जीने की राह
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  • हृदय से संचालित हो घर-गृहस्थी
    यह प्रतिस्पर्द्धा को प्रेरणा मानने का समय है। कामकाजी जिंदगी में अत्यधिक प्रतिस्पर्द्धा के कारण लगभग सभी लोग किसी न किसी दबाव में हैं। इसका बड़ा नुकसान परिवार उठाता है। जब हम परिवार में लौटें तो प्रतिस्पर्द्धी मानसिकता बाहर उतार दें। ठान लें कि घर की चारदीवारी में हर हालत में सहज रहेंगे और रिलेक्स बने रहेंगे। हमारी तनावग्रस्त रहने की आदत के कारण परिवार परेशान हो जाता है। तनाव की आदत के कारण हम घर में भी मुद्दे ढूंढ़ने लगते हैं। जैसे सफाई नहीं हुई, जो काम बताया गया वह पूरा नहीं हुआ। खर्च...
    06:19 AM
  • व्यक्ति के सर्वश्रेष्ठ को बाहर लाएं
    हर व्यक्ति के भीतर कुछ न कुछ श्रेष्ठ जरूर होता है और यह सदैव उजागर नहीं रहता। कुछ लोग अपने श्रेष्ठ को बाहर आने नहीं देेते और कुछ इस प्रक्रिया से अनभिज्ञ रहते हैं कि श्रेष्ठ बाहर भी आ सकता है। हमें हमारे संपर्क में आने वाले लोगों के भीतर के श्रेष्ठ को बाहर निकालना चाहिए। परमात्मा ने हर व्यक्ति में अपना अंश छोड़ा है और परमात्मा का थोड़ा-सा अंश भी मनुष्य के लिए श्रेष्ठ बन जाता है। जब भी किसी से मिलें और बात करें तो सतह पर मत टिकिए। हम केवल शब्दों से चलकर शब्दों पर ही खत्म हो जाते हैं। उसके भीतर जो...
    May 29, 05:17 AM
  • बच्चों से रिश्तों में संवेदना लाएं
    बच्चे माता-पिता पर निर्भर होते हैं यह सत्य है, लेकिन अब स्वरूप बदल रहा है। आज की पीढ़ी माता-पिता से जल्दी मुक्त हो रही है। पहले पालकों के पास बच्चों के लिए पर्याप्त समय था, अब वे भी जल्दी मुक्ति चाहते हैं। लिहाजा, बच्चे घर के कर्मचारियों के हवाले कर दिए गए। यहीं से निर्भरता ने नया रूप ले लिया। बच्चों को जैसे ही अहसास होता है कि हम निर्भर नहीं रहना चाहते तो उन्हें सिखाई जा रही अच्छी बातों के प्रति वे तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। ऐसे में या तो माता-पिता को चुप होना पड़ता है या मतभेद बढ़ने लगते...
    May 28, 06:22 AM
  • बालि की तरह आचरण करना पाप
    आरोप लगाना आसान है। आप एक छींटा उछालिए, दामन धोते-धोते सामने वाले की जिंदगी बीत जाएगी। चर्चा चल रही है श्रीराम और बालि के प्रसंग की। श्रीराम ने अंतिम सांसें ले रहे बालि के दोनों आरोपों के उत्तर बहुत ही व्यवस्थित और मान्य ढंग से दे दिए थे। किंतु श्रीराम आगे जोे बोले हैं, नैतिकता और चरित्र के मामले में ये पंक्तियां आचार संहिता बन जाती हैं। अनुज वधु भगिनी सुत नारी। सुनु सठ कन्या सम ए चारी।। इन्हहि कुदृष्टि बिलोकइ जोई। ताहि बधें कछु पाप न होई।। श्रीराम ने कहा , हे मूर्ख! सुन, छोटे भाई की स्त्री, बहन,...
    May 26, 06:08 AM
  • मन पर नियंत्रण हर चोट का इलाज
    जिंदगी के रास्ते सीधे कभी नहीं होते। वैसे यह है तो राजपथ। जिसे मनुष्य का शरीर मिला है उसे यह मालूम होना चाहिए कि वह राजपथ पर ही चल रहा है, जहां जितनी सुविधा है उतनी ही दुविधा भी है। कहीं मोड़ हैं तो कहीं गड्ढे हैं। आप सावधानी से चल रहे हैं पर किसी और की असावधानी दुर्घटना का कारण बन जाएगी। जीवनपथ पर बहुत कुछ ऐसा हो रहा होता है, जिस पर हमारा बिल्कुल नियंत्रण नहीं रहता। जीवनपथ पर चलते समय हमें चोट भी लगेगी, गिरेंगे-उठेंगे फिर गिरेंगे। कुछ घाव जल्दी भर जाएंगे। कुछ जीवनभर बने रहेंगे, लेकिन चलते ही...
