जीने की राह

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  • संघर्ष करना पड़े तो उसे दुर्भाग्य न मानें
    जीवन में संघर्ष सबको करना पड़ता है। संसार में निर्मित परिस्थितियों में और उन हालात में भी जो ईश्वर से मिले होते हैं। इसलिए, यदि संघर्ष करना पड़े तो उसे दुर्भाग्य न माना जाए। संघर्ष से बचने की कोशिश न करें। सफलता उसे ही मिलेगी जो ठीक से संघर्ष कर सकेगा। हालात कितने बुरे हैं यह इतना महत्वपूर्ण नहीं है। महत्व इसका है कि उन हालात का सामना आप कैसे करते हैं। एक बात याद रखिए कि जब भी संघर्ष करना पड़े, अपनी आंतरिक प्रसन्नता मत खोने दीजिए। भीतर से जितना खुद को खुश रखेंगे उतने हल्के होंगे और जो भीतर से...
    06:46 AM
  • अपने जीवन व स्वभाव में गहराई उतारें
    नदी को शांत होने के लिए गहराई चाहिए। जहां वह बहुत गहरी होती है, वहां वह बिल्कुल शांत नज़र आती है। हमारे जीवन में भी यही नियम लागू होता है। शांत होना है तो जीवन में गहराई उतारनी होगी। शांति की खोज में यदि नदी की तरह गहरे न हो सकें तो बीज की तरह हो जाएं। बीज जब अंकुरित होता है तो जानता नहीं है कि मेरे अंकुरण का परिणाम क्या होगा। कितना बड़ा वृक्ष बनूंगा, मेरे फूलों का क्या उपयोग होगा पर एक बात जानता है कि मैं बीज हूं तो मुझे अंकुरित होना है। बस, बीज जैसा ही भाव अपने भीतर ले आएं कि हम मनुष्य हैं तो हमें...
    January 21, 06:44 AM
  • पूरी तन्मयता से काम करें, शांति उतरेगी
    जो भी काम करें, यदि पूरे स्वाद के साथ करेंगे तो भीतर संन्यास या कहें फकीरी अपने आप उतर जाएगी। संन्यास का एक मतलब होता है रोम-रोम में शांति समा जाना। शांति की तलाश में हैं तो एक शब्द ध्यान में रखें स्वाद। जीवन में जिन भी क्षेत्रों में स्वाद बनाए रखना है उनमें से एक है रिश्तों का निर्वहन। आपका कोई परिवार जरूर होगा और यह टिका होता है रिश्तों पर। हम कई बार परिवार में रहते हुए सिर्फ वस्तुओं को देखने लगते हैं। एक मकान, कुछ गाड़ियां, कुछ लोग और उनकी सुविधाएं, इसी का नाम परिवार नहीं है। यदि परिवार में...
    January 20, 04:23 AM
  • मेहमान की तरह करें नींद का स्वागत
    रात को सोते समय बाहर से तो हमारा शरीर लेटा हुआ, स्थिर दिखता है। उसमें कोई गति नहीं होती लेकिन, भीतर से चार पहियों पर यह रातभर सफर करता है। ये चार पहिये होते हैं- काम, क्रोध, मद और लोभ के। कई बार तो ये सोए शरीर को भीतर से इतना दौड़ाते हैं कि सुबह उठने पर हम थकान-सी महसूस करते हैं। जो लोग सुबह उठने पर शांत नहीं रहते, उन्हें रात की नींद पर नज़र डालनी होगी। हम अपनी नींद को देखें तो पहली बात नज़र आएगी कि नींद आ तो तुरंत जाती है पर फिर खुल जाती है। दूसरी स्थिति होती है नींद तो आ जाती है पर रातभर असहजता बनी रहती...
    January 19, 04:08 AM
  • किसी को सुनते हुए भी हो सकता है ध्यान
    यदि आप ध्यान करना चाहते हैं और उसके लिए जरूरी समय नहीं निकाल पा रहे हों या कोई और बाधाएं ध्यान करने से रोकती हों तो एक काम धीरे-धीरे करते रहिए। योग अभ्यास का नाम है। कई तरह के अभ्यास हैं, जो आपकी योगवृत्ति को मजबूत करेंगे। उनमें से एक है अच्छे श्रोता बन जाना। यदि आप किसी को शांति से सुन सकें तो उसके दो फायदे होंगे। पहला यह कि ध्यान का अभ्यास होने लगेगा और दूसरा फायदा होगा, आप किसी के काम आ सकेंगे। यह भी बहुत बड़ी सेवा है। सेवा करने के लिए बहुत समर्थ या धनाढ्य होना ही जरूरी नहीं है, यह मन से भी की जा...
