विज्ञापन
 
 
जीने की राह
 
 
 
<< Prev 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10
 

  • May 6, 07:48
     
    इस समय हर व्यक्ति अपने लक्ष्य को पाने के लिए इस तरह से बेताब है कि वह साधनों की चिंता नहीं करता। इसीलिए हम किसके साथ उठ-बैठ रहे हैं और उसका असर हमारे व्यक्तित्व पर क्या होगा, लोग यह भूल बैठे हैं। सफलता और कीर्ति में अंतर है। नास्ति कीर्तिसमं धनम्। कीर्ति के समान अन्य धन...
     

  • May 4, 08:37
     
    इकट्ठा करना सांसारिक जीवन का कायदा है। समेटते-समेटते हम चीजों को पकड़ना ही शुरू कर देते हैं। हम भूल ही जाते हैं कि समेटी हुई वस्तुएं बांटी भी जानी चाहिए। हम सब दुनिया में आए नहीं हैं एक परमशक्ति द्वारा भेजे गए हैं। हम उसकी मर्जी का नतीजा हैं। बांटना उस परमशक्ति का...
     

  • May 2, 08:41
     
    जीत   की कामना रखना अच्छी बात है। जीत की जिद आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगी। सफलता का हठ हमारे लिए प्रेरणा बन जाता है। पर इस जिद के खतरों से भी परिचित रहें। जब हम जीत के लिए संघर्ष कर रहे हों तब बीच-बीच में विश्राम जरूर लेते चलें।   जूझने की अति एक आंतरिक थकान पैदा कर...
     

  • May 1, 08:03
     
    मीठी   वाणी बोलिए, जब ऐसा कहा जाता है तो इसका संबंध केवल कंठ से नहीं है। मीठी वाणी का मतलब आपके शब्द और दूसरे के श्रवण से भी जुड़ा है। लोग क्या सुनना चाहते हैं, इसकी फिक्र भले ही न करें, पर कैसा सुनना चाहते हैं, इसकी सावधानी जरूर रखें। दूसरों पर प्रभाव और प्रसन्नता...
     

  • April 30, 07:50
     
    जीवन   में शुभ और अशुभ दोनों हो सकते हैं और इनके होने का समय तय नहीं होता। इसलिए कब अच्छा होगा, कब बुरा इसकी फिक्र छोड़ देनी चाहिए। परमात्मा ने जन्म देकर हमारे सामने हमारी जिंदगी का प्रदर्शन कर दिया है। पूरा जीवन एक शो की तरह है।   जब हम फिल्म या नाटक देखने थियेटर...
     

  • April 29, 05:57
     
    अधिकांश लोग अपने जीवन में दो तरह से खुशी उतारते हैं। एक वर्ग उनका है जो भीतर प्रसन्न हैं पर बाहर प्रकट नहीं होने देते। दूसरे वे हैं, जो बाहर खुश नजर आते हैं पर भीतर खुशी के मामले में खोखले होते हैं। तीसरा समुदाय वह है जो भीतर के अपने दुख को बाहर फेंकते हैं।   खुद तो...
     

  • April 27, 07:39
     
    उपलब्धि के लिए लगातार सक्रिय रहने वाले लोग जब सफल होते हैं तो वे यह निर्णय नहीं कर पाते कि अपनी उपलब्धि का क्या करें? उपलब्धि उबलती है। समय रहते उपयोग न करें तो भाप बनकर उड़ जाएगी और गलत तरीके से उपयोग करें तो हम झुलस भी सकते हैं।   लोग अपनी ही उपलब्धियों के साथ एक...
     

  • April 26, 06:00
     
    अपने जीवनसाथी के नहीं दिख रहे जीवन की जानकारी रखने में कोई बुराई नहीं है। आज जो जोड़े बन रहे हैं, वे अत्यधिक पर्सनल लाइफ का क्लेम करते हैं। तलाक के मामलों में ऐसे मसले सामने आए हैं, जिनमें जीवनसाथी ने एक-दूसरे से उनके आने-जाने का समय, रहने के स्थानों की जानकारी ली तो...
     

  • April 25, 08:34
     
    जो   लोग मेलजोल में पारंगत होते हैं, वे श्रोता भी बहुत अच्छे होतेे हैं। हनुमानजी की विशेषताओं में से एक है कि वे बहुत अच्छे श्रोता हैं। आज हनुमान जयंती पर हम उनसे सीख सकते हैं कि किसी को सुनते समय चार बातों का आधार रखें। सहमति, सहानुभूति, सहयोग और सलाह को ध्यान में...
     

  • April 24, 06:40
     
    हमारी  जीवनशैली में नींद ऐसी गतिविधि है, जो सीधे हमारे स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती है। 6 से 8 घंटे की नींद शरीर की मांग के अनुसार जरूरी है। कम आए तो खतरे और ज्यादा आए तो भी नुकसान।   जब हम सो रहे होते हैं, तब हमें कुछ भी पता नहीं होता कि हमारे आसपास क्या घट रहा है। लेकिन जब...
     

  • April 23, 01:34
     
    वीरता क्या होती है इस पर लोगों की अलग-अलग राय है। आज युद्ध के मैदान बदल गए हैं इसलिए भी वीरता को परिभाषित करना कठिन हो जाता है। अपराधी भी अपने आप को वीर मानते हैं, भले ही उन्होंने गलत को जीता हो।   इतिहास में कई वीर ऐसे भी हुए जो जीतकर भी हार गए और कुछ जो हारते हुए दिखे, पर...
     

  • April 22, 06:58
     
    दौड़-भाग भरे जीवन में जब थकान आती है तो ऊर्जा प्राप्त करने के तरीके भी सिखाए जाते हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने ऊर्जा प्राप्त करने का एक सुंदर तरीका बताया है और वह है शांत रहना। शांत रहने के लिए सहनशील होने का अभ्यास किया जाए तथा सहनशील बनने के लिए 24 घंटे में से थोड़ा समय...
     

  • April 20, 04:05
     
    जब  भी जीवन में कोई बड़ी समस्या आए, थोड़ा खुद से हटकर दूसरों की ओर देखें। दूसरों के दुख निहारेंगे तो खुद की समस्याओं से निपटना आसान हो जाएगा। जब परेशानी आती है तो मनुष्य का मनोविज्ञान है कि वह अपने आपको अकेला महसूस करने लगता है।   ऐसा संकट केवल उसी पर आया है और वह...
     

  • April 19, 07:15
     
    हमारे देवी-देवताओं पर खूब साहित्य उपलब्ध है। प्राचीन और नए देवताओं की भरमार हो गई है। आज मनुष्य के शरीर में देवत्व को उतारकर प्रचार-प्रसार से नए नए देवता गढ़ दिए गए हैं। विवेकानंदजी ने भी एक नए देवता का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि सबसे बड़ा देवता है-राष्ट्र...
     

  • April 18, 06:36
     
    जीवनभर   कमाने के बाद ज्यादातर लोग यह नहीं समझ पाते कि उनकी असली कमाई क्या रही। आपने स्वयं को कमाया या नहीं, क्योंकि इस यात्रा में गंवाया तो बहुत जाता है। मनुष्य क्या अर्जित करके गया यह उसकी शवयात्रा से भी जाना जा सकता है। वैसे अब तो शवयात्राएं भी प्रायोजित हो गई हैं।...
     
<< Prev 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10
 
 
 
 
विज्ञापन
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 

रोचक खबरें

 

बॉलीवुड

 

जीवन मंत्र

 

क्रिकेट

 

बिज़नेस

 

जोक्स

 

पसंदीदा खबरें