जीने की राह

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  • आगे रहकर भी साथ चलना सीखें
    आगे चलते हुए साथ में चलना यह मुहावरा नेतृत्व करने वालों के लिए बड़े काम का है, चाहे बात उल्टी लगती है। किष्किंधा कांड के उस प्रसंग से यह मुहावरा समझें, जिसमें सीताजी की खोज में निकले वानर प्यास सेे परेशान हो गए। हनुमानजी को लगा कि वानर प्यास से व्याकुल होकर प्राण छोड़ देंगे। एक ऊंचे स्थान पर चढ़कर दृष्टि डाली तो कुछ पक्षी एक गुफा में जाते दिखे और वे समझ गए कि वहां पानी होगा। सारे वानरों को वहां ले गए। दल का नेतृत्व अंगद कर रहे थे, लेकिन उन्होंने गुफा में जाने से इनकार कर दिया। सभी हनुमानजी की ओर...
    03:49 AM
  • उदारता व संयम को आचरण में लाएं
    यह उदारता और संयम का वक्त होना चाहिए। जो लोग आज सार्वजनिक जीवन में सक्रिय, पारिवारिक जीवन में समर्पित, धार्मिक जीवन में गतिशील हैं और राजनीतिक जीवन में कुछ मुकाम पाना चाहते हैं उन्हें इन दो शब्दों को गहना बनाकर आचरण में उतारना ही पड़ेगा अन्यथा सारी दुनिया के साथ हमारा देश भी इसका नुकसान उठाएगा। उदारता मनुष्य के भीतर सेवाभाव लाती है, हिंसा को दूर करती है। उदारता से परहित होता है और संयम से जीवन की अति समाप्त हो जाती है, हम भोगी होने से बच जाते हैं। इन दो बातों से अहंकार, क्रोध सब काबू में आ जाएंगे।...
    July 23, 03:15 AM
  • प्रबंधक के साथ लीडर भी बनें पालक
    संदेह ऐसा शस्त्र है, जो आपकी सुरक्षा के काम आ सकता है और आत्मघाती भी हो सकता है। खासतौर पर संदेह यदि परिवार में उतर आए तो फिर परिवार बचाना मुश्किल हो जाता है। आज सबसे खतरनाक स्थिति यह है कि माता-पिता और पति-पत्नी भी संदेह के दायरे में आ गए हैं। माता-पिता बच्चों पर संदेह करने लगे हैं। उनके भविष्य की रक्षा के लिए संदेह कर रहे हों यहां तक तो ठीक है परंतु जब अपने भविष्य को लेकर बच्चों पर संदेह करने लगें कि ये बड़े होकर हमारी रक्षा-सेवा करेंगे या नहीं, यह खतरनाक है। पहले माता-पिता सिर्फ समर्पण भाव से...
    July 22, 05:15 AM
  • परंपरा, संस्कार और मूल्यों से जुड़ें
    इन दिनों जब नई पीढ़ी के बच्चों से राष्ट्रीयता, नैतिकता, परिवार या धर्म की बात की जाए तो वे कुछ सवाल हमारी ओर उछालते हैं। बच्चे जब इन बातों पर प्रश्न उठाएं तो सावधानी से उत्तर दें। परंपरा, संस्कार व मूल्य- ये तीनों शब्द बच्चों को भारी लगते हैं, लेकिन गहराई से देखें तो ये जीवन के लिए तीन सरल स्थितियां और सफलता प्राप्त करने के तीन सहज साधन हैं। परंपराएं परिवर्तित होती रहती हैं, संस्कारों का निर्माण करना पड़ता है और मूल्य स्थायी होते हैं। जैसे अगरबत्ती जलाई जाए तो परंपरा के रूप में यह पूजा की क्रिया...
    July 21, 04:49 AM
  • धन से रिश्ता तय करता है लाभ-हानि
    लालच सभी को होता है। कम या ज्यादा हो सकता है परंतु हर आदमी अपने ढंग से लालची है। ध्यान रखिएगा, आपका लालची स्वभाव यदि लोगों को पता चल गया तो वे आपका फायदा उठा सकते हैं और आपको नुकसान हो सकता है। फिर धन तो सीधे लालच से जुड़ा है। यह आता ही लालच के गलियारों से है। आप लालच की जितनी पूर्ति करेंगे, धन उतना तेजी से आएगा, इसलिए आज के समय में सारा जीवन धन के आसपास ही संचालित हो रहा है। ध्यान रखिएगा, तीन गति है धन की- दान, भोग और नाश। आइए, विचार करें कि जब हम धन से जुड़ते हैं या जीवन में धन उतरता है तो यदि हम धन के...