    January 18, 07:13 AM
  • ईश्वर के नाम को भीतरी सांस से जोड़ें
    दुनिया में सफलता पाने के लिए कुछ अलग होना और दिखना पड़ता है। हमारी सारी योग्यता इसी में है कि अन्य लोगों से अव्वल, अनूठे और थोड़े निराले हों। इसलिए लोग सारी ताकत इसी पर लगाते हैं कि कुछ अलग हो जाएं। संसार में ऐसा चलता है लेकिन, यदि संसार बनाने वाले को पाना हो तो फिर उसके जैसा ही होना पड़ता है। भगवान मिलता ही तब है जब आप भगवान होने की तैयारी करें। भगवान होने की तैयारी का मतलब कहीं अहंकार लाना नहीं है। भगवान बना देने वाली खूबियां मनुष्य को जन्म से मिली हुई हैं और उन्हीं को उजागर करने का मतलब भगवान...
    January 17, 07:14 AM
  • नींद के मामले में कोई समझौता न करें
    खानपान के मामले में अच्छे-अच्छों का संयम टूट जाता है। थाली सामने आते ही सारे प्रण धरे रह जाते हैं। मनुष्य के लिए जितना महत्वपूर्ण भोजन है, उससे कहीं ज्यादा जरूरी है नींद। नींद का नुकसान तुरंत पता लगता है, इसलिए जिस प्रकार हम खाने-पीने में शुद्धता का ध्यान रखते हैं, वैसे ही नींद के मामले में भी सावधान होना होगा। नींद की शुद्धता से मतलब है उसमें व्यवधान नहीं होना। नींद को गहरा बनाने के लिए उसको ध्यान का बाय-प्रोडक्ट बनाना पड़ेगा। नींद आराम या वासना पूर्ति की क्रिया नहीं है। जब भी सोने जाएं, पहले...
    January 14, 04:33 AM
  • कैलोरी घटाकर भी उपवास करना संभव
    इस समय देशवासियों को खूब नई जानकारियां दी जा रही हैं। बड़ा प्रचार है कि जीवन को कैशलेस किया जाए। जब देश को कैशलेस करने की बातें नए ढंग से हो रही हों तब देशवासियों का जीवन फैटलेस हो इस पर भी काम किया जाना चाहिए। डाइट को कैलोरी मैनेजमेंट से जोड़कर लोगों को जागरूक करना बहुत जरूरी हो गया है। ऐसे में मुहिम चलाई जाए कि आप जो भी खा रहे हों उसकी कैलोरी पता हो। देश के तीव्र विकास के साथ उतनी ही तेजी से बीमारियां भी प्रवेश के लिए तैयार बैठी हैं। कहीं ऐसा न हो कि डाइबिटीज की तरह मोटापा भी गंभीर समस्या बन...
    January 13, 04:37 AM
  • स्वामीजी की याद में हनुमान चालीसा जप
    मनुष्य का जीवन घटनाओं का जोड़ होता है और हर घटना दूसरी घटना पर प्रभाव छोड़ती है। जैसे कोई विद्यार्थी पढ़ते समय जिस फ्लेवर की च्यूइंगम खाएगा और यदि परीक्षा देते समय भी उसी फ्लेवर को मुंह में रखे तो कुछ बातें आसानी से याद आने लगती हैं। ऐसे ही मोबाइल की रिंगटोन को अलार्म बना लें तो उठने में सुविधा हो जाती है। पहले मनुष्य के जीवन में इतनी घटनाएं नहीं होती थीं पर आज के युवाओं के आसपास तो चौबीसों घंटे घटनाएं मंडराती रहती हैं। घटनाओं का बंटवारा ठीक ढंग से किया जाए इसकी सीख स्वामी विवेकानंद ने बहुत...
    January 12, 04:00 AM
  • भीतर तृप्ति जगाने से  टिकेगी गृहस्थी
    गलत व्यक्ति से सही मुलाकात हो जाने की जो घटनाएं होती हैं उनमें से एक है शादी। स्त्री-पुरुष के मिलन में होने वाली बेमेल बातों को दूर नहीं किया जा सकता है तब तलाक जैसी घटनाएं सामने आने लगती हैं। भारत में भी तलाक की दर लगातार बढ़ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि शादी के पांच साल के भीतर तलाक की बात करने वालों से ज्यादा वे हैं, जिनकी शादी को दस से बीस साल तक हो गए हैं। यह तो तय है कि विवाह का आरंभ कई गलतफहमियों से होता है। जब शादी का प्रस्ताव रखा जाता है, चाहे लड़का-लड़की स्वयं रखें या उनके परिवार वाले,...
