वेद प्रताप वैदिक

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  • एकतंत्र बनता जा रहा है हमारा लोकतंत्र
    ढाई साल के मोदी राज में देश किस दिशा में जाता रहा है, यह प्रश्न पूछने का समय अब आ गया है। यह महसूस हुआ है कि कोई प्रधानमंत्री है और धमाकेदार है, जबकि उसके पहले के दस वर्षों में यह पता लगाना पड़ता था कि प्रधानमंत्री कौन है। उन दिनों नीतियां कौन बना रहा था और उन्हें कौन लागू कर रहा था, यह बताना भी आसान नहीं था लेकिन, अब तक प्रधानमंत्री मोदी की कार्यपद्धति ऐसी रही है कि भारतीय लोकतंत्र, अब एकतंत्र (मोदीतंत्र) में बदलता दिख रहा है। इसके फायदे भी हैं और नुकसान भी हैं। फायदे कई हैं। जब प्रधानमंत्री...
    January 14, 04:42 AM
  • फैसलों में भावुकता नहीं स्पष्ट दृष्टिकोण जरूरी
    उड़ी हमले पर पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग करने के बाद ही गोवा में हुए ब्रिक्स सम्मेलन की घोषणा में सिर्फ आईएस और अलकायदा के एक गुट का नाम लिया गया, जो रूस व चीन के लिए खतरा है, भारत के लिए नहीं। क्या इसका मतलब यह है कि आतंकवाद पर दुनिया को हमसे सहानुभूति नहीं है? नहीं ऐसा नहीं है। यहां तक कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के दोस्त चीन ने भी उसे कोई राहत नहीं दी। बल्कि वह उसे अपने यहां के गुटों को काबू में रखने की सलाह देता रहता है। वजह यह है कि पाक- रूस, चीन, ईरान को आईएस से लड़ने में उपयोगी लगता...
    December 31, 03:37 AM
  • अब भ्रष्टाचार पर असली वार करे सरकार
    पिछला साल हमारी सरकार और जनता के लिए जैसा बीता, वैसा बीता लेकिन, अब नए साल में हम क्या करें? नया साल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भाजपा सरकार की आधी अवधि बीत चुकी है। शेष अवधि यह तय करेगी कि अगले चुनाव में वह लौटेगी या नहीं! यह 2017 का नया साल तय करेगा कि आने वाले कई वर्ष हमारी जनता के लिए कैसे वर्ष होंगे। पिछले संसदीय चुनाव के दौरान मैंने कई जन-सभाओं में नई सरकार के लिए जो एजेंडा पेश किया था, उसमें पहला मुद्दा था- गरीबी हटाने का। इस मामले में पिछले ढाई साल लगभग खाली चले गए। न तो करोड़ों नए रोजगार पैदा...
    December 30, 06:14 AM
  • अब नोटबंदी को ही बंद करने का वक्त
    नोटबंदी से उत्पन्न परेशानियों को लेकर विरोधी दलों के नेता राष्ट्रपति से मिले हैं लेकिन, राष्ट्रपति क्या कर सकते हैं? बहुत हुआ तो प्रधानमंत्री को सलाह दे सकते हैं बशर्ते कि उन्हें किसी की सलाह की जरूरत हो। नोटबंदी की नाव अभी किनारे पर ही थी कि वह भंवर में फंस गई। अपनी नाव को तैरा ले जाने के लिए सरकार ने क्या-क्या द्राविड़ी प्राणायाम नहीं किए लेकिन, मर्ज बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की। अब सरकार को नकदबंदी का नया मंत्र हाथ लगा है। नकद की जगह क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, पेटीएम, इंटरनेट बैंकिंग आदि के...
    December 17, 03:43 AM
  • अराजकता पर्व में जनता के धैर्य की परीक्षा
    नोटबंदी ने आम लोगों को जैसी मुसीबत में डाला है, वैसी मुसीबत तो भारत के लोगों ने न तो युद्धों के समय देखी और न ही आपातकाल के दौरान! इंदिरा गांधी के आपातकाल के मुकाबले नरेंद्र मोदी का आफतकाल लोगों के लिए ज्यादा प्राणलेवा सिद्ध हो रहा है, लेकिन क्या वजह है कि देश में बगावत का माहौल बिल्कुल नहीं है? लोग दिन-रात लाइनों में खड़े हैं, खड़े-खड़े दम तोड़ रहे हैं, किसानों की खेती चौपट हो रही है, मजदूर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, दुकानदार मंदी के शिकार हो रहे हैं, कर्मचारियों को तनख्वाह तक नहीं मिल पा रही है, शादियां मातम...
    December 2, 07:36 AM
  • भोपाल की मुठभेड़: खोखले तर्कों के तीर
    भोपाल की जेल से भागने वाले आतंकियों को मारकर मध्यप्रदेश पुलिस ने अनुकरणीय काम किया है। उसने भावी भगोड़ों की हड्डियों में कंपकंपी दौड़ा दी होगी। यदि सरकार जेलों के दरवाजे खोल भी दे तो भी आतंकी भागना पसंद नहीं करेंगे। वे मरने की बजाय जेल में मुफ्त की रोटियां तोड़ना ज्यादा पसंद करेंगे। 2013 में खंडवा जेल से भागे आतंकी देश के विभिन्न इलाकों से पकड़े गए थे। खंडवा जेल के उन्हीं आतंकियों ने भोपाल जेल के साथियों को दूसरे खंडवा के लिए उकसाया होगा। साजिश काफी तगड़ी थी। सबसे पहले सीसीटीवी के कैमरे के तार...
    November 5, 04:50 AM
  • हिंदुत्व नहीं, थोक वोट पर बहस की जाए
    आजकल सर्वोच्च न्यायालय इस मुद्दे पर विचार कर रहा है कि राजनीति में धर्म का इस्तेमाल किया जाए या नहीं? 20 साल पहले इसी अदालत का दिया गया वह निर्णय भी बहस का मुद्दा है कि हिंदू धर्म, धर्म नहीं है। वह जीवन-पद्धति है? क्या हिंदुत्व को धर्म या मज़हब या रिलीजन कहा जा सकता है? जाहिर है कि यह मुद्दा इतना उलझा हुआ है कि इस पर एक राय नहीं हो सकती। यदि अदालत कोई दो-टूक फैसला सुना देगी तो भी लोग उसे मानेंगे या नहीं, कुछ पता नहीं। आखिरकार, संसद को ही इस मसले पर कानून बनाना पड़ेगा। पिछले 20 साल से संसद इस मुद्दे पर मौन है।...
    October 22, 03:46 AM
  • गोवा में भारत के सपनों का ब्रिक्स बने
    हर सदस्य-देश के नाम का पहला अक्षर जोड़कर ब्रिक्स बना है। ब्राजील, रशिया, इंडिया, चाइना और साउथ अफ्रीका। अंग्रेजी में ब्रिक्स का अर्थ हुआ- ईंटें। पश्चिमी जगत की आक्रामक अर्थ-नीतियों के विरुद्ध ईंटों की दीवार खड़ी करना ही ब्रिक्स का मुख्य लक्ष्य है। पांच देशों के इस संगठन का आठवां सम्मेलन अब गोवा में हो रहा है, भारत की अध्यक्षता में। पहले इसमें सिर्फ चार देश थे। साउथ अफ्रीका बाद में जुड़ा। ब्रिक का पहला सम्मेलन 2009 में रूस में हुआ। दक्षिण अफ्रीका 2011 में इसका पांचवां सदस्य बन गया। यह संगठन काफी मजबूत...
    October 15, 05:51 AM