विज्ञापन
 
 
जीने की राह
 
 
 
 

  • February 18, 12:07
     
    कुछ बातें प्रदर्शन के बिना आकार ही नहीं ले पाती हैं। वहीं, कुछ बातें प्रदर्शन करते ही अपना स्वरूप खो बैठती हैं। संसार में प्रदर्शन को बड़ा महत्व दिया जाता है। कभी-कभी तो दिखावा ही योग्यता बन जाता है। दौलत और देह दोनों को वस्तु की तरह दर्शाया जाता है।   दुनिया में यह...
     

  • February 16, 12:26
     
    कुछ  लोग दुखी होते नहीं, रहते हैं। हालात बाहर से बिगड़ जाएं और मनुष्य दुखी हो तो फिर भी समझ में आता है। इसे दुखी होना कहेंगे। लेकिन सब ठीक हो फिर भी अकारण मन को उचाट रखें, इसे दुखी रहना कहा जाएगा। ये लोग उदासी को रक्त में बहा लेते हैं। परेशान रहना इनके सिस्टम में आ जाता...
     

  • February 15, 06:12
     
    जानवर  और इंसान में जितने फर्क हैं, उनमें एक बड़ा फर्क यह है कि जानवर एक निश्चित रूप, क्रिया और तरीके से व्यवहार करता है। जबकि मनुष्य की गतिविधियां अचानक और अनपेक्षित होती हैं। जानवरों का शिकार करने वाले लोग इस मनोविज्ञान को जानते हैं कि पशु का व्यवहार अधिकांश...
     

  • February 14, 06:41
     
    जीवन  में कुछ स्वाद अचानक भी प्रवेश कर जाते हैं। धीरे-धीरे ये अपनी जगह बनाकर आदत बन जाते हैं। बहाना बनाना ऐसा ही एक खतरनाक स्वाद है। इसकी शुरुआत होती है अस्त-व्यस्त जीवनशैली से। अव्यवस्थित रहने की आदत पड़ जाए तो मनुष्य बहाने बनाना आसानी से सीख जाता है। आप यदि...
     

  • February 13, 05:26
     
    आक्रमण  हमेशा हथियार से हो, यह जरूरी नहीं होता। कुछ लोगों का व्यवहार ही उनका शस्त्र बन जाता है। मूर्ख और अहंकारी लोगों से सदैव सावधान रहना चाहिए। ये गुण दिख भी सकते हैं और नहीं भी। हमारे पारिवारिक और सामाजिक जीवन में ऐसे व्यक्ति आते रहेंगे। ध्यान रखें, तलवार के...
     

  • February 12, 06:01
     
    मनुष्य  का सबसे बड़ा शत्रु कौन है। सतही तौर पर इस सवाल के जवाब की लंबी सूची होगी, लेकिन गहराई में एक ही जवाब होगा - इंसान खुद का सबसे बड़ा शत्रु है। हमने अपने कुछ इतने नुकसान कर डाले हैं, जो शायद हमारा शत्रु भी नहीं कर पाया होगा। चलिए, सुंदरकांड के रावण को देखें।...
     

  • February 11, 12:44
     
    मनुष्य  के पास कुछ भी स्थायी नहीं होता। एक अस्थायी जमावट के साथ पूरी जिंदगी निकल जाती है। इस पूरी यात्रा में इसकी खोज भी जारी रखना चाहिए कि फिर स्थायी क्या है। अस्थायी की प्राप्ति के लिए इतना बड़ा उद्योग है, तो फिर स्थायी के लिए कुछ तो प्रयास करना चाहिए। आज जो है, उससे...
     

  • February 9, 07:38
     
    घोर  परिश्रम के इस दौर में यदि कोई कम परिश्रम करना चाहेगा, तो वह आलसी माना जाएगा। लेकिन दो स्थितियां ऐसी हो सकती हैं, जब आप कम परिश्रम में या किए गए पर्याप्त परिश्रम में उससे ज्यादा परिणाम पा सकते हैं। पहली स्थिति है प्रभु कृपा और दूसरी होगी हमारा प्रतिभाशाली होना।...
     

