जीने की राह
Home >> Abhivyakti >> Jeene Ki Rah
  • बांटने से बढ़ती है संपदा रूपी लक्ष्मी
    समुद्र मंथन में चौदह रत्न प्राप्त हुए थे। कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, अप्सराएं, मदिरा, पारिजात, चंद्रमा, शारंग धनुष, लक्ष्मीजी, धन्वंतरि और अमृत आदि। आठवें क्रम पर लक्ष्मीजी प्रकट हुई थीं। उस समय ऋषि-मुनि, देवताओं ने लक्ष्मीजी की कामना की, लेकिन उन्होंने नारायण का वरण किया था। यह साधारण-सी कथा, असाधारण अर्थ लिए हुए है। लक्ष्मीजी के प्रकट होने पर एक श्लोक लिखा गया है- रूपौदार्य वयोवर्ण महिमा क्षिप्त चेतस:। जब वे समुद्र से प्रकट हुईं तो उनके सौंदर्य, औदार्य, यौवन, रूप-रंग और महिमा से सबका चित्त खिंच...
    October 23, 06:13 AM
  • मस्तिष्क से कमाएं, दय से बचाएं
    हम धीरे-धीरे दिवाली की ओर बढ़ रहे हैं। यह एकमात्र त्यौहार है, जो जीवन की सबसे बड़ी आशा धन यानी लक्ष्मी लेकर आता है। कहते हैं धन मस्तिष्क से कमाया जाए और हृदय से बचाया जाए। धन की कमाई, बचत और खर्च तीनों में प्रकाश होना चाहिए, इसीलिए दिवाली में प्रकाश का महत्व है कि जागकर धन कमाना, होश में बचाना और शुद्धी से खर्च करना। मस्तिष्क की विशेषता है कि वह विश्वास में काम करता है। यदि आप विश्वास कर ही लें कि यह आपको उपलब्ध होना ही है, तो मस्तिष्क उस दिशा में चल पड़ेगा, इसीलिए कहते हैं असंभव शब्द सोए हुए दिमाग...
    October 22, 06:50 AM
  • ईश्वर से संसार नहीं, उन्हीं को मांगें
    कभी आपने सोचा है कि हम भगवान को क्यों याद करते हैं। चलिए, आज हनुमानजी के माध्यम से समझते हैं। बहुत सारे लोग परंपरा के कारण परमात्मा को याद करते हैं। कुछ लोग स्वार्थ-पूर्ति के लिए कर रहे हैं और शेष डर के कारण। बहुत कम लोग परमात्मा को इसलिए याद करते हैं कि उनमें कुछ ऐसी बात है जो संसार में कहीं नहीं है। सच्चा भक्त उनसे इसलिए जुड़ता है कि उसे सिर्फ भगवान चाहिए। हमारी चर्चा चल रही है किष्किंधा कांड में श्रीराम और हनुमानजी की पहली भेंट के प्रसंग की। हनुमानजी श्रीरामजी से कह रहे हैं और तुलसीदासजी लिखते...
    October 21, 06:03 AM
  • संसार के केंद्र में ईश्वर होना चाहिए
    यह चीज हमारी है, ऐसा दावा करते ही जिंदगी के सारे समीकरण बदलने लगते हैं। फिर आज की जीवनशैली में तो सारे प्रयास इसी के लिए होते हैं। हमारी हो जाए या हमें मिल जाए, इस आकांक्षा में ही अशांति छिपी है। जिन्हें शांति की खोज करनी हो, वे इस इच्छा को थोड़ा सा आध्यात्मिक मोड़ दे दें। जो चीज ज्यादा समय साथ रहती है, उससे मोह हो जाता है। बरसों साथ रहकर बिछड़ जाए तो वह आपकी तो नहीं हुई। परमहंस संत रामसुखदासजी कहा करते थे, आपकी न उत्पत्ति होती है, न विनाश होता है, न आरंभ होता है, न अंत होता है। फिर उत्पन्न और नष्ट होने...
