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  • ‘मैं’ को विसर्जित करें, शांति मिलेगी
    क्या आप जानते हैं कि कुछ लोग आपको क्रोध में डुबो देने के प्रयास में लगे रहते हैं। यह घटना घर और बाहर दोनों में घटती है। आपके व्यावसायिक स्थल पर लोग आपको इर्रिटेट करें यह सामान्य बात है, लेकिन ऐसी घटनाएं घरों में भी होने लगती हैं। आपके पारिवार के सदस्य आपको गुस्सा करने के लिए उकसाते हैं। सावधान रहिए, दूसरों के द्वारा संचालित और प्रेरित क्रोध अपने ऊपर न आने दीजिए, क्योंकि यह आपके व्यक्तित्व को असंतुलित कर जाता है। सामने वाले इसका फायदा उठाते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि जब तक आप मजबूत हैं आपको...
    07:31 AM
  • मंत्र की मदद से दूर करें अपराधबोध
    परिणाम को लेकर कर्म में जब अत्यधिक दबाव बन जाता है तो मनुष्य के भीतर अपराध बोध पैदा होता है। सफलता की तारीफ मिलने से हमें भ्रम होना शुरू हो जाता है कि मैं जब भी करता हूं अच्छा ही करता हूं, लेकिन सफलता न मिले तो अपराधबोध पैदा हो जाता है। खासतौर पर संजीदा लोगों के साथ ऐसा होता है। उन्हें लगता है कि कहीं न कहीं वे गलती कर गए। अपराधबोध आते ही आप अपना और दूसरों का नुकसान करना शुरू कर देते हैं। जब आपके साथ ऐसा होने लगे तो समझ लीजिए आप अपराधबोध से ग्रसित हो रहे हैं। असफल होने पर क्या आप बातों को छुपा रहे हैं?...
    July 30, 07:27 AM
  • लक्ष्य तक पहुंचने के तीन मार्ग
    इस दौर में बिना संघर्ष के कम ही लोगों को उपलब्धियां मिलेंगी और जिन्हें मिल जाएंगी वे उसे बहुत दिनों तक पचा नहीं सकेंगे। समस्या, परेशानी, संघर्ष को सहजता से लीजिए। अब इस स्तंभ में हम चर्चा कर रहे हैं श्रीरामचरित मानस के चौथे सोपान किष्किंधा कांड की। यह संघर्ष की कथा है। यहां न सिर्फ श्रीराम संघर्ष कर रहे हैं, बल्कि जितने पात्र आएंगे सब कहीं न कहीं किसी न किसी परेशानी का सामना कर रहे हैं। श्रीराम व हनुमान बताते हैं कि संघर्ष एक जीवनशैली है। इसे बोझ, प्रतिकूलता, तनाव और परेशानी का कारण न मानें। घर...
    July 29, 07:48 AM
  • बुद्धि को तीक्ष्ण बनाए सूर्य साधना
    जीवन में कुछ क्षेत्र ऐसे होते हैं जहां बुद्धि का ही उपयोग करना पड़ता है। आप जब व्यावसायिक क्षेत्र में होते हैं तो वहां आपका पाला एक से एक बुद्धिमान लोगों से पड़ेगा। जब आप अपनी बुद्धि का उपयोग कर रहे हों तो अपने कुछ निर्णयों को गुप्त रखिए। इसके साथ वे अप्रत्याशित भी हों। कभी-कभी कुछ ऐसे फैसले लीजिए, जिन्हें लेकर लोगों को भरोसा ही न हो कि आप ऐसा भी कर सकते हैं, क्योंकि बुद्धि की एक विशेषता है कि वह समुद्र की तरह होती है। उसकी गहराई पाना बहुत मुश्किल है। इसलिए अपनी गहराई तक कोई पहुंच न सके इसकी...
    July 28, 06:51 AM
  • मदद करते समय जागरूकता जरूरी
    संसार में रहते हुए हमें अनेक लोगों की मदद करनी होती है और करना भी चाहिए। यदि आप थोड़े से भी सक्षम हैं तो मदद करने में कभी पीछे नहीं हटें, लेकिन कभी-कभी सहायता करना महंगा पड़ जाता है। ध्यान रखिए इस समय सरल और कुटिल दोनों प्रकार के लोग सहायता प्राप्त करने के लिए तत्पर हैं। कहीं सदाशयता में आप धोखा न खा जाएं। जिनकी आप सहायता कर रहे हैं उनके दुर्गुण और दुर्भाग्य दोनों पर पैनी नजर रखिएगा। आप किन लोगों की सहायता कर रहे हैं, इसका सीधा असर आप पर पड़ने वाला है। मदद को जोखिम न बना लें, क्योंकि गलत आदमी जब आपसे...
    July 25, 04:25 AM
  • किस्मत में जो है उसे कोई नहीं ले सकता
    लेन देन की इस दुनिया में अब संबंध भी इसी आधार पर बनते हैं। आप यदि किसी से स्थायी और प्रेमपूर्ण संबंध रखना चाहते हों तो दो बातें याद रखें। यदि उधार दिया है तो दान समझ लें। यदि किसी से लिया है, तो संकल्प करें कि लौटाना ही है, क्योंकि दुनिया का हिसाब तो यहीं रह जाएगा, लेकिन परमात्मा की दुनिया का हिसाब साथ में जाएगा। लेन-देन में यदि आपने ऐसी भावना नहीं रखी तो संबंध बिगड़ने में देर नहीं लगेगी। यदि देने में उदार हैं, तो वापस नहीं लौटने की स्थिति में भी उदार बने रहें। आधी उदारता संबंध जरूर खराब करेगी। खोने...