    January 11, 04:52 AM
  • मन पर नियंत्रण पाने के चार तरीके
    मनुष्य को दूसरों से उतना खतरा नहीं है जितना स्वयं से और यह होता है अपने ही दुर्गुणों से। हमारे शरीर में दुर्गुण प्रवेश तो करते हैं इंद्रियों के माध्यम से लेकिन, उनको आमंत्रण देता है मन। ऋषि-मुनियों ने पात्रों के माध्यम से इन प्रवृत्तियों को बड़े अच्छे ढंग से बताया है। रावण दुर्गुणों की पाठशाला था। लंका कांड में श्रीराम और रावण के बीच दुर्गण और सद्गुणों का जो युद्ध हुआ था, ऐसा ही युद्ध हम भी हमेशा अपने भीतर लड़ते रहते हैं। इसलिए जब लंका कांड का आरंभ हुआ तो तुलसीदासजी ने दो पंक्तियां लिखी हैं-...
    January 10, 04:34 AM
  • अच्छे वक्ता बनना हो तो भजन कीजिए
    हम अपनी काफी ऊर्जा दूसरों का खंडन और अपना मंडन करने में खर्च कर देते हैं। जब दुनियादारी में उतरते हैं तो कई लोगों से बात करनी पड़ती है, उन्हें अपनी बात समझानी पड़ती है और इस सब में बड़ी ऊर्जा लगती है। बात दो स्तरों पर होती है। पहले स्तर पर उनकी बात सुनने के बाद प्रतिक्रिया देते हैं, उसका खंडन या समर्थन करते हैं। लेकिन, दोनों ही आसान नहीं होते। बातचीत का दूसरा स्तर होता है बिना उनकी सुने अपनी बात कहनी पड़ती है। यानी शुरुआत हम कर रहे होते हैं। इसमें भी बड़ी ऊर्जा लगती है। आजकल तो प्रजेंटेशन करना हो,...
    January 7, 05:07 AM
  • शांति का सूत्र : बाहर संतोष, भीतर योग
    तन और मन के मामले में दुनिया अलग-अलग होती है। शरीर के लिहाज से देखें तो दुनिया तो एक है पर शरीर बहुत। पूरी दुनिया में जितने लोग बाहर से दिख रहे हैं उतने ही शरीर हैं और ये सारे शरीर वाले लोग जब दूर से देखते हैं तो दुनिया एक नज़र आती है। मन के मामले में उल्टा है। जितने मन उतनी ही दुनिया। बाहर से एक दिखने वाली दुनिया मन के हिसाब से सबकी अलग-अलग है। इसीलिए बाहर की दुनिया में जब शरीर से दौड़-भाग करते हैं, तो उतना नहीं थकते जितना मन थकाता है। मन इतनी दुनियाएं बसा लेता है कि इधर-उधर भागता-फिरता है। इसे रोकना...
    January 6, 06:10 AM
  • वीरता आत्मविश्वास है व परिवार स्रोत
    जीत एक सिलसिला है। जो लोग यह मानते हैं कि एक बार जीत गए, अब आगे कुछ नहीं करना है तो समझो वे हार की तैयारी कर रहे हैं। अब तो जीत और हार को वीरता से जोड़कर देखे जाने का समय है। यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि जो जीतेगा वह वीर होगा और ऐसा भी नहीं है कि जो वीर है वह जीत ही जाए। हार-जीत के बड़े गहरे मायने होते हैं। कई बार आप जीतकर भी हार जाते हैं और बहुत बार हारने के बाद भी जीत जाएंगे। एक मशहूर घटना है हनुमानजी द्वारा लंका जलाने की और इसे लगभग सभी लोग जानते हैं। धार्मिक लोग हनुमानजी के पराक्रम को रामजी की कृपा...
    January 5, 05:30 AM
  • दूसरों की समस्या दूर कर महत्वपूर्ण बनें
    चुंबक में दो बातें होती हैं। एक तो लोहा जो दिखता है और दूसरी उसके आसपास का मैग्नेटिक फील्ड जो नजर नहीं आता। इस बात को जीवन में आने वाली समस्याओं से जोड़कर देखें। समस्याएं तो जीवन में बनी ही रहेंगी। एक मिटाएंगे, दूसरी आ जाएगी। चलिए, देखते हैं जब समस्या आए तो स्थिति क्या बनती है और उससे कैसे निपटा जाए? समस्या के दौर में हमारे साथ तीन बातें होंगी। एक, हम परेशान होते हैं। दो, भयभीत हो जाते हैं और तीन, अपने आपको अकेला महसूस करने लगते हैं, इसीलिए दूसरे का सहारा ढूंढ़ते हैं। तीनों ही स्थितियों में या तो...