    July 20, 02:19 AM
  • बड़ा काम करना हो तो योग से जुड़ें
    भयभीत लोग ज्यादा दावे करते हैं, क्योंकि उनके भीतर कहीं भय छीपा रहता है। भीतर की कमजोरी छिपाने के लिए हिम्मत की बातें करने हैं। किष्किंधा कांड में जब सारे वानर सीताजी की खोज के लिए निकले तो खूब उत्साह में थे। सात्विक अहंकार था कि हम इतने महत्वपूर्ण कार्य के लिए चुने गए हैं। हमारे साथ भी ऐसा ही होता है। जब हमें किसी बड़े काम या लोकप्रिय घटना से जुड़ने का अवसर मिलता है, तो प्रयास की गंभीरता से अधिक अहंकार का स्पर्श काम करता है। सीताजी की खोज शक्ति, भक्ति और शांति की खोज का रूपक है। यह बताता है कि...
    July 19, 02:40 AM
  • ऊपर वाली सरकार से जुड़े रहें
    सरकारें दो तरह की होती हैं। ऊपर वाली, और नीचे वाली। ऊपर वाली यानी भक्ति की सरकार और नीचे वाली यानी भौतिकता की दुनियानवी सरकार। अयोध्या जाएं तो वहां रामजी को सब सरकार ही कहते हैं। वहां देवता और गुरु को भी सरकार कहते हैं। ऊपर वाली सरकार अखंड है, सारे संसार को चलाती है। नीचे वाली सरकार खुद भी डरी रहती है और लोगों को भी भयभीत करती है। ऊपर वाली सरकार याद आने से ही सुरक्षा लगने लगती है। वह कृपा बरसाती है, नीचे वाली सरकार जो हमारे पास है वह भी ले जाती है। सरकार दोनों में से कोई भी हो, झूठ जरूर बोलेगी। ऊपर...
    July 16, 03:48 AM
  • विचारों के प्रति सजगता देती है शांति
    मनुष्य का मन एक दिन में कम से कम पचास हजार या इससे भी अधिक विचार पी जाता है और यही उसकी अशांति का बड़ा कारण बन जाता है। शांति खोजनी हो तो अपने आसपास बह रहे, अपनी ओर आ रहे विचारों के प्रति थोड़ा होश जगाना पड़ेगा। जैसे हम रिमोट का बटन दबाकर टीवी देखना आरंभ करते हैं तो कई चैनल लगाने के बाद किसी एक पर टिक जाते हैं। कई दृश्य, फिल्में, समाचार वातावरण में मौजूद होते हैं। आपका टीवी उनमें से कुछ को पकड़ लेता है। बस, ऐसा ही विचारों के साथ चल रहा है। कई विचार बह रहे हैं, आपका मन उनको टटोलता है और फिर किसी अच्छे या...
    July 15, 07:02 AM
  • नकारात्मकता के सागर में तैरना सीखें
    एक शिकायत अलग-अलग ढंग से करते हुए कई लोग मिल जाएंगे। प्राय: सुनने को मिलता है कि हमारे यहां टांग खींचने वाले लोग बहुत हैं। कोई काम करने जाएं तो आलोचना पहले शुरू हो जाती है। यह छोटे कस्बों के लोगों की आम शिकायत है। जिस स्थान पर आप रहते हैं उसे कोसना एक मनोवृत्ति-सी हो जाती है। ऐसा नहीं है कि बड़े नगरों में रहने वालों को ऐसी शिकायत नहीं होती। वहां जीवन तेज होता है तो शायद खींचतान नज़र नहीं आती। छोटी जगहों के सुस्त जीवन में वहां की उठापटक, धक्कामुक्की सब अजीब ढंग से स्पर्श करते हैं। किंतु तय है कि यदि...
    July 14, 03:54 AM
  • वक्त को सुविधाजनक बनाता है योग
    समय के मामले में दो तरह के लोग मिल जाएंगे। एक वेे जो हमेशा यही कहते रहते हैं कि क्या करें टाइम नहीं है। एक वर्ग ऐसा भी है, जिसके साथ समस्या है कि समय कैसे काटें? सेवानिवृत्त, वृद्धावस्था की ओर जाते हुए लोग दूसरी श्रेणी में पाए जाते हैं। फिर शरीर भी साथ नहीं देता तो चौबीस घंटे भी भारी पड़ने लगते हैं। जो युवावस्था में हैं, वे बहुत कुछ पाना चाहते हैं। उन्हें समय कम पड़ रहा है। खाना-पीना, सोना-उठना इन सबका तालमेल बिगड़ गया है। 25वां घंटा भगवान ने किसी को दिया नहीं है। इसलिए अध्यात्म कहता है समय का सदुपयोग...