    July 24, 05:05 AM
  • परिश्रम से परिणाम के तीन तरीके
    किसी से कोई काम करवाना हो, तो बहुत ही समझदारी से काम लेना पड़ता है। हरेक के भीतर उसकी एक पकड़ होती है। अब तो अधिनस्थ कर्मचारियों से भी काम लेना आसान नहीं है। घर-परिवार में बड़ों के सामने भी बच्चों से काम लेना एक समस्या है। केवल भय, अनुशासन और नियम लादकर काम करवाने के दिन गए। अब काम लेना हो, तो प्रशंसा, प्रोत्साहन और प्रलोभन तीनों का मिलाजुला प्रयोग करना होगा। जब आप किसी की प्रशंसा करते हैं तो उसके अहंकार को संतुष्टि मिलती है, क्योंकि आदमी बहुत सारे काम तो अपने अहंकार को तृप्त करने के लिए ही करता है।...
    July 23, 03:47 AM
  • चार समस्याओं से गुजरता है जीवन
    शायद ही कोई होगा, जिसके जीवन में समस्या नहीं होगी। किसी भी क्षेत्र में आपको चार तरह की समस्या से गुजरना है। निजी जीवन की समस्या, पारिवारिक जीवन की समस्या, सामाजिक जीवन की समस्या और फिर होती है हमारे व्यावसायिक जीवन की दिक्कतें। यह चार तरह का जीवन हरेक को जीना है। निजी जीवन की समस्या का संबंध मन से है। परिवार के जीवन की समस्या का संबंध तन से है, क्योंकि परिवार के सारे रिश्ते तन के होते हैं। सामाजिक जीवन की समस्या का संबंध जन से है, क्योंकि हमें जनसमुदाय के बीच में रहना होता है और व्यावसायिक जीवन की...
    July 22, 07:07 AM
  • मेडिटेशन से भीतर का खालीपन भरें
    विज्ञान के इस युग में लगातार नई-नई चीजें इजाद हो रही हैं। हम आज एक चीज को भोगें और शायद अगली सांस में वह बासी हो जाए। हम फिर किसी नई चीज की तलाश में निकल जाएं। चारों तरफ भौतिक वस्तुओं का भराव है। ऐसे में भावनात्मक खालीपन और बढ़ जाता है। पति-पत्नी घंटों वाट्सअप पर संदेशों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। साथ बैठकर टीवी देख सकते हैं, लेकिन इन तमान साधनों को छोड़कर एकांत में बात नहीं कर सकते। यही हाल दूसरे रिश्तों का भी है। नहीं तो पहले लोग एक-दूसरे के साथ घंटों बिता देते थे। इसीलिए आज लोग भावनात्मक रूप से...
    July 21, 06:22 AM
  • सौजन्यता को दें आध्यात्मिक रूप
    यदि आपने परिश्रम से कुछ साधन अर्जित कर लिए हैं, तो उनका एक हिस्सा सौजन्य के लिए जरूर निकाल लें। जैसे कमाई हुई आय पर हम टैक्स देते हैं, भले ही मजबूरी में दें, लेकिन देते जरूर हैं। ऐसे ही स्वैच्छा से एक सौजन्य कोटा निर्मित करें। इसे अपने मित्रों, रिश्तेदारों के बीच उपहार के रूप में भेंट करते रहें। इससे आपके मित्रों का दायरा बढ़ेगा और रिश्तेदारों की दृष्टि में सम्मान। कोशिश करें जब भी किसी के घर जाएं खाली हाथ न जाएं। हो सकता है सामने वाले के पास आपसे भी ज्यादा हो, लेकिन फिर भी अपना हाथ देने के मामले...
    July 19, 08:10 AM
  • बच्चों को पुरखों की स्मृति से जोड़ें
    जब कभी आप परिवार के बीच बैठे हों और खासतौर पर आपके बच्चे साथ हों तो आज के दौर के घटनाक्रम पर तो चर्चा होती ही है। बच्चों के कॅरिअर और उनके आसपास के वातावरण पर खुलकर बात अनेक घरों में हो रही है। इस दौरान एक काम पूरे योजनाबद्ध तरीके से करिए। घर के बच्चे और बड़े एक साथ बैठ जाएं सौभाग्य के ऐसे क्षण भी बटोरना पड़ते हैं। ऐसे अवसरों को निर्मित करना पड़ता है। जब कभी ऐसा मौका मिले, तो अपने बच्चों को आपके वंश के गुजरे हुए बड़े-बूढ़ों के गुण अवश्य बताएं। क्योंकि उनमें हमारे पूर्वजों के गुण-दोष अपने आप आते हैं।...
    July 18, 07:42 AM
  • अज्ञान को जान लेना ज्ञान का आरंभ
    न चाहते हुए भी आपको कई बार भीड़ से घिरे रहना पड़ सकता है। भीड़ को संख्या से न जोड़ें। कुछ लोग होते तो अकेले हैं, पर अपने आप में भीड़ से कम नहीं रहते। आपकी नीयति है ऐसे लोगों से घिरे रहना। चलिए कुछ प्रयोग करते हैं। जब आप नासमझों में घिरे हों, तो अपनी समझदारी का भरपूर उपयोग करें। वरना उनकी मूर्खता की कीमत आप चुकाएंगे। पर जब आप समझदारों के बीच हों तो उनसे सीखने के लिए तुरंत नासमझ बन जाएं। वरना कई अच्छी बातें अपने जीवन में लाने से चूक जाएंगे। यह जान लेना कि आप अज्ञानी है, सबसे बड़ी समझदारी माना गया हैैं।...
    July 17, 07:19 AM
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