जीने की राह
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  • व्यक्तित्व से अस्तित्व पर जाएं
    मौजूदा समय में वही लोग टिक पाएंगे जो अपना श्रेष्ठ सर्वश्रेष्ठ में बदल देंगे। इस प्रक्रिया में आपको कई विषम परिस्थितियों से भी गुजरना पड़ेगा, क्योंकि सर्वश्रेष्ठ इस समय गुमशुदा है और गुमशुदा की तलाश एक रहस्यमय कार्य है। आपको सर्वश्रेष्ठ माता-पिता बनना है तो संतानों के मामले में घोर चुनौतियां सामने आएंगी। हमारा थकना, हमारे दुख और हमारी बीमारियां सर्वश्रेष्ठ तक पहुंचने में बाधाएं हैं। इन तीनों से मुक्ति पानी पड़ेगी, क्योंकि जिंदगी उम्र से एक अजीब-सा रिश्ता बनाती है। कभी आयु को अनुमति देती है...
    05:55 AM
  • जीने की राह: सद्‌भाव की अभिव्यक्ति त्योहार
    किसी भी धर्म का त्योहार आने पर उस धर्म से जुड़े अधिकांश लोग बहुत प्रसन्न रहते हैं। पहले से तैयारी होती है। त्योहार वाले दिन तो सुबह से उत्सव के माहौल में आ जाते हैं। पूरी दिनचर्या उससे जुड़ जाती है। कृष्ण जन्माष्टमी हो या रामनवमी, ईद हो या नानक जयंती, क्रिसमस में भी सब प्रसन्न रहते हैं। एक-दूसरे से मिलना, आचरण में छोटी-छोटी बातें जोड़ना। किंतु यह सब होता है साल में एक बार। आइए, एक प्रयोग करिए। जब आप किसी काम के दबाव या तनाव में हों तो उस दिन यह तय करें कि आज का दिन ऐसे मनाएंगे जैसे त्योहार हो। उस दिन...
    February 27, 07:11 AM
  • जीवन दृष्टि में हास्य बोध लाएं
    गाड़ी चलाते समय, पैदल चलते समय, हम अतिरिक्त सावधानी बरतते हैं, क्योंकि दुर्घटना की आशंका से हम चौकन्ने रहते हैं। किंतु दौड़ती जिंदगी के प्रति भी चौकन्ना रहना जरूरी है। जब हम जिंदगी के प्रति होश रखते हैं तो हमें एक चीज मिलती है- हास्य। जिंदगी मुस्कुराने, आनंदित होने के अवसर लेकर चलती है। अगरबत्ती के धुएं में खुशबू की तरह जीवन में हास्य घुला हुआ है। आपका बोध उस हास्य को उठा सकेगा। जीवन में परेशान होने के अनेक कारण हैं। कोई काम शुरू करिए दिक्कत से ही शुरू होगा, इसलिए जब कोई दायित्व आए तो काम करते समय...
    February 26, 06:20 AM
  • अकेलेपन की अौषधि है परहित
    इन दिनों लोग उदास बहुत जल्दी हो जाते हैं। जरा अपने मन की न हुई तो उदासी घेर लेती है। अपनों से सहयोग न मिले, धोखा हो जाए तुरंत उदासी में डूब जाते हैं। इसे ही डिप्रेशन कहा गया है। हमारे जैसे देश में जहां कण-कण में ईश्वर की कृपा और मोक्ष के भाव बसे हों वहां भी लोग उदास होने लगें तो यह चिंता का विषय है। चिकित्सा विज्ञान का मानना है कि यह हार्मोनल डिसबैलेंस है और इलाज भी उसी तरह किया जाता है। अध्यात्म कहता है जीवन में परमात्मा के अभाव का एक रूप डिप्रेशन है। भगवान के अभाव का अर्थ है आत्मविश्वास की कमी,...
    February 25, 07:02 AM
  • शब्दों का अर्थ बदलने से अनर्थ
    शब्दों का लोगों ने कैसा-कैसा उपयोग किया है इसका एक उदाहरण बाली का चरित्र भी है। बाली उन व्यक्तियों में से था, जिसने अपने शब्दों से भय निर्मित किया था। जब हम अपने ही शब्दों का गलत अर्थ लगा लेते हैं तब हम जो भी निर्णय लेंगे, गलत ही लेंगे। किष्किंधा कांड में सुग्रीव अपनी परेशानी श्रीराम को बता रहे थे। जब बड़ा भाई बाली राक्षस को मारने दौड़ा और वह एक गुफा में घुस गया, तब उसके पीछे गुफा में घुसते हुए बाली ने सुग्रीव से कहा तुम 15 दिन यहां रुकना और मैं वापस नहीं आऊं तो समझ लेना मारा गया। परिखेसु मोहि एक...
