जीने की राह
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  • दूसरे को सुखी करना सबसे बड़ा दान
    एक-दूसरे को सताना इनसान की फितरत है। वैसे तो किसी को भी दुख पहुंचाना धर्म और अध्यात्म की दृष्टि से पाप ही है। किसी को सुख पहुंचाना सबसे बड़ा दान है, लेकिन मनुष्य की प्रवृत्ति ऐसी हो जाती है कि मुझे सुख मिले और दूसरे को दुख मिल जाए। कई बार तो दूसरों को दुख देने में ही हमें सुख मिलने लगता है। फिर हम अपने आसपास तनावपूर्ण वातावरण बना लेते हैं। यह तो तय है कि दूसरों को दुख पहुंचाकर आप क्षणिक सुख उठा लें, लेकिन लंबे समय में यह हमारे लिए दुख का कारण बन सकता है। चलिए, आज उन तीन स्तरों को देखें जहां एक-दूसरे से...
    58 mins ago
  • सिंहस्थ में भीड़ का आत्मानुशासन
    भीड़ अगर कुटिल आदमी के साथ आ जाए तो हिंसा कर सकती है, अपराध कर सकती है। किसी समझदार के नेतृत्व में आ जाए तो सृजन और सेवा का बहुत बड़ा काम कर सकती है। इन दिनों सिंहस्थ मेले में जहां देखो वहां भीड़ नजर आती है, लेकिन स्वअनुशासित, एक अज्ञात लक्ष्य की ओर चलती हुई। आश्चर्य होता है इतने नरमुंड हैं, लेकिन फिर भी शांत! इसके पीछे है धर्म, अध्यात्म। कहीं न कहीं गुरुकृपा भी काम कर रही है। संतों का अपना प्रभामंडल इस भीड़ को नियंत्रित किए हुए है। अजीब-अजीब से दृश्य सामने आते हैं। मैं कहीं पढ़ रहा था और उस पढ़े हुए...
    May 4, 03:55 AM
  • हमारे प्रयास और उसकी कृपा हो
    दुर्गुणों से नादान या विद्वान कोई नहीं बच पाया। श्रीराम के सामने सुग्रीव जब उनका दिया काम भूलने का स्पष्टीकरण दे रहे थे कि तो उन्होंने काम, क्रोध और लोभ तीनों से बचने का सरल-सा उपाय प्रस्तुत किया। गोस्वामी तुलसीदासजी ने लिखा है,बिषय बस्य सुर नर मुनि स्वामी। मैं पावंर पसु कपि अति कामी।। नारि नयन सर जाहि न लागा। घोर क्रोध तम निसि जो जागा।। हे स्वामी! देवता, मनुष्य और मुनि सभी विषयों के वश में हैं। फिर मैं तो पामर पशु और उसमें भी अत्यंत कामी बंदर हूं। स्त्री का नयन-बाण जिसे नहीं लगा, जो भयंकर...
    May 3, 03:56 AM
  • मन की धूल साफ करता है कुंभ
    ये प्रकृति पंच तत्वों से बनी है- पृथ्वी, अग्नि, वायु, जल और आकाश। इनका संतुलन बिगड़ा कि हम अस्वस्थ और अशांत हो जाते हैं। इसी पंच तत्व का एक रूप है धूल। धूल कपड़े से साफ की जा सकती है, उसका भीतर आना रोका जा सकता है, लेकिन दुर्गुणों की धूल सबसे ज्यादा जमती है मन पर। इसीलिए शास्त्रों ने मन को दर्पण कहा है। इस दर्पण पर दुर्गुणों की धूल जमती है, तो वह किसी और साधन से साफ नहीं होती। कोई कहता है गुरु कृपा से साफ होती है। कोई कहता है मेडिटेशन से साफ होती है। इसका एक अवसर कुुंभ में आया है। इसमें मन पर जमी धूल साफ...
    April 30, 03:19 AM
  • वैभव के बीच विराग है कुंभ मेला
    पुराने लोग कहा करते थे कि जो लोग बाहर की दुनिया की मिट्टी फांकते हैं वो मन में फिर नहीं झांकते। इसका यह मतलब नहीं कि कंकर, पत्थर, मिट्टी खाई जाए। इसका सीधा-सा मतलब है जीवन केवल बाहर पर टिक जाए। हमारा जन्म संसार में हुआ है। हम घर-परिवार बसाते हैं, लेकिन उसमें इतना डूब जाते हैं कि जीवन का दूसरा पक्ष देख ही नहीं पाते। फिर हम भूल ही जाते हैं कि एक दुनिया ऐसी भी है, जिसमें मनुष्य अपने भीतर झांक सकता है। जीवन की यात्रा में कदम-कदम पर होनी और अनहोनी बिछी रहती है। आतंकी जमीनी सुरंग में बारूद बिछाकर हत्याएं...
