जीने की राह
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  • आदेश में भी विनम्रता का भाव हो
    दूसरों से काम लेना हो तो तीन तरीके अपनाए जा सकते हैं। येे किष्किंधा कांड में सुग्रीव ने बड़े अच्छे ढंग से पूरे किए थे। सीताजी की खोज में वानरों को भेजने के उनके आदेश में तीन स्तर थे- सबसे पहले समझाया, फिर निवेदन किया और फिर डराया। तुलसीदासजी ने लिखा- ठाढ़े जहं तहं आयसु पाई, कह सुग्रीव सबहि समुझाई। राम काजु अरु मोर निहोरा, बानर जूथ जाहु चहुं ओरा।। जनकसुता कहुं खोजहु जाई, मास दिवस महं आएहु भाई। अवधि मेटि जो बिनु सुधि पाए, आवइ बनिहि सो मोहि मराएं।। अर्थात यह श्रीरामजी का काम है और मेरा अनुरोध है तुम...
    04:20 AM
  • विश्राम के दौरान मिलता है भगवान
    सिंहस्थ में महीनेभर बहुत सारे लोग साथ रहे। महीनेभर में कई संसार एक साथ समा गए थे। एक बात शास्त्रों में लिखी है और साधु-संत भी कहते हैं कि दुनिया पाना हो तो दौड़ लगानी पड़ती है पर दुनिया बनाने वाले को हासिल करना हो तो थोड़ा-सा विश्राम करना पड़ता है। मैं एक माह से अधिक हनुमतधाम में ठहरा था। हनुमतधाम के निर्माण के समय मैंने संकल्प लिया था कि पूरे मेले की अवधि में इस कैंप से बाहर नहीं जाऊंगा। यदि कदम बाहर निकलेंगे तो सिर्फ शिप्रा स्नान के लिए या किसी गुरु की आज्ञा का पालन करने के लिए। पूरे बत्तीस दिन...
    May 21, 04:19 AM
  • कुंभ की विदाई के पहले लाभ उठाएं
    भारी गर्मी में कई दृश्य ऐसे दिख जाएंगे जो आपके कलेजे को ठंडक पहुंचाएंगे। कुंभ ऐसी ही विलक्षण विशेषताओं के दृश्य हमें दिखा रहा है। हवा-पानी से भारी तबाही हुई और कई लोगों को लगा कि सिंहस्थ समाप्त हो गया है। उसके बाद दुनियाभर से लोग पहुंचे हैं कुंभ मेले का आनंद लेने। यह केवल मेला नहीं है। निराश लोगों को यहां कई सहारे मिलेंगे। जिनके जीवन में अंधेरी रात है, उन्हें यहां कई सितारे मिलेंगे। जो पहुंच गए वे तो सौभाग्यशाली हैं परंतु जो नहीं पहुंच पाए वे दुर्भाग्यशाली हैं ऐसा भी नहीं है। वे इस कुंभ को...
    May 19, 04:46 AM
  • दुर्गुण हमारे भीतर बैठे भूत-पिशाच
    भूत-प्रेत में मनुष्य की सहज रुचि होती है। उनके बारे में जानने के चक्कर में लोग कथाएं पढ़ते हैं, फिल्में देखते हैं और कुछ लोग श्मशान भी पहुंच जाते हैं। इन दिनों उज्जैन कुंभ के दौरान कई उत्साही लोग लगातार उन तिथियों की प्रतीक्षा करते हैं जब अघोरी लोग श्मशान में तपस्या करते हैं। महाकाल की भूमि श्मशान साधना के लिए सिद्ध मानी गई है। नाथ परंपरा, तांत्रिक साधना वाले लोग श्मशान पहुंचते हैं। श्मशान ही इनका घर है। दूसरे लोग तमाशा देखने जाते हैं। डरते भी हैं और देखना भी चाहते हैं। विज्ञान और टेक्नोलॉजी...
    May 18, 05:00 AM
  • नेतृत्व करें तो भेदभाव मिटाना होगा
    नेतृत्व करने का मतलब समझा जाता है कि अच्छा पद, अधिक अधिकार, धन और प्रतिष्ठा मिलेगी। किंतु नेतृत्व करने वालों को अधीनस्थों को आश्वासन देना पड़ता है कि वे उनके नेतृत्व में सुरक्षित हैं और जरूरत के वक्त उचित मार्गदर्शन भी देंगे। केवल निर्देश देने वाला व्यक्ति ही नेतृत्व नहीं कर रहा है। किष्किंधा कांड में वानर सीताजी की खोज में जाने को तैयार थे। यही से श्रीराम के नेतृत्व की शुरुआत हो रही थी। वे जानते थे कि जिस दिन यह खबर मिलेगी कि सीता कहां है, उस दिन आक्रमण करना ही पड़ेगा। श्रीराम ने प्रत्येक वानर...