    February 24, 05:45 AM
  • संघर्ष में आनंद प्राप्ति का रास्ता
    भगवान भक्त की परीक्षा लेते हैं। यह संवाद धर्म के प्रति समर्पित व्यक्तियों में लोकप्रिय, प्रेरणादायक और मान्य है। जीवन में जब भी संघर्ष का दौर आता है, बहुत कम लोग होते हैं जो संघर्ष का सामना जमकर करते हैं। अधिकतर लोग या तो टूट जाते हैं या लक्ष्य की पूर्ति के लिए गलत साधनों का उपयोग करने लगते हैं। सबकी सुविधा के अनुसार काम होता रहे ऐसा संभव नहीं है। एक भक्त के जीवन में जब संघर्ष आता है, तो वह मानकर चलता है कि प्रतिस्पर्धा के युग में जब दूसरे घोर परिश्रम कर रहे होते हैं और यदि आप थोड़े भी कमजोर साबित...
    February 23, 06:17 AM
  • संतान से आत्मिक रिश्ते बनाएं
    मां-बाप और बच्चों के बीच की अनुभूतियां बाहर से नहीं समझी जा सकतीं। बाकी रिश्ते जन्म के बाद बनते हैं, इसलिए उन्हें ऊपरी तौर पर समझा जा सकता है। किंतु पालक और संतान का रिश्ता जन्म के पूर्व ही बनने लगता है, इसलिए इसे समझने के लिए गहरे उतरना पड़ेगा। मुझसे अनेक मां-बाप शिकायत करते हैं कि बच्चे उनकी बात समझ नहीं पाते या वे ठीक से समझा नहीं पा रहे, क्या करें? समस्या गंभीर है, लेकिन निदान आसान है। हम अपने बच्चों से ऊपरी तौर पर ज्यादा जुड़े हैं। मसलन, उन्हें अच्छा पढ़ाना, उनकी जरूरतें पूरी करना। हम काफी ध्यान...
    February 21, 07:05 AM
  • मनुष्य होने की अनुभूति अहम
    हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है कि हम मनुष्य हैं। यदि इसकी विस्मृति हो गई तो फिर समझ लीजिए कि केवल जी रहे हैं। जानवर और इंसान लगभग सारे काम एक जैसे करते हैं। एक ही भेद है कि जीवन क्या है, यह पशु पूरी उम्र नहीं जान पाता और मनुष्य चाहे तो हर पल समझ सकता है। हमें परमात्मा के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए कि उन्होंने हमें मनुष्य बनाया। परमात्मा ने अपनी सबसे सरल पहचान प्रकृति में डाल दी, इसलिए खुद को प्रकृति से जरूर जोड़ें। इसका सीधा अर्थ है धरती को प्रदूषित न करें। वायु शुद्ध रखें। जल का मान करें। शरीर की...
    February 19, 07:27 AM
  • शांति व उत्साह के पड़ाव, उत्सव
    हमारे देश में मेेले और उत्सव खूब मनाए जाते हैं। कई लोगों का जीवन तो इनसे ही जुड़ा है। तेजी से गुजर रहे जीवन में ये शांति तथा उत्साह के पड़ाव जैसे हैं। इन दोनों मौकों पर एक आयोजन और होता है, जिसे सत्संग कहते हैं। कुछ सत्संग ऐसे होते हैं, जिन्हें कथा कहा जाता है और कुछ सत्संगों में विचार-विमर्श होता है। प्राचीन समय से संत सम्मेलन किया करते थे। आज के कुंभ मेले उसी का रूप हैं। उस समय संत सम्मेलन में दुख पर शोध करते थे और उन्हें कैसे मिटाया जाए इसके उपाय ढूंढ़ा करते थे। संतों का मानना था कि मनुष्य सुखी रहे...
    February 18, 05:42 AM
  • पुनर्निर्माण के  देवता शिव
    यह मल्टी पर्सनालिटी का युग है। आपसे उम्मीद की जाती है कि आप हर क्षेत्र में दक्ष हों और जो भी काम करें पूर्णता के साथ करें। शिव चरित्र की एक विशेषता यह है कि वे जीवन के हर पक्ष को प्रभावित करते हैं। शिव का शाब्दिक अर्थ है कल्याण। उन्हें संहार का देवता कहा गया है, लेकिन संहार का अर्थ है पुनर्निर्माण। फिर शिवरात्रि की तिथि अनूठी है। इस दिन शिवलिंग का प्राकट्य भी हुआ और शिव-पार्वती का विवाह भी। शिवलिंग स्वरूप का मतलब है भाव-विरक्त रहकर सबके लिए हितकारी होना। आज संसार में निजहित की कामना इतनी हावी हो...
