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जीने की राह

विपरीत परिस्थिति में भी कीचड़ में कमल की तरह खिले रहें

नवजात शिशुओं की इंद्रियों की स्थिति एक जैसी होती है। आधि-व्याधि के कारण कुछ अपवाद को छोड़ दें तो जन्म के समय और मौत के वक्त सभी देह एक जैसी रही है। पैदा होने के बाद धीरे-धीरे हालात बदलते हैं, लालन-पालन, माता-पिता, समाज-खानदान के द्वारा दिए गए सुख-दुख, सुविधा-दुविधा, अभाव और सहयोग से मनुष्य का व्यक्तित्व बदलने लगता है। धीरे-धीरे जैसे ही समझ बढ़ती है, पहली चुनौती यह सामने आती है कि यदि जीवन में सुविधाएं हैं और आप बन गए तो यह एक सामान्य प्रक्रिया होगी, लेकिन यदि अभाव हो, संघर्ष हो, विपरीत परिस्थिति हो और उसके बाद भी हम कुछ बन जाएं, तब लगेगा जीवन जिया। भारतीय संस्कृति ने कमल के...
 

काम की अपनी मदहोशी होती है और सफलता का अपना नशा

 जीने की राह..आजकल   व्यावसायिक जीवन में सफल लोगों के बीच इस बात की लगातार बहस छिड़ी होती है कि सफल होना हो तो...

मन को नयापन भीतर ही मिल जाए तो वह बाहर नहीं कूदेगा

  जीने की राह..मन  को जो-जो चीजें पसंद हैं, उनमें से एक है बेईमानी करना। उसे नई-नई किस्म की बेईमानियां ढूंढ़ने में...
 
 
 

श्रीराम की कृपा यदि है तो जीवन जैसा भी है सुंदर है

यह सवाल सबके मन में उठता है कि भगवान से जब हम रिश्ता रखें तो उनसे कुछ मांग की जाए या नहीं। कुछ भक्त कहते हैं कि जब...

ज्ञान का गोदाम नहीं, समझ का उपकरण हैं शास्त्र

जीने की राह..जीवन में अनेक बार प्रश्नों का समाधान ऐसे स्थानों से मिलता है, जहां की हम उम्मीद भी नहीं करते। इसीलिए...
 
 

और खबरें

 
 
 

  • February 3, 12:15
     
    जीने की राह.. पूजा-पाठ, साधना-तपस्या के बाद भी एक दुगरुण ऐसा है जिसके बचे रहने की संभावना बनी रहती है और वह है अहंकार। चूंकि अहंकार बचा रहता है, इसलिए संसार भी बचा रहता है। संसार बचा रहे पूजा के बाद भी, इसमें कोई दिक्कत नहीं है। संसार छोड़ने की जरूरत है ही नहीं, लेकिन परेशानी यह है कि पूजा के समय भी संसार साथ में चलता है। इसके मूल में अहंकार भी होता है। अहंकार इतना बारीक है कि वह त्याग...
     

  • February 2, 12:09
     
    जीने की राह.. दुनिया में अनेक तरह के लोग होते हैं। किसे आपका कौन-सा काम पसंद या नापसंद है, इसका ठीक से आप हिसाब-किताब नहीं लगा पाते। चूंकि हम अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा दूसरों से प्रभावित रखते हैं, इसलिए हम भी चिंतित रहते हैं कि किसे क्या पसंद आएगा? कुछ लोग तो आपकी प्रशंसा करके अहंकार को बढ़ाएंगे और आप समझ नहीं पाएंगे कि आप अपना कितना बड़ा नुकसान कर रहे हैं। हमारे जीवन में वन का बड़ा...
     

  • January 31, 12:00
     
    जीवन में विपरीत परिस्थितियों में शब्दों का उपयोग बड़े काम का होता है। स्वयं को समझाना हो या दूसरों को, शब्दों का उपयोग करते समय उसमें चार बातों का समावेश करिए। सुंदरकांड में सीताजी से बातचीत करते हुए जब हनुमानजी ने भगवान के प्रताप का वर्णन किया तो सीताजी आश्वस्त हो गईं। हालांकि उन्हें लग रहा था कि रावण के राक्षस विशाल हैं और रामजी के बंदर बहुत छोटे, लेकिन हनुमानजी के शब्दों ने...
     

