Home >> Abhivyakti >> Hamare Columnists >> Ved Pratap Vaidik
  • बहुरूिपए चीन की पैंतरेबाजी
    चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत-यात्रा कैसी रही, इसका जवाब मैं यह देता हूं कि वह भारत-यात्रा नहीं, दक्षिण एशिया-यात्रा थी। इसमें पाकिस्तान, मालदीव और श्रीलंका पहले थे और भारत सबसे बाद में था। शी पाकिस्तान इसलिए नहीं जा पाए कि वहां जन-आंदोलन ने काफी अव्यवस्था फैला रखी थी। नेपाल और बांग्लादेश में भी आंतरिक समस्याएं हैं, वरना चीनी राष्ट्रपति लगे हाथ इन देशों में भी हो आते । यदि राष्ट्रपति शी का ध्यान भारत पर केंद्रित होता तो पहली बात यह कि उनके आने के हफ्ते-दो हफ्ते पहले से लद्दाख में चल रही...
    September 20, 07:16 AM
  • हम कैसे मनाएं हिंदी दिवस?
    हर 14 सितंबर को देश में हिंदी दिवस मनाया जाता है। जरा हम पता तो करें कि सवा अरब के इस देश में कितने लोगों को मालूम है कि 14 सितंबर को हिंदी दिवस होता है। आम आदमी का उससे कोई लेना-देना नहीं होता। सरकारी दफ्तरों में भी वह वार्षिक कर्मकांड बन गया है। किसी अफसर या किसी छोटे-मोटे नेता या किसी हिंदीसेवी को बुलाकर कुछ कर्मचारियों को हिंदी में काम करने के लिए पुरस्कार दे दिए जाते हैं। रटे-रटाए शब्दों में पिटे-पिटाए मुद्दों पर भाषण हो जाते हैं और फिर परनाला वहीं गिरना शुरू हो जाता है। अब नरेंद्र मोदी की...
    September 13, 06:40 AM
  • भारत-जापान मैत्री, मणि कांचन योग
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान-यात्रा की सफलता का प्रमाण यही है कि कांग्रेस के महान युवा नेता उसकी आलोचना में सिर्फ कुछ कंकर ही उछाल पाए हैं। उन्होंने कहा है कि देश में महंगाई और बेरोजगारी सिर उठाए हुए है और मोदी जापान में ढोलक पीट रहे हैं। इस बेचारे नेता को यह भी पता नहीं कि ढोल और ढोलक में क्या अंतर है। ऐसे नेता के नीचे काम करने की इच्छा व्यक्त करने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जापान के साथ कैसे रिश्ते बनाए? अपने दस साल के राज में कांग्रेस चाहती तो मैत्री का ऐसा चंदोवा खड़ा कर देती कि जो...
    September 6, 08:25 AM
  • फिर पटरी पर लौटेगी भारत-पाक वार्ता
    भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की वार्ता स्थगित क्या हुई, देश के कई जाने-माने राजनेताओं और विशेषज्ञों को ऐसा लगा कि भारत-पाक संबंध दुबारा शीर्षासन की मुद्रा में आ गए हैं। उनके मन में घबराहट पैदा हो गई है कि अगले कुछ दिनों में कहीं फौजी मुठभेड़ की नौबत न आ जाए। दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी राष्ट्र अचानक पटरी से क्यों उतर गए? हुर्रियत से पाक-उच्चायुक्त का मिलना तो मामूली बात है। इधर अचानक कोई गंभीर बात हुई है, जिसके कारण हमें ऐसा फैसला लेना पड़ा है। वह गंभीर बात क्या हो सकती है, वह हम आगे बताएंगे।...
    August 23, 08:07 AM
  • ताकि भ्रष्टाचारियों की रूह कांपे
    .वेदप्रताप वैदिक जनता समझती है कि उनके चुने हुए नेता सरकार चलाते हैं, लेकिन असलियत यह है कि नौकरशाह सरकार चलाते हैं । नेता तो थोड़े समय के मेहमान होते हैं। नौकरशाह सरकार के स्थायी मालिक होते हैं! नेता लोग हमारे नौकरशाहों के नौकर होते हैं। यदि नौकरशाही सुधर जाए तो कोई भी सरकार सचमुच जनता की सच्ची सेवक बन सकती है। प्रसन्नता की बात है कि सरकार ने नौकरशाहों के लिए एक नई और संशोधित नियमावली जारी की है। नौकरशाहों की जो आचरण-नियमावली बरसों से चली आ रही थी, उसमें कर्तव्यनिष्ठा, विनम्रता, ईमानदारी आदि...
    August 9, 06:32 AM
  • देशी भाषाओं में हों भर्ती परीक्षाएं
    संघ लोक सेवा आयोग की भर्ती-परीक्षा में सीसेट के प्रश्न-पत्रों का इतना तगड़ा विरोध होगा, इसका अंदाजा न तो पिछली सरकार को था और न ही वर्तमान सरकार को। पिछले साल दिल्ली के मुखर्जी नगर में जब इन छात्रों की पहली सभा को मैंने संबोधित किया था तो मुझे ऐसा जरूर लगा था कि यह आंदोलन पिछले कुछ हिंदी आंदोलनों की तरह बीच में ही ठप नहीं होगा, क्योंकि आंदोलनकारी छात्रों का भविष्य इस आंदोलन से सीधा जुड़ा हुआ था। लगभग दस लाख छात्र इस परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं। इन भर्ती-परीक्षाओं में अंग्रेजी का इतना बोलबाला है...