    January 4, 03:08 AM
  • इंद्रियों के संयोजन से दुर्गुणों को मात दें
    जीत केवल शस्त्रों से नहीं होती। आपके साथ बलवान योद्धा हों और जीत दिला ही दें यह जरूरी नहीं। जीतने के लिए हमारे पक्ष के लोगों का ठीक से संयोजन करना पड़ेगा। रामचरितमानस के लंकाकांंड में श्रीराम-रावण के बीच युद्ध की अनेक घटनाएं हैं, जिनमें रामजी ने बहुत अच्छे ढंग से हनुमानजी का संयोजन किया था। कुछ घटनाएं तो ऐसी हुई थीं कि रावण लगभग जीत चुका था लेकिन, हनुमानजी ने विजय का मुख मोड़कर रामजी की ओर कर दिया था। हनुमानजी शिव का अवतार कहे गए हैं। तुलसीदासजी ने लंकाकांड के आरंभ में तीन श्लोक लिखे हैं।...
    January 3, 06:15 AM
  • ईश्वर से ऐसे जुड़ें जैसे गर्भस्थ शिशु मां से
    बहुत कम अवसर आते हैं जब धर्म विज्ञान को स्वीकार करे और विज्ञान धर्म के महत्व को समझे। दोनों अपनी अति पर हैं और नुकसान उन लोगों को होता है, जो दोनों को ही पकड़ना चाहते हैं। इन दोनों को मानने वाले लोग बीच का रास्ता निकाल सकते हैं। परमात्मा का अर्थ होता है परमशक्ति और शक्ति के मामले में विज्ञान भी सहमत है। एक वर्ग है जो पूछता है परमशक्ति कहां से आती है? यह वह वर्ग है जो संशय या भ्रम में है। परमात्मा को ढूंढ़ना भी चाहता है। वैज्ञानिक भी परमात्मा को नकारते नहीं पर संशयग्रस्त होकर शोध में डूबे हैं।...
    December 30, 06:11 AM
  • नियम से काम करने में अपमान नहीं
    यदि आप किसी नियम का पालन कर रहे हों तो इसे निजी अपमान न समझें। बहुत से लोग होते हैं कि जिन्हें यदि किसी नियम में बंधकर काम करना पड़ता है तो वे उसे अपना अपमान मान लेते हैं, दबाव में आ जाते हैं। हम भी इस स्थिति से गुजर सकते हैं। किसी से नियम के तहत काम करवाते हों तो परेशानी हो सकती है और यदि किसी के द्वारा बनाए नियम के तहत उनके लिए काम कर रहे होंगे तो भी दबाव में आ सकते हैं। किसी से नियम का पालन करवाने का मतलब उसे पालतू बनाना नहीं होता। ऐेसे ही यदि आप किसी के लिए नियम में बंधकर काम कर रहे हैं तो भी यह न...
    December 29, 06:07 AM
  • भीतर की भीड़ मिटाने के लिए योग करें
    हर व्यक्ति के भीतर एक भीड़ होती है। बाहर से अकेला दिख रहा आदमी भी भीतर कई लोगों से घिरा है। इसी भीड़ से फिर वह काल्पनिक समूह बनाकर कल्पना में ही दूसरों से उम्मीद लगाए रहता है। महत्व मिले, नेतृत्व प्राप्त हो यह सब कल्पना में चलता रहता है। भीतर काल्पनिक समूह बनाने के बाद तुलना शुरू होती है। हम हम हैं, कल्पना में दूसरे लोग हैं और उन्हीं काल्पनिक लोगों से हम अपनी तुलना करने लगते हैं। जब यह तुलना बाहर आती है तो ईर्ष्या में बदलती है। उदाहरण के तौर पर हमारे पास चारपहिया वाहन नहीं है तो हम कल्पना में उन...
    December 28, 03:13 AM
  • संवेदनशीलता बचाकर सफलता मिले
    जिन बातों से जीवन बनता है उनमें संवेदनशीलता का बड़ा योगदान है। इसकी सीधी परिभाषा है अपनापन, प्रेम, करुणा। भगवान जब मनुष्य को जन्म देता है तो ये सब लबालब भरकर देता है। बढ़ती उम्र के साथ शिक्षा, अनुभव, पद-प्रतिष्ठा, पहचान धीरे-धीरे संवेदनशीलता को समाप्त करने लगते हैं। फिर आज के दौर में तो यह कमजोरी मानी जाती है। संवेदनशीलता बचाकर सफलता प्राप्त करना और संवेदनशीलता को समाप्त कर सफल होने के उदाहरण हैं श्रीराम और रावण। इसी स्तंभ में हर मंगलवार को हमने किष्किंधा कांड के हनुमानजी और राम को पढ़ा, उससे...
    December 27, 03:42 AM