    May 25, 06:08 AM
  • घर-परिवार में हो मजबूत साझेदारी
    जब धन कम अौर काम ज्यादा हो, रिश्ते मजबूत हों तब आदमी सांसारिक जीवन में पार्टनरशिप करता है। इसमें तीन बातें काम करती हैं। धन का बंटवारा हो जाता है, जो उसे बढ़ाने में काम आता है। व्यक्ति कम और काम अधिक हो तो सब मिल-जुलकर समय का सदुपयोग कर लेते हैं। एक पार्टनरशिप निजी रूप से अापको और करनी है। तीन पार्टनर बनाइए। एक आप स्वयं हों, दूसरे में अापका परिवार हो और तीसरे में व्यवसाय हो। परिवार और व्यवसाय में प्राण डालकर जीवित व्यक्ति की तरह व्यवहार करिए। अभी घर से निकलते हुए अपने कार्यस्थल जाने तक हमारे पास...
    May 23, 06:19 AM
  • आश्रमों में जाएं तो सुविधाएं न खोजें
    आजकल आयोजनों की बाढ़ आई हुई है। कुछ लोग तो सामान्य-सी घटना को भी आयोजन बना डालते हैं। ध्यान रखिएगा, आयोजन में बड़ा हिस्सा अहंकार-प्रदर्शन का होता है, जबकि उत्सव आंतरिक प्रसन्नता का मामला है। इस समय धार्मिक आयोजनों की भी बरसात-सी हो रही है। होते धरती पर हैं, लेकिन लगता ऐसे हैं जैसे आसमान से बरस रहे हों। इन्हें तीन तरीके से देखा जा सकता है। मंदिर, आश्रम और कथा। जिस नगर में देखो इनके निर्माण और आयोजनों की स्पर्द्धा चल रही है। चूंकि इनसे कुछ ऐसे लोग भी जुड़ जाते हैं, जो विवादास्पद होते हैं, इसलिए ये...
    May 22, 06:32 AM
  • दूसरों की खुशी का कारण बनें
    कभी फुर्सत में दो सूची बनाइए। एक में वे लोग हों, जो आपको देखकर खुश होते हैं। दूसरी सूची में उनके नाम जोड़िए, जिन्हें देखकर आप खुश होते हों। आप पाएंगे अगर ईमानदारी से कलम उठाएं तो कई चेहरे और नाम के आगे आपको दिक्कत आने लगेगी। जब हम कामकाज करके अपने घर लौटते हैं तो बच्चे और यदि घर में पालतू पशु हैं, तो वे हमें देखकर नि:स्वार्थ खुश होते हैं। इनकी निर्दोष प्रसन्नता हमें क्षणिक खुशी अपनाने पर मजबूर कर देती है। बाहर की दुनिया में जो लोग हमें देखकर खुश होते हैं या जिन्हें देखकर हम प्रसन्न होते हैं, उनमें...
    May 21, 06:30 AM
  • जीना सिखाती है बुजुर्गों की सीख
    बड़े-बूढ़े हमारे परिवारों में जीवन जीने के अद्भुत सूत्र छोड़ जाते हैं। बच्चों के लालन-पालन के लिए तो कुछ ऐसे सिक्रेट कोड बड़े-बूढ़े दे जाते हैं, जिनके आगे अच्छा-अच्छा प्रबंधन भी चुप हो जाए। दादा-दादी और नाना-नानियों ने जो कथाएं बच्चों को बिस्तर पर सुनाई उसके सामने बड़े-बड़े क्लास रूम और इंस्टीट्यूट फीके हैं। इसलिए परिवारों में जब बच्चों का लालन-पालन करना हो, तो जितने आधुनिक प्रयास अपनाए जाएं उससे दोगुने पारंपरिक और पुश्तैनी प्रयास जरूर करिएगा, क्योंकि हमें बच्चों को सीख और स्वतंत्रता एक साथ देनी है।...
    May 20, 06:16 AM
  • ईश्वर के उत्तर में साक्षात सत्य
    निंदा करना, आरोप लगाना, संदेह व्यक्त करना बड़ा आसान है। विश्वास करना उतना ही कठिन है। हम मनुष्यों पर संदेह करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह दुस्साहस बढ़ जाता है और हम भगवान को भी संदेह के दायरे में ले लेते हैं। हम एक प्रश्न करें, वे बराबर दो जवाब देंगे। चूंकि प्रश्न मनुष्य के अपने होते हैं, इसलिए वह उत्तर भी अपने हिसाब से ही पसंद करता है, जबकि जीवन का सच यह है कि प्रश्न आपके हो सकते हैं, लेकिन उसका जो उत्तर होता है वह सिर्फ उत्तर होता है। निष्पक्ष होता है। यदि उत्तर परमात्मा द्वारा दिया जा रहा है तो...
