जीने की राह
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  • चिंता से निपटने में मन नहीं, बुद्धि उपयोगी
    जिंदगी में चिंताएं आती रहती हैं, लेकिन ये लंबे समय टिक जाएं तो बीमारी साबित होंगी। कई लोगों का स्वभाव बन जाता है चिंता पालना। वे छोटी-छोटी बातों से परेशान हो जाते हैं। जब हमारे जीवन में कोई चिंता आए तो क्या करें। हम इसे किसी पर थोप सकते हंै, मदद ले सकते हैं या साझा कर सकते हैं। वरना चिंता चिढ़ बनकर सामने आएगी और यदि इसका मौका न मिले तो कुंठा शुरू हो जाएगी। लोग हमारी चिंता को चार ढंग से लेेंगे। एक, तुम्हारी तुम जानो। दो, अच्छा हुआ, इनके साथ ऐसा ही होना था। तीन, लोग हमसे सिर्फ सहानुभूति रखेंगे। चार, लोग...
    05:11 AM
  • झगड़ा हो जाए तो वाणी पर नियंत्रण रखें
    झगड़ा हो जाना सामान्य बात है। वैसे तो झगड़ा करना अच्छी बात नहीं है, लेकिन झगड़ा हो ही जाए तो हमारे बोलने का तरीका क्या होना चाहिए, इस पर ध्यान दें। झगड़ा होने पर मनुष्य सबसे पहले वाणी से गिरता है। फिर शरीर आक्रामक हो जाता है। कभी झगड़े की नौबत आए तो शब्दों को प्रकट करने के तरीके पर थोड़ा काम कीजिए। झगड़ा चार स्तरों पर हो सकता है। पहला, विचार के स्तर पर, जहां आप सलाह और समझाश दे रहे होते हैं। दूसरा भावना के स्तर पर। इसमें प्रेम और संवेदनाएं होती हैं, फिर भी झगड़ा चल रहा होता है। ऐसा घरों में ज्यादा होता...
    January 24, 07:03 AM
  • झगड़ा हो जाए तो वाणी पर नियंत्रण रखें
    झगड़ा हो जाना सामान्य बात है। वैसे तो झगड़ा करना अच्छी बात नहीं है, लेकिन झगड़ा हो ही जाए तो हमारे बोलने का तरीका क्या होना चाहिए, इस पर ध्यान दें। झगड़ा होने पर मनुष्य सबसे पहले वाणी से गिरता है। फिर शरीर आक्रामक हो जाता है। कभी झगड़े की नौबत आए तो शब्दों को प्रकट करने के तरीके पर थोड़ा काम कीजिए। झगड़ा चार स्तरों पर हो सकता है। पहला, विचार के स्तर पर, जहां आप सलाह और समझाश दे रहे होते हैं। दूसरा भावना के स्तर पर। इसमें प्रेम और संवेदनाएं होती हैं, फिर भी झगड़ा चल रहा होता है। ऐसा घरों में ज्यादा होता...
    January 24, 06:10 AM
  • जागरूक रहकर सहमति या असहमति दें
    जीवन में जब भी सहमति-असहमति व्यक्त कर रहे हों, तब थोड़ा सावधान हो जाइए। रिश्ते, पोजीशन व विषय को देखकर फैसला देना होता है। जब हमारे सामने कोई बड़ा हो तब हमें 80 प्रतिशत ध्यान रिश्ते पर देना चाहिए और 20 प्रतिशत चिंता विषय की पालनी चाहिए, क्योंकि बड़े व्यक्ति का अनुभव व अहंकार भी काम कर रहा होता है। मामला घर का हो तो उस दृष्टि से देखिए; अगर व्यावसायिक हो तो अपना पूरा कॅरिअर ध्यान में रखिए, लेकिन इसमें विषय के प्रति गंभीर रहें। अगर आपकी विषय पर पकड़ है, तो आज नहीं तो कल सामने वाला बड़ा व्यक्ति आपकी बात...
