विज्ञापन
 
 
 
 
जीने की राह

परिवार व कुटुंब में रिश्ते निभाना सबसे बड़ी योग्यता है

परिवार में रहते हुए लगातार इस बात की कोशिश करते रहना चाहिए कि यह टूटे नहीं। जैसे हर बात की आयु होती है, वैसे ही परिवार की भी उम्र होती है और जिस तरह हर उम्र की अपनी हेंडलिंग अलग रहती है, वैसे ही परिवार में रहते हुए सदस्यों द्वारा एक-दूसरे की हेंडलिंग पर लगातार सजगता रखनी चाहिए। यदि हम दीये की रोशनी पर दृष्टि गड़ाते हुए ध्यान कर रहे हों तो हमें ज्योति के महत्व को समझना चाहिए। हम दीये के आकार, मिट्टी के प्रकार पर ध्यान न दें। दीया जो ज्योति दे रहा है, हम उस पर टिकें। परिवार में कोई सदस्य कमजोर है और कोई सक्षम, हमें इस बात पर ध्यान नहीं देना है कि कौन क्या है? हमारी पहली...
 

रामकाज का अर्थ है ईमानदारी और परिश्रम से सद्कार्य करना

अहंकारी व्यक्ति जब कोई प्रश्न पूछता है तो उत्तर में वही सुनना चाहता है, जो उसकी इच्छा होती है। उसे उत्तर के पीछे...

बचपन से ही माता-पिता अपनी संतानों के लक्ष्य तय कर दें

जीने की राह.. कई लोगों का जीवन बीत जाता है और वे तय नहीं कर पाते कि उनके जीवन का लक्ष्य क्या है। कई लोग लक्ष्य का दावा...
 
 
 

ऐसे लोगों को अपने आसपास रखें जो प्रेरणा के स्रोत हों

जीने की राह... अपनी आलोचना करने वालों को अपने आसपास रखा जाए, ऐसे प्रेरक वाक्य हर युग में कहे गए हैं। निंदक नियरे...

परमात्मा को समर्पित भक्तों की आज कमी होती जा रही है

जीने की राह.. पिछले दिनों संन्यास परंपरा के शीर्ष संत से भेंट हुई। उन्होंने तीन बातें बड़ी गंभीरता से कहीं - पहली...
 
 

और खबरें

 
 
 

  • May 9, 12:58
     
    जीने की राह.. खूब परिश्रम के समय में हम कब आक्रामक हो जाते हैं, पता ही नहीं चल पाता है। लगातार प्रतिस्पर्धा के चलते हमारे हृदय की उदारता धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। फकीरों ने कहा है भगवान को अपने भक्तों के व्यक्तित्व में जो-जो अच्छा लगता है उनमें एक है दीनभाव। दीन गरीबी बंदगी, साधुन सों आधीन। ताके संग मैं यौं रहूं, त्यौं पानी संग मीन।। अर्थात जिसमें विनम्रता, गरीबी का विनय भाव,...
     

  • May 8, 01:35
     
    जीने की राह.. जो भी काम करें, उसे पूरे दिल और दिमाग से करें। इसे सुंदरकांड में हनुमानजी ने समझाया है। जब हम दिल और दिमाग के संतुलन से काम करते हैं, उस समय हमारी वाणी और विचार एक गति से चलते हैं। हमारी वाणी विचार, तर्क और तथ्यों के आधार पर प्रभावशाली बन जाती है। रावण ने अपनी सभा में हनुमानजी से पांच प्रश्न पूछे थे और हनुमानजी ने उसके दस उत्तर दिए थे। सुंदरकांड में हनुमानजी की...
     

  • May 7, 12:14
     
    जीने की राह.. व्यक्ति की रुचियों में अंतर होता है। हम इसे ही सिद्धांतों का अंतर या भेद मान लेते हैं। धर्म से धर्म टकराने का एक बड़ा कारण यह भी रहा है। धर्म-जाति से जुड़े कुछ लोगों ने अपनी निजी पसंद को धर्म के सिद्धांत से जोड़ दिया। जैसे प्रीति और वैर के मामले में पत्थर, रेत और पानी की निजी तासीर अलग-अलग परिणाम समझाएगी। उत्तम, मध्यम नीच गति पाहन सिकता पानि। प्रीति परिच्छा तिहुन की...
     