    July 13, 04:57 AM
  • मन को तन्मय करेंगे तो होंगे बड़े काम
    सभी के जीवन में बड़ी जिम्मेदारी का काम करने के अवसर आते हैं। कुछ लोग सदैव जिम्मेदारी के काम करते हैं और कुछ कभी-कभी ही दायित्व बोध को जीवन से जोड़ पाते हैं। जब भी बहुत महत्वपूर्ण काम करना हो और उसमें हमारी भूमिका भी गहरी हो तो दो काम करने चाहिए। पहला, मन को पूरी तरह से तन्मय करें। दूसरा, तन का मोह छोड़ें। यानी भ्रमित न हों और खूब परिश्रम करें। इसी बात को तुलसीदासजी ने किष्किंधा कांड में वानरों से जोड़कर कहा है। वानर सीताजी की खोज में चल चुके थे। तुलसीदासजी ने दोहा लिखा,चले सकल बन खोजत सरिता सर गिरि...
    July 12, 05:25 AM
  • हमेशा प्रसन्न रहने के लिए योग करें
    परमात्मा जब किसी को जन्म देता है तो उसके साथ प्रसन्न रहने की सारी संभावनाएं छोड़ता है। मनुष्य शरीर का गठन बाहर और भीतर से ऐसा किया गया है कि उसे खुश रहना ही चाहिए। फिर हम उदास क्यों रहते हैं? असल में उदासी बाहर से हमारे भीतर आती है और खुशी भीतर मौलिक रूप से मौजूद है। चूंकि हम सावधान नहीं रहते, इसलिए बाहर से आई उदासी हावी हो जाती है। बहुत गहराई में न जाएं तो हमारे पास पांच ज्ञानेंद्रियां, पांच कर्मेंद्रियां, और पंचतत्व होते हैं। ये पंद्रह चीजें हमें खुशी देने के लिए ही हैं। इन सबके साथ एक सोलहवीं...
    July 9, 03:14 AM
  • प्रत्येक काम योजनाब ढंग से करें
    खुद पर नियंत्रण रखना अग्नि से गुजरने जैसा है। जो बाहर से बहुत दृढ़ दिख रहे हों वे भी भीतर से खुद पर नियंत्रण पाने के लिए संघर्ष कर रहे होंगे। बदलते हालात में स्व-नियंत्रण की कला सबको आनी चाहिए वरना पतन बड़ी आसानी से हो जाएगा। आदत बना लें कि बिना योजना के कोई काम नहीं करेंगे और प्रतिदिन योजना बनाएंगे। अपने सारे कार्य कुछ खानों में बैठा लें। जैसे हमारी पांच कर्मेंद्रियां हैं- आंख, कान, नाक, त्वचा और जीभ। आप जो भी काम करें, इन कर्मेंद्रियों को खाने में बैठाकर करें कि आज क्या देखना है, कितना सुनना है,...
    July 8, 03:33 AM
  • अपने भीतर भक्ति को बनाए रखें
    पहले पारिवारिक जीवन में बड़ी उम्र का व्यक्ति नेतृत्व करता था। वह जो बोलता था, आदेश बन जाता था और उसे मानना पड़ता था। समाज के और राष्ट्र के जीवन में भी ऐसा ही था कि नेतृत्व और निर्णय कुछ ही लोगों के हाथों में होता था। धीरे-धीरे समय बदला और परिवार में शक्ति व निर्णय के अनेक केंद्र बन गए। परिवार में जितने सदस्य हैं, सबकी अपनी-अपनी राय महत्वपूर्ण हो गई और परिणाम में कलह हाथ लगी। इसलिए कलह पैदा हो रही हो तो एक काम करते रहिएगा और वह है विकल्प का प्रयोग। यदि आपको कोई निर्णय लेना हो तो यह न मानें कि आपने जो कह...
    July 7, 03:45 AM
  • जीवन में दुर्गुणों का प्रवेश है आत्मघात
    ऊपर वाला अपने ढंग से सबको जन्म देता है और जीवन का समापन भी करवाता है। हमारे हाथ में जो कुछ भी है वह बीच का मामला है। न हम जन्म का चयन कर सकते हैं और न ही मृत्यु को अपने ढंग से प्राप्त कर सकते हैं। किंतु भगवान उन्हें अपराधी मानता है, जो दूसरे के जीवन पर अकारण प्रहार करते हैं। आतंकी घटनाओं के साथ, हमारा परिचय एक नए ढंग की मृत्यु- आत्मघाती हमले से हुआ है। ऐसे हमलों से पूरी दुनिया कांप रही है। आतंक इसलिए बढ़ रहा है, क्योंकि लोग मानव जीवन के महत्व को समझ ही नहीं पा रहे हैं। मनुष्य का शरीर मिला है तो हमें...
