Home >> Abhivyakti >> Jeene Ki Rah
  • सांस से साधें संयम और जगाएं चरित्र
    संजिदा लोग बढ़ते हुए अपराधों को लेकर बहुत परेशान हैं। महिलाओं के साथ हो रहे अपराध तो परिवार को भीतर तक तोड़ देते हैं। खासतौर जब बच्चियां अपराध की शिकार हों। कानून अपना काम कर रहा है। धर्म चिल्ला-चिल्लाकर सिखा रहा है चरित्र बचाओ। आइए, हम सब भी अपनी सीमा में और अपने स्तर पर इससे मुक्ति का प्रयास करें। आस-पास के लोगों को समझाएं कि अपराध के दो बड़े कारण हैं - असंयम और अहंकार। असंयम वासनाओं को प्रवेश का अवसर देता है और अहंकार आवेश, आक्रोश, क्रोध में बदलता है, जो दुष्कृत्य में हिंसा भी उतार देता है। आज जो...
    April 19, 02:40 AM
  • साथ में प्राणायाम करें पति और पत्नी
    पानी के लिए कहा जाता है कि यदि उसे शून्य डिग्री मिले तो बर्फ बनना ही है और सौ डिग्री पर भाप होना ही है। हमारे विचार भी पानी की तरह हैं। ये दूसरों के विचारों से संचालित हो जाते हैं। जम भी सकते हैं और उबल भी सकते हैं। इसके सबसे खतरनाक परिणाम पति-पत्नी का रिश्ता भुगतता है। ऊपरी तौर पर तो यह विवाह आधारित है, लेकिन गहराई से देखें तो यह स्नेह-प्रधान रिश्ता है। देखने में आता है कि शादी और स्नेह का अनिवार्य संबंध नहीं है। कहते हैं बगैर प्रेम के विवाह नहीं होना चाहिए। जरूरी नहीं कि जहां प्रेम हो, वहां विवाह...
    April 18, 04:14 AM
  • तेज संभालकर व्यक्तित्व निखारें
    हमारे व्यक्तित्व में ऐसा क्या है जो सबसे सूक्ष्म है, लेकिन सबसे बलशाली है। जो अदृश्य है, लेकिन हम इसे दृश्य में बदल सकते हैं। इसे हमें जानना चाहिए, पर जीवनभर जान नहीं पाते। चाणक्य हमेशा पूछते थे कि सबसे बड़ा बलवान कौन? हाथी बहुत विशाल होता है, लेकिन छोटा-सा अंकुश उसे वश में रखता है। दीपक आकार में छोटा होता है, पर दूर-दूर के अंधकार को पी जाता है। इंद्र का वज्र छोटा है, पर बड़े-बड़े पहाड़ तोड़ चुका है। तो क्या अंकुश, दीपक या वज्र ये सब बड़े हैं या बलवान हैं। तब चाणक्य कहते थे - हैं तो ये छोटे, लेकिन इनके...
    April 17, 02:32 AM
  • प्रकृति देती है स्वस्थ विचार-प्रक्रिया
    आज व्यावसायिक दृष्टिकोण से मनुष्य को यदि लाभ हुआ है तो एक बड़ी हानि भी हुई है। लाभ यह कि मनुष्य ने अपना, अपने से जुड़े लोगों का, क्षेत्र का विकास किया और नुकसान यह है कि भावनात्मक रूप से दूसरों के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता। जैसे ही दृष्टिकोण व्यावसायिक होता है, मनुष्य सबको वस्तु समझने लगता है। भावनात्मक संबंध बनते हैं अस्तित्व से। व्यावसायिक विकास रुकना नहीं चाहिए। हम खूब प्रगति करें, लेकिन केवल यही दृष्टि हो तो मनुष्य का भावनात्मक संतुलन बिगड़ जाता है। उसके भीतर एक अजीब सा असंतोष जन्म ले...
    April 16, 01:58 AM
  • वायु तत्व के प्रतीक हैं हनुमानजी
    जन्म मृत्यु के बीच में जीवन नामक महत्वपूर्ण घटना घटती है। जन्म तो जानवरों का भी होता है, लेकिन उनमें जीवन नहीं घटता। यह संभावना सिर्फ मनुष्य में है। जन्म को जीवन में बदलने का एक उदाहरण हनुमानजी का है। कई लोग पूछते हैं कि हनुमानजी मनुष्य हैं या बंदर। कोई उन्हें मानने को तैयार नहीं है तो कोई उन्हें लेकर अनुभूति के कई प्रसंग सुना सकता है। कहीं वे सेवा के प्रतिमान हैं तो कहीं जीवन प्रबंधन गुरु। उन्हें वानर कहा गया है, वन में रहने वाले नर। इसीलिए वे मनुष्य की श्रेष्ठतम स्थिति का प्रतीक हैं। वे पशु की...
    April 15, 02:24 AM
  • व्यासपीठ पर काम करती है परमशक्ति
    कई लोग वक्ताओं से सवाल पूछते हैं कि मंच से उतरकर उन्हें कैसा लगता है। अच्छे वक्ता के साथ उस समय दो संभावनाएं होती हैं। अपने कहे हुए के प्रति संतोष और प्रशंसा का अहंकार। यह स्थिति कलाकार के साथ भी होती है। इसे थोड़ा अध्यात्मिक दृष्टि से देखें। सांसारिक दृष्टिकोण से मंच परीक्षा स्थल जैसा होता है। आप पास या फेल हो सकते हैं। आध्यात्मिक धरातल पर यही मंच व्यासपीठ में बदल जाता है। प्रवचनकारों व कथावाचकों के लिए व्यासपीठ मां की गोद से कम नहीं होता। वैसे वे बिल्कुल सामान्य आदमी होते हैं, लेकिन...