    January 23, 06:44 AM
  • प्रसन्नता से किए भोजन से मिलता है स्वास्थ्य
    भक्त को अन्न के प्रति बहुत सावधान रहना चाहिए। चार बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। पहली बात, अन्न जिस धन से आया है वो धन कहां से आया है। गलत तरीके से कमाए धन से आया अन्न परिवार की मानसिकता बिगाड़ देगा। दूसरी बात, अन्न को किसने बनाया है। घर में मां, बहन, बेटी, धर्मपत्नी या परिवार की प्रतिष्ठित स्त्री ही भोजन बनाए, क्योंकि भोजन बनाने वाले की मानसिकता अन्न में उतरती है। विज्ञान ने इसकी पुष्टि की है। प्रसन्नता से जो भोजन पकेगा उसे खाकर सभी प्रसन्न होंगे। माताएं-बहनें भोजन पकाते समय श्री हनुमानचालीसा का...
    January 22, 05:22 AM
  • घर के सदस्यों की परेशानी का ख्याल रखें
    अपनी व्यस्तता में हमें पता ही नहीं चलता कि घर में कोई सदस्य परेशान है। चाहे जीवनसाथी हो, मां-बाप या फिर बच्चे। घर के बाहर भले ही वे परेशान हों, लेकिन घर आने पर उसे ऐसा लगे कि कोई अपना है। उससे पूछिए कि हम तुम्हारे लिए क्या कर सकते हैं। इससे उसका मनोबल बढ़ेगा। कई बार लोग बाहर की समस्याओं को घर में नहीं बताते। घर की परेशानी में सास-बहू, बाप-बेटे, भाई-भाई तथा रिश्तेदारों का झगड़ा होता है। कई बार बड़े भाई से विवाद हो जाता है तो छोटा भाई सम्मान में कुछ बोलता नहीं, लेकिन भीतर ही भीतर घुटता रहता है। यदि...
    January 21, 05:59 AM
  • संकट में अहंकार छोड़कर समाधान स्वीकारें
    जीवन में ऐसे अवसर भी आते हैं जब समर्थ और सक्षम व्यक्ति को ऐसे लोगों से मदद लेनी पड़ती है, जो संभवत: मदद करने योग्य नहीं होते। यदि समझदारी से काम लिया जाए तो कमजोर लोगों की संभावना को भी उपयोग में लिया जा सकता है। किष्किंधा कांड में श्रीराम ने यही किया था। सुग्रीव स्वयं बहुत कमजोर थे और अपने भाई बाली से डरकर छिपे हुए थे। तुलसीदासजी ने लिखा - कह सुग्रीव सुनहु रघुबीरा। तजहु सोच मन आनहु धीरा।। सब प्रकार करिहउं सेवकाई। जेहि बिधि मिलिहि जानकी आई।। सुग्रीव ने कहा, हे रघुवीर सुनिए, सोच-विचार, चिंता छोड़...
    January 20, 06:14 AM
  • परमात्मा से जोड़ने वाला सेतु होता है गुरु
    लोगों की जिंदगी बीत जाती है, पर चाहकर भी गुरु नहीं बना पाते। इसके पीछे बाहरी और आंतरिक कारण होते हैं। पहला बाहरी कारण हमारी निजी पसंद है। कुछ लोग लोकप्रिय या प्रसिद्ध व्यक्ति को गुरु बनाने की सोचते हैं। अगर पसंद का कारण बाहरी है तो गुरु का चयन गलत हो जाएगा। दूसरी बात, हम अपनी सुविधा से गुरु बनाते हैं। कई लोग सोचते हैं कि गुरु सुविधाजनक होना चाहिए। अगर किसी को सच्चा गुरु मिल गया, तो सबसे पहले वह शिष्य की सुविधा छीन लेगा। गुरु परमात्मा से मिलाने आपके जीवन में आता है, सुविधा देने नहीं। आंतरिक कारणों...
