विज्ञापन
 
 
जीने की राह
 
 
 
 

  • April 5, 12:29
     
    इस समय दुनिया जानने के साधन पहले से अधिक हो गए हैं। जानकारी के मामले में तो लोगों को अजीर्ण-सा होता जा रहा है। हर मनुष्य विशेषज्ञ की तरह बात करता है। भले ही विषय की गंभीरता न मालूम हो। इस सबके बावजूद पूरे जीवन एक बहुत बड़ी बात अज्ञात ही रह जाती है और वह है हम यानी आत्मा,...
     

  • April 4, 12:01
     
    सोने के ठीक पहले और उठते ही जो विचार हमारे मन में होते हैं, वे हमारा दिनभर का व्यक्तित्व बनाते हैं। इसलिए इन दोनों समय कलह, शिकायत और चिड़चिड़ापन बिलकुल न रखें। देखा गया है कि बहुत सारे लोग दिनभर थकने के बाद शाम को कुंठा और क्रोध में सो जाते हैं। रात की दुखी कल्पनाएं...
     

  • April 3, 12:55
     
    आप कैसे हैं इस बात का निर्णय आपकी संगति से लगाया जा सकता है। जिन लोगों के साथ हमारा उठना-बैठना है, वे धीरे-धीरे हमारे व्यक्तित्व में उतर जाते हैं। इसलिए किससे बोल रहे हैं उतना ही महत्वपूर्ण है क्या सुन रहे हैं।   इसलिए अत्यधिक सावधान रहा जाए कि दो घड़ी भी किसके साथ...
     

  • April 2, 02:14
     
    जो लोग ज्यादातर समय दुखी रहते हैं, उन्हें समझाया जाता है कि दुख कभी मिटेगा नहीं। दुख में सुख छिपा है और सुख में दुख छिपा रहेगा। दरअसल, दुखी आदमी को जब यह कहा जाता है कि इसी दुख में सुख ढूंढ़ो तो संसार  के ज्यादातर लोग सुग्रीव की तरह काम करने लगते हैं।   दूसरों को कष्ट...
     

  • April 1, 02:35
     
    शतरंज के खेल के बारे में जानने वाले समझ सकते हैं कि इस खेल में जितना भी दिमाग लड़ाया जाता है, वह सब नियमों के तहत होता है। सब कुछ निश्चित होने के बावजूद हार-जीत अनिश्चित है। लेकिन अब शतरंज का खेल भी पुराना हो गया है। इस भागती-दौड़ती जिंदगी में किसी भी चाल का सही निश्चित...
     

  • March 30, 12:09
     
    मनुष्य की कई कमजोरियों में से एक कमजोरी समर्पण को भी माना गया है। कहते हैं कि यदि आप सरेंडर हो गए, इसका मतलब आप पराजित हो गए। इस समय तो जब चारों ओर विजय के लिए दौड़ लग रही हो, कौन पराजित होना चाहेगा।   आइए, समर्पण के भाव को थोड़ा-सा अध्यात्म से जोड़कर देखें। धर्म की...
     

  • March 29, 12:21
     
    वैसे तो इंसान को दो तरह का आचरण नहीं करना चाहिए, लेकिन माता-पिता बनने के बाद उन्हें दोहरे आचरण से गुजरना पड़ सकता है। जो संतान के लालन-पालन के मामले में बाहर से कठोर रहेंगे, वे बच्चों के सुखद भविष्य का निर्माण करेंगे।   ऐसे में हो सकता है कि बच्चे अपने पालकों के प्रति...
     

  • March 27, 12:06
     
    रंग  में रंग जाना केवल कहावत नहीं है, इसमें जीवन का एक बहुत बड़ा सिद्धांत समाया है। होली रंगों का त्योहार है। इसका मतलब केवल यह न लिया जाए कि एक-दूसरे को रंग पोतना है। यह एक व्यवहार है, जो वर्षो से चला आ रहा है। अब त्योहार खेल बन गया है।   खेल में गंदगी भी आ गई है,...
     