    August 2, 06:45 AM
  • जजों की नियुक्ति में सरकारी दखल
    न्यायपालिका में उच्चतम स्तर पर भ्रष्टाचार का एक नया मामला उजागर हुआ है। मद्रास उच्च न्यायालय के एक भ्रष्ट एडिशनल जज को स्थायी जज का दर्जा कैसे मिल गया, यह सवाल मार्कंडेय काटजू ने पूछा है। काटजू उस समय मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। रमेशचंद्र लाहोटी सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे। यह 2007 के आस-पास की बात है। उस समय देश में कांग्रेस की गठबंधन सरकार थी। तमिलनाडु की द्रमुक पार्टी इस गठबंधन में काफी वज़नदार थी। द्रमुक ने कांग्रेस को धमकी दी। यदि तुम इस जज को उच्च न्यायालय में...
    July 25, 04:58 AM
  • अचानक हुई मुलाकात पर हंगामा अनावश्यक
    मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के साथ मुलाकात को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। मुलाकात का उद्देश्य क्या था? सईद का इंटरव्यू किस प्रकाशन के लिए किया गया? तीखे सवालों के जवाब भी सईद ने ऐसी विनम्रता से क्यों दिए, जबकि यह उसकी करतूतों से मेल नहीं खाता? सईद व एक भारतीय पत्रकार की मुलाकात में जो तनाव नजर आना था, वह नदारद क्यों था? यहां लेखक ने इन्हीं सवालों के जवाब देने का प्रयास किया है। साथ में पाठकों की सुविधा के लिए विवादित इंटरव्यू : हाफिज सईद से मुलाकात अचानक तय हुई। 2 जुलाई की दोपहर मैं भारत...
    July 19, 08:38 AM
  • मोदी का मनमोहक बजट
    नरेंद्र मोदी सरकार का पहला बजट आ गया। हर बजट में हर आदमी क्या देखना चाहता है? सबसे पहले वह यह देखना चाहता है कि इस बजट में मेरे लिए क्या आ रहा है और मेरे पास से क्या जा रहा है? बजट की इस भाषा को समझने वाले लोग भारत में कितने होंगे? मुश्किल से 10-15 करोड़ लोग! इन 10-15 करोड़ लोगों के लिए यह बजट सचमुच मनमोहक है। इसे हम मनमोहक इसलिए भी कह सकते हैं कि यह मनमोहन-बजटों का ही विस्तार है। इसमें कोई चमत्कारी जलवा नहीं है। इस मोदी-बजट की आलोचना करते हुए सोनिया गांधी ने ठीक ही कहा है कि इसमें नया क्या है। शायद इसीलिए...
    July 12, 05:39 AM
  • पाक जेहन में मोदी से जुड़े सवाल
    पाकिस्तान के लिए नरेंद्र मोदी अब भी एक पहेली हैं। उन्हें भारत का प्रधानमंत्री बने अब एक महीना हो गया है, लेकिन पाकिस्तान के लोग अब भी उनके नाम का सही उच्चारण भी नहीं कर पाते। कुछ टीवी एंकर उन्हें नरिंदर कहते हैं तो कुछ नरिंदरा और जो लोग अंग्रेजीदां हैं, वे उन्हें मोदी नहीं, मोडी कहते हैं तो कुछ जागरूक बुद्धिजीवी, भारत से लौटे हुए कुछ कूटनीतिज्ञ और कुछ प्रबुद्ध पत्रकार हमारे प्रधानमंत्री का सही उच्चारण जरूर करते हैं, लेकिन यदि आप सड़क चलते किसी आम आदमी से पूछें कि भारत के नए वजीर-ए-आजम कौन हैं तो...
    June 28, 05:31 AM
  • आंखन देखी: तालिबान के खिलाफ शरीफ की मुहिम
    मुझे पाकिस्तान आए एक हफ्ता हो गया है। हम लोग आए थे, एक भारत-पाक संगोष्ठी में भाग लेने ताकि नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ ने जो पहल की है, उसे आगे बढ़ाया जा सके, लेकिन इस समय पाकिस्तान की राजनीति में अचानक दो बड़े तहलके मच गए हैं। एक तो सरकार ने आतंकवादियों के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया है और दूसरा लाहौर के मॉडल टाउन में भयंकर रक्तपात हो गया है। यहां सभी टीवी चैनलों और अखबारों में पिछले तीन-चार दिन से लाहौर छाया हुआ है। उत्तरी वजीरिस्तान में पाकिस्तानी फौज जिस बहादुरी से आतंकवादियों को खदेड़ रही है, यह...
    June 21, 07:09 AM
  • मोदी की खिचड़ी में क्या कुछ नहीं
    जवाहरलाल नेहरू से लेकर अब तक जितने भी प्रधानमंत्री हुए हैं, उन सबके भाषण सुनने का और नेहरूजी और शास्त्रीजी के अलावा सभी प्रधानमंत्रियों से निकट संपर्क का मौका मुझे मिला है, लेकिन जो सपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जगाए हैं, मुझे याद नहीं पड़ता कि किसी और प्रधानमंत्री ने कभी जगाए। नेहरूजी ने समाजवादी समाज, शास्त्रीजी ने जय जवान-जय किसान और इंदिराजी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया। अटलजी ने अपने आखिरी दौर में चमकते भारत का नारा दिया, लेकिन ये सब नारे ही रहे। इन नारों के तहत कुछ लक्ष्य भी पूरे हुए,...
    June 14, 03:42 AM
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