    February 17, 05:08 AM
  • आलस्य की जननी है सुविधाओं की आदत
    सुख-सुविधाएं बुरी नहीं होतीं, लेकिन इन्हें भोगते समय जो लोग विवेक नहीं रखेंगे, उन्हें दो बुराइयों का जोखिम रहता है। विवेकहीन सुख-सुविधाओं की अगली कड़ी होती है आरामदेह जीवन। आराम की आदत आलस्य को जन्म देती है। आलसी आदमी के पास अपनी स्थिति के लिए अनेक तर्क होते हैं। ये तर्क उसे निकम्मेपन के दौर में फेंक देते हैं। इससे हमारे व्यक्तित्व के पंच तत्व प्रभावित होने लगते हैं। आराम, आलस्य और निकम्मेपन की यात्रा से पृथ्वी तत्व बंजर होने लगता है। जल तत्व बदबू तथा अग्नि तत्व धुआं देने लगता है। वायु तत्व...
    February 14, 07:43 AM
  • वर्तमान को उपयोगी बनाना ही पुरुषार्थ
    समय के सदुपयोग की सलाह दी जाती है। जो लोग समय प्रबंधन में रुचि रखते हैं उन्हें इसके कई तरीके सिखाए जाते हैं। टाइम मैनेजमेंट पर अध्यात्म की अपनी दृष्टि है। हिंदू धर्म ने तो समय को काल और काल को देवत्व से जोड़ा है। समय को भविष्य, वर्तमान और भूतकाल में बांटा गया है। भविष्य का अज्ञात होना ही मनुष्य के परिश्रम को रोचक और गहरा बना देता है। इसी तरह भूतकाल का निचोड़ अनुभव होना चाहिए, न कि बेकार की स्मृतियां। इन दोनों के बीच में महत्वपूर्ण है वर्तमान। एक ही क्षण में वह भूत में होता है या उसका रूप भविष्य...
    February 13, 04:36 AM
  • जीवन में पहल करने की वृत्ति बढ़ाइए
    सभी के जीवन में कहीं न कहीं धोखे और अपमान की घटनाएं हुई होंगी। ऐसी घटनाओं के बाद व्यक्ति सभी को संदेह की दृष्टि से देखने लगता है या वह अत्यधिक सावधान हो जाता है। जब अपमान मिलता है तो बदले की भावना जाग जाती है या फिर निराशा व कुंठा जाग जाती हैं। धोखा और अपमान तो कभी भी हो सकते हैं। तब क्या करेंगे? न तो बदले की वृत्ति रखें और न ही अत्यधिक संदेह में डूबें। बस सावधान रहकर अच्छे काम की पहल करें। आदमी बहुत रिजर्व होता जा रहा है। चार लोगों के बीच में कोई हमें देखकर बात नहीं करे, तो हम सोचते हैं हम क्यों पहल...
    February 12, 05:32 AM
  • प्रेमपूर्ण होकर व्यसन से मुक्त कराएं
    तंबाकू, धूम्रपान और मदिरा पान को अब दोषपूर्ण नहीं माना जाता। ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाते हैं पर चरित्र से इसका संबंध खारिज कर दिया गया है। मदिरा पान तो स्टेटस सिंबल बन गया है। सबसे बड़ा खतरा यह है कि मदिरा घर में पहुंच गई है। जहां यह समस्या है, उन घरों के समझदार लोग नशे में शिकार व्यक्ति केे व्यक्तित्व की जड़ में जाकर देखें कि कमजोरी कहां है। आपको वह कमजोरी दूरी करनी होगी। उसे अपनी उस जड़ पर लौटाकर लाना होगा, जहां नशे की जरूरत नहीं होती और इसके लिए एक अच्छा दोस्त बनना पड़ेगा।...
    February 11, 06:16 AM
  • भीतर के केंद्र से दूर ले जाता है अहंकार
    परमात्मा अच्छे लोगों को अच्छे काम करने और बुरे लोगों को गलती सुधारने के मौके देता रहता है। किंतु हमारे जीवन में जब-जब अहंकार आएगा, ईश्वरीय शक्ति हमसे मुंह मोड़ लेगी। रामचरितमानस के किष्किंधा कांड में सुग्रीव, बालि की कहानी श्रीराम को सुना रहे थे, अर्ध राति पुर द्वार पुकारा। बालि रिपु बल सहै न पारा।। धावा बालि देखि सो भागा। मैं पुनि गयउं बंधु संग लागा।। उसने आधी रात को नगर के फाटक पर आकर ललकारा। बालि शत्रु की ललकार को सह नहीं सका। वह दौड़ा, उसे देखकर मायावी भागा। मैं भी भाई के संग चला गया। बालि ने...
