जीने की राह

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Jeene Ki Rah

  • भक्ति की तैयारी यानी प्रेम का पूरा स्वाद
    जिंदगी के दरवाजे खुले रखो तो प्रेम प्रवेश करता है और यदि स्वयं को खुला रखें तो फिर परमात्मा का प्रवेश हो जाता है। इसी को भक्ति कहते हैं। प्रेम यानी आप सबकुछ खोने को तैयार हैं और भक्ति का मतलब है सृष्टि की सबसे बड़ी हस्ती परमात्मा को पाने की तैयारी। आज के दौर में प्रेम पर बात करने वाले लोग धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं और प्रेम कब वासना में बदल गया, पता ही नहीं चला। अब तो प्रेम का मतलब देह का सुख रह गया है। जो अनुभूति का विषय था वह विलास की वस्तु हो गया। ऐसे में जो लोग प्रेम बचाना चाहते हैं उन्हें...
    05:40 AM
  • बड़ा काम करना हो तो शुभ संकल्प जरूर लें
    किसी बड़े अभियान पर निकलने से पहले कोई शुभ संकल्प जरूर लें। इससे सफलता की संभावना बढ़ सकती है। उस अभियान में हमसे जुड़े लोगों का हित कैसे हो, समाज व राष्ट्र की सेवा तथा परिवार के हितार्थ लगातार चिंतन चलता रहे ये शुभ संकल्प है। व्यावसायिक जीवन में जब लोग बड़े अभियान पर निकलते हैं तो सिर्फ इस बात का ध्यान रखते हैं कि लाभ के साथ हमारे लक्ष्य पूरे होने चाहिए। वे भूल जाते हैं कि इसकी भेंट कितने ही लोग चढ़ रहे होंगे। कभी-कभी तो आप खुद भी चढ़ जाते हैं। यह तो याद रहता है कि आपने क्या प्राप्त कर लिया पर यह...
    February 21, 06:14 AM
  • महत्वाकांक्षा को सही दिशा देता है संतोष
    महत्वाकांक्षा की अपनी ऊर्जा तो संतोष की अपनी शक्ति होती है। हम मनुष्यों को ये दोनों चाहिए। एनर्जी और पॉवर, यदि इसे ठीक से समझ लें तो फिर सफलता के मुकाम पर थोड़ा जल्दी पहुंच जाएंगे। शक्ति ऊर्जा को गति व दिशा देती है। यदि आपके पास ऊर्जा है पर शक्ति नहीं है तो ऊर्जा इधर-उधर बहेगी, आप उसका व्यवस्थित उपयोग नहीं कर पाएंगे। यदि शक्ति है और ऊर्जा नहीं है तो भी बैठे रहेंगे। इसलिए अपनी महत्वाकांक्षा को ऊर्जा से जोड़ें, उसे संतोष का स्पर्श दें। संतोष एक तरह की शक्ति है। बहुत से लोगों को यह भ्रम है कि कुछ...
    February 18, 04:17 AM
  • प्रसन्न रहना शुभ कार्य, शुभ का विस्तार करें
    अगर आप स्वस्थ हैं तो शायद अपने शरीर की याद भी न आए। शरीर तो बीमार पड़ने पर ही याद आता है। जैसे हमेशा जूते पहनते हैं लेकिन, जूता यदि काटे तो पता लगता है कि पैर है। हमें जो महसूस होता है और जो भूल जाते हैं, इन दो बातों में जीवन का बड़ा संदेश छिपा होता है। जब दु:ख आता है तो कई चीजें पता लगने लगती हैं, क्योंकि दु:ख भारी होता है। दु:ख आया कि भारीपन व्यक्तित्व में उतरा और यदि कोई भारी चीज शरीर पर है तो हमारी चाल में फर्क आ जाता है। ध्यान रखिएगा, आनंद हमारा स्वभाव है। प्रसन्नता हमें जन्म से मिली है, इसलिए यह कहने...
    February 17, 06:45 AM
  • शांति पाना है तो ध्यान में उतरकर मौन साधें
    जीने की एक अच्छी राह का नाम मौन भी है। जो मौन के रास्ते पर चलेंगे उन्हें एक दिन शांति जरूर मिलेगी। मनोवैज्ञानिक कहते हैं आनंदित आदमी कम और दुखी, परेशान व विचलित लोग ज्यादा बोलते हैं। आंतरिक संवाद अविराम होने लगे तो बाहर जो प्रकट होता है उसे पागलपन कहते हैं। एक पागल जो बाहर से कुछ भी बोलता हुआ दिखता है, दरअसल उसके भीतर क्या चल रहा है यह किसी को नहीं मालूम। लेकिन बाहर से यदि किसी पागल को लगातार वॉच करें तो पाएंगे उसके शब्दों में कोई तालमेल नहीं है। बस, ईमानदारी से एक बार अपने भीतर उतरकर देखें। हम...