  • March 25, 11:47
     
    भारत की संस्कृति में चरणों का बहुत महत्व है। हमने इन्हें शरीर का अंग ही नहीं माना है, मनुष्य के पैर को उसके आचरण से जोड़कर रखा गया है। इसलिए भारत में पैर छूने की परंपरा का बड़ा मान है।   विभीषण जब रावण को छोड़कर श्रीराम की ओर चले तो रामजी के चरणों को सात रूपों में मन ही...
     

  • March 25, 04:46
     
    भगवान  कहां मिलता है, यह खोज बड़ी पुरानी है। फिर विज्ञान के युग में तो ऐसा भी सवाल उठता है कि भगवान हैं भी या नहीं। रामसुख दासजी कहा करते थे- ईश्वर अनेक रूपों में व्यापक है, अचल है, ठोस है, सर्वत्र ठसाठस भरे हुए हैं, परंतु यह शरीर बिलकुल पोल है।   एक तरह से खोखला है और...
     

  • March 23, 02:44
     
    पूजा-पाठ खासतौर पर कर्मकांड की इन दिनों खिल्ली भी उड़ाई जाती है। घर में बुजुर्गों को पूजा-पाठ, दान आदि करते देखकर बच्चे विज्ञान और तर्क के झोंकों से उन्हें उड़ाने का भी खूब प्रयास करते हैं। नई पीढ़ी हर बात में तर्क, विज्ञान और व्यावहारिकता देखती है, ऐसा होना भी चाहिए।...
     

  • March 22, 01:25
     
    चारों तरफ चुनौतियां हैं। एक से निपटो, उससे पहले दूसरी तैयार रहती है। संसार, संपत्ति, स्वास्थ्य की समस्याओं का निदान तो फिर भी मनुष्य ढूंढ़ लेता है। यहां समाधान न भी मिले तो सहनशक्ति से काम चल जाता है, पर संतान के मामले में आई चुनौती अच्छे-अच्छों को तोड़ जाती है।  ...
     

  • March 21, 02:24
     
    पढ़ने की आदत छूट जाने के खतरे अब सामने आने लगे हैं। नई पीढ़ी तो पूरी तरह फैंटेसी में जीने की तैयारी के साथ है। पहले पढ़ते समय चित्त को गहराई तक स्पर्श किया जाता था। किताबों के अक्षर आंखों से उतरकर भीतर दिल की गहराई तक जाते थे।   पाठक दौड़ने-चलने की जगह बहता था। यह एक...
     

  • March 20, 01:12
     
    जिस तरह से हम अपने बाहरी दायित्वों के लिए बंटे हुए हैं, उसी तरह उसकी व्यवस्था अपने भीतर भी जमानी पड़ेगी। हम कार्यस्थल, घर-परिवार और नितांत निजी जीवन में अपने-अपने स्तर पर सक्रिय रहते हैं। कभी खुश, तो ज्यादातर परेशान ही रहते हैं।   हमारी परेशानी का कारण है हमारी भीतरी...
     

  • March 19, 06:29
     
    जीवन में चीजों का महत्व उनके जाने के बाद ही पता चलता है। दरअसल मनुष्य स्वयं को जब बहुत बड़ा मानने लगता है, तब अपने आसपास की कीमती वस्तुओं को भी तुच्छ समझने लगता है। रावण के जीवन से विभीषण चल दिए थे। रावण को लग रहा था मैंने विभीषण को त्याग दिया। लेकिन वास्तविकता यह थी कि...
     
 
 
 
 
विज्ञापन
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 

रोचक खबरें

विज्ञापन
 

बॉलीवुड

 

जीवन मंत्र

 

क्रिकेट

 

बिज़नेस

 

जोक्स

 

पसंदीदा खबरें