Home >> Abhivyakti >> Jeene Ki Rah
  • रोज की गतिविधियों में नवीनता लाएं
    इस दौर में बदलाव से जुड़े रहना ही बुद्धिमानी है। हमारी दिनचर्या में कुछ काम ढर्रे में बदल जाते हैं। इन कामों को हम क्यों कर रहे हैं, इसका कोई जवाब नहीं होता। ये काम धीरे-धीरे आदत बन जाते हैं, जो दो तरह की होती हैं। एक नुकसान पहुंचाती है और दूसरी वह जिसमें न लाभ है, न हानि। बस, करने के लिए किए जा रहे हैं। ऐसे में हमारी ऊर्जा भी अज्ञात दिशा में बहने लगती है। हमारे पास ऊर्जा का असीम भंडार है, लेकिन उसका सद्पयोग न करें, तो वह सीमित हो जाता है, इसलिए अपने दैनिक ढर्रे को बदलते रहिए। डाइनिंग टेबल पर अपना स्थान...
    September 20, 07:08 AM
  • बाधाएं दूर करनी हों तो एकांत साधिए
    क्या हम यह जानते हैं कि हमारे पास आज जो कुछ भी है अमीरी या गरीबी, शिक्षा या निरक्षरता, सुख या दुख यह सब कहां से आया और कहां जाएगा? ज्यादातर लोग इससे परिचित नहीं हैं। वे तो सिर्फ भोग रहे हैं। न तो इसके मूल की फिक्र है और न ही इसके परिणाम की चिंता। थोड़ा विचार करिए, ऐसी बातें जब जीवन में आती हैं तो कोई न कोई जरूर इनकी शुरुआत का बिंदु होता है और कहीं न कहीं जाकर इन्हें समाप्त भी होना है। इन दोनों छोरों से हम जितना अधिक परिचय कर लेंगे, उतना ही इन्हें भोगते समय आनंद उठा पाएंगे। इन छोरों को ढूंढ़ने के लिए हमेें...
    September 19, 07:01 AM
  • हर स्थिति को सहजता से स्वीकारें
    हमारा सोचना और फिर प्रतिक्रिया करना, इस पर हमारी खुशी या परेशानी टिकी रहती है। कुछ घटनाओं पर आपका वश नहीं रहता, वे घटकर ही रहेंगी। गुरु नानकदेव की यह घोषणा बड़ी गजब की है कि आपका जो नजरिया है वैसी ही आपकी दुनिया बन जाएगी, इसलिए कुछ बातों को सहज रूप से स्वीकार करें, लेकिन हम स्थितियों से उलझने लगते हैं। हम हमेशा चाहते हैं कि हालात हमारे अनुकूल रहें। अध्यात्म कहता है कि हम बाहर की स्थिति से भीतर बिल्कुल विचलित न हों। हम बाहरी स्थितियों और व्यक्तियों को देखकर अपने भीतर के अस्तित्व को भी बदलने लगते...
    September 18, 07:42 AM
  • नियमितता में है शांतिपूर्ण सफलता
    आजकल माता-पिता के पास बच्चों की शिकायत सूची में यह भी है कि बच्चे आलसी होते जा रहे हैं, लेकिन गौर से देखा जाए तो आजकल के बच्चे बहुत क्रियाशील नजर आते हैं। खतरा उनकी अनियमितता से है। इसके कारण बच्चों का तेज और चुस्त दिमाग भी जल्दी थकने लगता है। नए जमाने में बाल मनोविज्ञान को इस बात से जोड़ दिया गया है कि तुम्हें हर हाल में और बहुत जल्दी सब प्राप्त करना है। देर की तो दूसरे आगे निकल जाएंगे। इस दबाव ने उनके मन को बेचैन अौर तन को अनियमित बना दिया है। इनके पास जीवन का अनुभव तो कम होता है, लेकिन अपेक्षाएं...
    September 17, 07:20 AM
  • आपके शब्द ही आपका परिचय हैं
    हर काम को करने के कुछ कायदे होते हैं। योजना बनाकर किए काम में सफलता की संभावना रहती ही है, लेकिन योजना का वर्तमान जब एग्जीक्यूशन के भविष्य से जुड़ता है तो समझ की जरूरत पड़ती है। मैदान में योजना बनाने का वक्त नहीं होता। तुरंत निर्णय लेने होते हैं। इसमें हनुमानजी दक्ष थे, क्योंकि उनका मन उनके नियंत्रण में था। अनियंत्रित मन कई किस्म के विचार उछालकर अनिर्णय में डाल देगा। किष्किंधा कांड में हनुमानजी श्रीराम के सामने थे। पता लगाना था कि ये कौन हैं, ताकि सुग्रीव भविष्य का निर्णय ले सकें। हनुमानजी ने...
    September 16, 07:24 AM
  • नवीनता देती है रिश्ते को स्थिरता
    सभी में आकर्षण होता है और हर आकर्षण की उम्र होती है। आकर्षण खत्म होने का सबसे ज्यादा खतरा पति-पत्नी के रिश्ते में होता है। अन्य रिश्तों में भी आकर्षण होता है। अनेक बार इसे बनाए रखना पड़ता है और कभी-कभी इसे खत्म भी करना पड़ता है। लगाव व आकर्षण में फर्क है। आकर्षण अनजान के प्रति खिंचाव है। लगाव जानबूझकर जुड़ना है। पति-पत्नी में धीरे-धीरे आकर्षण कम होने लगता है। रिश्ता प्रेम में बदल जाए ऐसा मुिश्कल से ही हो पाता है। प्रेम तो अनेक बार गुप्त समझौते जैसा बन जाता है। मन मारकर जीने की कला को प्रेम बता दिया...