    February 10, 06:14 AM
  • शिक्षा के साथ शिष्टाचार भी महत्वपूर्ण
    इन दिनों हम बच्चों की शिक्षा पर बहुत जोर दे रहे हैं, लेकिन सवाल उठता है कि क्या केवल शिक्षा से काम चल जाएगा? शिक्षा की एक बहन है शिष्टाचार। देखा जा रहा है कि अधिकांश बच्चे शिक्षा लेकर तो घर लौटते हैं पर दूसरी बहन शिष्टाचार घर में प्रवेश नहीं कर पाती। यही वजह है कि बच्चे घर में जिद, अमर्यादित व्यवहार या कभी-कभी बदतमीजी की हद पार कर जाते हैं। शिष्टाचार का प्रयास परिवार के भीतर से ही करना होगा। परिवार के वरिष्ठ सदस्य जो माता-पिता, बड़े भाई-बहन भी हो सकते हैं, सभी मिलकर संयुक्त रूप से कृतज्ञता और...
    February 9, 05:56 AM
  • प्रकृति की सहजता को आचरण में उतारें
    विश्व के सामने प्रदूषण की बड़ी समस्या है। धार्मिक लोगों को इसके प्रति अपने ढंग से जागरूक होना चाहिए। हमारी प्रकृति पंच तत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बनी है। ये पांचों तत्व मनुष्य के शरीर में भी प्रभावी होते हैं। प्रकृति अपने पंच तत्वों के साथ बहुत सहज गति से बहती है। उसे चलना नहीं कहेंगे, बहना कहेंगे। मनुष्य जीवन भी बहाव की तरह होना चाहिए। बहने में सहजता है। जैसे आपके परिश्रम को किसी की कृपा मिल गई। अगर कोई प्रकृति से पूछे कि तुम क्या करती हो, तो उसका जवाब होगा मैं कुछ नहीं करती, मैं होने...
    February 7, 07:03 AM
  • आत्मा तक पहुंचने का प्रवेश द्वार है प्रेम
    प्रेम के मामले में महिला और पुरुष दोनों का मनोविज्ञान भिन्न होता है। फर्क होना तो नहीं चाहिए, क्योंकि प्रेम तो एक ही होता है पर दृष्टिकोण की भिन्नता फर्क ला देती है। प्रेम में मानव की क्रिएटिविटी बहुत बढ़ जाती है। प्रेम सृजन है, इसलिए सृजन के बाद शांति मिलनी चाहिए, लेकिन प्रेम में लोग बावले हो जाते हैं, अशांत हो जाते हैं। जहां प्रेम का परिणाम शांति होना था वहां विध्वंस, हिंसा, अशांति क्यों हो जाती है? भिन्न दृष्टिकोण के कारण झंझट शुरू होती है। पुरुष का प्रेम देह से यात्रा करता है जबकि महिला...
    February 6, 06:03 AM
  • इंद्रियों के सदुपयोग में ही है जीवन
    यदि व्यवस्था में छिद्र है तो उसमें से ईमानदारी, नैतिकता और धन रिस जाता है। यह छिद्र ऐसा होता है कि इसमें टू वे ट्रैफिक चलता है। जिस समय ईमानदारी को बाहर फेंका जाता है उस समय बेईमानी को प्रवेश कराया जा रहा होता है। इस पूरी क्रिया का नाम है भ्रष्टाचार। इसी तरह शास्त्रों ने मनुष्य में नौ छिद्र बताए हैं। इनसे अच्छाई बाहर जा सकती है और बुराई भीतर आ सकती है। हम सारे कामों के साथ मृत्यु को देखने की भी तैयारी करें। यदि आप मृत्यु देखना चाहें तो आंख, नाक और कान इन सबकों मिलाकर छह छिद्र हैं। मल-मूत्र की...
    February 5, 05:01 AM
  • बच्चों को डांटते वक्त संवेदनाएं व्यक्त हों
    माता-पिता का संतान के साथ जुड़ाव बड़े बारीक स्तर पर होता है। यह रिश्ता दो तरफा है, इसलिए जब बच्चों को डांटना पड़े तो अत्यधिक सावधानी बरतें। फिर आजकल के बच्चे तो बुद्धिप्रधान हैं। हम उन्हें शिक्षा से इतना अधिक जोड़ चुके होते हैं कि उनका पूरा जीवन मस्तिष्क केंद्रित हो जाता है। वे हृदय केंद्रित कम रह पाते हैं। बच्चों से यह उम्मीद कम ही होती है कि वे डांट को भावनात्मक रूप से लें। वे सीधे मस्तिष्क पर लेते हैं और इसीलिए विद्रोह पर उतर आते हैं। कुछ बच्चे दिल पर लेते हैं तो वह भी मस्तिष्क के दबाव में ही...
    February 4, 05:24 AM
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