    May 19, 06:29 AM
  • परिवार में रस पैदा करती है भक्ति
    लंबे समय किसी के भी साथ रहना परीक्षा जैसा ही होता है। स्त्री-पुरुष पति-पत्नी के रूप में जब साथ रहते हैं तब इनके बीच एक दिक्कत यह भी होती है कि वे आपस में बात क्या करें। दोनों के बीच में जितने विषय होते हैं वे सब इस तरह से निचुड़े जा चुके होते हैं जैसे चरखी से निकला गन्ना। ज्यादातर देखा गया है पति-पत्नी के बीच जब कोई बात शुरू होती है कि दोनों अपने शब्दों के साथ भीड़ लेकर चलते हैं। वार्तालाप में अन्य पात्रों की उपस्थिति बहुत अधिक हो जाती है। इसलिए देखा गया है कि अधिकांश पति-पत्नी या तो चुप्पी साधे...
    May 18, 06:42 AM
  • वाणी में चिंतन, स्पष्टता व मिठास हो
    विज्ञान, धर्म व अध्यात्म ये कई मामले में आपस में टकराते रहते हैं। इनमें जो संतुलन बना ले उसे इनका श्रेष्ठ मिल जाता है। चलिए विज्ञान व अध्यात्म के ऐसे विषय पर चर्चा करते हैं जो सांस लेेने जितना सहज है। सांस लेना और बोलना यह हम जीवन में लगातार करते हैं। जिन क्षणों में हम बाहर नहीं बोलते उस समय भीतर चर्चारत होते हैं। बोलना एक ऐसी क्रिया होनी चाहिए, जिससे हमारी जरूरतें पूरी हों, लेकिन हमने बोलने को भी आदत बना लिया है। कई बार शब्द निकलने के तुरंत बाद पछतावा भी होता है। विज्ञान कहता है बोलना भौतिक...
    May 16, 07:05 AM
  • दूसरे के क्रोध का कारण समझें
    आजकल जिसे देखो उसे बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है। कुछ लोग तो यह शिकायत करते हैं कि हमें न चाहते हुए भी गुस्सा आ जाता है। शांत रहने के हमारे प्रयासों पर क्रोध भारी पड़ जाता है। फिर भी कुछ धीर-गंभीर और समझदार लोग अपने क्रोध पर काफी हद तक नियंत्रण पा लेते हैं। इनके सामने सवाल खड़ा होता है कि अपने क्रोध पर तो हमने नियंत्रण पा लिया, लेकिन जब सामने वाला क्रोध करे तब हम कैसे स्वयं को नियंत्रित रखें। एक प्रयोग कीजिए। सामान्यत: क्रोध तब आता है जब जैसा हमने चाहा वैसा काम नहीं हुआ। अपनी पसंद और उम्मीद के...
    May 15, 06:19 AM
  • हृदय पर केंद्रित होकर भय दूर करें
    आज जिसे देखो वह डरा हुआ है। पहले बच्चे अज्ञात से डरते थे, अब ज्ञात से डरने लग गए। पहले बच्चों को कुछ बातों का ज्ञान होता भी नहीं था और दिया भी नहीं जाता था। समय बदला तो कच्ची उम्र में वह ज्ञान और जानकारी भी आ गई जो परिपक्व होने पर आती थी। यहीं से भय भी बढ़ा। पहले बच्चों को डर लगता था तो मां के आंचल में छुप जाते थे या पिता के कंधे पर चढ़ जाते थे। अब तो वह आंचल खुद भयभीत है, वे कंधे खुद डरे हुए हैं। आइए, आज इसी पर विचार करते हैं। जैसे ही जीवन में कोई भय आए सबसे पहले पता लगाएं कि यह बाहर आ कहां से रहा है। फिर...
    May 14, 07:14 AM
  • एकाग्रता में निहित हमारी शक्ति
    सार्वजनिक जीवन में हमें अपनी पद-प्रतिष्ठा, रुचि, लक्ष्य के साथ-साथ अन्य लोगों की भी इन्हीं बातों का ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि सभी के ऐसे ही उद्देश्य होते हैं। ऐसे समय हमें एकाग्रता पर लगातार काम करना चाहिए। एकाग्रता में बहुत शक्ति होती है। भौतिक जगत में एकाग्रता से लाभ होता है और एकाग्रता से चूक जाएं तो हानि भी होती है। जितने भी बड़े वैज्ञानिक हुए हैं उनकी सफलता के पीछे एकाग्रता ही थी। कुछ साधु-संतों का जीवन देखें तो हम पाएंगे वे सहजता से अनूठा और अव्वल कर जाते हैं। इसके पीछे उनकी...