    February 16, 04:23 AM
  • धर्म के श्रेष्ठतम को जीवन में उतारें
    विनोबा भावे कहा करते थे कि सभी फकीर गहरे में जाकर एक बात पर सहमत हैं कि मनुष्य को पंथ छोड़ देना चाहिए और धर्म से जुड़ जाना चाहिए। उनके अनुसार धर्म से जुड़ने का मतलब है उसके तत्व को समझकर जीवन में उतारना। आजकल तो जिस धर्म की दुहाई देकर लोग बहुत चिल्लाते हैं, यदि शांति से उनसे पूछें तो वे बता नहीं सकते कि उनके धर्म के मूल तत्व क्या हैं। साधारण भाषा में कहें तो कई लोग जिस भी धर्म से जुड़े हैं उसके बारे में यह तक नहीं जानते कि वह जीवन के लिए कितना उपयोगी है। बस, चूंकि उस धर्म से जुड़े हैं और उसे बचाना है...
    February 15, 04:28 AM
  • पूर्ण स्वीकार भाव केेे साथ काम करते रहें
    हम सब एक बहुत बड़ी व्यवस्था का हिस्सा हैं। जब कोई काम कर रहे होते हैं, तो हमारी दृष्टि उसी काम पर होती है। किंतु उस समय कई लोगों की दृष्टि हम पर भी रहती है, क्योंकि आप उस व्यवस्था का हिस्सा हैं। जिसे कोई अज्ञात शक्ति चला रही है। धीरे-धीरे बहुत से लोग, कई परिस्थितियां उसमें मिल जाती हैं और हम उसका छोटा-सा हिस्सा रहते हैं। यहां हम एक भूल कर जाते हैं। यह मान लेते हैं कि हम ही इस व्यवस्था को चला रहे हैं। जो हम कर रहे हैं, उसे केवल हम ही कर सकते हैं। ऐसा अहंकार नहीं पालें। जैसे ही अपने आपको उस व्यवस्था का...
    February 14, 04:11 AM
  • चार दुर्गुणों के संतुलन से आनंद प्राप्त करें
    खूब काम करने के इस दौर में कई लोग भूल ही गए कि काम और जीवन दो अलग-अलग चीजें हैं। परमात्मा ने हमें जीवन दिया है, इसलिए काम कर पा रहे हैं। जीवन तो पशुओं को भी मिला है पर वे काम नहीं कर पाते। उनका परिश्रम सिर्फ भोजन और भोग के लिए होता है। मनुष्य का पुरुषार्थ इनके अलावा जीवन के कुछ और लक्ष्य के लिए भी होता है। इसमें धन, पद-प्रतिष्ठा, धर्म-रक्षा, रुचियां और आनंद शामिल है। हम काम में इतने डूब जाते हैं कि जीवन का आनंद खत्म होने लगता है। काम, क्रोध, मद और लोभ ये चार चीजें आपके परिश्रम को जीवन से काट सकती हैं।...
    February 11, 03:45 AM
  • परिवार में रहना है तो भक्त हो जाइए
    घर बसाना मुश्किल हो जाता है और परिवार न हो तो घर किसी काम का नहीं रहता। यदि मनुष्य जन्म लिया है और परिपूर्ण इंसान बनना चाहते हैं तो घर-परिवार दोनों होने चाहिए। लोगों को अपना ही घर-परिवार बोझ लगने लगता है। बसा तो लेते हैं, फिर दूर भागते हैं। परिवार में तनाव, कलह जिन कारणों से होता है उनमें एक है मालिकियत चलाना। परिवार चलता है सर्वमत से। यानी कुछ-कुछ सबका अधिकार और मिला-जुला निर्णय। जब किसी सदस्य को लगने लगता है कि परिवार में हमारा महत्व नहीं है, मात्र उपयोग हो रहा है तो फिर गड़बड़ी शुरू हो जाती है।...
    February 10, 07:15 AM
  • सोने से पहले ध्यान बढ़ाए छुट्‌टी की खुशी
    अच्छे-अच्छे प्रबंधक अपने संसाधनों का उपयोग करने में चूक जाते हैं और ये ही लोग दूसरों के संसाधनों का गजब का उपयोग कर जाते हैं। हर व्यावसायिक व्यवस्था में एचआर विभाग होता है, जिसके लोगों का काम होता है वहां काम करने वालों के भीतर जितनी योग्यता, संभावनाएं और संसाधन हैं उनका अधिक से अधिक उपयोग कर लिया जाए। किंतु ऐसे कुशल लोग भी अपने भीतर के संसाधनों के प्रति लापरवाह होते हैं। उनमें हम और आप भी हो सकते हैं। हमारे भीतर जितने भी संसाधन हैं, अगर दिनभर उनका उपयोग नहीं कर सकें तो एक समय जरूर कर लें और वह...