    May 17, 03:50 AM
  • विचार शब्दों का खेल न बन जाएं
    सिंहस्थ का पूरा मेला लेन-देन का मामला बन गया है। लोग श्रद्धा देकर आशीर्वाद ले रहे हैं और कहीं आशीर्वाद देकर श्रद्धा खरीदी जा रही है। श्रद्धा के नीचे जब हर बात का सौदा हो रहा हो तो विचार भी सौदे की वस्तु बन जाते हैं। किसी भी बात के आगे महा लगा दो तो वह बड़ी प्रदर्शित होने लगती है, लेकिन जो पहले से ही महान हो उसके आगे महा लगाओ तो फिर जिम्मेदारी बढ़ जाती है। कुंभ को महाकुंभ कहेंगे तो कहने वालों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। फिर जब इसके साथ विचार जुड़ा हो तो ये आयोजन मात्र नहीं होना चाहिए। इसमें सचमुच एक...
    May 14, 03:13 AM
  • सिंहस्थ के कोलाहल में शांति
    शांति की तलाश में सभी लोग रहते हैं। उन्हें लगता है कि शांति वहां मिलेगी जब आप थोड़े अकेले हो जाएंगे या जब सफल हो जाएंगे, लेकिन ऐसा होता नहीं है। एक प्रयोग और करिएगा। शोर में भी शांति तलाशी जा सकती है। उज्जैन के सिंहस्थ मेले में आप ऐसा कर सकते हैं। खूब शोर-शराबा है, लेकिन एक जगह आप शांति प्राप्त कर सकते हैं। यह अवसर चूक न जाएं। सिंहस्थ में आने वाला शिप्रा-स्नान अवश्य करता है। डुबकी लगाकर तुरंत चल न दें। मौका मिले तो घाट की किसी सीढ़ी पर बैठ जाएं और नदी की जलधारा को देखें और अंतरमन से उस बहाव को...
    May 12, 03:42 AM
  • सिंहस्थ में जो सही है, वह लेकर जाएं
    भगवान की लीलाओं में से एक है सिंहस्थ मेला। इस मेले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह होती है कि जिससे मिलो वह एक सवाल छोड़ जाता है। श्रद्धालुओं को देखो तो लगता है यह बावरापन है या आस्था। संदेह शुरू हो गया। व्यवस्थापकों से मिलो तो लगता है अधिकारियों ने ईमानदारी से काम किया या बेईमानी से। सबसे ज्यादा माया तो साधु-संतों के दर्शन में दिखती है। बैरागियों को देखो तो लगता है सारा मोह तो आसपास है। निर्मोहियों को देखें तो उनके विवाद देखकर आश्चर्य होता है। फिर गहराई में जाओ तो लगता है कि इन्होंने एकांत...
    May 11, 05:49 AM
  • मन नियंत्रण में हो तब काम करें
    प्रसन्न रहना मनुष्य का मूल स्वभाव होना चाहिए, लेकिन हम देखते हैं कि लोग अकारण उदासी ओढ़ लेते हैं। जब हमारी पसंद का काम न हो या मनमर्जी का परिणाम न मिले, तब भी हम अपनी प्रसन्नता न खोएं। श्रीराम विपरीत परिस्थितियों में भी आंतरिक प्रसन्नता खोते नहीं थे। भीतर की खुशी बचाए रखने के लिए हमें दूसरों के प्रति उदार होना पड़ेगा, क्योंकि हमारे जीवन में अनेक लोग आते हैं; जोे हमारे अनुकूल व्यवहार न करें तब हमें पीड़ा होती है। सुग्रीव भगवान का काम भूलने के बाद हनुमानजी के समझाने पर वानरों को सीताजी की खोज में...
    May 10, 03:20 AM
  • अव्यवस्था है मूल स्वभाव की परीक्षा
    बात-बात पर क्रोध करने वालों की बात छोड़ दें, क्योंकि ये लोग इसे जीवनशैली मानते हैं। वे जिंदगी में क्रोधित बने रहते हैं, बल्कि जब शांत रहते हैं तो परेशान होने लगते हैं। किंतु जब शांत-संयमी लोग क्रोधित होते हैं तब उन्हें और हमें भी कारण ढूंढ़ने चाहिए। एक बड़ा कारण है अव्यवस्था। अच्छे-अच्छे शांत-संयमित लोग भी अव्यवस्थाओं के कारण धैर्य खो बैठते हैं। मैं उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र में कल्पवास कर रहा हूं। चूंकि हनुमतधाम से जुड़ा हुआ हूं इसलिए व्यावहारिक व्यवस्थाओं से मेरा सामना हो रहा है। सिंहस्थ...