    October 20, 06:41 AM
  • लक्ष्य केंद्रित जीवन में है सार्थकता
    बिना लक्ष्य का जीवन वैसा ही है जैसे बिना धड़कन का हृदय यानी मृत्यु। आज प्रतिस्पर्द्धा का जैसा माहौल है उसमें सालों और महीनों के लक्ष्य नहीं, दिन और उसमें भी हर घंटे के लक्ष्य तय करने पड़ेंगे। आप लक्ष्य आधारित जीवन जीते हैं तो फालतू बातों से खुद को बचा लेते हैं। लक्ष्य केंद्रित लोग बहस में नहीं पड़ते। बेकार के निदानों के चक्कर में नहीं उलझते। उन्हें शार्ट कर्ट भी ज्यादा पसंद नहीं आते। वे तो यह देखते हैं कि अपनी क्षमता का अधिकतम उपयोग कैसे करें। उनकी रुचि दूसरों को नीचा दिखाने से ज्यादा खुद को आगे...
    October 18, 07:15 AM
  • मित्र, संबंधियों के लक्ष्य जरूर जानें
    जब भी हम किसी के साथ संबंध रखें, एक बात जरूर जान लें कि सामने वाले के जीवन में लक्ष्य क्या है। उनके भीतर क्या चल रहा है यह तो नहीं जान पाएंगे, लेकिन वे कहां पहुंचना चाहते हैं, कौन सा काम करते हैं और उनकी महत्वाकांक्षाएं क्या हैं, इसका सूक्ष्म विश्लेषण जरूर कर लीजिए। इसके दो फायदे होंगे। यदि वो व्यक्ति सही है तो आप उसकी मदद कर सकेंगे और वह भी आपकी मदद कर पाएगा, क्योंकि जीवन में मदद लेनी भी पड़ती है। जब हम अपने कार्यस्थल पर होते हैं तब हमें समान लक्ष्य वाले लोग मिल जाते हैं। मसलन, आपके कार्यस्थल पर सभी...
    October 17, 07:30 AM
  • व्यक्तित्व नहीं, अस्तित्व से जुड़ें
    परनिंदा और आत्म-स्तुति मनुष्य की दो कमजोरियां हैं। कहते हैं कि अत्यधिक आत्म-स्तुति करने से अहंकार आ जाता है। लगातार खुद की प्रशंसा करते रहने से आप भ्रम में भी पड़ सकते हैं। कुछ लोगों को यह आदत पड़ जाती है कि दिनभर में वे यदि तारीफ न सुनें तो शाम तक उन्हें निराशा घेर लेती है। यदि वे प्रभावशाली व्यक्ति हैं तो उनके आस-पास चापलूसों का घेरा बन ही जाएगा। चापलूस शब्दों से ऐसा भ्रम-जाल बुन देते हैं कि कुछ समय बाद आप भूल ही जाते हैं कि मूल रूप से आप हैं क्या। चलिए, एक आध्यात्मिक प्रयोग करें। अध्यात्म...
    October 16, 05:43 AM
  • जानकारी बाहर और ज्ञान भीतर मिलता है
    आजकल हर बात की जानकारी इकट्ठा करना फैशन बन गया है। इंटरनेट आने के बाद तो हर आदमी तुरंत समाधान के चक्कर में है। लोग बीमार होते हैं, डॉक्टर के पास पहुंचने के पहले ही लक्षणों के आधार पर कम्प्यूटर से बीमारी और इलाज दोनों की जानकारी निकाल लेते हैं। इसके बाद शुरू होता है उनकी परेशानी का दौर। फर्क होता है जानकारी, ज्ञान और होश में। आपको कम्प्यूटर से जानकारी मिल सकती है, पर ज्ञान तो डॉक्टर के पास ही होगा और होश डॉक्टर भी नहीं दे सकता, वो आपको खुद अर्जित करना है और उसके लिए गुरु माध्यम जरूर बन सकता है। अब तो...
    October 15, 05:40 AM
  • भूलने से बचाती है जागरूकता
