वेद प्रताप वैदिक
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  • बाबुओं को शाह से सेवक कैसे बनाएं?
    केंद्र सरकार ने अपने खर्च में से 10 प्रतिशत की कटौती करने की जो घोषणा की है, उसका तो खुले दिल से स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन हम लगे हाथ यह प्रश्न भी पूछ लें तो किसी को बुरा नहीं लगना चाहिए कि सरकार में फिजूलखर्ची क्या सिर्फ 10 प्रतिशत ही होती है? अधिकाधिक सुशासन और न्यूनतम शासन का नारा लगाने वाली मोदी सरकार से ही यह सवाल पूछा जा सकता है। पिछली सरकारें तो वोट की खातिर नोट और नौकरियां झोलों में भर-भरकर बांट रही थीं। उस बंदरबांट का सुशासन से कोई लेना-देना नहीं था, इसीलिए भारत की सरकार बेहद वजनदार हो...
    06:13 AM
  • व्यवस्था परिवर्तन का दौर शुरू
    प्रांतीय चुनावों से मुक्त होते ही केंद्र सरकार ने तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। इसके तीन स्पष्ट संकेत हमारे सामने हैं। पहला, श्रमसुधार की घोषणाएं, महत्वपूर्ण सचिवों की अदलाबदली और मनरेगा का रूपांतरण! यदि इन तीनों परिवर्तनों को एक साथ रखकर देखें तो आशा बंधती है कि इस वर्ष के अंत तक यह सरकार देश के सामने कुछ ठोस उपलब्धियां प्रस्तुत कर सकेगी। दूसरे शब्दों में लोग शायद महसूस करने लगें कि सरकार बदली है तो अब व्यवस्था भी बदल रही है, जिसका बेसब्री से इंतजार है। हमारी व्यवस्था में कई दोष हैं,...
    October 18, 07:26 AM
  • थोड़े से खुद गांधी  बनें तो बात बने
    वेदप्रताप वैदिक. गांधी-जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सफाई अभियान और सरसंघ चालक मोहन भागवत का विजयदशमी भाषण काफी चर्चा में रहे। उन्होंने आशा जगाई कि देश में अब रचनात्मक काम बड़े पैमाने पर शुरू होंगे, लेकिन क्या वाकई कोई रचनात्मक जन-आंदोलन शुरू होगा, जो साफ-सफाई, खादी, स्वभाषा, स्वदेशी, गोरक्षा, नशाबंदी, जाति-मुक्ति आदि कामों की प्रेरणा लाखों-करोड़ों लोगों को देगा? सत्तारूढ़ नेताओं के इन उपदेशों को लागू कौन करेगा? सरकार कठोर कानून बना सकती है और नौकरशाही मक्खी पर मक्खी बिठा सकती है, लेकिन...
    October 13, 07:36 AM
  • भारत ने अमेरिका से क्या पाया?
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा में भारत ने क्या खोया, क्या पाया यह सवाल सभी सुधीजन खुद से पूछ रहे हैं। यह सवाल के यदि संपूर्ण विदेश नीति के संदर्भ में रखकर पूछें तो यह ज्यादा अर्थवान हो जाता है। अभी तक मोदी ब्रिक्स में हुई भेंटों के अलावा भूटान, जापान, चीन और अमेरिका के नेताओं से मिले हैं। इन भेंटों में से भारत के लिए क्या निकला और आगे क्या निकलने की संभावनाएं हैं? हमारी कुल विदेश नीति की दिशा क्या है? जहां तक मोदी की अमेरिकी यात्रा का प्रश्न है, इसे हम अपूर्व जनसंपर्क कह सकते हैं।...
    October 4, 06:37 AM
  • मोदी तय करें भारत-अमेरिकी राह
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली अमेरिका-यात्रा प्रारंभ हो गई है। यह यात्रा इस अर्थ में असाधारण है कि जिस मोदी को सालभर पहले तक अमेरिका वीजा देने को तैयार नहीं था, उसी मोदी की अगवानी में अमेरिकी राष्ट्रपति पलक-पांवड़े बिछाए हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए सितंबर-अक्टूबर का महीना ऐसा होता है, जिसमें वे विदेशी राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों से मिलने में कतराते हैं, क्योंकि न्यूयॉर्क में होने वाले संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में लगभग सभी राष्ट्रों के नेता पहुंचे रहते हैं। ऐसे में...
    September 27, 07:10 AM
  • बहुरूिपए चीन की पैंतरेबाजी
    चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत-यात्रा कैसी रही, इसका जवाब मैं यह देता हूं कि वह भारत-यात्रा नहीं, दक्षिण एशिया-यात्रा थी। इसमें पाकिस्तान, मालदीव और श्रीलंका पहले थे और भारत सबसे बाद में था। शी पाकिस्तान इसलिए नहीं जा पाए कि वहां जन-आंदोलन ने काफी अव्यवस्था फैला रखी थी। नेपाल और बांग्लादेश में भी आंतरिक समस्याएं हैं, वरना चीनी राष्ट्रपति लगे हाथ इन देशों में भी हो आते । यदि राष्ट्रपति शी का ध्यान भारत पर केंद्रित होता तो पहली बात यह कि उनके आने के हफ्ते-दो हफ्ते पहले से लद्दाख में चल रही...
    September 20, 07:16 AM
  • हम कैसे मनाएं हिंदी दिवस?
