नवजात शिशुओं की इंद्रियों की स्थिति एक जैसी होती है। आधि-व्याधि के कारण कुछ अपवाद को छोड़ दें तो जन्म के समय और मौत के वक्त सभी देह एक जैसी रही है। पैदा होने के बाद धीरे-धीरे हालात बदलते हैं, लालन-पालन, माता-पिता, समाज-खानदान के द्वारा दिए गए सुख-दुख, सुविधा-दुविधा, अभाव और सहयोग से मनुष्य का व्यक्तित्व बदलने लगता है।
धीरे-धीरे जैसे ही समझ बढ़ती है, पहली चुनौती यह सामने आती है कि यदि जीवन में सुविधाएं हैं और आप बन गए तो यह एक सामान्य प्रक्रिया होगी, लेकिन यदि अभाव हो, संघर्ष हो, विपरीत परिस्थिति हो और उसके बाद भी हम कुछ बन जाएं, तब लगेगा जीवन जिया। भारतीय संस्कृति ने कमल के...