    September 15, 06:58 AM
  • वर्तमान के प्रति जागरूक रहें
    भविष्य की चिंता सभी को सताती है, लेकिन भविष्य के प्रति जागरूक रहना अलग बात है और चिंतित होना बिल्कुल अलग स्थिति है। लोग जब भविष्य के बारे में सोचने लगते हैं, तो वर्तमान से बिल्कुल हट जाते हैं। भविष्य यानी आने वाला वर्तमान। उम्मीदों का तूफान जो आने वाला है, इसलिए भविष्य की लिस्ट बड़ी लंबी है और मनुष्य उसी में उलझ जाता है। अनजाने भविष्य के लिए वर्तमान क्यों बिगाड़ें? वर्तमान का पूरा आनंद उठाते हुए आने वाले वक्त के प्रति सजग रहा जा सकता है, क्योंकि भविष्य को तो आना ही है। आप चाहें तो जल्दी नहीं ला...
    September 13, 06:22 AM
  • विचारों से मुक्ति है असली शांति
    हम जब खाली बैठे होते हैं तब भी खाली नहीं रहते। विचारों को भीतर भरते रहते हैं। शरीर काम नहीं कर रहा होता है तो हम मान लेते हैं कि खाली हैं, लेकिन मन की सक्रियता बनी रहती है। फिर भी जब कभी हम शरीर से निष्क्रिय हों तो विचार करिएगा कि हमारा मन आखिरी बार कब शांत रहा था। चौबीस घंटे में यह सवाल एक या दो बार खुद से जरूर पूछें, क्योंकि शांत मन मस्तिष्क को रचनात्मक परिणाम देने में सहयोग करता है। मस्तिष्क में बेढंगे रूप में प्रवेश करने वाले विचारों को सिस्टेमैटिक बनाने के लिए समझ से काम लेना पड़ता है। समझ का...
    September 12, 07:30 AM
  • परमात्मा को रखें जीवन के केंद्र में
    मनुष्य दो तरीके से जीवन जीता है। एक होता है जीवन का केंद्र, जो शरीर के भीतर होता है और दूसरी होती है परिधि, जहां हमारी सांसारिक गतिविधियां रहती हैं। जैसे हमारा घर और हमारी बाहर की दुनिया। घर केेंद्र है और हमारा कार्यस्थल परिधि है। अब हमें तय करना है कि जीवन में किसको किस जगह रखना है। परमात्मा को केंद्र में रखिए और दुनियादारी को परिधि पर पटकिए। अगर उल्टा किया, तो जीवन समस्या का दूसरा नाम हो जाएगा। जैसे ही ईश्वर को हम केंद्र में रखते हैं हमारी सोच सकारात्मक हो जाती है। हम आत्मा से परिचित होने लगते...
    September 11, 07:17 AM
  • भीतर से आता है संतुलित दृष्टिकोण
    बहुत से लोग जीवनभर यह तय नहीं कर पाते कि उनके लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा। इसमें भी उन्हें दूसरों का सहारा लेना पड़ता है। दरअसल, सारा मामला हमारे दृष्टिकोण का है। दृष्टिकोण का शाब्दिक अर्थ है आपकी निगाहें घटना को किस एंगल से देख रही हैं। आध्यात्मिक दृष्टि हमें दृष्टिकोण की गहराई दे सकती है। दृष्टि शब्द आया यानी आंख। आंख का काम है देखना, लेकिन जब दृष्टि जुड़ती है तो अर्थ है विचार सक्रिय हो चुके हैं और सक्रिय विचार मन और हृदय तक पहुंच रहे हैं। इस पूरी यात्रा का नाम है दृष्टिकोण। फिर हम...
    September 10, 07:32 AM
  • ईश्वर में भरोसे से मिटता है भय
    जीवन में जब भय उतरता है, तो वह हमारे विचारों को भी गलत दिशा में धक्का देने लगता है। भय ऐसी क्रिया है जिसमें मन, हृदय, मस्तिष्क तीनों सक्रिय हो जाते हैं। भय मिटाने का सरल तरीका है भरोसा। बच्चों को माता-पिता पर भरोसा होता है, तो भय के समय वो उनसे लिपट जाते हैं। संसार में अनेक भय हैं। सबके निपटारे का सही तरीका है ईश्वर के प्रति भरोसा। भय का प्रवेश बाहरी घटनाओं से होगा, भरोसे का आगमन अंतरतम से आएगा। हमारी चर्चा चल रही है रामचरितमानस के चौथे सोपान किष्किंधाकांड की। भय भी बहुत बड़ी समस्या है और हनुमानजी...
    September 9, 07:16 AM
  • मन के नियंत्रण में ही है सहजता
    जीवन में एक निरंतरता बनी रहती है। इसके प्रति जो लोग जागरूक रहते हैं वे इसका लाभ उठा लेते हैं और लापरवाह लोगों को हानि हो जाती है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण है मनुष्य की उम्र। कोई चाहकर भी अपनी आयु की गति को रोक नहीं पाएगा, इसलिए जीवन की निरंतरता के प्रति सजग, सरल और सहज दृष्टिकोण अपनाया जाए। इसमें बाधा बनता है मन, क्योंकि मन भी बहुत गतिशील है। मन अपनी गति को जीवन की निरंतरता से टक्कर देता है और फिर दुख, पीड़ा जैसे अनुभवों की शुरुआत होती है। ध्यान रखिएगा कष्ट, संकट, पीड़ा ये सब भाव हैं, जिन्हें फिलिंग्स...
    September 8, 07:48 AM
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