    February 9, 07:01 AM
  • मन से दूरी बनाकर उस पर काबू पाएं
    शास्त्रों में स्वर्ग-नर्क की अलग-अलग ढंग से परिभाषाएं हैं। भौगोलिक स्थिति के अनुसार तो स्वर्ग ऊपर है, भूलोक बीच में और नर्क नीचे। किंतु इसकी जीवन से जुड़ी परिभाषा है कि जब आप अशांत होते हैं तो नर्क और शांत होते हैं तो स्वर्ग में होते हैं। इन दोनों तक जाने के लिए नौ रास्ते बताए गए हैं। ये नौ छिद्र हैं हमारे शरीर के। दो आंख, दो कान, दो नाक, एक मुंह और मल-मूत्र के दो स्थान। इस तरह से इन नौ रास्तों से मनुष्य स्वर्ग में जा सकता है और नर्क में भी। यानी शांत भी रह सकता है और अशांत भी। हमारे भीतर तीन तरह के...
    February 8, 06:51 AM
  • जीवन की चुनौतियों को खेल जैसा लें
    जीवन में आने वाली हर चुनौती को युद्ध की तरह नहीं, खेल की तरह लिया जाए। युद्ध हो या खेल, किसी एक पक्ष की जीत और दूसरे की हार होनी ही है। हारने वाला पूरी तरह टूट जाता है और जीतने वाला यदि संयम न रखे तो अहंकार में डूब जाता है। जीवन में जब भी चुनौती आए, उसे खेल की तरह लें। इसे समझना हो तो लंका कांड के उस प्रसंग में चलते हैं जहां वानरों से कहा जा रहा है राम चरन पंकज उर धरहू। कौतुक एक भालु कपि करहू।। श्रीराम के चरणों को हृदय में धारण कर सब एक खेल कीजिए। आगे तुलसीदासजी ने लिखा है, लिलहिं लेही उठाई यह बड़ा...
    February 7, 06:44 AM
  • ज्योति की तरह हो पति-पत्नी का रिश्ता
    भवन निर्माण का विवाद से पुराना नाता है इस कहावत को सही होते देखना चाहें तो मकान बनाकर देखिए। आस-पड़ोस से झगड़ा हो ही सकता है, क्योंकि सारा मामला मालिकाना हक का होता है। कई बार तो इंचभर जमीन की नपती के लिए पड़ोसी जीवनभर का बैर पाल लेते हैं। आइए, इसे समझें कि जब भी निर्माण होगा, मालिकाना हक की बात आएगी और जहां मालिक बनने की इच्छा हुई, झगड़ा होकर रहेगा। परिवार में जब सदस्य एक-दूसरे पर मालिकाना हक जताने लगते हैं तो तनाव शुरू हो जाता है। बाकी रिश्ते तो फिर भी अपनी स्थिति को बचा लेते हैं पर चूंकि...
    February 4, 07:26 AM
  • सूर्य-चंद्र की खूबियां जीवन में उतारें
    हर व्यवस्था के अपने कुछ अंग होते हैं और उनमें आपस में रस्साकशी या खींच-तान चलती रहती है। काम-धंधे की बात करें तो जितने विभाग होते हैं, सब एक-दूसरे के लिए होते हैं लेकिन, एक-दूसरे से उलझते भी हैं। एक का काम दूसरे के बिना नहीं चलता लेकिन, फिर भी कभी-कभी आपस में टकरा जाते हैं। ऐसी ही एक व्यवस्था हमारे भीतर भी चल रही है। हमारी इंद्रियों को अलग-अलग विभाग कह सकते हैं। इन सबके सहयोग का नाम स्वस्थ शरीर है और जैसे ही इन्होंने खींच-तान मचाई, समझो बीमारी को आमंत्रण मिला। हमारा जीवन कैसा होना चाहिए, इस पर...
    February 3, 07:40 AM
  • ईश्वर से आपको जोड़ने वाली डोर है प्रार्थना
    हर त्योहार निवेदन है, हर उत्सव एक प्रार्थना। हमारे देश में चूंकि बहुत से देवी-देवताओं ने अवतार लिया इसलिए कई तिथियां उन्हें समर्पित की गई हैं और इसीलिए हर माह बल्कि हर सप्ताह कोई न कोई उत्सव रहता है। जब उत्सव या त्योहार मना रहे हों तो यह भाव अवश्य जगाएं कि आप उस देवत्व से कोई न कोई प्रार्थना या निवेदन कर रहे हैं। भगवान से बात करें तो भाव यही होना चाहिए कि यह हमारी प्रार्थना है, पूरी करना, नहीं करना आपकी इच्छा है। प्रार्थना का मतलब ही है निवेदन हमारा, इच्छा आपकी। निवेदन और इच्छा के बीच में जो शब्द...