    हर 14 सितंबर को देश में हिंदी दिवस मनाया जाता है। जरा हम पता तो करें कि सवा अरब के इस देश में कितने लोगों को मालूम है कि 14 सितंबर को हिंदी दिवस होता है। आम आदमी का उससे कोई लेना-देना नहीं होता। सरकारी दफ्तरों में भी वह वार्षिक कर्मकांड बन गया है। किसी अफसर या किसी छोटे-मोटे नेता या किसी हिंदीसेवी को बुलाकर कुछ कर्मचारियों को हिंदी में काम करने के लिए पुरस्कार दे दिए जाते हैं। रटे-रटाए शब्दों में पिटे-पिटाए मुद्दों पर भाषण हो जाते हैं और फिर परनाला वहीं गिरना शुरू हो जाता है। अब नरेंद्र मोदी की...
    September 13, 06:40 AM
  • भारत-जापान मैत्री, मणि कांचन योग
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान-यात्रा की सफलता का प्रमाण यही है कि कांग्रेस के महान युवा नेता उसकी आलोचना में सिर्फ कुछ कंकर ही उछाल पाए हैं। उन्होंने कहा है कि देश में महंगाई और बेरोजगारी सिर उठाए हुए है और मोदी जापान में ढोलक पीट रहे हैं। इस बेचारे नेता को यह भी पता नहीं कि ढोल और ढोलक में क्या अंतर है। ऐसे नेता के नीचे काम करने की इच्छा व्यक्त करने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जापान के साथ कैसे रिश्ते बनाए? अपने दस साल के राज में कांग्रेस चाहती तो मैत्री का ऐसा चंदोवा खड़ा कर देती कि जो...
    September 6, 08:25 AM
  • फिर पटरी पर लौटेगी भारत-पाक वार्ता
    भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की वार्ता स्थगित क्या हुई, देश के कई जाने-माने राजनेताओं और विशेषज्ञों को ऐसा लगा कि भारत-पाक संबंध दुबारा शीर्षासन की मुद्रा में आ गए हैं। उनके मन में घबराहट पैदा हो गई है कि अगले कुछ दिनों में कहीं फौजी मुठभेड़ की नौबत न आ जाए। दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी राष्ट्र अचानक पटरी से क्यों उतर गए? हुर्रियत से पाक-उच्चायुक्त का मिलना तो मामूली बात है। इधर अचानक कोई गंभीर बात हुई है, जिसके कारण हमें ऐसा फैसला लेना पड़ा है। वह गंभीर बात क्या हो सकती है, वह हम आगे बताएंगे।...
    August 23, 08:07 AM
  • ताकि भ्रष्टाचारियों की रूह कांपे
    .वेदप्रताप वैदिक जनता समझती है कि उनके चुने हुए नेता सरकार चलाते हैं, लेकिन असलियत यह है कि नौकरशाह सरकार चलाते हैं । नेता तो थोड़े समय के मेहमान होते हैं। नौकरशाह सरकार के स्थायी मालिक होते हैं! नेता लोग हमारे नौकरशाहों के नौकर होते हैं। यदि नौकरशाही सुधर जाए तो कोई भी सरकार सचमुच जनता की सच्ची सेवक बन सकती है। प्रसन्नता की बात है कि सरकार ने नौकरशाहों के लिए एक नई और संशोधित नियमावली जारी की है। नौकरशाहों की जो आचरण-नियमावली बरसों से चली आ रही थी, उसमें कर्तव्यनिष्ठा, विनम्रता, ईमानदारी आदि...
    August 9, 06:32 AM
  • देशी भाषाओं में हों भर्ती परीक्षाएं
    संघ लोक सेवा आयोग की भर्ती-परीक्षा में सीसेट के प्रश्न-पत्रों का इतना तगड़ा विरोध होगा, इसका अंदाजा न तो पिछली सरकार को था और न ही वर्तमान सरकार को। पिछले साल दिल्ली के मुखर्जी नगर में जब इन छात्रों की पहली सभा को मैंने संबोधित किया था तो मुझे ऐसा जरूर लगा था कि यह आंदोलन पिछले कुछ हिंदी आंदोलनों की तरह बीच में ही ठप नहीं होगा, क्योंकि आंदोलनकारी छात्रों का भविष्य इस आंदोलन से सीधा जुड़ा हुआ था। लगभग दस लाख छात्र इस परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं। इन भर्ती-परीक्षाओं में अंग्रेजी का इतना बोलबाला है...
    August 2, 06:45 AM
  • जजों की नियुक्ति में सरकारी दखल
    न्यायपालिका में उच्चतम स्तर पर भ्रष्टाचार का एक नया मामला उजागर हुआ है। मद्रास उच्च न्यायालय के एक भ्रष्ट एडिशनल जज को स्थायी जज का दर्जा कैसे मिल गया, यह सवाल मार्कंडेय काटजू ने पूछा है। काटजू उस समय मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। रमेशचंद्र लाहोटी सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे। यह 2007 के आस-पास की बात है। उस समय देश में कांग्रेस की गठबंधन सरकार थी। तमिलनाडु की द्रमुक पार्टी इस गठबंधन में काफी वज़नदार थी। द्रमुक ने कांग्रेस को धमकी दी। यदि तुम इस जज को उच्च न्यायालय में...
    July 25, 04:58 AM
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