    April 28, 04:36 AM
  • तन-मन की शुद्धि का महापर्व
    सफाई रखना मनुष्य का स्वभाव है और होना भी चाहिए। कहते हैं, जो लोग गंदगी में रहते हैं वे दुर्भाग्य को आमंत्रित करते हैं। शुद्धता में सौभाग्य है। हमारे देश में सफाई का जो राष्ट्रीय अभियान लिया गया है उसे केवल स्थान की, शरीर की सफाई से न जोड़ा जाए। उज्जैन में कुंभ मेले के मौके पर आयोजित शुद्धता के कुछ नए अर्थ समझे जा सकते हैं। वैसे तो जब मेला लगता है तो गंदगी की संभावना बढ़ जाती है, लेकिन इस मेले में जो लोग आ रहे हैं उनकी दो श्रेणियां की जा सकती है- एक साधु-संत और दूसरे श्रद्धालु। क्यों लोग साधु-संतों के...
    April 27, 03:58 AM
  • गलती हो तो सुग्रीव जैसी क्षमा मांगें
    गलती करने वाले भक्त कभी-कभी प्रयास करते हैं कि भगवान को याद दिला दें कि आपको लग रहा है कि हम सब ठीक-ठाक ही करते रहेंगे, पर ऐसा होता नहीं है। जब गलती कर जाते हैं तो गलती के तर्क भी भगवान के सामने देते हैं। हम अपनी गलती दूसरे के सिर पर थोपने में बहुत दक्ष है। किष्किंधा कांड के प्रसंग में सब लौटकर रामजी के पास आते हैं। जैसे ही रामजी से सामना होता है, सुग्रीव को लगता है मैं इनका काम भूलने की गलती कर चुका हूं, अब स्पष्टीकरण कैसे दिया जाए। देखिए, किस ढंग से सुग्रीव स्पष्टीकरण दे रहे हैं। सुग्रीव के इस...
    April 26, 03:54 AM
  • धन नहीं, धर्म सुख दे सकता है
    सभी लोगों को ऊपर से नीचे देखने का मौका नहीं मिलता। किसी बहुमंजिला इमारत या किसी पहाड़ पर चढ़ जाएं तब भी यह मौका मिलेगा, लेकिन हवाई यात्रा के दौरान जो दृश्य दिखता है उसे ही सचमुच ऊपर से नीचे देखना कहेंगे। हां, नीचे से ऊपर जरूर सभी देख सकते हैं। आकाश में देखें और यदि रात हो चुकी हो तो चंद्रमा के साथ सितारे नजर आते हैं। इस दृश्य से कल्पना करें कि उज्जैन में सिंहस्थ का मेला आरंभ हो चुका है, जहां एक से एक सितारे उतरे मिलेंगे। ये वे सितारे हैं जिन्हें कभी साधु, कभी संत, कभी संन्यासी कहा तो कभी बैरागी कहा...
    April 23, 03:45 AM
  • सिंहस्थ मेले में जीवन के सूत्र
    कहते हैं कि भीड़ का कोई भाव नहीं होता। भीड़ बिना सिद्धांत, बिना नियम के चलती है।अनियंत्रित हो जाए तो नुकसान भी पहुंचा सकती है। फिर भी वर्षों से भीड़ एकत्र होती रही है। एक माह के लिए उज्जैन की धरती पर भीड़ एक नए स्वरूप में आएगी। लगभग पांच करोड़ श्रद्धालु इस एक माह में उज्जैन की धरती पर प्रवेश करेंगे। लाखों साधु-संत और उनके भक्त होंगे। उज्जैन का सिंहस्थ मेला हनुमान जयंती से शुरू हो रहा है। हनुमानजी महाराज उज्जैन की धरती पर अपनी जयंती से अनुमति दे रहे हैं कि एक माह में जीवन के वे सारे सूत्र ले जाओ, जो...
    April 21, 03:55 AM
  • नदियों को बचाइए, जीवन बचेगा
    नदी में स्नान करना केवल जलक्रीड़ा ही नहीं है। भारत में तो नदी के साथ धर्म जुड़ा है। यहां नदियों में डुबकी लगाना केवल जलक्रीड़ा नहीं है। इससे पुण्य का बड़ा मामला जुड़ जाता है। उज्जैन में सिंहस्थ के दौरान करोड़ों लोग शिप्रा में डुबकी लगाने को आतुर हैं। एक माह तक यह जल-पूजा चलेगी। इस दौरान सब मिलकर छोटी-छोटी आहूति दें। वह ऐसे कि शिप्रा में इस संकल्प के साथ डुबकी लगाएंं कि देश की प्रत्येक नदी को प्रदूषण मुक्त रखेंगे। यह किसी एक सरकार या व्यवस्था का काम नहीं होगा। केवल गंगाजी का ही उदाहरण लें। गंगा...