    April 14, 03:13 AM
  • सत्संग बनाता है हमें अमृतयुक्त
    क्या आपको बहुत अधिक बातें करने का शौक है। क्या आप खुद बोलना पसंद करते हैं और दूसरों की सुनना कम। यदि अकेले हों और किसी से बात करने को न मिले तो आपको घबराहट होने लगती है। अनजाना या जान-पहचान का कोई भी व्यक्ति मिल जाए तो बिना बात किए आप नहीं रह सकते हों, तो थोड़ी सावधानी बरतनी शुरू कर दीजिए। जीवन की लंबी यात्रा में यह आदत खतरनाक साबित हो सकती है। बातचीत में से सत्य चला जाए, आलोचना आ जाए, कल्पना की उड़ान अत्यधिक होने लगे, तो उसे गपशप कहते हैं। गपशप में जो विचार शब्दों के रूप में बदल रहे होते हैं उनकी...
    April 12, 04:58 AM
  • मिलने वाले हर व्यक्ति से अच्छाई लें
    यूं तो आप अपनी जिंदगी में अनेक लोगों से मिलते होंगे। कुछ ध्यान रह जाते होंगे, कुछ को ध्यान रखना पड़ता होगा। कुछ को जबर्दस्ती भुलाना पड़ता होगा और कुछ अपने आप विस्मृत हो जाते हैं। हम जागरूक ही नहीं रह पाते कि उनकी अच्छाइयों से हमने क्या फायदा उठाया। आपके संपर्क में आने वाले लोगों को तीन खानों में बांटिए। पहले, बहुत प्रगतिशील, स्पष्ट और प्रेरणा दायक। इनसे तो जितना ले सकें, ले लीजिए। पता नहीं ऐसे लोग दोबारा मिलें या न मिलें। दूसरे, जो खुद संघर्ष कर रहे हों, बहुत सफल नहीं होंगे, परेशान भी दिखेंगे,...
    April 11, 04:43 AM
  • आत्मिक बल से कीजिए सार्थक सेवा
    आपके मन में सेवा करने की इच्छा है, लेकिन आपको लगता है कि धन, शिक्षा और बल में आप उतने सक्षम नहीं हैं तो निराश बिलकुल न हों। मैं ऐसे कई लोगों को जानता हूं जो इसीलिए सेवा के क्षेत्र में कदम नहीं बढ़ा पाते। उन्हें यह भ्रम है कि सक्षम व समृद्ध लोग ही सेवा कर सकते हैं। सेवा के लिए पैसा, उच्च शिक्षा या बल होना बिलकुल जरूरी नहीं है। आप अपनी आत्मा को इसके लिए तैयार कीजिए और फिर देखिए आत्मिक बल इन तीनों के अभाव में भी आपसे वैसी सेवा करा लेगा जैसी अच्छे-अच्छे लोग नहीं कर पाते। मैं आपको एक सेवा प्रस्तावित करता...
    April 10, 03:21 AM
  • धैर्य व परिश्रम से संघर्ष बनता है आनंद
    संघर्ष के बाद मिली उपलब्धि स्थायी होती है और उसका मजा कुछ अलग ही रहता है। इस समय हर व्यक्ति अपनी योग्यता को मांजने पर लगा है। किसी काम को करने के लिए जब आप पूरी ताकत लगा रहे होते हैं, तब दूसरा भी यही कर रहा होता है। इसीलिए प्रतिस्पर्धा खूब बढ़ गई है। इसलिए संघर्ष को जीवनशैली बना लें। हो सकता है जब संघर्ष शुरू हो आप अकेले रहें, लेकिन एक आदमी का संघर्ष बाद में कई लोगों का संघर्ष बन जाता है। संघर्ष की स्थिति आए तो पहले ठीक से उसका आकलन करिए। कितना उसमें भाग्य-दुर्भाग्य काम कर रहा है, स्थिति कौन सी है,...
    April 9, 03:39 AM
  • आज के चालीसा महापाठ में आपका स्वागत है
    प्रतिस्पर्धा के इस युग में सभी सफल होना चाहते हैं। इस समय धन, नाम, पद, प्रतिष्ठा कमाना बहुत मुश्किल काम नहीं है, लेकिन सबसे बड़ा चुनौती का काम है संतानों को योग्य बनाना, जो हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। बहुत धन होकर भी योग्य संतानें न हो तो हम निर्धन हैं। धन न हो और संतानें योग्य हो जाएं तो हमसे बड़ा धनवान नहीं। पिछले पांच वर्षों से देश-दुनिया में सवा करोड़ लोग श्री हनुमानचालीसा का पाठ कर रहे हैं। एक ही दिन, एक ही समय में ऐसा अनूठा प्रयोग किया जा रहा है। आज रामनवमी के दिन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से...
    April 8, 03:43 AM
  • शरीर के साथ मन का विश्राम भी जरूरी
    कुछ लोग बहुत काम करने के बाद भी कम थकते हैं तो कुछ लोग बिना काम किए ही थक जाते हैं। सबका अपना-अपना ऊर्जा का लेवल है। नवरात्रा में उपवास की परंपरा है। कुछ लोग पूजा-पाठ, उपवास के बाद थके-थके से नजर आते हैं जबकि इस दौरान हमें अतिरिक्त शक्ति प्राप्त करनी है। हमारी थकान के सारे इलाज इन नौ दिनों में हो सकते हैं। जब हम बाहर थकते हैं तो आराम करते हैं। बाहर से शरीर को आराम देने के बाद भी कुछ लोगों की भीतरी थकान नहीं मिटती। इसलिए एक बात साफ समझ ली जाए कि हमारी थकान के भी दो लेवल हैं - पहला है शरीर का, दूसरा है मन...
    April 5, 04:04 AM
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