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जीने की राह
 
 
 
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  • April 17, 05:33
     
    कभी आपने बीज में से अंकुर को फूटते हुए देखा है। इसके चित्र देखे जा सकते हैं या थोड़ा धर्य व साधना रखें तो प्रकृति में यह दृश्य नजर आ जाएंगे।   बीज जब अंकुरित होता है तो वह फूटता है और अपने भीतर के जीवन को बाहर फेंकता है। ये बड़ी प्यारी घटना है। हमारे भीतर प्रेम, अहिंसा,...
     

  • April 16, 06:36
     
    घर-परिवार में रहते हुए कई बार अपने ही सदस्यों का आचरण हमारे साथ ऐसा हो जाता है जैसे वे आक्रमण कर रहे हों। घरों में किए गए युद्ध, चूंकि नियमित रूप से घोषित नहीं होते, इसलिए भले ही युद्ध जैसे न लगें, पर शीतयुद्ध चलते ही रहते हैं। अपनी विजय की कामना और दूसरे को पराजित करने की...
     

  • April 15, 12:07
     
    दूसरों  की नजर में चढ़ने के लिए आप अपने व्यक्तित्व में ओढ़ा हुआ बदलाव न करें। कई बार हम दूसरों को अच्छा दिखने के लिए दिखावे पर उतर जाते हैं और अपने असली स्वरूप को छिपा लेते हैं। कुछ लोग तो इस काम में अपने जीवन की काफी ऊर्जा नष्ट कर देते हैं।   बाहर की दुनियादारी में...
     

  • April 13, 08:00
     
    कुछ लोगों की पूरी जिंदगी बीत जाती है और वे यह रहस्य समझ नहीं पाते कि उनके जीवन में कुछ लोगों से उनके रिश्ते क्यों बने। कई बार उद्दंड संतानों को लेकर माता-पिता सोचते हैं कि ये हमारे घर में ही क्यों पैदा हुए।   पति-पत्नी मन ही मन अनेक बार विचार करते हैं कि इस धरती पर क्या...
     

  • April 12, 12:39
     
    आपके साथ जीवन में जुड़े हुए कुछ लोग कुछ बातों में आपसे लेने के हकदार हैं, जैसे-संतान। आप माता-पिता बने, तो संतान अपने आप आपसे लेने की हकदार होगी। बदले में आपको भविष्य में क्या मिलेगा, यह सोच ही व्यर्थ है। फिर इस इन्वेस्टमेंट में तो आजकल सबसे ज्यादा खतरे हैं।   कई लोग...
     

  • April 10, 11:31
     
    जब भी हम नए कालखंड में प्रवेश करें, हमारा निर्भय होना आवश्यक है, क्योंकि भविष्य का भय हरेक को सताता है। हिंदू कैलेंडर आज से नया साल मना रहा है। इसमें नया क्या है? दरअसल जब हम अपने आपको नया बनाएंगे, तब काल की नवीनता हमें समझ में आएगी।   हमारे नए होने की तैयारी नहीं है तो...
     

  • April 10, 12:24
     
     चूंकि भौतिक जीवन वस्तु केंद्रित होता है, इसलिए हम वस्तुओं के प्रति अतिरिक्त रूप से मोहित, आकर्षित, समर्पित और व्यवस्थित होने लगते हैं। वस्तुओं का अतिआग्रह धीरे-धीरे हमें इस भूलभुलैया में डाल देता है कि हम वस्तु और मनुष्य का भेद करना ही भूल जाते हैं। फिर हम लोगों को...
     

  • April 9, 08:01
     
    हर व्यक्ति दूरदर्शी होता है। मूर्ख से मूर्ख भी अपनी मूर्खताओं में एक भविष्य लेकर चलते हैं। कुछ लोगों की दूरदर्शिता परिष्कृत होती है और कुछ की विकृत, पर होती जरूर है। गौरतलब है कि आपके भीतर एक आप ही की आवाज गूंज रही है। उसके मामले में अनसुना रहना मनुष्य का स्वभाव बन...
     

  • April 8, 05:29
     
    जीवन में दुर्घटनाएं दो बड़े कारणों से होती हैं - गति और दृष्टि। लेकिन दोनों के दोषी हम हैं। दूसरों की अनियंत्रित गति और उनका दृष्टि-दोष भी हमें क्षतिग्रस्त कर सकता है। हां, हमारी गति यदि नियंत्रित है और दृष्टि से सावधान हैं तो दुर्घटना से बचने की संभावना जरूर बढ़ सकती...
     

  • April 6, 05:12
     
    केवल   बोलने के लिए कभी न बोलें। बोला इसलिए जाए कि शब्द साकार हो सकें। दूसरों के लिए उपयोगी रहें और हमारी ऊर्जा को पीने वाले न बन जाएं। इन दिनों हर हाथ में चिपके हुए मोबाइल ने लोगों की वाक्-वृत्ति को बढ़ा दिया है, जिससे शब्द-शक्ति पर सीधा असर पड़ रहा है।   इसका अंदाजा...
     

  • April 5, 12:29
     
    इस समय दुनिया जानने के साधन पहले से अधिक हो गए हैं। जानकारी के मामले में तो लोगों को अजीर्ण-सा होता जा रहा है। हर मनुष्य विशेषज्ञ की तरह बात करता है। भले ही विषय की गंभीरता न मालूम हो। इस सबके बावजूद पूरे जीवन एक बहुत बड़ी बात अज्ञात ही रह जाती है और वह है हम यानी आत्मा,...
     

  • April 4, 12:01
     
    सोने के ठीक पहले और उठते ही जो विचार हमारे मन में होते हैं, वे हमारा दिनभर का व्यक्तित्व बनाते हैं। इसलिए इन दोनों समय कलह, शिकायत और चिड़चिड़ापन बिलकुल न रखें। देखा गया है कि बहुत सारे लोग दिनभर थकने के बाद शाम को कुंठा और क्रोध में सो जाते हैं। रात की दुखी कल्पनाएं...
     

  • April 3, 12:55
     
    आप कैसे हैं इस बात का निर्णय आपकी संगति से लगाया जा सकता है। जिन लोगों के साथ हमारा उठना-बैठना है, वे धीरे-धीरे हमारे व्यक्तित्व में उतर जाते हैं। इसलिए किससे बोल रहे हैं उतना ही महत्वपूर्ण है क्या सुन रहे हैं।   इसलिए अत्यधिक सावधान रहा जाए कि दो घड़ी भी किसके साथ...
     

  • April 2, 02:14
     
    जो लोग ज्यादातर समय दुखी रहते हैं, उन्हें समझाया जाता है कि दुख कभी मिटेगा नहीं। दुख में सुख छिपा है और सुख में दुख छिपा रहेगा। दरअसल, दुखी आदमी को जब यह कहा जाता है कि इसी दुख में सुख ढूंढ़ो तो संसार  के ज्यादातर लोग सुग्रीव की तरह काम करने लगते हैं।   दूसरों को कष्ट...
     

  • April 1, 02:35
     
    शतरंज के खेल के बारे में जानने वाले समझ सकते हैं कि इस खेल में जितना भी दिमाग लड़ाया जाता है, वह सब नियमों के तहत होता है। सब कुछ निश्चित होने के बावजूद हार-जीत अनिश्चित है। लेकिन अब शतरंज का खेल भी पुराना हो गया है। इस भागती-दौड़ती जिंदगी में किसी भी चाल का सही निश्चित...
     
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