    April 20, 02:56 AM
  • हालात कैसे भी हों, शिष्टाचार न छोड़ें
    समस्याओं को निपटाने के जितने भी तरीके हैं उनमें एक है शिष्टाचार। यह एक ऐसी जीवनशैली है जो कई बातों को मिलाकर बन जाती है। हमें लगता है कि शिष्टाचार उन्हीं से निभाया जाए, जो परिचित हों। थोड़ा उनसे भी निभाया जाए, जो अंजान हों, लेकिन उनसे भी निभाया जाए, जो प्रतिस्पर्द्धी हों। यहां तक कि शत्रुता होने पर भी निभाया जाए। व्यक्तित्व में शालीनता, सौम्यता, मधुरता, क्षमा मांगने की वृत्ति, मेहमाननवाजी का भाव, चेहरे पर मुस्कान, बात कहने का विनम्र सलीका ऐसी अनेक बातें मिलकर शिष्टाचार बनती हैं। शिष्टाचार से...
    April 19, 04:38 AM
  • कुंभ में हनुमान चालीसा से मेडिटेशन
    घर-परिवार में कई बार इस बात को लेकर झगड़ा हो जाता है कि मैंने यह कहा था, आपने नहीं सुना। जब परिवार में सदस्य आपस में बातचीत कर रहे हों तो अपने संवाद बड़े अधूरे ढंग से और दूर से बोलते हैं, क्योंकि मामला घर का होता है। कई बार तो एक सदस्य अलग कमरे में होता है और दूसरा अन्य कमरे में और वहीं से बोल देता है। बाहर विषय की प्रस्तुति बहुत अच्छे ढंग से करने वाले लोग भी घरों में बड़बड़ाते हैं, आधी-अधूरी बात करते हैं और संबंधों में तनाव आ जाता है। 24 मिनट का हनुमान चालीसा से मेडिटेशन का एक कोर्स, जिसमें छह-छह मिनट के...
    April 16, 02:38 AM
  • हनुमान चालीसा से समूह ध्यान
    इस दुनिया में हर रिश्ता, हर वार्ता सौदा बन जाती है। ऐसे सौदे हम सब करते हैं। कभी-कभी यह प्रयोग करें कि अपना फायदा दूसरों को उठाने दें। सुनने में अजीब लगेगा, लेकिन करके देखिए। परमात्मा ने हर एक के भीतर एक विशेषता दी है। उस विशेषता का लाभ हम तो उठाएं, दूसरों को भी उठाने दें, यह बड़ी सेवा होगी। कुछ व्यक्तित्व ऐसे हैं, जिन्होंने अपना भरपूर लाभ दूसरों को दिया और उन्हीं में से एक हैं- हमारे राम। कल रामनवमी के दिन जब श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाए तो ध्यान रखें कि रामजी ने अपनी योगयताओं को दूसरों में खूब...
    April 14, 02:50 AM
  • योग करें और आहत होने से बचें
    बच्चे स्कूल से आते हैं तो स्कूल की कुछ जानकारी देते हैं। कुछ शिकायतें होती हैं, कुछ बहाने। समझदार माता-पिता बहाने और शिकायतों में फर्क समझते हैं। इस वक्त बच्चों की शिकायतों पर लापरवाही नहीं दिखानी चाहिए। आमतौर पर एक शिकायत हल्के में ली जाती है और वह होती है बुली के बारे में। बुली शब्द उन बच्चों के लिए उपयोग में लाया जाता है, जो स्कूल में सहपाठी के साथ मारपीट करते हैं। बुली बच्चे अपने आप में एक मानसिक समस्या है। इन्हें काबू न किया जाए तो उनकी यह हिंसा आगे जाकर विकृत रूप ले लेगी। यह मानसिकता हमें...
    April 13, 04:39 AM
  • अवसर के अनुसार ही बात करें
    अपनी कमजोरी को जान लेना उससे मुक्ति पाने का सबसे अच्छा उपाय है।कितना ही समझदार और समर्थ व्यक्ति हो, कुछ न कुछ दोष सभी में रहते हैं। अपनी कमजोरियों से मुक्ति पाने के लिए आप जो भी उपाय कर रहे हों, सबसे पहले अच्छी तरह समझ लें कि कमजोरी है क्या व हमारे भीतर उसका केंद्र क्या है? हनुमानजी के प्रयासों से लक्ष्मणजी लगभग शांत हो गए थे। तब सुग्रीव ने प्रवेश करके जो कहा वह हमारे लिए सीखने लायक है। सबसे पहले सुग्रीव ने अपनी कमजोरी स्वीकार की और लक्ष्मणजी से कहा, नाथ बिषय सम मद कछु नाहीं, मुनि मन मोह करइ छन...