    January 19, 07:00 AM
  • शिक्षित होने का आनंद बढ़ाता है योग
    आजकल बाजार में हर वस्तु का विस्तार हो रहा है। वस्तुओं की इतनी किस्में बना दी गई हैं कि लोग बाजार में भटकते रहते हैं। किस्में जब तेजी से बदलती हैं तो फैशन बन जाता है। फैशन ओढ़ने-संवरने तक तो ठीक है, लेकिन यह चिंताजनक रूप से शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश कर गया है। लगातार कोर्स की संख्या बढ़ रही है। कुछ डिग्रियां रोजी-रोटी के काम आती हैं, कुछ स्टेटस से जुड़ गईं, कुछ टाइम-पास हैं और कुछ में सिर्फ फैशन है। जो शिक्षा जीवन संवार सकती थी, वह अब हथियार बनकर एक को दूसरे से लड़वा रही है, इसीलिए घरों में भी शिक्षित...
    January 17, 07:17 AM
  • जटिल स्वभाव के बच्चे को ऐसे संभालें
    घर में कोई बच्चा दूसरों से बिल्कुल अलग स्वभाव का हो तो माता-पिता बहुत परेशान हो जाते हैं। यदि यह बच्चा दूसरों को भी परेशान कर रहा हो तो समस्या और भी विकट हो जाती है। चलिए, आज इसी पर विचार करते हैं। एक ही परिवार के बच्चे भी दुनिया को देखने के नजरिये, आदतों और प्रतिक्रिया व्यक्त करने में भिन्न होते हैं। संसार में आने के बाद बच्चे की पहली दृष्टि माता-पिता की ही दृष्टि होती है। अब उनकी जिम्मेदारी है कि वे उस बच्चे के भीतर जो उसकी अपनी दृष्टि है, उसका जो मूल व्यक्तित्व है उसे समय पर समझना शुरू कर दें। मूल...
    January 16, 03:29 AM
  • बच्चों में जिम्मेदारी का अहसास जगाएं
    घर के सदस्यों से, जीवनसाथी से, बच्चों से कोई काम कराना आजकल बड़ा मुश्किल हो गया है। अपने व्यवसाय या घर में जब भी किसी से काम लें, उसमें चार बातों का ध्यान रखें। एक, काम का बंटवारा ठीक से करें। यह मालूम होना चाहिए कि कौन-सा व्यक्ति क्या काम कर सकता है। बंटवारा गलत हुआ तो काम भी बिगड़ेगा। दो, जिसे काम सौंपा गया है, उस पर भरोसा रखें। तीन, स्त्री-पुरुष का भेद नहीं करें। कई लोग सोचते हैं कि महिलाएं यह काम नहीं कर पाएंगी। बस, यहीं से झंझट शुरू हो जाती है घरों में। औरतें भी कई बार यह मान लेती हैं कि यह काम आदमी...
    January 15, 05:46 AM
  • जीवन में संघर्ष से अाती है परिपक्वता
    पारिवारिक जीवन में जब अचानक संघर्ष आता है तो तैयारी न होने पर लोग टूट जाते हैं या बिखर जाते हैं। टूट गए तो फिर जुड़ जाएंगे, लेकिन बिखर गए तो व्यक्तित्व के टुकड़े समेटना मुश्किल होगा। आज के बच्चों को तो मालूम ही नहीं है कि संघर्ष होता क्या है। मां-बाप प्रतिपल बच्चों को सुख देने के लिए बेचैन रहते हैं। इनके जीवन का 75 प्रतिशत संघर्ष तो मां-बाप ही पूरा कर देते हैं। ऐसे लोग होते हैं, जो पढ़ाई का खर्च खुद उठाते हैं। आज के बच्चे इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। इन्हें लगता है कि फीस मां-बाप को ही भरनी है। पेरेंट्स...
