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जीने की राह
 
 
 
 

  • March 1, 01:46
     
    भगवान  की इच्छा का क्या मतलब है? सीधा उत्तर है इच्छा भी भगवान ही है, इसे भगवान से अलग कैसे कर सकते हैं? ‘जिस-जिस भाव में जिस-जिस रूप में तुम मुझको भजोगे, मैं उसी रूप में तुम्हारे सामने मौजूद हो जाता हूं।’ परमात्मा ने यही कहा है, परमपिता से हमारे संबंधों की बड़ी सुंदर...
     

  • February 28, 12:52
     
    विश्वास और अभ्यास के ऊपर सब कुछ आधारित है। कुएं में पानी निकालने की क्रिया में रस्सी पत्थर से लगातार रगड़ खाती है। रसरी आवत जात ते सिल पर पड़त निशान।   रस्सी से जब पत्थर पर निशान बन सकते हैं, तो पत्थर से अधिक तो हम लोग जड़मति नहीं हैं। तय कर लें कि, बार-बार चिंतन करूंगा,...
     

  • February 26, 11:03
     
    दुख किसके जीवन में नहीं आता। आप न चाहें तो भी वह जीवन द्वार पर दस्तक दे ही देता है। जब हमें दुख मिल जाता है तो हम संसार को कोसने लगते हैं।   हमारा स्वभाव बन जाता है कि हम संसार पर ताने कसें और अन्य लोगों को इसका दोषी बताएं। हनुमान भक्त रविशंकर महाराज रावतपुरा सरकार सरल...
     

  • February 26, 12:54
     
    अहंकार योग्य से योग्य मनुष्य की मति को भ्रम में डाल देता है। जब मनुष्य हर बात में स्वयं को सही मानने लगता है, तब सही भी गलत रूप ले लेता है। अपने आप को समझदार समझने का हक सभी को है, लेकिन दूसरों को मूर्ख मान लेना बहुत बड़ी गलती है। रावण जैसे लोग इसी तरह की भूल कर जाते हैं।...
     

  • February 25, 12:07
     
    जिसमें  अधिकार की लोलुपता नहीं होती, बल्कि कर्तव्य-परायणता होती है, उसे घर और बाहर दोनों जगह काम करने में कोई कठिनाई नहीं होती। यह मानकर काम कीजिए कि मैं जो कर रहा हूं, वह समाज का काम है और समाज का मालिक परमात्मा है।   यदि इस भाव से आप काम करेंगे तो कार्य के अंत में...
     

  • February 23, 12:49
     
    संसार के सारे रिश्ते या तो संयोग से बनते हैं या स्वार्थ से। जीवनभर मनुष्य इन्हें जानकर अनजाने में निभाता और ढोता भी है। लेकिन एक तीसरा तरीका मन द्वारा रिश्ता बनाने का भी होता है। मन को दूसरे से जुड़ने में बड़ी रुचि होती है।   भीड़ उसके लिए भोजन जैसी है। हमेशा दूसरे...
     

  • February 22, 01:03
     
    अतीत से कटना वर्तमान जीवनशैली के आनंद के लिए इलाज की तरह है। मनुष्य की जैसे जैसे उम्र बढ़ती है वह या तो पूरी ताकत से अतीत से चिपक जाता है या भविष्य के अज्ञात भय से डरने लगता है। अतीत के अनुभव उसे सुखद प्रतीत होते हैं।   वर्तमान उनसे दूरी का कारण लगता है और भविष्य में...
     

  • February 21, 12:56
     
    अस्तित्व का प्रतिनिधि आत्मा है। जब भी आत्मा के बारे में जानने का प्रयास करेंगे, जीवन और रहस्यमयी हो जाता है। हमारे जीवन में कई ऐसे प्रश्न होते हैं, जिनके उत्तर किससे प्राप्त करें यह प्रश्न भी खड़ा हो जाता है। गुरु मिल जाने पर थोड़ा-बहुत समाधान हो भी जाता है।   फिर भी...
     

  • February 20, 01:13
     
    जब  हम तन की धुलाई कर रहे होते हैं, तब परोक्ष रूप से गंदगी के स्रोतों पर ध्यान रख रहे होते हैं। यह जानना समझदारी भी है कि वे कौन-कौन सी स्थितियां होती हैं, जहां से शरीर मलिन होता है। गंदगी कितनी और कैसी है इससे भी धुलाई के साधनों, प्रयासों की मात्रा तय होती है।   शरीर का...
     

  • February 19, 01:47
     
    खुद  को बचाकर ईश्वर नहीं मिलता। यहां बचाने का अर्थ है स्वयं के प्रति मोह, अपने झूठे ‘मैं’ को ही अपना अस्तित्व मान लेना। जब अपने से लगाव में कटाव किया जाता है, तब उस परमशक्ति की ओर चलना हो सकता है।   स्वयं से कटने के लिए हमारे पूर्वजों ने एक अनूठा प्रयोग किया,...
     

  • February 18, 12:07
     
    कुछ बातें प्रदर्शन के बिना आकार ही नहीं ले पाती हैं। वहीं, कुछ बातें प्रदर्शन करते ही अपना स्वरूप खो बैठती हैं। संसार में प्रदर्शन को बड़ा महत्व दिया जाता है। कभी-कभी तो दिखावा ही योग्यता बन जाता है। दौलत और देह दोनों को वस्तु की तरह दर्शाया जाता है।   दुनिया में यह...
     

  • February 16, 12:26
     
    कुछ  लोग दुखी होते नहीं, रहते हैं। हालात बाहर से बिगड़ जाएं और मनुष्य दुखी हो तो फिर भी समझ में आता है। इसे दुखी होना कहेंगे। लेकिन सब ठीक हो फिर भी अकारण मन को उचाट रखें, इसे दुखी रहना कहा जाएगा। ये लोग उदासी को रक्त में बहा लेते हैं। परेशान रहना इनके सिस्टम में आ जाता...
     

  • February 15, 06:12
     
    जानवर  और इंसान में जितने फर्क हैं, उनमें एक बड़ा फर्क यह है कि जानवर एक निश्चित रूप, क्रिया और तरीके से व्यवहार करता है। जबकि मनुष्य की गतिविधियां अचानक और अनपेक्षित होती हैं। जानवरों का शिकार करने वाले लोग इस मनोविज्ञान को जानते हैं कि पशु का व्यवहार अधिकांश...
     

  • February 14, 06:41
     
    जीवन  में कुछ स्वाद अचानक भी प्रवेश कर जाते हैं। धीरे-धीरे ये अपनी जगह बनाकर आदत बन जाते हैं। बहाना बनाना ऐसा ही एक खतरनाक स्वाद है। इसकी शुरुआत होती है अस्त-व्यस्त जीवनशैली से। अव्यवस्थित रहने की आदत पड़ जाए तो मनुष्य बहाने बनाना आसानी से सीख जाता है। आप यदि...
     

  • February 13, 05:26
     
    आक्रमण  हमेशा हथियार से हो, यह जरूरी नहीं होता। कुछ लोगों का व्यवहार ही उनका शस्त्र बन जाता है। मूर्ख और अहंकारी लोगों से सदैव सावधान रहना चाहिए। ये गुण दिख भी सकते हैं और नहीं भी। हमारे पारिवारिक और सामाजिक जीवन में ऐसे व्यक्ति आते रहेंगे। ध्यान रखें, तलवार के...
     
 
 
 
 
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