March 16, 01:15
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किया हुआ कभी व्यर्थ नहीं जाता, बल्कि हमारा किया हुआ किसी न किसी रूप में हमारे सामने आता जरूर है। अच्छा, अच्छे के रूप में और बुरा, बुरे के रूप में। कबीरदासजी एक किस्सा सुनाया करते थे-चोर चोराई टूंबरी, गाडै़ पानी मांहि। वह गाड़ै तो ऊछलै, करनी छानी नांहि।।
किसी चोर ने...