    हमें एक-दूसरे से जितनी भी शिकायतें होती हैं उनमें से एक शिकायत होती है, आपने हमें भुला दिया। कई बार ऐसा होता है कि हम किसी से मिलने जाना चाहते हैं, किसी का कोई काम करना हो, लेकिन हम भूल जाते हैं। लाख सावधानी के बाद भी कई बातें विस्मृत हो ही जाती हैं। मनुष्य में ऐसी कौन सी वृत्ति होती है जो उसे बातें भुला देती हैं। इस वृत्ति का नाम है माया। इसे साधारण भाषा में जादू भी कह सकते हैं। जादू यानी होने और न होने का भ्रम। किष्किंधा कांड में हनुमानजी ने माया का जिक्र किया है। श्रीराम से उनकी पहली मुलाकात चल रही...
    October 14, 05:59 AM
  • बदलावों को समझकर व्यवहार करें
    हर उम्र में मनुष्य की प्रवृत्ति बदलती है। इसके पीछे पहला कारण होता है भौतिक परिस्थितियों में बदलाव। किसी के पास पहले धन नहीं होता, बाद में पर्याप्त संपत्ति आ जाती है। इसका उल्टा भी हो जाता है। हरेक का ग्राफ ऊपर या नीचे जाता ही है। पहला कारण स्थितियों से जुड़ा हुआ है। स्थितियां बदलती हैं तो हमारा व्यवहार बदलने लगता है। मिसाल के तौर पर एक वक्त था जब जहां जैसा खाना-पानी मिला, खाया-पिया और पचा भी लिया। फिर ऐसा वक्त भी आता है कि जरा गड़बड़ हुई कि पाचन तंत्र जवाब दे जाता है। मनुष्य की प्रवृत्ति दूसरी...
    October 13, 07:26 AM
  • परिजनों के कामों में रुचि लें
    किसी के दिल में क्या चल रहा है यह पता लगाना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है। जो ऐसा कर सकें, समझ लीजिए वह सिद्ध है। बाहर की दुनिया में तो लोग एक-दूसरे से कम ही खुलते हैं। व्यावसायिक दुनिया के सारे सौदे लुकाछिपी से ही किए जाते हैं। अब घरों में भी यह दिक्कत शुरू हो गई है। हम जान ही नहीं पाते कि घर के सदस्यों के मन में क्या चल रहा है। घर के सदस्य जब-जब दूसरे से बातें छुपाएंगे तो कलह होने की संभावना बढ़ जाएगी। परिजनों से बातचीत करते रहिए। इससे यह मालूम पड़ जाता है कि सामने वाला किन बातों से चिड़ जाता है, किन...
    October 11, 05:37 AM
  • व्यवसाय में निराशा का मुकाबला करें
    कोई व्यक्त करे या न करे, लेकिन यह सही है अच्छे-अच्छे विद्वान को निराशा घेर लेती है। समझदार लोग निराशा से बचने के तरीके जानते हैं और नासमझ लोग उसमें उलझ जाते हैं। आजकल व्यावसायिक क्षेत्र में लक्ष्य प्राप्त करने का दबाव अत्यधिक बढ़ गया है। आपके ऊपर वाले टारगेट के लिए आप पर दबाव बना रहे होंगे और इसी दबाव को आप अपने नीचे खिसका रहे होंगे। यही दबाव धीरे-धीरे तनाव में बदलता है। इसी तनाव की औलाद का एक नाम निराशा है, इसलिए व्यवसाय करते हुए निराशा के जाल में बिलकुल न फंसें। निराशा आपकी संपत्ति और...
    October 10, 07:32 AM
विज्ञापन
 
 

बड़ी खबरें

 
 

रोचक खबरें

 

बॉलीवुड

 
 

जीवन मंत्र

 
 

स्पोर्ट्स

 

बिज़नेस

 

जोक्स

 

पसंदीदा खबरें