    February 1, 03:25 AM
  • अपना पात्र खुला रखें, कृपा बरस जाएगी
    उपलब्ध संसाधनों का देसी सदुपयोग जुगाड़ कहलाता है। हमारे देश में जुगाड़ बहुत बड़ी योग्यता है। आप बहुत पढ़े-लिखे, समर्थ हों पर यदि जुगाड़ु नहीं हैं तो हो सकता है प्रगति के लिए बाधाओं का सामना करना पड़े। प्रबंधन में जुगाड़ का अर्थ होता है उपाय कुशल। यानी आपके पास जो भी संसाधन और उपाय हैं उनका कुशलता से उपयोग कर लें। लोकभाषा में जुगाड़ को जोग कहते हैं। जोग का परिष्कृत रूप योग है और योग को दो अर्थों में देखा जा सकता है। एक तो पतंजलि का आठ चरण का योग और दूसरा समय का योग। जैसे बातचीत में कहा जाता है सब...
    January 31, 05:22 AM
  • अपने जीवन को ज्योति की तरह देखें
    जलते हुए दीपक को देखें तो पहली प्रतिक्रिया होगी कि दीपक जल रहा है। थोड़ी गहराई से देखेंगे तो कहेंगे बत्ती जल रही है, दीपक तो मिट्टी का है। और भी बारीकी से देखेंगे तो बत्ती में तेल दिखेगा और अधिक गहराई में उतरेंगे तो समझ जाएंगे कि दीपक, तेल, बाती इन तीनों से हटकर है ज्योति। दीपक उस ज्योति के कारण है। ज्योति तो सदैव से जल रही थी, साधन मिल गए तो प्रकट हो गई। इस आध्यात्मिक विचार को व्यावहारिक जीवन से भी जोड़िए। सभी धर्मों में अवतार की परम्परा है। हम अवतारों को कथा में, धार्मिक स्थल पर पूजा-पाठ से जोड़कर...
    January 28, 03:11 AM
  • ध्यान करने से खत्म होता है मन का खेल
    संसार में बहुत कुछ होता नहीं है लेकिन, लगने लगता है। कभी-कभी लगता है जो पहले हमारे बड़े शुभचिंतक थे, आजकल बदल से गए हैं। ऐसा लगता है, हो सकता है वैसा होता नहीं हो। माता-पिता जब बेटे की शादी करते हैं तो कई बार लगता है बहू आने के बाद बेटा बदल गया। हो सकता है, ऐसा होता न हो। विवाह के बाद स्त्री ससुराल जाती है तो वहां का नया माहौल, नए रिश्तेदार देखकर उसे लगता है ये मेरे मायके जैसे नहीं हैं। जो माहौल मुझे वहां मिला, यहां नहीं मिल रहा। फिर ऐसा लगता है होता नहीं है वाली बात। ये लगने का नतीजा यह होता है कि अचानक...
    January 25, 07:16 AM
  • संघर्ष करना पड़े तो उसे दुर्भाग्य न मानें
    जीवन में संघर्ष सबको करना पड़ता है। संसार में निर्मित परिस्थितियों में और उन हालात में भी जो ईश्वर से मिले होते हैं। इसलिए, यदि संघर्ष करना पड़े तो उसे दुर्भाग्य न माना जाए। संघर्ष से बचने की कोशिश न करें। सफलता उसे ही मिलेगी जो ठीक से संघर्ष कर सकेगा। हालात कितने बुरे हैं यह इतना महत्वपूर्ण नहीं है। महत्व इसका है कि उन हालात का सामना आप कैसे करते हैं। एक बात याद रखिए कि जब भी संघर्ष करना पड़े, अपनी आंतरिक प्रसन्नता मत खोने दीजिए। भीतर से जितना खुद को खुश रखेंगे उतने हल्के होंगे और जो भीतर से...
    January 24, 06:46 AM
  • अपने जीवन व स्वभाव में गहराई उतारें
    नदी को शांत होने के लिए गहराई चाहिए। जहां वह बहुत गहरी होती है, वहां वह बिल्कुल शांत नज़र आती है। हमारे जीवन में भी यही नियम लागू होता है। शांत होना है तो जीवन में गहराई उतारनी होगी। शांति की खोज में यदि नदी की तरह गहरे न हो सकें तो बीज की तरह हो जाएं। बीज जब अंकुरित होता है तो जानता नहीं है कि मेरे अंकुरण का परिणाम क्या होगा। कितना बड़ा वृक्ष बनूंगा, मेरे फूलों का क्या उपयोग होगा पर एक बात जानता है कि मैं बीज हूं तो मुझे अंकुरित होना है। बस, बीज जैसा ही भाव अपने भीतर ले आएं कि हम मनुष्य हैं तो हमें...
    January 21, 06:44 AM

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