वेद प्रताप वैदिक
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  • हम किसे चुनें चार्वाक या गांधी?
    आजादी के बाद महात्मा गांधी का अपने चेलों से जैसा मोहभंग हुआ, वैसा किसी नेता, किसी गुरु या किसी महात्मा का नहीं हुआ होगा। गांधीजी ने सादगी को अपना आदर्श बनाया और उस पर अमल करके दिखाया। उन्होंने कांग्रेस को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन बनाया और करोड़ों लोगों को सादगी का पाठ पढ़ाया, लेकिन ज्यों ही देश आजाद हुआ, कांग्रेसी नेताओं की 30 साल से दबी वासनाओं ने जोर मारा और वे सब अंग्रेजों की नकल करने लगे। गोरे अंग्रेज तो चले गए, लेकिन उनकी जगह काले अंग्रेज आ गए। नेता किसी भी पार्टी के हों, सबका...
    January 30, 03:05 AM
  • यह दिखावा है या हृदय परिवर्तन?
    भारत पाक विदेश सचिवों की वार्ता जिस ढंग से टली है, उससे पता चलता है कि दोनों देशों ने अपूर्व कूटनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया है। न तो भारत ने अपना ठीकरा पाकिस्तान के सिर फोड़ा है और न ही पाकिस्तान ने भारत के सिर! दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच निश्चय ही संवाद हुआ है और दोनों ने मिलकर यह संयुक्त फैसला किया है। जरा हम याद करें, पिछले उन दो मौकों को जब वार्ताएं टूटी थीं। एक हुर्रियत के बहाने और दूसरी कश्मीर के बहाने! दोनों सरकारों ने एक-दूसरे के सिर पर छप्पर रखने की कोशिश की थी। दोनों सरकारें...
    January 16, 04:23 AM
  • ये संकल्प करें तो चमत्कार हो जाए
    नए साल पर आमतौर पर लोग एक-दूसरे को बधाइयां, शुभकामनाएं देते हैं। आम और खास सभी लोग अपनी सरकारों से कई अपेक्षाएं करते हैं। किंतु क्या इस मौके पर हर आदमी कोई शुभ-संकल्प करता है? क्या हम 2016 को बेहतर बनाने के लिए कमर कसेंगे? क्या हम प्रतिज्ञा करेंगे कि नए साल में हम ये काम करेंगे, ये नहीं करेंगे? तो आइए, पहले हम वे संकल्प लें, जो खुद कर सकते हैं। सबसे पहला संकल्प यही करें कि न तो हम रिश्वत देंगे और न ही लेंगे। प्रायः रिश्वत तभी दी जाती है, जब हम कोई गलत काम करवाना चाहते हैं। संकल्प यह भी करें कि थोड़ा नुकसान...
    January 2, 05:28 AM
  • संतुलन खोते लोकतंत्र के स्तंभ
    हमारी लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था के चार स्तंभ हैं। विधानपालिका यानी संसद, कार्यपालिका यानी सरकार, न्यायपालिका यानी अदालत और खबरपालिका यानी अखबार और टीवी-रेडियो चैनल! क्या ये चारों स्तंभ अपना-अपना काम सही-सही कर रहे हैं? ये सब काम तो कर रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि उनके काम-काज में कोई बुनियादी कमी आ गई है कि या तो एक स्तंभ का काम दूसरे से लिया जा रहा है या कोई स्तंभ स्वयं इतना पस्त हो गया है कि उसका किया और अनकिया बराबर होता जा रहा है। सबसे पहले हम संसद को लें। संसद में पहले असहिष्णुता की बहस चली।...
    December 19, 04:43 AM
  • पाक से टूटे तार जोड़ने का मौका
    पाकिस्तान के विपक्षी नेता इमरान खान ने नरेंद्र मोदी और नवाज़ शरीफ की भेंट को कायराना कहा है। और कांग्रेस ने उस पर व्यंग्य कसते हुए कहा है कि यह मोदी की सहिष्णुता का प्रमाण है। कांग्रेस ने यह ताना मोदी और शरीफ की पेरिस में हुई भेंट पर मारा है और इमरान ने पिछले साल काठमांडू में हुई गुप्त भेंट पर मारा है। जहां तक इमरान का सवाल है, उन्हें विदेश नीति संचालन का कभी मौका ही नहीं मिला, इसीलिए उनकी टिप्पणी ज्यादा आपत्तिजनक नहीं मालूम पड़ती है। यदि वे कभी प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री रहे होते तो वे ऐसी...