    July 6, 04:59 AM
  • जनहित में मर्यादित व्यवहार है राजनीति
    आजकल राजनीति शब्द कुछ लोगों के बीच गाली जैसा हो गया है। कुछ गलत लोग राजनीति में आ गए इसलिए राजनीति को गलत समझा जा रहा है, अन्यथा राजनीति कभी गलत नहीं रही। देश की आजादी में राजनीति का बड़ा योगदान है। राजनीति को समझने के लिए किष्किंधा कांड की यह चौपाई बड़े काम की है। हनुमानजी के सिर पर हाथ रखकर भगवान राम ने उन्हें विदा किया। हनुमानजी प्रसन्न होकर चले तब तुलसीदासजी लिखते हैं, जद्यपि प्रभु जानत सब बाता। राजनीति राखत सुर त्राता।। यद्यपि देवताओं की रक्षा करने वाले प्रभु सब बात जानते हैं तो भी वे...
    July 5, 02:39 AM
  • ये चार तरीके अपनाएं, सदा खुश रहें
    कुछ समय बाद खुश रहना भी सपने जैसा हो जाएगा। बड़ी बात नहीं कि शांति सिर्फ स्वप्न में ही मिला या दिखा करेगी, जबकि खुश रहना मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है। फिर ऐसा क्यों है कि आज जिसे देखो वह अशांत नज़र आता है। परिवारों में लोग लगातार चिंतित हैं कि कैसे खुश रहें और दूसरों को रखें। इसके लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि लोग खुश रहें। कहीं कोर्स हो रहे हैं, कहीं क्लासेस चल रही हैं, शिविर लगाए जा रहे हैं। यहां तक कि अब तो सरकार इसका अलग मंत्रालय बनाने जा रही है। भारत की संस्कृति में दो अवतार ऐसे हुए हैं, जो...
    July 2, 04:21 AM
  • आशीर्वाद से बढ़ता है आत्मबल
    कुछ लोग पैर से छूकर भी आशीर्वाद देते हैं। यह बात सुनने में अजीब लगती है, क्योंकि पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है, दिया नहीं जाता। मैंने अपने जीवन में एक-दो संत ऐसे देखे हैं, जिनके सामने मैं झुकूं उससे पहले वे मेरे सामने झुक गए और जब वे झुके तो मुझे अनुभूति हुई कि ये झुककर भी मुझे आशीर्वाद ही दे रहे हैं। समझ में आया कि इसके पीछे विनम्रता काम कर रही है। स्वभाव में विनम्रता तभी आ सकती है जब अहंकार गले। इसके जितने भी तरीके हैं, उनमें हमारे ऋषि-मुनियों ने एक तरीका निकाला है प्रणाम करने का। इसके भी कई...
    July 1, 07:34 AM
  • रिश्तों में संवादहीनता न आने दें
    अपेक्षा अशांति का कारण है, लेकिन यह स्वाभाविक है कि मनुष्य, मनुष्य से अपेक्षा करेगा ही। फिर जहां संबंध होते हैं, वहां तो अपेक्षा होती ही है। एक रिश्ता तो पूरी तरह अपेक्षा पर ही टिका है और वह है पति-पत्नी का। शायद इसीलिए इस रिश्ते में तनाव बहुत अधिक होता है। जो लोग समझदार हैं, योग्य हैं वे उनसे अपेक्षा रखने वालों को संतुष्ट करने का हुनर जानते हैं। सभी को संतुष्ट किया भी नहीं जा सकता, लेकिन हमसे अपेक्षा रखने वाले लोग जीवन में आते रहेंगे। वे हमारी जिम्मेदारी के दायरे में भी हो सकते हैं। इनकी संख्या कम...
    June 30, 04:49 AM
  • दूसरों को संतुष्ट करना भी एक हुनर
    अयोग्य व्यक्ति परेशान हो, दिक्कत में आए तो समझ में भी आता है परंतु कभी-कभी मनुष्य की योग्यता भी उसे मुसीबत में डाल देती है। पढ़-लिखकर, परिश्रम करके जब किसी बड़े पद पर पहुंच जाते हैं, हमारे पास कुछ अधिकार आ जाते हैं तो हम उनका उपयोग करते हैं। जिन लोगों के पास अधिकार नहीं होता उनके पास कुछ ऐसा ज्ञान होता है कि वे उससे दूसरों का भला करते हैं। यह योग्यता का सदुपयोग है। किंतु ऐसे योग्य लोगों को परेशानी भी उठानी पड़ सकती हैै। बहुत योग्य व्यक्ति अपने लिए समय नहीं निकाल पाते। वे सदैव उन लोगों से घिरे रहते...
    June 29, 03:47 AM