  • February 8, 02:09
     
    फकीरी  कोई स्टेटस नहीं है, न ही यह कोई पहचान है और न ही जीवनशैली। यह है एक प्रवृत्ति। फकीरी का अंकुर फूटता है स्वभाव की जमीन पर। परमात्मा से जुड़ने के लिए फकीरी का अंदाज एक सेतु की तरह है। दरअसल ऊपरवाला सदैव स्वभाव में जीता है।   संसार व्यवहार से चलता है और संसार...
     

  • February 7, 04:26
     
    धरती  की छाती जमकर बींधने के बाद भी उसके गर्भ में पर्याप्त पानी है। लेकिन इस पानी को भी ढूंढ़ना पड़ता है। आज भी लोग टोटकों का उपयोग करते हैं यह जानने के लिए कि धरती के किस हिस्से में पानी निकलेगा।   यह हिसाब अपने व्यावसायिक प्रबंधन के जीवन पर भी लागू करिए। जब भी किसी...
     

  • February 6, 12:24
     
    जिंदगी में मनुष्य चार छोटी-छोटी भूलें कर जाता है, जिनके परिणाम बड़े होते हैं। चूंकि मामला शरीर से जुड़ा है, इसलिए हम ध्यान ही नहीं दे पाते। इनमें पहली भूल है- यह शरीर मेरे लिए है। दूसरी, मेरा है यह शरीर। तीसरी, मैं ही शरीर हूं।   चौथी मूल है, मैं शरीर को बचा लूंगा। जो...
     

  • February 4, 01:02
     
    जिस संसार को मुट्ठी में भरने के लिए हम बेताब रहते हैं, वह तेजी से बदल रहा है। भूतकाल व भविष्य काल की संधि को देखना हो तो संसार देख लें। संसार का अर्थ ही है चलता हुआ।   जिस भविष्य के प्रति हम अत्यधिक योजनाबद्ध रहते हैं, वह तुरंत वर्तमान बनकर शीघ्र ही भूत में बदल जाता है।...
     

  • February 2, 12:03
     
    संसार  में हर वस्तु नाशवान है, इसलिए परिवर्तनशील तो होगी ही। बदलाव विकास और विनाश दोनों का कारण बनता है। इसलिए पश्चिम कहता है कि जो  बदल रहा है, उसे आज ही भोग लो। विज्ञान का शोध भी इसी पर टिका है कि बदलाव और नाश को पहचानो, उस पर शोध करो और जरूरत पड़े तो उसे नया बना लो।...
     

  • February 1, 12:56
     
    खूबसूरत,  महंगा चांदी का पात्र हो, उसे चंदन की लकड़ी सुलगाकर गरम किया जाए और फिर इसमें लहसुन पकाई जाए तो इसे क्या कहेंगे? यह होगा सही वस्तुओं का गलत उपयोग। हमने अपने मानव शरीर के साथ यही किया।   एक शानदार बगीचे में विष के वृक्ष लगाकर जो फल खाए जा रहे हैं, वे...
     

  • January 31, 12:07
     
    बचपन में हम अच्छी-बुरी संगत का मतलब भले ही न समझें, पर किसी न किसी का साथ जरूर चाहिए होता है। बचपन मे विवेक कम या नहीं के बराबर रहता है, अत: अच्छा-बुरा जो मिले, मन वह स्वीकार करने लगता है।   इस समय ग्रहणशीलता चरम पर होती है, क्योंकि नए के लिए पर्याप्त स्थान और आग्रह उपलब्ध...
     
 
 
 
 
विज्ञापन
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 

रोचक खबरें

 

बॉलीवुड

 

जीवन मंत्र

 

क्रिकेट

 

बिज़नेस

 

जोक्स

 

पसंदीदा खबरें