीं अधिक शक्तिशाली और संपन्न हैं, जिनमें मोदी अब तक गए थे। मोदी पहले पड़ोसी देशों में गए और फिर पूर्व के और अब पश्चिम के देशों में गए। अमेरिका तो पहले ही हो आए थे। यूरोप के देशों और कनाडा के साथ भारत के संबंध जितने घनिष्ट हो सकते थे, नहीं हुए । यदि उसके कारणों में हम यहां गहरे न उतरें तो भी यह तो मानना पड़ेगा कि मोदी की इस यात्रा...
    April 18, 05:52 AM
  • मर्यादा का पालन तो करना ही होगा
    विदेश राज्यमंत्री जनरल विजयकुमार सिंह ने पत्रकारों को प्रेस्टीट्यूट कह दिया। इस शब्द पर पत्रकारों का तिलमिला जाना स्वाभाविक है। यूं तो प्रेस्टीट्यूट का शाब्दिक अर्थ जरा भी आपत्तिजनक नहीं है, क्योंकि उसका अर्थ यही होगा- प्रेस नामक संस्था! लेकिन कई पत्रकार संगठनों ने जनरल सिंह की कड़ी भर्त्सना की है। क्यों की है? क्योंकि यह शब्द प्रेस्टीट्यूट अंग्रेजी के प्रॉस्टीट्यूट शब्द का रूपान्तर है। प्रॉस्टीट्यूट का अर्थ होता है वेश्या यानी पत्रकारिता वेश्यावृत्ति है। इन दोनों शब्दों के...
    April 11, 06:32 AM
  • भाजपा की लुढ़कन कैसे रुके
    बेंगलुरू में चल रही भाजपा की कार्यकारिणी की बैठक में क्या होगा? लगभग 300 सदस्यों की इस समिति का नाम कार्यकारिणी है। क्या-क्या कार्य करती है, यह? कुछ नहीं। कार्य करते हैं पार्टी के पदाधिकारी लोग और सत्तारूढ़ दल के मंत्री लोग। वास्तव में कार्यकारिणी तो होती है, विचारकारिणी। किसी भी पार्टी या सरकार में विचार या विचारधारा का कितना महत्व होता है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि कार्यकारिणी की बैठक साल-साल भर में होती है और सिर्फ दो दिन में 300 लोगों के विचार जानने की कोशिश की जाती है। वास्तव में...
    April 4, 06:27 AM