  • May 5, 12:43
     
    जीने की राह.. उत्सव मनाना और सौभाग्य को आमंत्रित करना लगभग एक जैसा है। सफलता का उत्सव तो बहुत लोग मनाते हैं, लेकिन असफल होने पर भी उत्सव की वृत्ति न छोड़ें। भारतीय संस्कृति उत्सवों की ही संस्कृति है। उत्सव का अर्थ यह नहीं होता कि खुशियों का बंटवारा कर लें, बल्कि उत्सव का अर्थ होता है, उत्साह को पैदा करना। सुख और दुख बांटो या न बांटो, उनके अपने फैलने के तरीके होते हैं, लेकिन उत्साह...
     

  • May 4, 12:04
     
    जीने की राह.. बड़े से बड़े संयमी, समझदार और विनम्र व्यक्ति को भी प्रशंसा सुनना अच्छा लगता है। संसार में आपके कार्यो पर लोग चार तरह से प्रतिक्रिया देंगे। कुछ तटस्थ होंगे, कुछ आलोचना करेंगे, कुछ चापलूसी करेंगे और बचे हुए प्रशंसा करेंगे। जो तटस्थ हों, उनके प्रति ईष्र्या का भाव न पालें और जो आलोचना कर रहे हों, उनको लेकर शत्रुता मन में न लाएं। चापलूसों से सावधान रहें और जो प्रशंसा कर...
     

  • May 3, 12:37
     
    जीने की राह.. जिंदगी में कभी-कभी बिना किसी कारण के अपयश मिलता है। हमारी कोई भूमिका न हो, फिर भी जिंदगी में अपकीर्ति आ जाए तो अच्छे-अच्छे सहनशील भी परेशान हो जाते हैं। कहा गया है -‘नास्त्यकीर्ति समो मृत्यु:’ यानी अकीर्ति के समान मृत्यु नहीं है। ऐसा लगता है जैसे मौत आ गई है। जब अकारण अपयश मिले तो मनुष्य दो काम कर जाता है। पहली स्थिति तो यह होगी कि कुछ न किया जाए, चुपचाप बैठकर इस अपयश को...
     

  • May 2, 12:19
     
    जीने की राह.. संसार में रोज ही नए-नए संकट पैदा होते रहते हैं। कोई एक क्षेत्र इसके लिए तय नहीं होता। इसके समाधान के लिए हमें लगातार प्रयत्न करने होंगे। जब हम एक समस्या से छुटकारा पा रहे होते हैं, तब दूसरी समस्या दस्तक देने के लिए आ रही होती है। लेकिन कई बार हम निराश हो जाते हैं। विशाल दृष्टि रखकर सोचें। परमात्मा ने इतना बड़ा संसार बनाया, उसमें कोई न कोई संकट आता ही रहता है। इसीलिए वह...
     

  • May 1, 12:43
     
    जीने की राह.. अपने विचारों का मूल्यांकन करना कभी भी बंद न करें, क्योंकि विचारों का प्रवाह अनवरत और कभी-कभी अत्यधिक भी हो जाता है। हर नया विचार पुराने को चुनौती देता है। यहीं से भ्रम भी पैदा होता है और कभी-कभी अधिक विचार आने से निर्णय भी गलत हो जाते हैं। रावण के साथ यही हुआ। वह बहुत विद्वान था। लिहाजा उसके भीतर विचारों की भरमार थी। सुंदरकांड का दृश्य है। रावण के दरबार में हनुमानजी...
     

  • April 30, 12:46
     
    किसान बड़े परिश्रम से अपनी फसल उगाता है और उसका सबसे बड़ा सपना होता है फसल को काटकर अन्न के रूप में उपयोग करना। शास्त्रों में किसान की इस सफलता पर बड़ी सुंदर टिप्पणी की गई है। जब फसल बिल्कुल काटे जाने की तैयारी में होती है, तब किसान से एक चूक हो जाती है। कबीर कह गए हैं - पकी खेती देखिके, गरब किया किसान। अजहूं झोला बहुत है, घर आवै तब जान। इन पंक्तियों में ‘अजहूं झोला’, बड़ा सुंदर शब्द...
     
 
 
 
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बॉलीवुड

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जीवन मंत्र

 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्रिकेट

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बिज़नेस

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

फोटोगैलरी

Most Viewed

Controversies that rocked B-town
Amazing Body Paintings
Just Added

करियर कॉलेज में फेयरवेल पार्टी के दौरान स्टूडेंट्स ने बिखेरे रंग
Bollywood Stars at Cannes
 
 
 
विज्ञापन