    January 14, 07:30 AM
  • जीवन में ईश्वर लाने का प्रयास करें
    किष्किंधा कांड में श्रीराम और लक्ष्मणजी को हनुमानजी सुग्रीव के पास लाकर मैत्री कराते हैं। मित्रता होने के बाद सुग्रीव श्रीराम से बातचीत करते हैं। तुलसीदासजी ने पंक्ति लिखी, कह सुग्रीव नयन भरि बारी, मिलिहि नाथ मिथिलेस कुमारी। सुग्रीव ने नेत्रों में जल भरकर कहा, हे नाथ, मिथिलेश कुमारी जानकी जी मिल जाएंगी। जो सुग्रीव अपने भाई बाली से परेशान होकर इधर-उधर भाग रहा था वह श्रीराम को आश्वासन दे रहा है कि चिंता मत करो प्रभु। ऐसा इसलिए हो गया, क्योंकि सामने श्रीराम खड़े थे। जब परमात्मा जीवन में आता है...
    January 13, 06:10 AM
  • किसी के बन जाओ या किसी को अपना बना लो
    गृहस्थी में कई बार हमारी परीक्षा होती। अपने जो हमसे मांग करते हैं, कोई इच्छा व्यक्त करते हैं तो आपके सामने यह चुनौती आ जाती है कि इनकी मांग और इच्छा को कैसे पूरा करें। हमारे परिवार में कभी-कभी ऐसा होता है, खासतौर पर पति-पत्नी के बीच में, क्योंकि पति-पत्नी का रिश्ता बाहर से आया हुआ होता है। ये किसी दूसरे परिवार से आकर मिले हुए होते हैं। जब इनका मिलन होता है तो इनके जीवन की पूर्व की घटनाएं और बाद की घटनाओं में मेल नहीं बैठता है तो तनाव शुरू हो जाता है। जब एक की कोई इच्छा हो, तो दूसरे को बड़े धैर्य से...
    January 12, 05:45 AM
  • जागरूक व्यक्ति सच्चे अर्थ में मानव
    जब मनुष्य मर्यादा के बाहर काम करता है तो टिप्पणी की जाती है कि वह तो पशु हो गया। खासतौर पर जब मनुष्य अपराध करने पर उतर आता है तो वह पशु जैसा व्यवहार करता है। आइए देखें कि मनुष्य और पशु में क्या अंतर है। वैसे सामान्य अंतर मजबूरी का होता है। पशु मजबूर होता है और मनुष्य अपने पुरुषार्थ से अपनी इच्छा का जीवन जी सकता है। मनुष्य की तरह पशु अंत:करण की जानकारी नहीं ले सकता। मनुष्य के भीतर के अंत:करण में चार बातें हैं- मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार। जो इन चारों को ठीक से नहीं जान पाया, कहा जा सकता है वह भी पशु जैसी...
    January 10, 06:51 AM
  • संसार को ईश्वर की रचना मानकर कर्तव्य भाव रखें
    यह जो संसार हमें बना-बनाया मिला है, यह ईश्वर ने बनाया है। हमको लगता है हमने बनाया है। मनुष्य यह मानने लगता है कि यह जो संसार है, इसे मैंने बनाया है। मेरे बच्चे, मेरा धंधा, मेरा बंगला, मेरी कार, मेरा नाम, मेरी प्रतिष्ठा, बस यहीं से भ्रम शुरू हो जाता है। शास्त्र हमें यह बताते हैं कि यह सब हमें ईश्वर ने दिया है। चूंकि इस संसार को हम अपनी इंद्रियों से देखते हैं, अपने राग-द्वेष द्वारा संसार की वस्तुओं में रंग डाल देते हैं। परमात्मा ने अच्छा-बुरा नहीं बनाया, उसने तो केवल वस्तु बनाई, लेकिन लोग राग-द्वेष की...