    May 13, 06:37 AM
  • गलत काम का नतीजा गलत ही
    हर व्यक्ति के कुछ निर्णय सवालों के घेरे में आ जाते हैं। किंतु धीर-गंभीर लोग जो निर्णय लेते हैं, बाहर से वे भले ही प्रश्नों के घेरे में लगें, लेकिन उनके पास इन प्रश्नों के पर्याप्त उत्तर होते हैं। किष्किंधा कांड में श्रीराम बालि को तीर मार चुके थे। बालि श्रीराम पर कुछ आरोप लगाता है। बालि का आरोप लगाना और श्रीराम का उत्तर देना हमारे लिए बहुत बड़ा संदेश है। बालि ने श्रीराम से कहा था, धर्म हेतु अवतरेहु गोसाईं। मारेहु मोहि ब्याध की नाईं।। मैं बैरी सुग्रीव पिआरा। अवगुन कवन नाथ मोहि मारा।। हे गोसाई,...
    May 12, 06:12 AM
  • ध्यान के जरिये मन को काबू करें
    हर व्यवस्था कोे ठीक से चलाने के लिए कुछ बातों का नियंत्रण करना पड़ता है। नौकरी करते हैं तो इस बात पर पूरा नियंत्रण रखते हैं कि काम समय पर हो जाए। यदि व्यवसाय कर रहे हैं तो खर्च आदि पर नियंत्रण करते हैं। यदि माता-पिता हैं तो बच्चों के आचरण पर नियंत्रण किया जाता है। नियंत्रण के अभ्यास में एक कदम और बढ़ाइए तथा अपने मन पर नियंत्रण की क्रियाएं शुरू कर देनी चाहिए। बाकी सब बातें आसान हैं, मन पर नियंत्रण बड़ा मुश्किल हो जाता है। जब मन अनियंत्रित होता है तो हमारे सारे बाहरी अनुशासन धरे रह जाते हैं। या तो...
    May 11, 06:12 AM
  • जीवन में लयबद्धता लाना अहम
    बच्चा जब पहली बार अपने दोनों पैरों पर खड़े होकर लड़खड़ाता हुआ चलता है वह दिन माता-पिता के लिए यादगार होता है। बड़े लोग पूरा प्रयास करते हैं कि सहारा भी दें और बच्चा स्वतंत्र रूप से चलना भी सीख जाए। इस दृश्य को जीवनभर के लिए याद रखिए। आपकी संतानें कितनी ही बड़ी हो जाएं, कहीं न कहीं वे लड़खड़ाकर चल रही होंगी। माता-पिता के रूप में आप कितने ही बूढ़े हो जाएं, अब भी आप सहारा देकर उन्हें लड़खड़ाने से बचा सकते हैं। उस समय आपने उसके हर कदम पर सावधानी रखी थी। बच्चों में यह बात उतार दें कि जो सजगता हमने उस समय...
    May 9, 06:27 AM
  • विफलता के दौरान शांति बनाए रखें
    सभी जिंदगी में कभी न कभी असफल होते हैं। कुछ लोग अधिक, कुछ लोग कम। सदैव सफल व्यक्तित्व बनाने में परमात्मा की रुचि कम ही है। किसी ने परमात्मा से पूछा कि जब आप बना ही रहे थे तो सबको सफल बना देते। ईश्वर का कहना था, मैं पूर्ण मनुष्य बनाना चाहता हूं और जब जीवन में असफलता आती है तो वह व्यक्ति को पूर्ण बनाकर जाती है। एक प्रयोग करते रहिए। आप गांव में रहते हों या शहर में। उस स्थान के नामी-गिरामी लोगों की सूची जरूर बनाइए और थोड़ा अध्ययन करें कि वे जीवन में कब असफल हुए और उसके बाद उन्होंने क्या किया। किसी बड़े...
    May 8, 06:15 AM
  • धन अर्जन को सेवा से जोड़ना होगा
    दौलत कमाने में देर और आलस नहीं होना चाहिए। फिर जब धन कमाने के लिए अनेक साधन हो गए हों तो मुकाबला भी अधिक लोगों से होगा। पहले लोग कम पढ़े-लिखे होते थे तो धन कमाने की क्षमता कम लोगों में होती थी। अब ज्यादातर लोग जो काम कर रहे हैं, धन कमाने के लिए ही कर रहे हैं। हर व्यक्ति के पास धन होना चाहिए इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन इस अंधी दौड़ में लोग भूल जाते हैं कि धन कमाना जीवन का छोटा-सा हिस्सा है। जब हम दौलत को सबसे पहले रखते हैं, तब जिंदगी में से बहुत कुछ खो देते हैं, जिसे सच्ची खुशी, भीतर की प्रसन्नता कहते...
    May 7, 07:02 AM
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