    May 7, 03:36 AM
  • दूसरे को सुखी करना सबसे बड़ा दान
    एक-दूसरे को सताना इनसान की फितरत है। वैसे तो किसी को भी दुख पहुंचाना धर्म और अध्यात्म की दृष्टि से पाप ही है। किसी को सुख पहुंचाना सबसे बड़ा दान है, लेकिन मनुष्य की प्रवृत्ति ऐसी हो जाती है कि मुझे सुख मिले और दूसरे को दुख मिल जाए। कई बार तो दूसरों को दुख देने में ही हमें सुख मिलने लगता है। फिर हम अपने आसपास तनावपूर्ण वातावरण बना लेते हैं। यह तो तय है कि दूसरों को दुख पहुंचाकर आप क्षणिक सुख उठा लें, लेकिन लंबे समय में यह हमारे लिए दुख का कारण बन सकता है। चलिए, आज उन तीन स्तरों को देखें जहां एक-दूसरे से...
    May 5, 03:54 AM
  • सिंहस्थ में भीड़ का आत्मानुशासन
    भीड़ अगर कुटिल आदमी के साथ आ जाए तो हिंसा कर सकती है, अपराध कर सकती है। किसी समझदार के नेतृत्व में आ जाए तो सृजन और सेवा का बहुत बड़ा काम कर सकती है। इन दिनों सिंहस्थ मेले में जहां देखो वहां भीड़ नजर आती है, लेकिन स्वअनुशासित, एक अज्ञात लक्ष्य की ओर चलती हुई। आश्चर्य होता है इतने नरमुंड हैं, लेकिन फिर भी शांत! इसके पीछे है धर्म, अध्यात्म। कहीं न कहीं गुरुकृपा भी काम कर रही है। संतों का अपना प्रभामंडल इस भीड़ को नियंत्रित किए हुए है। अजीब-अजीब से दृश्य सामने आते हैं। मैं कहीं पढ़ रहा था और उस पढ़े हुए...
    May 4, 03:55 AM
  • हमारे प्रयास और उसकी कृपा हो
    दुर्गुणों से नादान या विद्वान कोई नहीं बच पाया। श्रीराम के सामने सुग्रीव जब उनका दिया काम भूलने का स्पष्टीकरण दे रहे थे कि तो उन्होंने काम, क्रोध और लोभ तीनों से बचने का सरल-सा उपाय प्रस्तुत किया। गोस्वामी तुलसीदासजी ने लिखा है,बिषय बस्य सुर नर मुनि स्वामी। मैं पावंर पसु कपि अति कामी।। नारि नयन सर जाहि न लागा। घोर क्रोध तम निसि जो जागा।। हे स्वामी! देवता, मनुष्य और मुनि सभी विषयों के वश में हैं। फिर मैं तो पामर पशु और उसमें भी अत्यंत कामी बंदर हूं। स्त्री का नयन-बाण जिसे नहीं लगा, जो भयंकर...
    May 3, 03:56 AM
  • मन की धूल साफ करता है कुंभ
    ये प्रकृति पंच तत्वों से बनी है- पृथ्वी, अग्नि, वायु, जल और आकाश। इनका संतुलन बिगड़ा कि हम अस्वस्थ और अशांत हो जाते हैं। इसी पंच तत्व का एक रूप है धूल। धूल कपड़े से साफ की जा सकती है, उसका भीतर आना रोका जा सकता है, लेकिन दुर्गुणों की धूल सबसे ज्यादा जमती है मन पर। इसीलिए शास्त्रों ने मन को दर्पण कहा है। इस दर्पण पर दुर्गुणों की धूल जमती है, तो वह किसी और साधन से साफ नहीं होती। कोई कहता है गुरु कृपा से साफ होती है। कोई कहता है मेडिटेशन से साफ होती है। इसका एक अवसर कुुंभ में आया है। इसमें मन पर जमी धूल साफ...
    April 30, 03:19 AM
  • वैभव के बीच विराग है कुंभ मेला
    पुराने लोग कहा करते थे कि जो लोग बाहर की दुनिया की मिट्टी फांकते हैं वो मन में फिर नहीं झांकते। इसका यह मतलब नहीं कि कंकर, पत्थर, मिट्टी खाई जाए। इसका सीधा-सा मतलब है जीवन केवल बाहर पर टिक जाए। हमारा जन्म संसार में हुआ है। हम घर-परिवार बसाते हैं, लेकिन उसमें इतना डूब जाते हैं कि जीवन का दूसरा पक्ष देख ही नहीं पाते। फिर हम भूल ही जाते हैं कि एक दुनिया ऐसी भी है, जिसमें मनुष्य अपने भीतर झांक सकता है। जीवन की यात्रा में कदम-कदम पर होनी और अनहोनी बिछी रहती है। आतंकी जमीनी सुरंग में बारूद बिछाकर हत्याएं...