    January 9, 07:17 AM
  • प्रसन्नता में फलीभूत होती है भक्ति
    भक्त वो होता है जो विशिष्ट होकर भी सामान्य है। लोग भक्ति का अर्थ तिलक लगाना, शिखा रखना, मंदिर जाना मानते हैं जबकि भक्त का मतलब होता है जो अपनी क्षमता के ऊपर किसी और परमशक्ति को स्वीकार करता है। भक्त की सबसे बड़ी पूंजी होती है भरोसा। अगर परमात्मा पर भरोसा है तो भक्त विशिष्ट होकर भी सामान्य बन जाता है। जब योग भक्ति से जुड़ जाता है तो योग के आठ चरण होते हैं और उसका अंतिम चरण है समाधि। भक्त जब समाधि में उतरता है तो लोग समझते हैं कि उसने संसार छोड़ दिया, जबकि तब वह संसार के प्रति और सामान्य हो जाता है।...
    January 8, 05:29 AM
  • वक्त की कमी को सूझबूझ से पूरा करें
    गृहस्थी परमात्मा का प्रसाद है। यदि घर-परिवार में शांति नहीं है तो मनुष्य अपने जीवन को सफल नहीं मानेगा। आज लोग बहुत मेहनत करते हैं, लेकिन परिवार को भूल जाते हैं। कई बार उम्र के किसी पड़ाव पर परिवार बोझ लगने लग जाता है और ऐसा भी दौर संभव है जब परिवार वालों को उम्र बोझ लगने लगे। वृद्ध को लगेगा कि मैंने परिवार में 70 साल बिताए और आज मेरी यह हालत कर दी गई है। हर उम्र में गृहस्थी का स्वाद बदल जाता है, क्योंकि उम्र धीरे-धीरे कुछ खोने भी लगती है। उम्र बढ़ती है तो दो दिशाओं में खींचती है और जब व्यक्तित्व दो...
    January 7, 06:10 AM
  • धैर्यवान श्रोता ही अच्छा वक्ता बनता है
    अपनी बात को सबके बीच रखने के लिए प्रभावशाली वक्ता होना आवश्यक है। जरूरी नहीं है कि अच्छा वक्ता मंच से ही अपनी बात कहे। दो व्यक्तियों के बीच भी बात हो रही हो, तो भी बात को कहने का ढंग, अर्थ बदल सकता है। हम किष्किंधा कांड की चर्चा कर रहे हैं। हनुमानजी ने श्रीराम व लक्ष्मण की सुग्रीव के साथ अग्नि की साक्षी में मैत्री करा दी थी। हमारी संस्कृति में अग्नि का बड़ा महत्व है। विवाह में वर-वधू अग्नि कुंड के फेरे लेते हैं। इसका अर्थ यही है कि आपका आगामी जीवन एक-दूसरे के प्रति समर्पित हो। लक्ष्मण ने रामजी की ओर...
    January 6, 04:59 AM
  • बीते समय की यादों में संतुलन रखें
    स्मृतियां मनुष्य को मथ देती हैं। याद करने पर तो बीता हुआ सुख भी दुख देने लगता है, फिर दुख तो पीड़ा पहुंचाएगा ही। नए वर्ष में जो भी पिछले साल से आया है उनमें यादें भी हैं। ध्यान रखिएगा, ये नए वर्ष में बोझ न बन जाएं। अच्छी यादें अहंकार दे सकती हैं, बुरी यादें उदास बना सकती हैं। जीवन संतुलन मांगता है। जो अच्छा था वो काम आए और जो बुरा था वो रुकावट न बन जाए। बीता हुआ समय और संसार से गुजरे हुए परिजन लौटकर नहीं आते। अब उनकी स्मृतियों को हम चाहें तो अपनी ऊर्जा के सृजन का माध्यम बनाकर नए व अच्छे काम कर सकते हैं।...
    January 5, 06:01 AM
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