    April 12, 04:14 AM
  • सदैव शीर्ष पर रहने की जिद न करें
    हर व्यक्ति का अपना शीर्ष होता है। यानी सफलता का सफल समापन सभी के जीवन में आता है। सभी लोग शीर्ष पर नहीं पहुंचते यह भी सही है। जो भी लोग शीर्ष पर पहुंचने की तैयारी में हों या पहुंच चुके हों उन्हें एक बात ध्यान रखनी चाहिए कि अपनी एग्ज़िट का दरवाजा सावधानी से खुला रखें। लौटना सभी को है। शीर्ष यानी किसी व्यवसाय, समाज, परिवार में जब आप नंबर वन होते हैं, कामयाब होते हैं और ख्यात होते हैं। कई लोगों को गलतफहमी हो जाती कि शीर्ष सदैव बना रहेगा। वे यह भूल जाते हैं कि यहां आने के लिए कुछ और लोग भी तैयारी कर रहे...
    April 9, 04:21 AM
  • नीयत साफ हो तो टिकती है दोस्ती
    धन जीवन में आता है तो आदमी के तौर-तरीके बदल ही जाते हैं। फिर यदि धन लंबे समय टिक जाए तो उठना-बैठना भी सिलेक्टिव हो जाता है। पैसे वाले पैसे वालों के साथ ही बैठना पसंद करते हैं। मेरा संबंध अनेक धनाढ्य लोगों से है, जो मुझे अपने साथ बैठा लेते हैं। इसका एक कारण है धर्म और अध्यात्म। मैं अकेला और धनवान लोग अधिक बैठे हों तो उनकी बातचीत में चौंकाने वाले संवाद आ जाते हैं। ऐसे ही एक बैठक में बातचीत चल रही थी मित्रता को लेकर। एक प्रतिष्ठित व्यक्ति ने कहा, पैसे वालों में दोस्ती नहीं होती। यारी तो कंगालों का...
    April 7, 04:25 AM
  • अपने केंद्र पर है आनंद की प्राप्ति
    शास्त्रों में लिखा है कि मृत्यु अपने निमित्त का चयन करती है। श्रीकृष्ण की मृत्यु जरा नामक शिकारी के तीर से हुई थी। मृत्यु ने उसका चयन किया था। जरा ने रोते हुए श्रीकृष्ण से कहा, मुझसे भूल हो गई। मैं आपका अपराधी हूं। श्रीकृष्ण ने कहा, तुमने मेरी पसंद का काम किया है। तुम तो निमित्त हो। हम मृत्यु के कारण को कोसने लगते हैं। मैं यहां यह बात इसलिए लिख रहा हूं कि पिछले दिनों मैंने समाचार पढ़ा कि नाव पलटने से युवकों की मृत्यु हो गई। कहा जा सकता है कि नाव निमित्त बनी, लेकिन यह सतही कारण है। सच तो यह है कि उनकी...
    April 6, 04:06 AM
  • सफलता के लिए जागृति जरूरी
    हनुमानजी जितना अच्छा सोचते थे, सोचे हुए को उतने ही अच्छे ढंग से कर लेते थे। विद्वान से विद्वान व्यक्ति को भी हनुमानजी के काम के पीछे के उद्देश्य को पकड़ने में बड़ी कठिनाई होती थी, क्योंकि बड़ी गहरी सोच के साथ काम करते हैं हनुमानजी। किष्किंधा कांड में हनुमानजी ने श्रीराम का यश सुनाया तो लक्ष्मणजी शांत हो गए और हनुमानजी से कहा, जब पर्वत से चला तो रामजी ने मुझे टोक दिया था कि सुग्रीव के साथ ज्यादा मारपीट मत करना। उन्होंने मेरे आवेश को नियंत्रित कर दिया था, अब आपने मेरे क्रोध को उड़ा दिया। कहिए...
    April 5, 03:34 AM
  • हनुमानजी का हैप्पीनेस मंत्रालय
    महाभारत युद्ध का पर्याय बन गया है, लेकिन गीता में धर्म के साथ कुरुक्षेत्र का नाम आया है। बात उल्टी लगती है। जहां धर्म है, वहां युद्ध कैसा और जहां युद्ध हो रहा हो तो धर्म कैसे बचेगा? किंतु ऐसी विपरीत स्थितियों में गहरा संदेश होता है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने मिनिस्ट्री ऑफ हैप्पीनेस का गठन करने की चौंकाने वाली घोषणा की है। एक अंतरराष्ट्रीय आवश्यकता पर यह प्रादेशिक प्रयास है। अगर ऐसा होता है तो मनुष्य के जीवन के लिए बड़ा उपयोगी होगा। राजनीति कुरुक्षेत्र है और वहां हैप्पीनेस यानी प्रसन्नता...
    April 2, 03:36 AM