    December 5, 01:41 AM
  • लड़े रूस-अमेरिका, भुगते सारी दुनिया
    पेरिस हमले के बाद यह विचार करना जरूरी हो गया है कि जिस आतंकवाद के खिलाफ दुनिया के सारे देश एकजुट हो रहे हैं, उसका असली स्वरूप क्या है और उसके फैलने के कारण कौन-कौन से हैं? यह जानना भी बेहतर होगा कि क्या ये सारे पश्चिमी राष्ट्र मिलकर इस आतंकवाद को समाप्त कर सकेंगे? 21वीं सदी के शेष समय का विश्व क्या आतंकवाद रहित रह सकेगा? जिस आतंकवाद से सारी दुनिया पीड़ित है, उसे इस्लामी आतंकवाद कहा जाता है। क्या सचमुच यह आतंकवाद इस्लामी है? इसमें शक नहीं कि इस आतंकवाद की जन्मभूमि और कर्मभूमि इस्लामी देश ही हैं। इस...
    November 21, 06:29 AM
  • पड़ोसियों के सामने हम बेबस क्यों?
    पिछले तीन वर्षों से मालदीव में गज़ब की उथलपुथल मची हुई है, लेकिन भारत की भूमिका एक असहाय तमाशबीन जैसी हो गई है। मनमोहन सरकार हो या मोदी सरकार, यह समझ में नहीं आता कि वे हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी रहती हैं? मालदीव के उपराष्ट्रपति अहमद अदीब को पहले गिरफ्तार किया गया और अब उन पर महाभियोग लगाकर बर्खास्त कर दिया गया। पूरे देश में आपातकाल थोप दिया गया है। राष्ट्रपति यामीन अब्दुल कय्यूम का आरोप है कि उनके उपराष्ट्रपति ने उनकी हत्या की साजिश की थी। उन्होंने उनकी बोट में बम रखवा दिया था। बम फूटा तो सही,...
    November 7, 06:21 AM
  • क्या इस तरह होगा राष्ट्र निर्माण?
    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख और राष्ट्रपति के संदेश में क्या फर्क है? एक काल्पनिक हिंदू राष्ट्र के राष्ट्रपति हैं और दूसरे भारत राष्ट्र के राष्ट्रपति हैं। राष्ट्रपति स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस पर संदेश देते हैं और सर संघचालक दशहरे पर देते हैं, जो इस बार संघ का 91वां स्थापना दिवस था। दोनों के संदेशों की ध्वनि वही होती है, जो सरकार कहना चाहती है। खासतौर से तब जबकि सरकार अपने स्वयंसेवकों की हो। जैसे आप राष्ट्रपति से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वह सरकार की आलोचना करे, वैसे ही संघप्रमुख से आप...
    October 24, 04:37 AM
  • गोहत्या पर यह कैसी राजनीति?
    गोमांस खाने के शक को लेकर मोहम्मद इखलाक की जो हत्या हुई है, उसकी भर्त्सना पूरे देश ने की है लेकिन फिर भी क्या कारण है कि इस मुद्दे पर देश में बेहद कटु और ओछी बहस चल पड़ी है? सिर्फ नेताओं ही नहीं, बुद्धिजीवियों में भी आरोपोंप्रत्यारोपों की बाढ़-सी आ गई है। कुछ साहित्यकारों ने अपने पुरस्कार लौटा दिए हैं। इस बात की किसी को चिंता नहीं है कि सारी दुनिया में इस एक दुर्घटना से भारत की छवि कितनी विकृत हो रही है। जहां तक साहित्यकारों द्वारा साहित्य अकादमी के पुरस्कार लौटाने का प्रश्न है, उसका औचित्य मेरी...
    October 10, 03:54 AM