    April 28, 04:36 AM
  • तन-मन की शुद्धि का महापर्व
    सफाई रखना मनुष्य का स्वभाव है और होना भी चाहिए। कहते हैं, जो लोग गंदगी में रहते हैं वे दुर्भाग्य को आमंत्रित करते हैं। शुद्धता में सौभाग्य है। हमारे देश में सफाई का जो राष्ट्रीय अभियान लिया गया है उसे केवल स्थान की, शरीर की सफाई से न जोड़ा जाए। उज्जैन में कुंभ मेले के मौके पर आयोजित शुद्धता के कुछ नए अर्थ समझे जा सकते हैं। वैसे तो जब मेला लगता है तो गंदगी की संभावना बढ़ जाती है, लेकिन इस मेले में जो लोग आ रहे हैं उनकी दो श्रेणियां की जा सकती है- एक साधु-संत और दूसरे श्रद्धालु। क्यों लोग साधु-संतों के...
    April 27, 03:58 AM
  • गलती हो तो सुग्रीव जैसी क्षमा मांगें
    गलती करने वाले भक्त कभी-कभी प्रयास करते हैं कि भगवान को याद दिला दें कि आपको लग रहा है कि हम सब ठीक-ठाक ही करते रहेंगे, पर ऐसा होता नहीं है। जब गलती कर जाते हैं तो गलती के तर्क भी भगवान के सामने देते हैं। हम अपनी गलती दूसरे के सिर पर थोपने में बहुत दक्ष है। किष्किंधा कांड के प्रसंग में सब लौटकर रामजी के पास आते हैं। जैसे ही रामजी से सामना होता है, सुग्रीव को लगता है मैं इनका काम भूलने की गलती कर चुका हूं, अब स्पष्टीकरण कैसे दिया जाए। देखिए, किस ढंग से सुग्रीव स्पष्टीकरण दे रहे हैं। सुग्रीव के इस...
    April 26, 03:54 AM
  • धन नहीं, धर्म सुख दे सकता है
    सभी लोगों को ऊपर से नीचे देखने का मौका नहीं मिलता। किसी बहुमंजिला इमारत या किसी पहाड़ पर चढ़ जाएं तब भी यह मौका मिलेगा, लेकिन हवाई यात्रा के दौरान जो दृश्य दिखता है उसे ही सचमुच ऊपर से नीचे देखना कहेंगे। हां, नीचे से ऊपर जरूर सभी देख सकते हैं। आकाश में देखें और यदि रात हो चुकी हो तो चंद्रमा के साथ सितारे नजर आते हैं। इस दृश्य से कल्पना करें कि उज्जैन में सिंहस्थ का मेला आरंभ हो चुका है, जहां एक से एक सितारे उतरे मिलेंगे। ये वे सितारे हैं जिन्हें कभी साधु, कभी संत, कभी संन्यासी कहा तो कभी बैरागी कहा...
    April 23, 03:45 AM
  • सिंहस्थ मेले में जीवन के सूत्र
    कहते हैं कि भीड़ का कोई भाव नहीं होता। भीड़ बिना सिद्धांत, बिना नियम के चलती है।अनियंत्रित हो जाए तो नुकसान भी पहुंचा सकती है। फिर भी वर्षों से भीड़ एकत्र होती रही है। एक माह के लिए उज्जैन की धरती पर भीड़ एक नए स्वरूप में आएगी। लगभग पांच करोड़ श्रद्धालु इस एक माह में उज्जैन की धरती पर प्रवेश करेंगे। लाखों साधु-संत और उनके भक्त होंगे। उज्जैन का सिंहस्थ मेला हनुमान जयंती से शुरू हो रहा है। हनुमानजी महाराज उज्जैन की धरती पर अपनी जयंती से अनुमति दे रहे हैं कि एक माह में जीवन के वे सारे सूत्र ले जाओ, जो...
    April 21, 03:55 AM
  • नदियों को बचाइए, जीवन बचेगा
    नदी में स्नान करना केवल जलक्रीड़ा ही नहीं है। भारत में तो नदी के साथ धर्म जुड़ा है। यहां नदियों में डुबकी लगाना केवल जलक्रीड़ा नहीं है। इससे पुण्य का बड़ा मामला जुड़ जाता है। उज्जैन में सिंहस्थ के दौरान करोड़ों लोग शिप्रा में डुबकी लगाने को आतुर हैं। एक माह तक यह जल-पूजा चलेगी। इस दौरान सब मिलकर छोटी-छोटी आहूति दें। वह ऐसे कि शिप्रा में इस संकल्प के साथ डुबकी लगाएंं कि देश की प्रत्येक नदी को प्रदूषण मुक्त रखेंगे। यह किसी एक सरकार या व्यवस्था का काम नहीं होगा। केवल गंगाजी का ही उदाहरण लें। गंगा...
    April 20, 02:56 AM