  • January 30, 12:42
     
    हमारे  भीतर दो बातों का संघर्ष चलता ही रहता है - हिंसा और अहिंसा। बाहर भले ही हम प्रदर्शित न करें, लेकिन भीतर ही भीतर कभी-कभी हम इतने हिंसक हो जाते हैं कि यदि उसे क्रियान्वित कर दें तो शायद कानून के दायरे में आ जाएं और दंड भोगना पड़े। अहिंसा और हिंसा की यही वृत्ति हमें शांति और अशांति की ओर ले जाती है। आजकल आसानी से कोई भी काम होना कठिन है। ऐसे में भीतर से हमारे हिंसक होने की संभावना...
     

  • January 28, 12:45
     
    जीने की राह.. यह सवाल ज्यादातर लोगों के मन में उठता है कि क्या भगवान हमारा भला चाहते हैं? क्योंकि कई बार जब हमारी पसंद का काम नहीं होता तो हमें भगवान की भूमिका पर संदेह होने लगता है। स्वामी अवधेशानंदगिरिजी कहते हैं - मनुष्य नहीं समझ पाता है कि भगवान उसका हर पग पर भला चाहते हैं और भला करते हैं। यदि मनुष्य अपने समस्त कर्म भगवान को समर्पित कर दे तो उसकी आत्मा कभी गलत काम नहीं होने देगी...
     

  • January 26, 12:10
     
    जीने की राह.. निराशा आने पर हम आशा की किरण दूसरों में ढूंढ़ते हैं। वैसे तो सबसे अच्छा समाधान हमारे भीतर होता है, लेकिन फिर भी यदि बाहर ढूंढ़ रहे हों तो एक स्थान पर जरूर जाएं जिसे सत्संग कहते हैं। यहां कुछ ऐसा मिल जाता है, जो जीवन के नैराश्य को मिटा सकता है। निवृत्तमान शंकराचार्य सत्यमित्रानंदगिरिजी कहते हैं - सत्संग करते-करते विचार जागेगा, मन में करुणा जागेगी। सत्संग आपको संसार...
     

  • January 25, 12:08
     
    जीने की राह.. दुखी होने के लिए अब बड़ी घटनाओं की जरूरत नहीं है। छोटी-सी बात भी आपको बड़े से बड़ा दुख दे जाएगी और बड़ी से बड़ी घटनाएं भी छोटा-सा सुख नहीं दे पाएंगी, क्योंकि सारा मामला भीतरी समझ का है। आर्ट ऑफ लिविंग के श्रीश्रीरविशंकर कहते हैं, जरा भीतर उतरिए, तो समझ में आ जाएगा कि यह जगत परिवर्तनशील है। दिमाग में, मन में, अनुभव में जाकर हम देख लें, तब हम छोटी-छोटी बातों को लेकर दुखी नहीं...
     

  • January 24, 12:08
     
    जीने की राह.. यह कुछ अलग करने का समय है। इस समय प्रतिस्पर्धा की मांग है कि अव्वल ही न रहा जाए, कुछ अनूठा भी किया जाए। हमारी और दूसरों की मांगें असीम हो गई हैं। जल्दी चाहिए और बहुत चाहिए, ऐसा उद्देश्य छोटे-बड़े सबका बन गया है। नए प्रबंधन के युग में कहा जाता है कि सर्वश्रेष्ठ पाने के लिए अहंकार भी सहारा बन जाता है। कुछ लोग अहंकार को अपनी प्रेरणा मानते हैं। उनका कहना है कि अहंकार की...
     

  • January 23, 12:44
     
    जीवन प्रेमपूर्ण हो जाना एक बड़ी उपलब्धि है। स्त्री-पुरुष ही नहीं, कुछ और रिश्ते भी हैं, जो प्रेम को समझाते हैं। मनुष्य अपनी साधना-भक्ति से प्रेम प्राप्त नहीं कर सकता। प्रेम जिस पर कृपा करता है, उसके हृदय में प्रकट हो जाता है। हमारी संस्कृति में गुरु का बहुत महत्व बताया गया है। कर्म में सेवा का भाव गुरुचरण सेवा ही है। यदि उदार दृष्टि से विचार किया जाए तो सेवाभाव की सर्वव्यापकता...
     
 
 
 
 
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